ऐशेज़ के आख़िरी टेस्ट में अहम WTC पॉइंट्स के लिए होगा मुक़ाबला

आख़िरी टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया की नज़रें 4-1 से ऐशेज़ जीतने पर होगी © PA Photos/Getty Images

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अगर आपने नवंबर में इंग्लैंड के फ़ैंस की राय ली होती और पिछले 15 साल में इंग्लैंड का ऑस्ट्रेलिया में ख़राब रिकॉर्ड दिमाग़ में रखा होता तो यह विश्वास करना मुश्किल होता कि 3-2 से ऐशेज़ हार से सबको इतनी निराशा होती। उस स्कोरलाइन से सीरीज़ की प्रतिस्पर्धा और विश्वास का संकेत मिलता और लगातार निराशा के बाद SCG में बेन स्टोक्स और जो रुट को एक सम्मानजनक विदाई का मौक़ा मिलता।

हालांकि इस तरह के परिणाम की भविष्यवाणी नहीं की गई थी। यह सोचना भी जल्दबाज़ी होगा कि ऑस्ट्रेलिया में पिछले 18 में से 16 टेस्ट हारने वाली इंग्लैंड की टीम अब वहां लगातार दो टेस्ट जीत सकती है। लेकिन मान लीजिए उन्होंने अगर ऐसा कर दिया तो उससे क्या होगा? क्या खिलाड़ियों को ज़बरदस्त वापसी करने के लिए गौरवान्वित होना चाहिए या फ़िर उन्हें इस बात का पछतावा होगा जिसने उनके पिछले सपनों को चकनाचूर कर दिया था। अगर पांच में से इंग्लैंड को चौथी हार मिलती है तो यह तय हो जाएगा कि ऑस्ट्रेलिया में उनका वापस ऐशेज़ जीतना सिर्फ़ एक भ्रम था।

और ऑस्ट्रेलिया का क्या, जिन्होंने सिर्फ़ 11 दिन के अंदर बाज़बॉल को मात देकर ऐशेज़ पर कब्ज़ा किया? चौथे टेस्ट से पहले घर के 6 ऐशेज़ में तीसरी बार ऑस्ट्रेलिया के पास व्हाइटवॉश का मौक़ा था और यह इस टीम के लिए काफ़ी बड़ी बात होती, क्योंकि उन्हें 2010-11 के बाद से सबसे ख़राब ऑस्ट्रेलियाई टीम कहा जा रहा था। लेकिन अब MCG में दो दिन में ही मिली हार के बाद यह संभावना ख़त्म हो गई है और उस हार से क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया को भी भारी नुकसान हुआ है। उस हार के बाद टीम को लेकर भी चर्चाएं हो रही है जिसका फ़ायदा इंग्लैंड पहले उठाने में सफल नहीं हो सकी थी।

वैसे उस्मान ख्वाज़ा के 88 टेस्ट के करियर का अंत होने वाला है और उनके संन्यास के बाद जांच-पड़ताल में कुछ हद तक कमी आई है। 15 साल पहले ख्वाज़ा ने उसी सिडनी टेस्ट में अपना डेब्यू किया था, जहां MCG के पिछले टेस्ट से पहले ऑस्ट्रेलिया में इंग्लैंड को आख़िरी बार ऐशेज़ जीत मिली थी। अब इस बार एक औसत सीरीज़ के बाद 39 वर्षीय ख्वाज़ा ने आख़िरकार अपने करियर का अंत करने की घोषणा की।

क्या इंग्लैंड की टीम मेलबर्न में मिली सफलता को क़ायम रखेगी? © Getty Images

ख्वाज़ा के जाने के बाद ऑस्ट्रेलिया की टीम बदलाव देखने को मिल सकते हैं और 2027 में जब ये दोनों फ़िर से आमने-सामने होंगी तब सिर्फ़ ख्वाज़ा ही नहीं होंगे जो उस समय नहीं दिखेंगे। ट्रैविस हेड ने अपनी ज़बरदस्त बल्लेबाज़ी से कमज़ोर बल्लेबाज़ी लाइन-अप पर पर्दा डाल दिया है। इस ऐशेज़ में पैट कमिंस, जॉश हेज़लवुड और नेथन लायन का योगदान नहीं के बराबर ही रहा है और जिन दो खिलाड़ियों ने सबसे अहम योगदान दिया (मिचेल स्टार्क और स्कॉट बोलैंड) अगले ऐशेज़ तक 40 साल के ज़्यादा नज़दीक हो जाएंगे।

दूसरी तरफ़, इंग्लैंड के लिए ऐशेज़ के दौरे ज़्यादातर शुरुआत से ज़्यादा खिलाड़ियों के अंत वाले होते थे, लेकिन MCG की जीत के बाद ऐसी उम्मीद है कि हाल-फ़िलहाल टीम में ज़्यादा बदलाव नहीं देखने को मिलेंगे।

संन्यास की घोषणा के बाद अपने परिवार के बाद ख्वाज़ा © Getty Images

स्टोक्स ने संकेत दिए हैं कि वह कप्तान बने रहना चाहते हैं और ब्रेंडन मक्कलम के प्रति उनके समर्थन ने कोच को कुछ समय के लिए राहत दी है, क्योंकि उनके तौर-तरीकों को लेकर ज़्यादा गहन रूप से जांच हो सकती है।

मार्क वुड के लिए अब रास्ते का लगभग अंत होने वाला है और ऐसे में जॉश टंग, ब्रायडन कार्स और चोटिल गस एटकिंसन टीम के प्रमुख तेज़ गेंदबाज़ रह सकते हैं। इसके अलावा जोफ़्रा आर्चर का शरीर अगर उनका साथ देगा तो वो भी टेस्ट टीम में नियमित दिख सकते हैं।

सिडनी टेस्ट में WTC पॉइंट्स के लिए भी मुक़ाबला होगा और इंग्लैंड से ज़्यादा ऑस्ट्रेलिया के लिए इसके मायने होंगे क्योंकि एक बार फ़िर से इंग्लैंड का फ़ाइनल में जाना मुश्किल लग रहा है। सीरीज़ में 4-1 और 3-2 के परिणाम से ज़्यादा फ़र्क नहीं पड़ेगा जितना अलग संर्दभ में पड़ता। इस दौरे पर इंग्लैंड की नैतिक जीत भी अब फ़ीकी पड़ गई है।

फ़ॉर्म गाइड

ऑस्ट्रेलिया LWWWW (पिछले 5 टेस्ट का परिणाम, आख़िरी टेस्ट सबसे पहले) इंग्लैंड WLLLL

मार्नस लाबुशेन बड़े स्कोर के साथ ऐशेज़ का अंत करना चाहेंगे © Getty Images and Cricket Australia

इन खिलाड़ियों पर रहेंगी निगाहें

ख्वाज़ा के संन्यास के बाद सभी की नज़रें सीधे मार्नस लाबुशेन के ऊपर जाएंगी जिनके लिए जुलाई 2025 में हुए वेस्टइंडीज़ दौरे के बाद से चीज़ें काफ़ी बदल गई है। शेफ़ील्ड शील्ड में उन्होंने ज़बरदस्त फ़ॉर्म के साथ शुरुआत की और ऐशेज़ के पहले दो टेस्ट में दो महत्वपूर्ण अर्धशतक भी लगाया, लेकिन उसके बाद से उनका फ़ॉर्म गिर गया है। जिस सीरीज़ में वह दो से ज़्यादा टेस्ट खेले हैं, उसमें से इस बार उनका औसत सबसे कम है (24.85)। सिडनी में अगर उनका बल्ला नहीं चलता है तो फ़िर सवाल उठ सकते हैं।

मेलबर्न में जब इंग्लैंड का स्कोर 8 पर 3 हो गया था, हैरी ब्रूक ने एक अलग तरह का खेल दिखाया और बाद में उसकी सबने तारीफ़ भी की। ब्रूक इकलौते बल्लेबाज़ थे जिन्होंने दोनों पारियों में मिलाकर 50 से ज़्यादा रन बनाए। एक तरफ़ जहां ब्रूक ने इंग्लैंड की इतने सालों के बाद ऑस्ट्रेलिया में मिली पहली जीत में अहम योगदान दिया, आख़िरी टेस्ट में उनके ध्यान में यह ज़रूर होगा कि ऑस्ट्रेलिया ने अभी तक उनका बेस्ट नहीं देखा है। चार साल के बाद हो सकता है कि वह कप्तान के तौर पर ऑस्ट्रेलिया आएं।

ऐंड्रयू मिलर ESPNcricinfo में यूके के एडिटर हैं।

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