बुमराह की सलाह, चोटों के ख़िलाफ़ मानसिक लड़ाई और श्रेयांका की वापसी
भारतीय स्टार तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह ने चोटों से घिरीं श्रेयांका पाटिल को बेंगलुरु के सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस में एक अहम सीख दी थी - "अपनी चोटों से लड़ने के बजाय उसे स्वीकार करना सीखो।"
श्रेयांका ने कभी नहीं सोचा था कि जिस ब्रेक को वह मामूली समझ रही हैं, वह उनके धैर्य की 14 महीनों लंबी परीक्षा बन जाएगा। रिकवरी के इस लंबे सफ़र में वह एक के बाद एक कई शारीरिक समस्याओं से घिरी रहीं। शुरुआत शिन स्प्लिंट्स और कलाई की चोट से हुई और सिलसिला बाएं अंगूठे के फ़्रैक्चर पर जाकर रुका।
बुधवार को श्रेयांका ने बताया, "मेरा अंदाज़ा था कि यह महज़ एक मामूली चोट है और दो-तीन महीनों में सब ठीक हो जाएगा। मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे एक साल से अधिक समय तक क्रिकेट से दूर बैठना पड़ेगा।"
शारीरिक कष्ट के बावजूद उनके लिए मानसिक संघर्ष कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। WPL 2025 और इंग्लैंड दौरे जैसी बड़ी सीरीज़ हाथ से निकल जाने के बाद, विश्व कप टीम में जगह न मिल पाना उनके लिए सबसे बड़ा आघात था।
उन्होंने कहा, "एक के बाद एक बड़े मौक़े गंवाना और फिर WPL मिस करना मेरे लिए बेहद तक़लीफ़देह था। विश्व कप की ट्रॉफ़ी जीतना हर खिलाड़ी का ख़्वाब होता है और उसे चूकना बहुत दुखद रहा।"
हालांकि, इस कठिन दौर में जसप्रीत बुमराह के साथ हुई बातचीत ने उनकी सोच की दिशा बदल दी थी। श्रेयांका ने बताया, "एक स्पिनर होने के बावजूद मैं डेथ ओवर्स में गेंदबाज़ी करती हूं, इसलिए मेरे मन में यॉर्कर और दबाव झेलने को लेकर कई सवाल थे। बुमराह ने न केवल तकनीकी बारीकियां समझाईं, बल्कि चोट से उबरने के मानसिक पहलू पर भी मेरा हौसला बढ़ाया। उन्होंने मुझे समझाया कि यह खेल का हिस्सा है और हर खिलाड़ी इस दौर से गुज़रता है। उनकी सलाह साफ़ थी कि मुश्किलों से जूझने के बजाय उन्हें सहजता से स्वीकार करना सीखो।"
इन बातचीतों के साथ साथ सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस में मौजूद अन्य खिलाड़ियों रियान पराग, मयंक यादव, आशा शोभना और अमनजोत कौर के साथ अनौपचारिक बातचीत ने भी धीरे-धीरे उन्हें उस अकेलेपन से बाहर निकाला।
उन्होंने कहा, "शुरुआत में मैं किसी से बात नहीं कर रही थी। मैं दो या तीन महीने तक खु़द को कमरे में बंद रखती थी। वह मैं नहीं थी। मैं आमतौर पर बहुत चुलबुली रहती हूं। लेकिन लोगों से बात करने पर मुझे एहसास हुआ कि मैं अकेली नहीं हूं।"
खुशख़बरी का एक और पल तब आया, जब पिछले साल के आख़िर में मालोलन रंगराजन का फोन आया। वह यह बताने के लिए था कि मेगा ऑक्शन साइकल से पहले RCB उन्हें रिटेन कर रही है।
श्रेयांका ने कहा, "मेरे पास इसे बयान करने के लिए शब्द नहीं हैं। कोई खिलाड़ी जो 13 या 14 महीने से नहीं खेला हो और फिर भी वे आप पर भरोसा जताएं और कहें कि हम आपको बैक करेंगे क्योंकि आपकी स्किल उस स्तर की है। इससे बहुत आत्मविश्वास मिलता है।"
उन्होंने कहा, "उससे पहले मैं बहुत ज़्यादा सोच रही थी। अगर मुझे रिटेन नहीं किया गया तो क्या होगा, मैं किस टीम के लिए खेलूंगी, ये सारे ख़याल आ रहे थे। कॉल के बाद मैंने अपने पर्सनल कोच अर्जुन देव सर को फोन किया और रोने लगी। मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि मैं क्या महसूस कर रही हूं।"
अब श्रेयांका पिछले कुछ महीनों से पूरी तरह दर्द मुक्त हैं। विमेंस CPL और कर्नाटक के लिए घरेलू सत्र खेलने के बाद उन्होंने सीज़न से पहले अपनी निजी अकादमी में एक महीने के कंडीशनिंग कैंप के दौरान ऑफ़ स्पिन, बल्लेबाज़ी और फ़िटनेस से जुड़ी कई तकनीकी चीज़ों पर काम किया है।
और वह जानती हैं कि जब 9 जनवरी को वह मैदान पर उतरेंगी और स्टेडियम में "RCB RCB" के नारे गूंजेंगे, तो वह पूरी तरह से तैयार होंगी।
