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रणजी ट्रॉफ़ी में कर्नाटक के कप्तान बने देवदत्त पडिक्कल

कर्नाटक ने अहम मुकाबले में पंजाब के ख़िलाफ़ केएल राहुल और प्रसिद्ध कृष्णा को भी स्क्वाड में शामिल किया

इस सीज़न देवदत्त पडिक्कल ने सिर्फ़ दो रणजी मैच खेले हैं  Getty Images

कर्नाटक की टीम में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव देखने को मिला है। पंजाब के ख़िलाफ़ होने वाले अहम रणजी ट्रॉफ़ी मुक़ाबले के लिए युवा बल्लेबाज़ देवदत्त पडिक्कल को नया कप्तान नियुक्त किया गया है। लीग चरण के इस अंतिम मैच के साथ ही मयंक अग्रवाल को कप्तानी की ज़िम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है।

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दिलचस्प बात यह है कि कप्तानी से हटाए जाने के बावजूद मयंक टीम का हिस्सा बने रहेंगे। उन्हें पंजाब के विरुद्ध चुनी गई विशेषज्ञ बल्लेबाज़ों की सूची में जगह दी गई है। इस स्क्वाड की ताक़त केएल राहुल की मौजूदगी से और बढ़ गई है। राहुल का लाल गेंद के घरेलू क्रिकेट में उतरना एक दुर्लभ मौक़ा है; 2018 के बाद से उन्होंने अब तक महज़ दो रणजी मुक़ाबले खेले हैं, जिसमें उनकी आख़िरी भागीदारी जनवरी 2025 में हरियाणा के ख़िलाफ़ दिखी थी।

कर्नाटक क्रिकेट में यह बड़ा फेरबदल प्रशासन में आई नई लहर का हिस्सा माना जा रहा है। हाल ही में टीम इंडिया के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ वेंकटेश प्रसाद को एसोसिएशन का नया अध्यक्ष चुना गया है। इसके अलावा, दिसंबर में गठित हुई नई चयन समिति, जिसकी कमान पूर्व ऑलराउंडर अमित वर्मा के हाथों में है, अब भविष्य की टीम तैयार करने की दिशा में सख्त कदम उठाती नज़र आ रही है।

आंकड़ों के लिहाज़ से देखें तो मयंक अग्रवाल ने इस सीज़न की नौ पारियों में 33.11 की औसत से 298 रन बनाए हैं, जिसमें एक सैकड़ा और दो अर्धशतक शामिल हैं। दूसरी ओर, कप्तानी की नई ज़िम्मेदारी संभालने वाले देवदत्त पडिक्कल का सफ़र उतार-चढ़ाव भरा रहा है। रणजी सत्र के पहले मैच में उन्होंने 96 और 15 रन की पारियां खेलीं, लेकिन फिर वे लाल गेंद के शुरुआती चरण से बाहर रहे। हालांकि, विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी में पडिक्कल ने प्रचंड फ़ॉर्म दिखाई और 90.62 की औसत से 725 रन कूटकर कर्नाटक को सेमीफ़ाइनल तक पहुंचाया। वे टूर्नामेंट के दूसरे सबसे सफल बल्लेबाज़ रहे। इसके उलट, मध्य प्रदेश के ख़िलाफ़ पिछले रणजी मैच में पडिक्कल के लिए कड़वा अनुभव रहा, जहां वे दोनों पारियों में शून्य पर आउट हुए और महज़ तीन गेंदों का सामना कर सके।

कर्नाटक के मध्यक्रम को रविचंद्रन स्मरण की वापसी से राहत मिली है, जो चोट के कारण पिछले मैच से बाहर थे। हालांकि टीम को अनुभवी करुण नायर की कमी खलेगी। मध्य प्रदेश के विरुद्ध मैच में उंगली की चोट के कारण नायर दूसरी पारी में बल्लेबाज़ी नहीं कर पाए थे और अब तक पूरी तरह फ़िट नहीं हो सके हैं। उनकी अनुपस्थिति में पिछले मैच में निकिन जोसे ने बतौर सब्स्टीट्यूट फ़ील्डिंग की थी।

गेंदबाज़ी की बात करें तो प्रसिद्ध कृष्णा की वापसी कर्नाटक के लिए बूस्टर डोज़ जैसी है। वे इस सीज़न में पहली बार मैदान पर उतरेंगे और तेज़ गेंदबाज़ी आक्रमण की अगुवाई करेंगे। पिछले सत्र में उन्होंने कर्नाटक के लिए दो मैचों में शिरकत की थी।

मध्य प्रदेश से मिली शिकस्त के बाद अलूर में पंजाब के ख़िलाफ़ यह मुक़ाबला कर्नाटक के लिए 'करो या मरो' का हो गया है। ग्रुप-बी के समीकरण बेहद पेचीदा हैं। कर्नाटक 21 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर है, जबकि महाराष्ट्र 24 अंकों के साथ टॉप पर और मध्य प्रदेश 22 अंकों के साथ दूसरे पायदान पर काबिज़ है। दिलचस्प बात यह है कि अंतिम लीग मैच में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की टीमें आमने-सामने होंगी, जिसका सीधा असर कर्नाटक की किस्मत पर पड़ेगा।

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