हरमनप्रीत कौर : मेरे लिए जीत से ज़्यादा, जीत की मानसिकता ज़रूरी है
बीते साल भारतीय महिला टीम को पहला विश्व कप ख़िताब जिताने वाली हरमनप्रीत कौर का अगला मक़सद एक और WPL ट्रॉफ़ी हासिल करना है। उन्होंने साफ़ किया कि वह भविष्य के खिलाड़ियों के लिए "जीत के जुनून" (विनिंग माइंडसेट) की एक ठोस विरासत छोड़कर जाना चाहती हैं।
मुंबई इंडियंस (MI) के प्री सीज़न प्रेस कॉन्फ़्रेंस में हरमनप्रीत ने कहा, "मैं जिस भी टीम का हिस्सा बनती हूं, मेरा मक़सद सिर्फ़ जीत की मानसिकता पैदा करना होता है। सालों से हम सिर्फ़ टूर्नामेंट्स में भागीदारी करते आए हैं, लेकिन उससे बदलाव नहीं आता। जब आप मैदान पर सिर्फ़ जीत हासिल करने के इरादे से उतरते हैं, तो वह न केवल आपके व्यक्तिगत प्रदर्शन को निखारता है, बल्कि देश के गौरव को भी बढ़ाता है।"
तीन WPL सीज़न में MI को दो बार चैंपियन बनाने और फिर भारत को विश्व कप की ऐतिहासिक जीत दिलाने वाली हरमनप्रीत ने अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपनी फ़्रैंचाइज़ी को दिया। उनका मानना है कि 2023 से इस टीम के साथ जुड़े रहने और यहां के माहौल ने उनके भीतर जीतने के जज़्बे को और भी मज़बूत किया है।
हरमनप्रीत ने स्वीकार किया कि WPL ने उनके नज़रिए में काफ़ी बदलाव लाया है। उन्होंने कहा, "इस लीग से जुड़ने से पहले मेरी सोच कुछ सीमाओं में बंधी थी। मुंबई इंडियंस (MI) का IPL में ख़िताब जीतने का एक लंबा और गौरवशाली इतिहास रहा है। जब मैंने इस सेटअप का हिस्सा बनकर उनके साथ वक़्त बिताया, तो मुझे अहसास हुआ कि उनका पूरा फ़ोकस सिर्फ़ इस बात पर होता है कि चैंपियन बनने के लिए सबसे सटीक रणनीति क्या होनी चाहिए। उनके इसी ऊंचे मापदंड ने मुझे अंदर से बदल दिया। अब मैं जहां भी जाती हूं, मेरा मक़सद टीम की मानसिकता में बदलाव लाना होता है। पिछले कुछ समय में हमारी सफलताओं में यही 'विनिंग माइंडसेट' साफ़ तौर पर नज़र आया है।"
MI आमतौर पर अपने स्टाफ़ और खिलाड़ियों में निरंतरता बनाए रखने पर ज़ोर देती है। हालांकि इंग्लैंड की हेड कोच बनीं चार्लट एडवर्ड्स के जाने के बाद टीम को अपने कोचिंग सेटअप में बदलाव करना पड़ा है। पिछले तीन साल दिल्ली कैपिटल्स की असिस्टेंट कोच रहीं लीज़ा केटली अब MI की हेड कोच हैं। उनके साथ पूरी तरह महिला कोचिंग स्टाफ़ है, जिसमें मेंटॉर और गेंदबाज़ी कोच झूलन गोस्वामी, बल्लेबाज़ी कोच देविका पलशिकर, फ़ील्डिंग कोच निकोल बोल्टन और स्पिन गेंदबाज़ी कोच क्रिस्टन बीम्स शामिल हैं।
1997 और 2005 में ऑस्ट्रेलिया के साथ दो विश्व कप जीत चुकी केटली कोचिंग की भूमिका में नई नहीं हैं। वह 2007-08 में ऑस्ट्रेलिया की पहली महिला हेड कोच बनी थीं। इसके बाद वह 2019 से 2022 तक इंग्लैंड महिला टीम की हेड कोच रहीं। इसके बाद उन्होंने सिडनी थंडर और नॉर्थर्न सुपरचार्जर्स के साथ भी काम किया, जो अब द हंड्रेड में सनराइजर्स लीड्स के नाम से जानी जाती है।
केटली ने कहा, "मैं पिछले 20 सालों से एलीट स्पोर्ट और एलीट टीमों की कोचिंग कर रही हूं। अब जब दुनिया भर में इतनी फ्रेंचाइज़ी लीग हैं, तो उनमें शामिल होना और अलग अलग देशों में हेड कोच की भूमिका निभाना मेरे लिए बहुत रोमांचक है। इन 20 सालों में पहली बार मेरे पास पूरी तरह महिला कोचिंग पैनल है। यह मेरे लिए भी नया है और खिलाड़ियों के लिए भी बहुत अहम है। मैं इस बात पर पूरा भरोसा करती हूं कि अगर आप किसी चीज़ को देख नहीं सकते, तो आप वह बन भी नहीं सकते। आने वाले दस सालों में आप इसे और ज़्यादा देखेंगे।
ट्रेनिंग के दौरान घरेलू खिलाड़ियों की प्रतिस्पर्धा ने भी केटली का ध्यान खींचा है। दिल्ली कैपिटल्स के साथ रहते हुए उन्होंने एन श्री चरनी का उभार क़रीब से देखा था, जो बाद में विश्व कप में भारत के लिए खेलीं। MI में भी उन्हें कुछ ऐसी ही तस्वीर नज़र आ रही है।
केटली ने कहा, "पिछले चार सालों में जब भी मैंने घरेलू भारतीय खिलाड़ियों के साथ काम किया है, यह उनके लिए बहुत मायने रखता है। मुझे ज़्यादा कुछ कहने की ज़रूरत नहीं पड़ती। उनकी मेहनत, सुनने का तरीक़ा, संवाद और इंटरनेशनल खिलाड़ियों के साथ काम करने की ललक साफ़ दिखाई देती है। यह देखना बहुत ताज़गी भरा और खूबसूरत होता है।
"नेट्स में जिस तरह वे प्रतिस्पर्धा करते हैं, वह कमाल का है। हाल ही में अमेलिया कर का पहला ट्रेनिंग सेशन था। हमारी लेफ़्ट आर्म स्पिनर त्रिवेणी वशिष्ठ गेंदबाज़ी आईं, उनकी पैड पर गेंद मारी और ज़ोर से चिल्लाईं आउट-आउट -आउट। ऑस्ट्रेलिया में ऐसा नहीं होता। वहां गेंद पैड पर लगती है और गेंदबाज़ बस लौट जाती है। यहां प्रतिस्पर्धा बहुत ज़्यादा है और वह देखने में काफ़ी प्यारी भी लगती है।
"ट्रेनिंग हो या प्रैक्टिस मैच, उनकी तीव्रता देखने लायक़ होती है। आमतौर पर ऑस्ट्रेलिया में प्रैक्टिस मैच को खिलाड़ी हल्के में ले लेते हैं, लेकिन यहां खिलाड़ी इस प्रतिस्पर्धा का पूरा आनंद लेते हैं।