कैसे लंबे समय बाद मिले मौक़े को मानव सुथार ने अपना बनाया
अपने आदर्श अश्विन की तरह सुथार भी हर फ़ॉर्मैट खेलना चाहते हैं, लेकिन वह फ़िलहाल ज़्यादा दूर का नहीं सोच रहें

ऑस्ट्रेलिया ए के ख़िलाफ़ दूसरे अनाधिकृत टेस्ट मैच से पहले मानव सुथार ने सीनियर स्तर पर अपना आख़िरी प्रतिस्पर्धात्मक मैच इस साल के जनवरी में खेला था, जब वह आंध्रा के ख़िलाफ़ राजस्थान के लिए एक रणजी ट्रॉफ़ी मैच में उतरे थे। इस मैच की पहली पारी में अर्धशतक बनाने के साथ-साथ उन्होंने चार विकेट भी लिए थे।
इसके बाद से वह IPL 2025 में गुजरात टाइटंस (GT) के साथ सिर्फ़ सफ़र करते रहे, इंडिया ए टीम के साथ इंग्लैंड का दौरा किया लेकिन कोई मैच नही मिला और फिर दलीप ट्रॉफ़ी में सेंट्रल ज़ोन के साथ भी ऐसा ही हुआ। ऑस्ट्रेलिया ए के ख़िलाफ़ पहले अनाधिकृत टेस्ट में भी उनकी जगह हर्ष दुबे को तरज़ीह दी गई, लेकिन जब दूसरे अनाधिकृत टेस्ट में उन्हें मौक़ा मिला, तो उन्होंने उसे अपना बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ा।
बाएं हाथ के इस स्पिनर ने मैच के पहले दिन ही अपने प्रथम श्रेणी करियर का पांचवां पंजा खोला और प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अपने 100 विकेट भी पूरे किए। दूसरी पारी में भी उन्होंने तीन विकेट अपने नाम किए और ऑस्ट्रेलिया ए को सिर्फ़ 194 रनों पर समेटने में मदद की। मैच के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सुथार ने कहा इन पिछले पांच-छह महीनों में उन्होंने अपने स्किल पर बहुत मेहनत की है, जिसका उन्हें फ़ायदा मिला।
उन्होंने कहा, "मुझे एकादश में मौक़े नहीं मिल रहे थे तो ऐसा नहीं कह सकते कि मैं निराश या हताश (फ़्रस्टेटेड) चल रहा था। मैं इन दिनों अपनी स्किल्स पर बिहाइंड द सीन लगातार मेहनत कर रहा था। मैं बहुत फ़ोकस था और लगातार अभ्यास कर रहा था। अभ्यास में भी मेरी कोशिश अधिक से अधिक गेंदें डालने की होती थी। इसके अलावा फ़िटनेस पर भी मेरा ध्यान था। मैं अच्छी स्ट्रेंथनिंग और कंडीशनिंग ट्रेनिंग कर रहा था। यह जो समय था, उसमें बस यही था कि मुझे अपनी तरफ़ से पूरी मेहनत करना है। मैं ख़ुद पर जितना ध्यान दूंगा, वह मेरे लिए आगे बेहतर ही साबित होगा।"
ऑस्ट्रेलिया ए के ख़िलाफ़ इस मैच के पहले दिन जहां भारत के अन्य गेंदबाज़, ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों के सामने काफ़ी महंगे साबित हुए, वहीं सुथार ने इन बल्लेबाज़ों को अपनी सटीक लाइन व लेंथ से बांधे रखा। क्रिकेट का यह अलिखित नियम है कि बाएं हाथ के स्पिनर, बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों के ख़िलाफ़ उतने प्रभावी नहीं होते क्योंकि गेंद उनके लिए अंदर आती है। लेकिन इन्हीं अंदर आती गेंदों से सुथार ने ऑस्ट्रेलिया ए के बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों को परेशान किया।
उन्होंने पहली पारी में एक अंदर आती गेंद से बाएं हाथ के बल्लेबाज़ ऑलिवर पीक को क्लीन बोल्ड किया, जबकि अगली ही गेंद पर कूपर कॉनली भी उनका शिकार थे। इसके बाद उन्होंने अगली पारी में फिर से एक अंदर आती गेंद पर पीक को लेग स्लिप में कैच करवाया और टॉड मर्फ़ी भी उनकी गेंद पर क्लीन बोल्ड हुए। इस मैच में सुथार द्वारा लिए गए आठ विकेटों में से चार विकेट बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों के थे।
उनके प्रथम श्रेणी करियर के जिन छह मैचों का गेंद-दर-गेंद डेटा उपलब्ध है, उसमें उन्होंने बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों के ख़िलाफ़ सिर्फ़ 25 जबकि दाएं हाथ के बल्लेबाज़ों के ख़िलाफ़ 64 के महंगे औसत से विकेट लिया है। इन मैचों में पिछले साल के दलीप ट्रॉफ़ी के तीन मैच और ईरानी कप फ़ाइनल के साथ-साथ इंडिया ए के दो मैच शामिल है, जो मैचों की गुणवत्ता को बताते हैं। कुल मिलाकर उनके 103 प्रथम श्रेणी विकेटो में 28 विकेट बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों के हैं।
ऑस्ट्रेलिया ए के ख़िलाफ़ इस मैच में सुथार ने बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों के लिए डायगोनल रन अप के साथ राउंड द विकेट से गेंदबाज़ी की, जिससे उन्हें बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों के ख़िलाफ़ एक ख़ास एंगल मिल सके और गेंद नैसर्गिक रूप से अंदर आने के साथ-साथ कभी-कभी एंगल से बाहर भी निकले। कुछ ऐसी ही गेंद पर उन्होंने पहली पारी में कॉनली को स्लिप में कैच कराया था।
Manav Suthar: 'Ashwin is my bowling idol, Yuvraj my all-time favourite'
Allrounder Manav Suthar on his cricketing journey and Duleep Trophy call-upसुथार कहते हैं, "मैं बचपन से ही बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों के लिए डायनोगल रन अप से आता था। मेरे कोच ने भी मुझे यही सिखाया था। हालांकि बाद में मैंने इसे बदलने की बहुत कोशिश की कि सामने से आकर गेंदबाज़ी करूं लेकिन मुझे यही ज़्यादा कंफ़र्टेबल लगा। अंदर से (डायगोनल) आने से मेरी बॉडी अच्छी चलती है और मैं अधिक ज़ोर लगा सकता हूं। इसलिए अभी भी मैं इसे जारी रखा हूं।"
जहां सुथार ने इस मैच में बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों के लिए राउंड द विकेट गेंदबाज़ी को अपना हथियार बनाया, वहीं ऑन साइड में बने रफ़ का प्रयोग करने के लिए वह दाएं हाथ के बल्लेबाज़ों के ख़िलाफ़ ओवर द विकेट से आए।
सुथार ने कहा, "वह हमारी प्लानिंग का हिस्सा था क्योंकि दाएं हाथ के बल्लेबाज़ों के लिए ऑन साइड में थोड़ा सा रफ़ था और उनके लिए वह एंगल मुश्किल हो रहा था। मैं ऐसी योजनाएं मैच और परिस्थितियों के अनुसार बनाता हूं कि किस बल्लेबाज़ को कब किस समय पर कैसी गेंदबाज़ी करनी है। इस दौरान मुझे (केएल) राहुल भाई और ध्रुव (जुरेल) से भी बहुत मदद मिली। वह समय-समय पर मुझे बता रहे थे कि किस बल्लेबाज़ के ख़िलाफ़ कौन सी लेंथ हिट कर सकते हैं, किस स्पीड से और कौन सी वैरिएशन की गेंद डाल सकते हैं। अगर आप ऐसे सेटअप में रहते हैं तो आपको हर खिलाड़ी से हर रोज़ कुछ ना कुछ सीखने को मिलता है।"
जहां पहले अनाधिकृत टेस्ट का हर दिन बारिश से प्रभावित रहा, वहीं दूसरे टेस्ट के दौरान बहुत ही अधिक गर्मी और उमस के कारण खिलाड़ी संघर्ष करते नज़र आए। हर घंटे या 1.15 घंटे पर होने वाला ड्रिंक्स 45-45 मिनट पर हो रहा था, जिसमें बेंच पर बैठे खिलाड़ी, अपने साथी खिलाड़ियों के लिए ड्रिंक्स के साथ-साथ बड़े-बड़े छाते भी ला रहे थे, ताकि उन्हें थोड़ी देर के लिए ही सही लेकिन राहत मिल सके।
मैच के तीसरे दिन अच्छी बल्लेबाज़ी कर रहे केएल राहुल को थकान के कारण रिटायर होना पड़ा। ऑस्ट्रेलिया ए के विकेटकीपर बल्लेबाज़ और प्लेयर ऑफ़ द सीरीज़ बने जॉश फ़िलिपे ने इसे अपने क्रिकेटिंग करियर का सबसे गर्म (हॉटेस्ट) अनुभव बता डाला और कहा कि ऐसी परिस्थितियों में फ़ोकस रहना भी एक चुनौती थी। ऑस्ट्रेलिया ए के स्पिनर मर्फ़ी के मुताबिक ऐसे मौसम में पसीने वाले हाथों से गेंद को ग्रिप करना क्या पकड़ना भी बहुत मुश्किल हो रहा था।
हालांकि सुथार ने कहा कि परिस्थितियां बहुत ही कठिन थीं, लेकिन उनके लिए यह कुछ नया नहीं था। उन्होंने कहा, "मैं श्रीगंगानगर से आता हूं, वहां इससे ज़्यादा गर्मी पड़ती है। मैं वहां 45-50 डिग्री सेल्सियस में अभ्यास करता हूं। तो कह सकते हैं कि ऐसी परिस्थितियों से निपटने की कला मेरे अंदर इनबिल्ट है। इसके अलावा मेरे लिए फ़िटनेस बहुत महत्वपूर्ण है। जो हम मेहनत करते हैं, फ़िटनेस करते हैं, वह सब इन्हीं कठिन दिनों के लिए होता है।"
आर अश्विन को उनके वैरिएशन के लिए अपना आदर्श मानने वाले सुथार को इस सीरीज़ के वनडे लेग में जगह नहीं मिली है और वह अब ईरानी ट्रॉफ़ी में रेस्ट ऑफ़ इंडिया के लिए खेलते दिखेंगे। हालांकि वह इससे निराश नहीं है कि उन्हें एक फ़ॉर्मैट में ही ऊपर स्तर पर मौक़े मिल रहे हैं। वह अश्विन की तरह हर फ़ॉर्मैट तो खेलना चाहते हैं, लेकिन फ़िलहाल उनका ध्यान मिल रहे मौक़ों को अपना बनाना है।
उन्होंने कहा, "मेरा फ़ोकस यही है कि जहां मुझे मौक़ा मिले, मैं वहां टीम के लिए अच्छा कर सकूं और मैच जिता सकूं। फिर चाहे कोई भी फ़ॉर्मैट हो।"
इसके अलावा वह भारतीय टेस्ट टीम और उसके आस-पास (इंडिया ए सेटअप) बढ़ रहे बाएं हाथ के स्पिनरों की बीच प्रतिस्पर्धा से भी चिंतित नहीं हैं। वह इसे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा मानते हैं। वह अपनी बल्लेबाज़ी को और बेहतर कर इस प्रतिस्पर्धा में अपने आपको आगे करना चाहते हैं। वह इस बात से निराश दिखें कि दूसरी पारी में नाइट वाचर के रूप में बल्लेबाज़ी क्रम में ऊपर आने का वह फ़ायदा नहीं उठा पाए।
उन्होंने कहा, "मैं अपनी बल्लेबाज़ी पर बहुत मेहनत कर रहा हूं। यह मेरे खेल का एक महत्वपूर्ण पक्ष है और मेरा फ़ोकस बल्लेबाज़ी पर भी है। दुर्भाग्य से मैं यहां रन नहीं बना पाया, लेकिन मुझे जब भी मौक़ा मिलता है, तो मैं अपनी बल्लेबाज़ी पर बहुत काम करता हूं।"
सुथार ने फ़िलहाल अपना कोई तात्कालिक और दूर का लक्ष्य नहीं सोच रखा है। इस मैच से निकलने के बाद उनका लक्ष्य तीन दिन बाद नागपुर में होने वाले ईरानी कप मैच पर हैं, जहां वह लगातार दूसरे साल रेस्ट ऑफ़ इंडिया का प्रतिनिधित्व करेंगे।
दया सागर ESPNcricinfo हिंदी में सब एडिटर हैं।dayasagar95
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