सीज़न से पहले भारतीय नागरिक बने अमन राव की बेहतरीन कहानी

विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी में दोहरा शतक जड़ने वाले अमन राव को सैयद मुश्ताक़ अली ट्रॉफ़ी शुरू होने से दो दिन पहले भारतीय नागरिकता मिली

सैयद मुश्ताक़ अली ट्रॉफ़ी में Shardul Thakur के ख़िलाफ़ आतिशी बल्लेबाज़ी करते हुए Aman Rao सुर्ख़ियों में आए थे © PTI

21 वर्षीय अमन राव सैयद मुश्ताक़ अली ट्रॉफ़ी 2025 26 से पहले थोड़े चिंतित थे।

उस समय अमेरिकी नागरिक अमन राव भारतीय नागरिकता की पुष्टि होने के लिए काग़ज़ी प्रक्रिया का इंतेज़ार कर रहे थे। अगर यह प्रक्रिया पूरी हो जाती तो वह संशोधित BCCI निर्देशों के मुताबिक़ हैदराबाद की सीनियर टीम के लिए खेलने के पात्र बन पाते। यह प्रक्रिया लगभग एक साल से चल रही थी। अगर इसमें ज़्यादा देरी होती तो यह तय था कि वह भारतीय घरेलू सत्र के सफ़ेद गेंद के चरण से बाहर हो जाते।

राव ने ESPNcricinfo से कहा, "यह इंतज़ार काफ़ी बेचैन करने वाला था।" क़िस्मत ने साथ दिया और SMAT शुरू होने से महज़ दो दिन पहले काग़ज़ी प्रक्रिया पूरी हो गई। इसके साथ ही राव को हैदराबाद की टीम में शामिल कर लिया गया। उन्होंने दिसंबर 2024 में T20 डेब्यू कर लिया था। तब वह नियमों के तहत भारतीय रेज़िडेंट होने के कारण वह खेल सकते थे, लेकिन इस बार मामला कुछ ऐसा बना कि उन्हें ऐसा लगा कि सब कुछ फिर से शुरू हो रहा है।

SMAT में राव ने सभी दस मैच खेले और ओपनर के तौर पर 163.63 की स्ट्राइक रेट से 234 रन बनाए। 12 दिसंबर को मुंबई के ख़िलाफ़ टेलीविज़न मैच में खेली गई नाबाद 52 रन की पारी उनका सबसे यादगार प्रदर्शन रही। इसके बाद शार्दुल ठाकुर के ख़िलाफ़ उनकी बल्लेबाज़ी वायरल हो गई। राव ने एक ही ओवर में ठाकुर के ख़िलाफ़ तीन चौके और दो सिक्सर लगाए। हैदराबाद की टीम उस मैच में 132 रनों का पीछा कर रही थी और अमन के ताबड़तोड़ अंदाज़ के कारण उनकी टीम ने यह लक्ष्य सिर्फ़ 11.5 ओवर में हासिल कर लिया।

तब उन्हें पता भी नहीं था कि कुमार संगकारा ने उनकी बल्लेबाज़ी के वीडियो देख लिए थे और उनके आंकड़े भी खंगाल लिए थे। संगकारा तुरंत उन्हें राजस्थान रॉयल्स की टीम में शामिल करना चाह रहे थे। नीलामी में जब राव का नाम आया, तो बोली लगाने वाली एकमात्र टीम RR ही रही और उन्हें 30 लाख रुपये में साइन कर लिया गया।

इस पहले से ही यादगार बन चुके सीज़न का ताज़ा धमाका मंगलवार को देखने को मिला। अपने सिर्फ़ तीसरे लिस्ट ए मैच में राव ने अपना पहले शतक को एक बेहतरीन दोहरे शतक में तब्दील कर लिया। उस पारी में उन्होंने 154 गेंदों पर नाबाद 200 रन बनाए। पारी में तीन गेंदें शेष रहते हुए वह 186 पर थे, लेकिन उन्होंने दो चौके और आख़िरी गेंद पर सिक्सर लगाकर डबल सेंचुरी पूरी की। यह कारनामा उन्होंने मोहम्मद शमी, आकाश दीप, मुकेश कुमार और शाहबाज़ अहमद जैसे भारतीय अंतरराष्ट्रीय गेंदबाज़ों से सजी मज़बूत बंगाल आक्रमण के ख़िलाफ़ किया, जिसने इसे और भी ख़ास बना दिया। चारों तरफ़ मिल रही तारीफ़ों और उत्साह के बीच, जिसमें आर अश्विन की सराहना सबसे ऊपर रही, राव ज़मीन पर बने रहने की कोशिश कर रहे हैं।

वह कहते हैं, "सोशल मीडिया पर मिल रही तारीफ़ों के बीच मैं कोशिश करता हूं कि यह सब दिमाग़ पर न चढ़े। आज सब तारीफ़ कर रहे हैं, कल ग़ायब भी हो सकती है। मैं सामान्य रहने की कोशिश करता हूं, विनम्र रहता हूं और ज़्यादा नहीं सोचता। मुझे पता है कि आज की सराहना किसी दिन आलोचना में भी बदल सकती है, इसलिए मैं इसमें उलझता ही नहीं हूं।"

घरेलू सत्र के सफ़ेद बॉल चरण ने उनके करियर को ऐसी रफ़्तार दी है, जिसकी उन्होंने शायद कल्पना भी नहीं की थी। लेकिन अक्तूबर तक वह बड़े स्कोर नहीं बना पाने से काफ़ी निराश थे। ऐसे में उन्होंने तिलक वर्मा से बात की, जो उसी सिस्टम से निकलकर भारतीय टीम तक पहुंचे हैं।

राव बताते हैं, "तिलक उस समय T20I टीम के साथ ऑस्ट्रेलिया में थे, लेकिन फिर भी उन्होंने मुझे समय दिया। यह वह दौर था, जब मैं सब कुछ सही कर रहा था, लेकिन रन नहीं बन रहे थे। 90 रन की एक पारी थी, उसके बाद कुछ नहीं। मुझे एक अलग नज़रिया चाहिए था, इसलिए मैंने उन्हें मैसेज किया। उन्होंने अपने असफलताओं के अनुभव, उनसे बाहर निकलने के तरीक़े और मेरे लिए क्या मददगार हो सकता है, इस पर बात की। उस वक़्त उनके शब्द मेरे लिए बहुत सुकून देने वाले थे। उस बातचीत से मुझे काफ़ी मदद मिली।"

राव सिर्फ़ छह महीने के थे, जब उनके माता पिता ने भारत लौटने का फ़ैसला किया। शुरुआत में वह अपने बड़े भाई के साथ जॉन मनोज की सेंट जॉन्स अकैडमी जाया करते थे, जो VVS लक्ष्मण और मिताली राज जैसे खिलाड़ियों के लिए जानी जाती है। धीरे-धीरे कोचों को इतनी कम उम्र में उनकी हैंड आई कोऑर्डिनेशन काफ़ी प्रभावशाली लगी।

वह हंसते हुए कहते हैं, "शुरुआत में मैं ओपनिंग करने से डरता था। लेकिन नौ साल की उम्र में पहला शतक लगाने के बाद मुझे नई गेंद खेलने का आत्मविश्वास मिल गया। तब से मैं ओपनर ही हूं।"

जूनियर क्रिकेट में राव ने शुरुआत में ज़्यादा सुर्ख़ियां नहीं बटोरीं, लेकिन उनका प्रदर्शन इतना रहा कि वह अगले स्तर तक पहुंचते चले गए। वह कहते हैं, "अंडर 14 में मेरा प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। लोग कहते थे कि मुझमें टैलेंट है, लेकिन नतीजे नहीं थे। अंडर 16 के पहले साल में मैंने अच्छा किया और दोहरा शतक लगाया। उसके बाद मैं NCA कैंप गया।"

तिलक वर्मा ने अमन राव की मदद की Sajjad Hussain / © AFP/Getty Images

"अगले साल मैंने अंडर 16 टीम की कप्तानी की और हम सेमीफ़ाइनल तक पहुंचे। फिर कोविड आ गया और मेरा एक साल का अंडर 19 क्रिकेट छूट गया। अंडर 19 का पहला पूरा साल, जो 2020 वर्ल्ड कप बैच का था, उसमें लीग मैचों में अच्छा करने के बावजूद मुझे शुरुआत में वनडे टीम में नहीं चुना गया।

"बाद में मुझे मल्टी डे टीम में जगह मिली, वहां मैंने अच्छा प्रदर्शन किया और फिर से NCA गया। दुर्भाग्य से उस साल अंडर 19 इंडिया का कोई दौरा नहीं हुआ। अंडर 19 के आख़िरी साल में उम्र सीमा के कारण मुझे फिर से मौक़ा नहीं मिला।

"उस वक़्त मैं काफ़ी निराश था। अंडर 19 इंडिया के लिए खेलना मेरा सपना था। हर बच्चे का यह सपना होता है। मेरे कोचों ने मुझसे कहा कि अगर यह नहीं भी हुआ, तो शायद इससे भी बड़ा कुछ इंतज़ार कर रहा हो और मुझे बस मेहनत करते रहना चाहिए।

"जिस दिन मेरा चयन नहीं हुआ, मैं सीधे अभ्यास पर चला गया। मैंने ब्रेक नहीं लिया। मैंने बस प्रोसेस पर भरोसा रखा। मेरे पिता ने भी कहा कि यह दुनिया का अंत नहीं है और आगे और मौके मिलेंगे, बस उन्हें भुनाने के लिए तैयार रहना है। वही सोच मेरे काम आई।"

हाशिये पर खड़े खिलाड़ी की झुंझलाहट और संघर्ष से निकलकर राव अब इस नए मौके को पूरी तरह भुनाना चाहते हैं। शुरुआत के तौर पर वह सफ़ेद बॉल क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ चुके हैं। अब उनकी नज़र IPL से पहले अपने खेल को और निखारने पर है।

"और उससे पहले, अगर क़िस्मत ने साथ दिया, तो रणजी ट्रॉफ़ी में डेब्यू की उम्मीद भी है।"

शशांक किशोर ESPNcricinfo में वरिष्ठ संवाददाता हैं

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