WPL में मुंबई इंडियंस की लड़खड़ाहट के पीछे छुपी वजहें
मुंबई इंडियंस (MI) की कप्तान हरमनप्रीत कौर पिच पर अपनी उसी ट्रेडमार्क मुद्रा में खड़ी थीं। मैदान पर उन्हें इस मुद्रा में अक्सर तब देखा जाता है, जब वह खेल की गतिशीलता पर छोटा सा ब्रेक लगाते हुए, खुद को मानसिक रूप से तरोताज़ा करना चाहती हैं या किसी गंभीर विषय पर सोचना चाहती हैं। दायां पैर बाएं के ऊपर टिके हुए। बायां हाथ कमर पर। और दायां हाथ बल्ले के सहारे पूरे शरीर का वज़न संभालता हुआ।
उसी दौरान यूपी वॉरियर्ज़ के ख़िलाफ़ लक्ष्य का पीछा करते हुए निकोला केरी दसवें ओवर में आउट होकर पवेलियन में लौट रही थीं। मुंबई का घरेलू मैदान इस वक़्त विरोधी टीम के जश्न से गूंज रहा था, लेकिन हरमनप्रीत बिल्कुल एकांत और सन्नाटे में डूबी रहीं। 188 रनों के जवाब में जब रन रेट 12 के भी ऊपर निकल गया था, तो शायद उनके ज़हन में यह सवाल ज़रूर कौंधा होगा कि उनकी टीम इस मोड़ पर कैसे आ पहुंची - सिर्फ़ इस मुक़ाबले में ही नहीं, बल्कि इस पूरे टूर्नामेंट में।
WPL 2026 अभी अपने आधे सफ़र तक ही पहुंची चुकी है। मुंबई इंडियंस (MI) ने पहले ही अपने आठ में से पांच मुक़ाबले खेल लिए हैं। इन पांच मैचों में टीम को महज़ दो में जीत नसीब हुई है। अब तक नवी मुंबई और डीवाई पाटिल स्टेडियम के घरेलू माहौल में खेल रही यह टीम अब वडोदरा का रुख़ करेगी, जहां इस सीज़न का दूसरा चरण आयोजित होना है।
हालिया ऑक्शन में अपने ज़्यादातर पुराने खिलाड़ियों पर दांव लगाने के बाद, मुंबई इंडियंस (MI) का ऐसा ख़राब आग़ाज़ किसी ने सोचा भी नहीं था। टीम की मुसीबतें तब शुरू हुईं, जब सलामी बल्लेबाज़ हेली मैथ्यूज़ को चोट लग गई। वे कंधे की सर्जरी के बाद करीब छह महीने के लंबे इंतज़ार के बाद मैदान पर लौटी थीं। उनकी ग़ैर-मौजूदगी में अनुभवहीन जी कमलिनी को ज़िम्मेदारी दी गई और अमेलिया कर को उनके साथ ओपनिंग के लिए प्रमोट किया गया।
अमेलिया कर न्यूज़ीलैंड के सुपर स्मैश टूर्नामेंट में महज़ 59 गेंदों पर शतक ठोककर MI कैंप में पहुंची थीं। हालांकि, WPL के पहले ही मैच में RCB के विरुद्ध वह 15 गेंदों पर सिर्फ़ 4 रन ही बना सकीं। इसके बाद दिल्ली कैपिटल्स के ख़िलाफ़ 'गोल्डन डक' ने उन्हें बैटिंग ऑर्डर में नीचे जाने पर मजबूर कर दिया। दूसरी ओर कमलिनी स्विंग के सामने लड़खड़ाते फुटवर्क की वजह से नाकाम रहीं। इसका नतीजा यह हुआ कि पांच मैचों के बाद MI का पावरप्ले में रन रेट (6.50) टूर्नामेंट में सबसे कम रहा, जो कि यूपी वॉरियर्ज़ (7.56) के मुक़ाबले भी काफ़ी पीछे है।
मैच के बाद हरमनप्रीत कौर ने अपनी निराशा ज़ाहिर करते हुए कहा, "हम हर मुक़ाबले में पावरप्ले के दौरान वैसी सकारात्मक सोच के साथ मैदान पर नहीं उतर पा रहे हैं जैसी ज़रूरत है। मुझे लगता है कि यह एक ऐसा पहलू है जिस पर हमें गहराई से काम करने की ज़रूरत है।"
ओपनिंग जोड़ी की नाकामी का सीधा असर मध्यक्रम पर पड़ा, जिससे रन बनाने की पूरी ज़िम्मेदारी नेट सिवर-ब्रंट और हरमनप्रीत कौर के कंधों पर आ गई। दिल्ली कैपिटल्स के विरुद्ध मिली पहली जीत में इन दोनों का अहम योगदान रहा। वहीं, गुजरात जायंट्स के ख़िलाफ़ कप्तान हरमनप्रीत ने महज़ 43 गेंदों पर नाबाद 71 रनों की तूफ़ानी पारी खेलकर टीम को दो अंक दिलाए। सिवर-ब्रंट ने UPW के विरुद्ध पहले मैच में संघर्ष किया, लेकिन शनिवार को मिली हार में टीम को यह कमी खल गई कि इन दोनों में से कोई भी बड़ी पारी नहीं खेल सका।
दिलचस्प बात यह है कि तीसरे मुक़ाबले से पहले ही हेली मैथ्यूज़ पूरी तरह फ़िट थीं, फिर भी उन्हें अगले मैच से बाहर रखा गया। स्पिन के लिए मददगार पिच पर उनकी ऑफ़ स्पिन काफ़ी कारगर साबित हो सकती थी, लेकिन उनकी ग़ैर-मौजूदगी ने ओपनिंग की दुविधा को और गहरा कर दिया। शनिवार को आखिरकार मैथ्यूज़ की वापसी हुई, मगर इस बार उनके साथ एस सजना को ओपनिंग पर भेजा गया। इस अदला-बदली में कामलिनी को सीधे नंबर आठ पर धकेल दिया गया और तेज़ गेंदबाज़ शबनम इस्माइल को बेंच पर बैठना पड़ा, जिससे टीम के भीतर मची उथल-पुथल साफ़ नज़र आने लगी।
MI की कमज़ोर बल्लेबाज़ी के साथ-साथ उनकी फ़ील्डिंग ने भी टीम की मुश्किलें बढ़ाईं। जब मैग लानिंग और फ़ीबी लीचफ़ील्ड यूपी वॉरियर्ज़ को मज़बूत स्कोर की ओर ले जा रही थीं, तब मुंबई के पास कुछ कैच लपककर मैच में वापसी करने का सुनहरा मौक़ा था, जिसे उन्होंने गंवा दिया।
12वें ओवर के दौरान दोनों बल्लेबाज़ों के बीच तालमेल की भारी कमी दिखी, लेकिन MI इसका लाभ उठाने में नाकाम रही। उसी ओवर में कामलिनी ने लानिंग को स्टंप करने का एक सुनहरा मौक़ा भी गंवा दिया। अगले ओवर में ख़ुद कप्तान हरमनप्रीत ने कवर्स पर लिचफ़ील्ड का एक बेहद आसान कैच टपका दिया और हताशा में मैदान पर लेट गईं। घरेलू फ़ैंस सन्न होकर यह सब देखते रहे। महज़ पांच मैचों के भीतर MI अब तक दस कैच छोड़ चुकी है। प्रति मैच दो कैच का यह औसत पिछले चार सीज़नों में उनका सबसे बुरा प्रदर्शन है। हालांकि दोनों सेट बल्लेबाज़ जल्द ही पवेलियन लौट गईं, लेकिन उन तीन ओवरों में लुटाए गए 44 रनों ने UPW के रन रेट को 9.50 के पार पहुंचा दिया था।
हरमनप्रीत ने अपनी निराशा ज़ाहिर करते हुए कहा, "इस लेवल पर अगर आप लगातार मौक़े छोड़ेंगे, तो विपक्षी टीम आप पर ज़बरदस्त दबाव बना लेगी। आज वही हुआ। एक टीम के तौर पर हमें इस मुद्दे पर बात करनी होगी क्योंकि हम बहुत ज़्यादा ग़लतियां कर रहे हैं।"
अगर यही MI इलेवन इनमें से एक-दो मौक़े लपक लेती, तो मुमकिन था कि वे पिछले तीन सालों की तरह दबाव में मैच अपनी ओर मोड़ लेते। लेकिन 2026 में हालात उनके मुताबिक़ नहीं चल रहे
प्रेस कॉन्फ़्रेंस में अमेलिया कर ने कहा, "यह सीज़न उतार-चढ़ाव भरा रहा है। हम अपने बेस्ट लेवल पर नहीं खेल पाए, इसलिए जीत के मौक़े नहीं बन सके। कुछ खिलाड़ी बाहर रहे, चोटें और बीमारी भी एक बड़ी वजह रही। कई ऐसी चीज़ें हुईं जो हमारे हाथ में नहीं थीं। इसके बावजूद मुश्किल वक़्त में टीम ने जिस तरह एकजुटता दिखाई है, वह सीज़न के अगले हिस्से के लिए हौसला बढ़ाने वाली बात है। उम्मीद है कि अब हमें एक स्थिर प्लेइंग XI और सही कॉम्बिनेशन मिल जाएगा।"
इन तमाम मुश्किलों के बाद भी MI अंक तालिका में दूसरे पायदान पर बनी हुई है। लेकिन जिस तरह इस सीज़न में हर टीम कड़ी चुनौती दे रही है, वहां अपनी खोई हुई लय और ताक़त वापस पाना आसान नहीं होने वाला।
