फ़्लाइट, फ़ाइट और फ़ियरलेसनेस: वैष्णवी शर्मा के बनने की कहानी
अगर श्रीलंका के ख़िलाफ़ पहले T20I में शॉर्ट फ़ाइन लेग पर श्री चरणी ने कैच लपक लिया होता तो वैष्णवी शर्मा को अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की 12वीं गेंद पर पहला विकेट मिल सकता था। हालांकि वैष्णवी ने बिना विकेट लिए अपना पहला मुक़ाबला समाप्त किया लेकिन उन्होंने उस मुक़ाबले में मात्र चार रन प्रति ओवर की दर से रन दिए और अपने कोटे के चार ओवरों में उन्होंने एक भी बाउंड्री नहीं दी। वैष्णवी उस मुक़ाबले में भारत की सबसे किफ़ायती गेंदबाज़ रहीं।
अगले मैच में वैष्णवी को नीलाक्षिका सिल्वा के रूप में पहला विकेट मिला और यह विकेट शॉर्ट फ़ाइन लेग पर श्री चरणी द्वारा कैच लपकने के बाद मिला जो कि उन्होंने पिछले मैच में ठीक उसी जगह पर छोड़ा था। दूसरे मुक़ाबले में वैष्णवी ने दो विकेट निकाले और पूरी सीरीज़ में उनके खाते में कुल पांच विकेट शामिल थे जो कि सीरीज़ में संयुक्त तौर पर लिए गए सर्वाधिक विकेट थे।
भारत ने जब अंडर-19 T20 विश्व कप के अभियान की शुरुआत की तब आयुषी शुक्ला और पारुनिका सिसोदिया ने प्रमुख स्पिनरों के रूप में शुरुआत की लेकिन मलेशिया के ख़िलाफ़ मुक़ाबले में वैष्णवी को मौक़ा मिला और उन्होंने इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। वैष्णवी ने पांच रन देकर पांच विकेट झटके जिसमें एक हैट्रिक भी शामिल था। उन्होंने सर्वाधिक 17 विकेट लेते हुए टूर्नामेंट में सर्वाधिक विकेट लेने वाली गेंदबाज़ के तौर पर टूर्नामेंट समाप्त किया।
ऐसी उम्मीद जताई जा रही थी कि WPL 2026 में वैष्णवी खेलती दिखाई देंगी लेकिन नीलामी में पांचों टीमों में से किसी ने भी उनके लिए बोली नहीं लगाई। हालांकि इसके कुछ ही दिनों बाद उन्हें श्रीलंका के ख़िलाफ़ T20I सीरीज़ के लिए भारतीय टीम का बुलावा आ गया।
सीरीज़ में वैष्णवी की गेंदबाज़ी में निर्भीकता की झलक प्रमुख रूप से दिखाई दी। सीरीज़ के चौथे मैच में जिसमें श्रीलंका ने 191 रन बनाए, उस मुक़ाबले में भी वैष्णवी ने छह रन प्रति ओवर की दर से रन ख़र्च किए और दो विकेट भी हासिल किए। इसमें श्रीलंकाई कप्तान चमरी अतापत्तू का विकेट भी शामिल था।
मध्य प्रदेश अंडर-19 महिला टीम की कोच भावना श्रीवास्तव कहती हैं कि वैष्णवी एक निर्भीक और आत्मविश्वास से भरी हुईं क्रिकेटर हैं। श्रीवास्तव की ही देखरेख में MP ने 2022-23 में अंडर-19 महिला T20 ट्रॉफ़ी जीती थी, उस टूर्नामेंट में वैष्णवी ने 3.00 की इकॉनमी से सर्वाधिक 23 विकेट हासिल किए थे।
"जूनियर क्रिकेट में खिलाड़ियों को आत्मविश्वास हासिल करने में समय लगता है लेकिन उनके भीतर यह आत्मविश्वास पहले से ही मौजूद है। वह निर्भीकता के साथ प्रदर्शन करने में सक्षम हैं और मैं सिर्फ़ ऐसा उनकी गेंदबाज़ी के बारे में नहीं बल्कि खेल के हर पहलू के बारे में कह रही हूं। वह कभी दबाव महसूस नहीं करतीं, उन्हें अपने खेल पर पूरा विश्वास है। वह अवसरों का इंतज़ार करती हैं जिनमें वह ख़ुद को साबित कर सकें।"
वैष्णवी ग्वालियर डिविज़न के चंबल क्षेत्र से भारतीय महिला टीम के लिए खेलने वालीं पहली खिलाड़ी हैं। 2013 में सात वर्ष की उम्र में जब उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरू किया था तब अधिक सुविधाएं नहीं थीं। वैष्णवी के पिता पेशे से ज्योतिषी हैं और उन्होंने अपनी बेटी में प्रतिभा को देखते हुए ग्वालियर की तानसेन क्रिकेट अकादमी में वैष्णवी का दाखिला करा दिया। वे अकादमी से 10 किलोमीटर दूर रहा करते थे लेकिन वैष्णवी को समस्या न हो इसलिए उन्होंने अकादमी के पास ही घर किराए पर ले लिया।
वैष्णवी के कोच लवकेश चौधरी जो अब अकादमी चलाते हैं उन्होंने कहा, "जब उनके पिता अकादमी में उन्हें लेकर आए तब उनके स्मूथ ऐक्शन को देखकर लगा जैसे वह एक बढ़िया बाएं हाथ की स्पिनर बन सकती हैं। उस समय महिला क्रिकेट उतना नहीं हुआ करता था। बल्कि हमारी अकादमी में वह पहली महिला क्रिकेटर थीं। तो उन्होंने हमारे अकादमी के लड़कों के साथ अभ्यास करना शुरू किया। इनमें से कुछ ऐसे खिलाड़ी थे जो कि एज ग्रुप क्रिकेट और MP के लिए रणजी ट्रॉफ़ी खेल चुके थे।"
गेंद की फ़्लाइट में बदलाव करने की वैष्णवी की क़ाबिलियत ने हमेशा उनके कोचों को प्रभावित किया है, लेकिन उनकी असली ताक़त रफ़्तार में विविधता है। उन्होंने 65 किमी/घंटा से लेकर 85-87 किमी/घंटा तक की स्पीड से गेंदबाज़ी करने की क्षमता विकसित कर ली है। इसमें अगर डिप पैदा करने की कला भी जुड़ जाए, तो उन्हें मारना लगभग असंभव हो जाता है। पांचवें T20I में कविशा दिलहारी का विकेट इसका बेहतरीन उदाहरण है। एक्स्ट्रा कवर के ऊपर चौका खाने के ठीक एक गेंद बाद वैष्णवी ने 68.5 किमी/घंटा की रफ़्तार से गेंद को लूप किया, उसमें डिप हासिल की, उसे मिडिल पर लेंथ में गिराया और दिलहारी के स्वीप के प्रयास को चकमा देकर उन्हें बोल्ड कर दिया। चौथे मैच में चमरी अतापत्तू का विकेट भी इसी वजह से आया। वैष्णवी ने श्रीलंका की कप्तान को वह अतिरिक्त रफ़्तार और जगह नहीं दी, जिसका वह आम तौर पर फ़ायदा उठाती हैं।
एमपी की सीनियर और अंडर-23 टीम के हेड कोच समीर नाइक बताते हैं, "वह हमेशा से गेंद को फ़्लाइट देने में अच्छी थी, इसलिए हमने उनकी रोटेशन पर काम किया। जब वह गेंद पर ज़्यादा रोटेशन डालने लगीं, तो उन्हें डिप और बाउंस मिलने लगा।" नाइक ने 2025-26 सत्र से पहले सीनियर टीम की ज़िम्मेदारी संभाली, लेकिन वह पांच साल से ज़्यादा समय से मध्य प्रदेश क्रिकेट अकादमी से जुड़े हैं। वैष्णवी जब 15 साल की थीं और एमपीसीए सेट-अप में आईं, तब नाइक ने उनके साथ क़रीबी तौर पर काम किया। कोविड के दौरान, जब टीमों की स्क्वॉड साइज 20 थी, वैष्णवी को सीनियर टीम में डेवलपमेंट प्लेयर के तौर पर शामिल किया गया।
"जब बल्लेबाज़ उन्हें अटैक करने के लिए आगे आते थे, तो उन्हें एंगल्स समझने और अपनी ट्रैजेक्टरी बदलने की ज़रूरत थी। तभी उन्होंने क्रीज़ पर एंगल्स का इस्तेमाल करना सीखा। सालों के दौरान उन्होंने एक धारदार आर्म बॉल भी विकसित की। अंडर-23 प्रतियोगिता के दौरान हमने वाइड यॉर्कर पर भी काम किया, ताकि गेंद बल्लेबाज़ों के आर्क से दूर रहे।"
नाइक को अपने तरीक़ों के असर देखने के लिए ज़्यादा इंतज़ार नहीं करना पड़ा। वैष्णवी इस सत्र में सीनियर महिला T20 ट्रॉफ़ी में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाज़ रहीं (21 विकेट, इकॉनमी 4.50), और सीनियर महिला इंटर ज़ोनल T20 ट्रॉफ़ी में भी संयुक्त रूप से सर्वाधिक विकेट (12) उनके नाम रहे (इकॉनमी 6.28)। दबाव में शांत रहने की उनकी क़ाबिलियत ने नाइक को ख़ास तौर पर प्रभावित किया।
यह गुण वैष्णवी ने कैसे विकसित किया?
चौधरी कहते हैं, "ग्वालियर में काफ़ी मेन्स T20 क्रिकेट होता है। जब वह क़रीब 15-16 साल की थीं, तभी से मैंने उन्हें उन मैचों में खिलवाया। इससे उन्हें समझ आया कि किस मौक़े पर कौन-सी स्पीड से गेंदबाज़ी करनी चाहिए। लड़कों की प्रतियोगिताओं में नियमित खेलने से उनमें दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता आई।"
यही दबाव झेलने की क़ाबिलियत श्रीवास्तव के भरोसे का आधार बनी, जब 2022 की अंडर-19 T20 ट्रॉफ़ी के एक अहम लीग मैच में उन्होंने बड़ा फ़ैसला लिया। मध्य प्रदेश 72 रन के लक्ष्य का पीछा कर रहा था और 11 रन पर 4 विकेट गिर चुके थे। आख़िरी 2 गेंदों पर 2 रन चाहिए थे।
"एक बल्लेबाज़ [यामिनी बिल्लोरे] बाक़ी थीं, लेकिन क्योंकि मैंने वैष्णवी के साथ कई साल काम किया था, मुझे पता था कि वही उस दबाव को संभाल सकती हैं। इसलिए मैंने बाक़ी बल्लेबाज़ों से पहले उन्हें भेजा और उन्होंने हमें मैच जिता दिया।"
2023 की शुरुआत से अब तक भारत ने वैष्णवी को मिलाकर छह लेफ़्ट-आर्म स्पिनर्स को T20I डेब्यू दिया है-- बी. अनुषा, राशि कन्नोजिया, साइका इशाक़, तनुजा कंवर और श्री चरणी। चरणी और वैष्णवी को छोड़कर, बाक़ी किसी को भी चार से ज़्यादा T20I नहीं मिले, जबकि इशाक़ और कंवर अपनी-अपनी WPL टीमों की नियमित सदस्य हैं।
श्रीवास्तव वैष्णवी को "हंसमुख इंसान" बताते हैं जो माहौल हल्का रखती हैं, लेकिन अपने काम पर पूरा फ़ोकस बनाए रखती हैं। मगर ग्वालियर से आने और यहां तक पहुंचने के संघर्ष ने उन्हें एक परिपक्व खिलाड़ी बना दिया है। लड़ाई से कभी पीछे न हटने की आदत शायद उनके भीतर रच-बस गई है। और शायद यही बात भारत वैष्णवी में देखता है, जब वह अपने ख़ज़ाने में एक और विश्व टाइटल जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
एस सुदर्शनन ESPNcricinfo में सब-एडिटर हैं. @Sudarshanan7