संघर्ष की राह से मैच विनर तक गौतमी नाइक का सफ़र
WPL 2026 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की सबसे बड़ी ताक़त यह रही है कि उन्हें हर मैच में एक नया मैच-विनर बल्लेबाज़ मिला है। नादिन डी क्लर्क, ग्रेस हैरिस, राधा यादव और स्मृति मांधना मौजूदा सीज़न के अलग-अलग मौक़ों पर अपना दम दिखा चुकी हैं। हालांकि, सोमवार को जब टीम मुश्किल में फंसी, तो उसे उबारने वाला नाम थोड़ा हैरान करने वाला था। गौतमी नाइक ने अपने WPL करियर के महज़ तीसरे ही मैच में गज़ब की परिपक्वता दिखाई। शुरुआती दो ओवरों में ही RCB के दो विकेट गिर जाने के बाद नाइक ने जिस तरह मोर्चा संभाला, उसने सबको प्रभावित किया। इसी के साथ वह WPL के इतिहास में अर्धशतक जड़ने वाली पहली अनकैप्ड भारतीय खिलाड़ी भी बन गई हैं।
ज़्यादातर वक़्त नाइक लगभग रन प्रति गेंद की रफ़्तार से रन बनाती रहीं। लेकिन जब उन्होंने डीप स्क्वायर लेग के ऊपर से ज़बरदस्त पिकअप शॉट जड़ा, तो हर कोई यह सोचने पर मजबूर हो गया कि उन्होंने अब तक अपना आक्रामक अंदाज़ क्यों छिपा कर रखा था। साफ़ है कि उनके पास बड़े शॉट्स की कोई कमी नहीं है। महाराष्ट्र प्रीमियर लीग में वे स्मृति मांधना के साथ रत्नागिरी जेट्स के लिए ओपनिंग करती हैं और अपनी पावर-हिटिंग से उन्हें काफ़ी प्रभावित कर चुकी हैं। 2025 के सीज़न में उन्होंने रायगढ़ रॉयल्स के ख़िलाफ़ 160 रनों का पीछा करते हुए महज़ 46 गेंदों में 70 रन कूट दिए थे। वहीं, सोलापुर स्मैशर्स के ख़िलाफ़ तो उन्होंने सिर्फ़ 10 गेंदों में 31 रन बनाए थे, जिसमें तीन सिक्सर और तीन चौके शामिल थे। सोमवार को नंबर चार की ज़िम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने 55 गेंदों में 73 रनों की बेहतरीन पारी खेली।
पुणे में बैठकर नाइक के कोच अविनाश शिंदे इस पारी पर नज़र बनाए हुए थे। शिंदे पिछले एक दशक से भी ज़्यादा वक़्त से नाइक को तराश रहे हैं और वे किरण नवगिरे व पूनम खेमनार जैसी खिलाड़ियों को भी कोचिंग दे चुके हैं। शिंदे के ज़हन में वह सवाल बिल्कुल नहीं था जो बाकी दुनिया सोच रही थी। उन्हें नाइक के रनों से ज़्यादा उनकी 'मैच अवेयरनेस' यानी हालात के हिसाब से खेलने की समझ पसंद आई।
शिंदे ने ESPNcricinfo से कहा, "आगे चलकर आप उसका आत्मविश्वास देखेंगे। वह ऐसी खिलाड़ी है जो पहली ही गेंद से शॉट मार सकती है। वह काफ़ी प्रभावशाली बल्लेबाज़ है। आज उसने ख़ुद को थोड़ा रोका। उसके पास शॉट्स की पूरी रेंज है। उसने इस तरह खेला क्योंकि उसे टीम में अपनी जगह भी पक्की करनी थी।"
वडोदरा की उस पिच पर ख़ुद नाइक ने भी माना कि शॉट खेलना कतई आसान नहीं था, उन्हें अपनी आक्रामक फितरत पर लगाम लगानी पड़ी। उनकी पारी में कई ऐसे दमदार शॉट्स थे, जिन्होंने स्कोरबोर्ड की रफ़्तार को थमने नहीं दिया। उन्होंने लेंथ गेंदों पर पूरा धैर्य दिखाया और कवर्स के बीच से ख़ूबसूरत गैप निकाले। यहां तक कि उन्होंने खड़े-खड़े एक्स्ट्रा कवर के ऊपर से भी बेहतरीन शॉट्स जड़े। जब भी मौक़ा मिला, उन्होंने गेंदबाज़ के सिर के ऊपर से या मिडविकेट की ओर हवाई शॉट खेलने से भी परहेज़ नहीं किया।
पारियों ब्रेक के दौरान ब्रॉडकास्टर्स से बात करते हुए नाइक ने कहा, "मुझे लगता है कि मैंने हालात की ज़रूरत के हिसाब से बल्लेबाज़ी की। गेंद ठीक से बल्ले पर नहीं आ रही थी और थोड़ा रुक कर निकल रही थी। ऐसे में हमारे लिए मैच को आगे ले जाना ज़रूरी था।" उन्होंने मुस्कुराते हुए आगे कहा, "मुझे पता है कि अपनी ताक़त पर भरोसा रखना अहम है, लेकिन मुझे इस बात की ज़्यादा ख़ुशी है कि मैंने सिंगल्स और डबल्स बखू़बी चुराए।"
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नाइक का इस मुकाम तक पहुंचने का सफ़र साल 2013 में एक कॉलेज टूर्नामेंट से शुरू हुआ था। उस वक़्त उन्होंने एक पुरुष टीम में ग़ैरहाज़िर खिलाड़ी की जगह ली थी। उसी मैच के दौरान शिंदे की नज़र उन पर पड़ी, जो विरोधी टीम का हिस्सा थे और उन दिनों महिला खिलाड़ियों को कोचिंग देने की शुरुआत कर रहे थे। नाइक उस मुक़ाबले में महज़ कुछ गेंदें ही खेल पाईं और आउट हो गईं, लेकिन शिंदे ने उनसे संपर्क करने के लिए कहा।
शिंदे ने उन दिनों को याद करते हुए बताया, "उसने मुझे पूरे एक साल बाद फ़ोन किया। अब तो वह मुझे सर कहती है, लेकिन पहले वह मुझे सिर्फ़ दादा कहकर बुलाती थी। वह हमेशा से लड़कों के साथ ही क्रिकेट खेलती आई थी और तब वह बिल्कुल अलग मिज़ाज की इंसान थी।"
लेकिन नाइक के लिए मंज़िल इतनी आसान नहीं थी और शिंदे ने इस बात को बहुत जल्दी भांप लिया था। उन्होंने बताया, "जब वह मेरे पास आई, तो उसके पास बैट या पैड तक ख़रीदने के पैसे नहीं थे। लेकिन वह ज़बरदस्त मेहनती लड़की है। उसने बहुत कम उम्र में अपने पिता को खो दिया और ज़िंदगी में काफ़ी उतार-चढ़ाव देखे। एक बार उसने मुझे बताया था कि उसके पास खाने तक के पैसे नहीं थे। कई बार तो ऐसा हुआ कि वह सिर्फ़ एक कप चाय पीकर मैदान पर खेलने उतर गई।"
दुबली-पतली और लंबी कद-काठी की वजह से नाइक एक तेज़ गेंदबाज़ के तौर पर एकदम फ़िट नज़र आती थीं और उन्होंने शुरुआत भी वहीं से की थी। लेकिन हालातों ने उनकी राह बदल दी।
शिंदे ने कहा, "सच तो यह है कि तेज़ गेंदबाज़ बनने के लिए हमारे पास ज़रूरी संसाधन ही नहीं थे। तेज़ गेंदबाज़ी के लिए एडवांस ट्रेनिंग की ज़रूरत होती है और इसमें चोट लगने का डर भी ज़्यादा रहता है। मुझे नहीं लगा कि हम यह सब अफ़ोर्ड कर पाएंगे।"
उन्होंने यह भी बताया कि उस वक़्त उनकी अपनी कमाई भी बहुत कम थी। हालांकि, बल्लेबाज़ बनने का रास्ता थोड़ा कम मुश्किल रहा।
शिंदे आगे बताते हैं, "वह बल्लेबाज़ी भी अच्छी करती थी, लेकिन तब उसे सिर्फ़ ज़ोर से गेंद को हिट करना आता था, तकनीक का पता नहीं था। वह पूरी तरह से कच्ची थी। हमने बहुत धीरे-धीरे उसके खेल पर काम किया। हर कुछ महीनों में हमने उसके तरकश में नए शॉट्स जोड़े और उन जगहों पर ध्यान दिया जहां वह रन बटोर सकती थी। आज 12-13 साल हो गए हैं और हम अब भी उसकी बल्लेबाज़ी को निखार रहे हैं। उसे यहां तक पहुंचने में एक दशक से ज़्यादा का वक़्त लगा है, लेकिन अब वह नंबर दस से नंबर एक तक का सफ़र तय कर चुकी है।"
नाइक ने लोकल टूर्नामेंट में अपना लोहा मनवाया और एक मुक़ाबले में तो दोहरा शतक तक जड़ दिया। उन्होंने महाराष्ट्र की अंडर-23 टीम की नुमाइंदगी भी की, लेकिन सीनियर टीम के दरवाज़े उनके लिए इतनी आसानी से नहीं खुले। शिंदे और खेमनार के मशवरे पर वे नागालैंड की टीम से जुड़ गईं। वहां 2021 के सीनियर विमेंस वनडे टूर्नामेंट में उन्होंने 45.60 की औसत से छह मैचों में 228 रन कूट डाले।
साल 2023 में MPL की शुरुआत नाइक के करियर के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। पुरुषों के टूर्नामेंट से पहले महिलाओं का एक प्रदर्शनी मैच रखा गया था और शिंदे बताते हैं, "हमने उस इकलौते मैच की तैयारी के लिए पूरे नौ महीने जी-तोड़ मेहनत की थी।"
बारिश की वजह से छोटे हुए उस मैच में नाइक ने 28 गेंदों में 39 रनों की पारी खेली। यह पारी भारत के पूर्व विकेटकीपर किरण मोरे के ज़हन में उतर गई। मोरे वहां कमेंट्री कर रहे थे। उन्होंने बाद में गौतमी को फ़ोन किया और कहा कि वे उनके खेल के कायल हो गए हैं। उन्होंने ताज्जुब जताते हुए यह भी पूछा कि वे महाराष्ट्र के लिए क्यों नहीं खेल रही हैं।
नाइक 2023 तक नागालैंड से जुड़ी रहीं, फिर 2024 में वे बड़ौदा चली गईं और आख़िरकार 2025 के सीज़न से पहले उनकी महाराष्ट्र की टीम में वापसी हुई। उसी सीज़न में उन्होंने टीम को सीनियर विमेंस T20 ट्रॉफ़ी जिताने में अहम रोल निभाया।
घरेलू क्रिकेट के अपने इस लंबे संघर्ष पर 27 साल की नाइक ने पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन में कहा, "मेरा मक़सद सिर्फ़ क्रिकेट खेलना था और मुझे बस मौक़ा चाहिए था। मेरे मन में यह ज़िद कभी नहीं रही कि मुझे यहीं या वहीं से खेलना है। मैं बस मैदान पर उतरना चाहती थी। यह वाक़ई एक बहुत लंबा सफ़र रहा है।"
जब WPL ऑक्शन में RCB ने नाइक को 10 लाख रुपये में ख़रीदा, तो शिंदे भावुक हो गए, हालांकि उन्हें पूरी तरह हैरानी नहीं हुई क्योंकि ट्रायल्स में उन्होंने टीम को काफ़ी प्रभावित किया था। इससे पहले मुंबई इंडियंस ने भी उन्हें बुलाया था, लेकिन उस वक़्त वह बीमार पड़ गई थीं।
इस सीज़न में RCB के लिए दूसरे मैच में जब वह सिर्फ़ नौ रन बना पाईं, तो शिंदे ने उन्हें एक भरोसा दिलाने वाला मैसेज भेजा। "जिस टीम ने पहले WPL जीती है, वह उस पर भरोसा दिखा रही है और उसे प्लेइंग इलेवन में रखा गया है। यह अपने आप में बहुत बड़ी बात है। मैंने उससे बस इतना कहा कि स्मृति का भरोसा जीतना है।"
सोमवार को उन्होंने वही किया। क्रीज़ पर शुरुआती दौर में स्मृति मांधना ने उन्हें लगातार गाइड किया।
नाइक ने कहा,"आज जब मैं बल्लेबाज़ी करने उतरी, तो उन्होंने मेरे लिए चीज़ें आसान कर दीं। ना उन्होंने मुझे बताया कि ऐसी पिच पर शॉट चयन कैसा होना चाहिए। उन्हीं की वजह से मैं शुरुआत में सहज हो पाई और फिर बाद में अपने शॉट खेल सकी।"
प्लेयर ऑफ़ द मैच का पुरस्कार हासिल करने के बाद नाइक ने इसे उन लोगों को समर्पित किया, जिन्होंने उन्हें यहां तक पहुंचाया। उन्होंने कहा, "यह सर और मेरे परिवार के लिए है। इन्हीं की वजह से मैं यहां तक पहुंच पाई हूं। उन्होंने मेरे लिए बहुत मेहनत की है।"
