एश्वेल प्रिंस: रोहित और कोहली जितना ही है डी कॉक का प्रभाव
क्विंटन डी कॉक ने इस साल की वापसी में सफ़ेद गेंद की क्रिकेट में संन्यास से वापसी का निर्णय लिया और पाकिस्तान में काफ़ी सफल भी रहे

वनडे क्रिकेटर के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल में क्विंटन डी कॉक लुत्फ़ उठाना शुरू कर चुके हैं। 2023 वनडे विश्व कप के बाद इस प्रारूप को अलविदा कहने वाले डी कॉक ने इस साल की शुरुआत में ख़ुद को फिर से साउथ अफ़्रीका के लिए उपलब्ध बताया था और पाकिस्तान में काफ़ी सफल भी रहे थे। तीन मैचों की सीरीज़ में उन्होंने 119.5 की औसत से 239 रन बनाए थे।
साउथ अफ़्रीका के बल्लेबाज़ी कोच एश्वेल प्रिंस ने कहा, "मुझे लगता है कि वह बड़े खिलाड़ी हैं। रोहित और विराट के भारतीय टीम में वापस आने पर मुझे लगता है कि डी कॉक का भी हमारी टीम पर ठीक वैसा ही प्रभाव है। हमने पाकिस्तान में उनका अनुभव और क्वॉलिटी देखा था।"
"उनकी उपस्थिति ने ड्रेसिंग रूम को बूस्ट किया है और हमारे पास कुछ बाएं बाथ के बल्लेबाज़ और कुछ युवा खिलाड़ी टीम में हैं। उनके लिए डी कॉक के साथ बैठना, बातचीत करना और उनके साथ बल्लेबाज़ी करना काफ़ी बड़ी बात है जिसका उनके ग्रोथ पर असर पड़ेगा। हमारे लिए उनका काफ़ी अधिक महत्व है।"
टेस्ट सीरीज़ में 2-0 की शानदार जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले मार्को यानसन किस ऊंचाई तक जा सकते हैं यह भी साउथ अफ़्रीका देखना चाहती है। प्रिंस ने गुवाहाटी में यानसन द्वारा खेली गई 91 गेंदों में 93 रनों की पारी और गेंद से एक पारी में लिए गए छह विकेटों पर भी बातचीत की।
उन्होंने कहा, "मेरे ख़्याल से यानसन के लिए जरूरी ये है कि उन्हें अपनी बल्लेबाज़ी को लेकर चीज़ें साफ़ हैं। जब आप आठ या नौ नंबर पर बल्लेबाज़ी करते हैं तो आपके पास साथियों की कमी रहती है। उनके लिए फिर सेट होने के बाद तेज़ी से रन बनाना अहम होता है क्योंकि उनके पास एक या दो ही साथी बचे होते हैं। आक्रामक अंदाज़ अपनाने को लेकर हमने बात की थी।"
"जिस तरह गेंद से उन्होंने बल्ले वाले प्रदर्शन को फॉलो किया तो हम परिस्थितियों का अंदाजा लगाने को लेकर बातचीत करते हैं। जब हम भारत आते हैं तो हमें उतनी उछाल की उम्मीद नहीं रहती, जितनी उस पिच में थी। हमने बल्लेबाज़ों और गेंदबाज़ों दोनों से इस बारे में बात की थी। बल्लेबाज़ों ने बताया कि उछाल अधिक है। इससे हमें उम्मीद से अधिक उछाल का इस्तेमाल करना था। उछाल को संभालना कठिन था। इसीलिए हम कहते हैं कि जो सामने है उससे तालमेल बैठाना सबसे अहम चीज़ है।"
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