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इन विदेशी स्पिनरों ने भारत को भारत में बहुत परेशान किया है

भारत और साउथ अफ़्रीका के बीच खेली गई टेस्ट सीरीज़ में साइमन हार्मर के 17 विकेट उस सीरीज़ की सबसे बड़ी कहानियों में से एक थे

ओमकार मनकामे
29-Nov-2025 • 2 hrs ago
Simon Harmer rattled India, India vs South Africa, 1st Test, Kolkata, 2nd day, November 15, 2025

साइमन हार्मर ने भारत के ख़िलाफ़ टेस्ट सीरीज़ में 17 महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए थे  •  Getty Images

विश्व क्रिकेट भारत लंबे समय से वह टीम रहा है, जहां कई बड़े स्पिनरों ने विश्व क्रिकेट में अपना नाम स्थापित किया है। यहां विश्व स्तरीय स्पिनर भी पैदा हुए हैं और ऐसे बल्लेबाज़ भी जिन्होंने स्पिन के ख़िलाफ़ महारत से नाम कमाया है। इसके बावजूद कुछ विदेशी टीम के दौर ऐसे भी रहे जब विपक्षी टीम बेहद ठोस योजनाओं और सटीक कौशल के साथ आईं और भारत को उसके ही खेल में मात दे गईं। यहां कुछ ऐसे स्पिनरों की सूची है, जिन्होंने अपनी फिरकी से भारतीय धरती पर कमाल का प्रदर्शन करते हुए भारत को ही परेशान कर दिया।
हार्मर ने इस दौरे पर भारतीय स्पिनरों को पूरी तरह से पछाड़ दिया। 2015 में भी उन्होंने भारत का दौरा किया था। लेकिन उस दौरान वह कुछ ख़ास प्रदर्शन नहीं कर पाए थे। भारत में किसी भी टेस्ट सीरीज़ में उनसे बेहतर औसत से ज़्यादा विकेट किसी भी गेंदबाज़ ने नहीं लिए हैं। उन्होंने 8.94 की बेहतरीन औसत से 17 विकेट लिए। पहले टेस्ट मैच में यह उनकी ही गेंदबाज़ी का कमाल था कि भारत 124 रन के लक्ष्य को भी हासिल नहीं कर पाया। गोआहाटी टेस्ट में भी उन्होंने पिच से घुमाव और उछाल हासिल करते हुए भारत में पहली बार एक पारी में पांच विकेट लिए।
7-53 और 6-104, दूसरा टेस्ट, पुणे, 2024
इस सीरीज़ में सैंटनर ने बस यही मैच खेला था। इस सीरीज़ में भारतीय टीम की 0-3 से मिली हार आधुनिक टेस्ट क्रिकेट के सबसे हैरतअंगेज़ नतीजों में से एक था और इसमें सैंटनर ने अहम भूमिका निभाई। भारत में टेस्ट सीरीज़ जीतने का दुर्लभ कारनामा न्यूज़ीलैंड ने इसी मैच के दम पर किया। बेंगलुरु में 1-0 की बढ़त के बाद सैंटनर को टीम में वापस लाया गया और उन्होंने 13 विकेट लेकर अपने टेस्ट करियर में पहली बार पंजा खोला। उन्होंने उस मैच में अपनी गति में ऐसा परिवर्तन किया कि भारतीय बल्लेबाज़ उन्हें समझ ही नहीं पाए। वह अक्सर अपनी गति 87 किमी प्रतिघंटा से कम रखा था और परिणाम यह रहा कि उन्हें भारतीय स्पिनरों से ज़्यादा टर्न मिला।
5-103 और 6-57, तीसरा टेस्ट, मुंबई, 2024
पटेल ने इस सीरीज़ के पहले दो मैचों में कुछ ख़ास प्रदर्शन नहीं किया था। लेकिन सैंटनर की गैरमौजूदगी में उन्होंने तीसरे मैच में कमाल की गेंदबाज़ी की। मुंबई में जन्मे पटेल की गेंदबाज़ी ने भारत पर 3-0 की क्लीन स्वीप तय की। दूसरे दिन लंच के बाद उन्होंने कमालस की लय पकड़ी। उन्होंने उस स्पेल में ऐसी लंबाई के साथ गेंद डाला, जहां भारतीय बल्लेबाज़ आगे तो आते, लेकिन गेंद पूरी तरह तक पहुंच नहीं पाते। दूसरी पारी में उन्होंने भारत को 147 रनों का लक्ष्य हासिल नहीं करने दिया और छह विकेट लिए। इसमें ऋषभ पंत का वह महत्वपूर्ण विकेट भी शामिल था जिसने मैच का रुख बदल दिया।
7-62, 1st Test, हैदराबाद, 2024
हार्टली का टेस्ट करियर उथल पुथल भरे अंदाज़ में शुरू हुआ। पहले ओवर में दो सिक्सर पड़े और पहली पारी में उनके आंकड़े 25 ओवर में 131 रन देकर दो विकेट थे। लेकिन दूसरी पारी में उन्होंने अपने ऊंचे रिलीज़ प्वाइंट का जबरदस्त इस्तेमाल किया। अनुभवी भारतीय बल्लेबाज़ उनके ख़िलाफ़ लगातार असहज दिखे और हार्टली ने 7 विकेट लेकर इंग्लैंड की शानदार वापसी की कहानी लिखी। इस मैच में भारत ने 190 रनों की बढ़त ले ली थी। इसके बावजूद उन्हें हार मिली।
6-35 और 6-35, 1st Test, पुणे, 2017
भारत 2012 के बाद से कोई घरेलू टेस्ट नहीं हारा था। पुणे में तीन दिन के अंदर हार ने वह सिलसिला तोड़ दिया। ओ कीफ़ ने दोनों पारियों में 35 रन दिए और छह विकेट हासिल किए। परिणाम यह रहा कि भारत 105 और 107 रन पर सिमट गया। पहली पारी में तीन विकेट बाहरी किनारे से आए और एक स्टंपिंग से। दूसरी पारी में छह में से पांच विकेट उन्होंने स्टंप्स की लाइन में गेंदबाज़ी करते हुए लिए। नतीजा एलबीडब्ल्यू और बोल्ड ही रहा। ऑस्ट्रेलिया ने यह मैच 333 रनों से जीता।
अहमदाबाद में नौ विकेट से हार के बाद इंग्लैंड ने पनेसर को वापस अंतिम ग्यारह में शामिल किया। उन्होंने मुंबई में दस विकेट लेकर मैच पलटा। इसमें सचिन तेंडुलकर के दोनों पारियों में विकेट शामिल थे। पनेसर और स्वान ने मिलकर 25.70 की औसत से 37 विकेट लिए। इस सीरीज़ में आर अश्विन और प्रज्ञान ओझा की जोड़ी 39.82 की औसत से 34 विकेट ही ले सकी। दोनों विदेशी स्पिनरों के कमाल के प्रदर्शन से इंग्लैंड ने 28 साल बाद भारत में टेस्ट सीरीज़ जीती।
2-10 और 5-83, दूसरा टेस्ट, बेंगलुरु, 2000
अपने दूसरे टेस्ट में ही बोजे ने ऐसा प्रदर्शन किया जिसने साउथ अफ़्रीका को भारत में पहली टेस्ट सीरीज़ जीत दिलाई। नाइटवॉचर बनकर आए बोजे ने 85 रन की जुझारू पारी खेली। उनका यह आत्मविश्वास गेंदबाज़ी में भी दिखा। उन्होंने भारत के शीर्ष तीन बल्लेबाज़ों को आउट किया और फिर निचले क्रम के दो और विकेट लेकर पांच विकेट पूरे किए।
अपने सबसे बेहतरीन दौर में सक़लैन ने दो टेस्ट की इस यादगार सीरीज़ पर गहरा असर छोड़ा। चेन्नई में उन्होंने सचिन तेंदुलकर के ख़िलाफ़ कमाल की गेंदबाज़ी की और भारत 12 रन से वह मैच हार गया। दिल्ली में उन्होंने लगातार दूसरी मैच में दस विकेट लिए। हालांकि इस मैच में अनिल कुंबले के 10-74 ने सुर्खियां अपनी तरफ़ खींच लीं। इस सीरीज़ में सक़लैन ने चार बार पंजा खोला। सक़लैन के 'दूसरा' ने तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, मोहम्मद अज़हरुद्दीन और सौरव गांगुली जैसे भारत के बेहतरीन बल्लेबाज़ों को पूरी तरह से छका दिया था।