मल्टी-डे मैचों में अब आख़िरी ओवर में विकेट गिरने के बाद भी जारी रहेगा खेल
बहु-दिवसीय क्रिकेट में, जिसमें टेस्ट मैच भी शामिल हैं, अब दिन के खेल का आख़िरी ओवर विकेट गिरने पर तुरंत समाप्त नहीं हो जाएगा। MCC द्वारा मंगलवार को घोषित किए गए क्रिकेट के नियमों के नए संस्करण के अनुसार, वह ओवर पूरा किया जाएगा और नए बल्लेबाज़ को मैदान पर आना होगा।
यह MCC द्वारा किए गए बड़े बदलावों में से एक है। इसके अलावा वयस्क मनोरंजक क्रिकेट में लैमिनेटेड बल्लों की अनुमति देना, हिट विकेट की परिभाषा में बदलाव करना और ओवरथ्रो की परिभाषा को सरल बनाना भी शामिल है।
ये नए बदलाव एक अक्तूबर 2026 से लागू होंगे और उससे पहले इन्हें ICC की क्रिकेट कमेटी की अगली बैठक में भी चर्चा के लिए रखा जाएगा, ताकि इन्हें अंतरराष्ट्रीय प्लेइंग कंडीशंस में शामिल किया जा सके।
MCC ने यह फ़ैसला क्रिकेट बोर्ड्स पर भी छोड़ दिया है कि वे अपने घरेलू क्रिकेट की प्लेइंग कंडीशंस में इन बदलावों को अपनाएंगे या नहीं।
विकेट गिरने के बावजूद आख़िरी ओवर जारी रहेगा
MCC की सब-कमेटी ने यह महसूस किया कि अगर आख़िरी ओवर में विकेट गिरने पर उसे अगले दिन तक आगे बढ़ा दिया जाए, तो यह न केवल बल्लेबाज़ी टीम के पक्ष में होता है बल्कि मैच से कुछ "रोमांच" भी छिन जाता है।
"इससे समय की बचत नहीं होती (जैसा कि लंच और चाय के समय होता है), क्योंकि बची हुई गेंदें अगले दिन पूरी करनी पड़ती हैं। इससे खेल का रोमांच कम हो जाता है, जबकि आने वाले बल्लेबाज़ को मुश्किल हालात से बच निकलने का मौक़ा मिल जाता है। नए बदलाव का मतलब है कि दिन का आख़िरी ओवर पूरी तरह फेंका जाएगा, भले ही उसमें विकेट गिर जाए (बशर्ते परिस्थितियां खेलने योग्य बनी रहें)।"
लैमिनेटेड बल्ले
MCC ने वयस्क मनोरंजक क्रिकेट में लैमिनेटेड बल्लों के इस्तेमाल को भी मंज़ूरी दे दी है। लैमिनेटेड बल्ला अलग-अलग प्रकार की लकड़ियों के संयोजन से बनता है, जिसकी लागत विलो से बने बल्लों की तुलना में काफ़ी कम हो जाती है। एक इंग्लिश विलो पेड़ को परिपक्व होने में आमतौर पर 15 साल से ज़्यादा का समय लगता है। ऐसे समय में जब बल्लों की मांग तेज़ी से बढ़ रही है, MCC लंबे समय से लैमिनेटेड बल्लों पर शोध कर रहा था।
2017 में जूनियर क्रिकेट में लैमिनेटेड बल्लों के इस्तेमाल को मंज़ूरी दी गई थी। अब दुनिया भर के बैट निर्माताओं के साथ क़रीबी समन्वय के बाद MCC ने वयस्क क्लब क्रिकेट में भी लैमिनेटेड बल्लों को मंज़ूरी दे दी है।
MCC ने कहा कि लैमिनेटेड बल्लों की अनुमति देना "दुनियाभर में बल्लों की बढ़ती लागत को कम करने के प्रयास" का हिस्सा है। यह भी राष्ट्रीय बोर्ड्स पर निर्भर करेगा कि वे इसे अपने यहां लागू करते हैं या नहीं।
"लैमिनेटेड बल्लों में अधिकतम तीन टुकड़ों की लकड़ी का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता वाले विलो पेड़ों का बेहतर उपयोग संभव होता है," MCC ने कहा। MCC के अनुसार, लैमिनेटेड बल्ले सामान्य बल्लों की तुलना में कोई एडवांटेज नहीं देते।
हिट विकेट नियम
हिट विकेट नियम (35.1.1 और 35.2) में दो बदलाव किए गए हैं। पहला, MCC ने यह परिभाषित किया है कि अगर बल्लेबाज़ गेंद खेलने के बाद संतुलन बनाने की कोशिश में काफ़ी देर बाद स्टंप्स पर गिर जाता है, तो भी उसे हिट विकेट माना जाएगा।
MCC ने कहा, "अगर बल्लेबाज़ अपने शॉट के कारण असंतुलित हो जाता है, संभलने के चक्कर में उनके क़दम लड़खड़ाते हैं और वह फिर स्टंप्स पर गिर जाता है, तो यह भी हिट विकेट आउट माना जाएगा, भले ही गेंद काफ़ी पहले निकल चुकी हो।"
हालांकि, बल्लेबाज़ को तब हिट विकेट आउट घोषित नहीं किया जाएगा, अगर वह संतुलन बनाते समय किसी फ़ील्डर से टकरा जाए और वह फ़ील्डर उसे स्टंप्स पर धकेल दे। इसके अलावा अगर किसी बल्लेबाज़ का कोई इक्विपमेंट, शॉट खेलने की प्रक्रिया में बल्लेबाज़ के शरीर से अलग होकर किसी अन्य खिलाड़ी से टकराने के बाद स्टंप्स से टकराता है, तो वह भी हिट विकेट आउट नहीं हो सकता। हालांकि अगर बल्लेबाज़ से गलती से बल्ला छूट जाए और वह सीधे स्टंप्स से टकरा जाए, तो बल्लेबाज़ हिट विकेट आउट होगा। लेकिन अगर बल्ला पहले विकेटकीपर से टकराए और फिर विकेट से लगे, तो वह नॉट आउट होगा।
ओवरथ्रो नियम
MCC ने मूल रूप से नियम 19.8 में इस्तेमाल की गई "अस्पष्ट" भाषा को हटा दिया है, जो ओवरथ्रो से संबंधित है और इस तरह मिसफ़ील्ड से उसका स्पष्ट अंतर बनाया गया है। नए संस्करण में ओवरथ्रो को "रन बनाने से रोकने या रन-आउट करने के लिए गेंद को स्टंप्स की ओर फेंकने का प्रयास" के रूप में परिभाषित किया गया है।
वहीं मिसफ़ील्ड के लिए MCC ने कहा, "चाहे वह गेंद को रोकने का प्रयास हो या बाउंड्री के क़रीब किसी अन्य फ़ील्डर को पास करने का, इसे ओवरथ्रो नहीं माना जाना चाहिए।"
गेंद 'पूरी तरह स्थिर' या डेड कब होगा?
अब गेंद के डेड होने के लिए उसका गेंदबाज़ या विकेटकीपर के हाथ में होना ज़रूरी नहीं होगा। MCC ने कहा कि यह नियम (20.1.1.1) में "काफ़ी बड़ा" बदलाव है, जिसके तहत अंपायर को यह तय करने में "काफ़ी अधिक छूट" होगी कि गेंद कब पूरी तरह स्थिर हो गई है। यह अक्सर बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है, ख़ासकर किसी क़रीबी मैच की आख़िरी गेंद पर।
MCC ने कहा, "अब गेंद का गेंदबाज़ या विकेटकीपर के हाथ में होना ज़रूरी नहीं है, कि तभी ही उसे पूरी तरह स्थिर माना जाए। वह किसी भी फ़ील्डर के हाथ में हो सकती है या ज़मीन पर स्थिर पड़ी हो सकती है। इससे अंपायरों को यह तय करने की आज़ादी मिलती है कि गेंद कब डेड है, भले ही कोई फ़ील्डर या बल्लेबाज़ अभी भी खेल जारी रखने की कोशिश कर रहा हो।
अपडेट किए गए नियम और अन्य बदलाव MCC की वेबसाइट पर प्रकाशित कर दिए गए हैं। MCC ने कहा कि नियमों का नया संस्करण दो सिद्धांतों पर आधारित है। पहला, ये "आधुनिक खेल के लिए उपयुक्त" है और दूसरा, ये "सभी के लिए समावेशी" है।
नागराज गोलापुड़ी ESPNcricinfo के न्यूज़ एडिटर हैं।