T20 विश्व कप में किसके नाम सबसे अधिक रन हैं?
T20 विश्व कप में सबसे ज़्यादा रन किसने बनाए हैं? भारत से नदीम नावेद का सवाल
इस सूची में दो दिग्गज भारतीय बल्लेबाज़ सबसे आगे हैं। विराट कोहली ने T20 विश्व कप मैचों में कुल 1292 रन बनाए हैं, जबकि रोहित शर्मा के नाम 1220 रन हैं। इसके बाद श्रीलंका के महेला जयवर्दने आते हैं, जिन्होंने 1016 रन बनाए हैं। रोहित ने टूर्नामेंट के पिछले सभी नौ संस्करण खेले हैं, लेकिन इस बार वह विश्व कप का हिस्सा नहीं होंगे, क्योंकि उन्होंने 2024 के फ़ाइनल में भारत को जीत दिलाने के बाद T20I से संन्यास ले लिया था। वही मैच कोहली का भी आख़िरी T20 अंतरराष्ट्रीय मैच था। जॉस बटलर इस T20 विश्व कप में 1013 रन के साथ शुरुआत करेंगे। इस साल का टूर्नामेंट शुरू होने से पहले 1000 से ज़्यादा रन बनाने वाले एकमात्र अन्य खिलाड़ी वही हैं, जिनके पास इस आंकड़े को आगे बढ़ाने का मौक़ा है, क्योंकि वह इस बार भी इंग्लैंड की टीम में हैं।
अगर कोई गेंदबाज़ों के बारे में पूछने से पहले जानना चाहता है, तो इस सूची में बांग्लादेश के शाकिब अल हसन 50 विकेट के साथ सबसे आगे हैं। शाहिद अफ़रीदी 39 विकेट के साथ दूसरे नंबर पर हैं। अफ़ग़ानिस्तान के राशिद ख़ान के पास फ़िलहाल 37 विकेट हैं। अगर वह टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो आगे निकल सकते हैं। रोहित की तरह शाकिब ने भी पिछले सभी नौ टूर्नामेंट खेले थे, लेकिन वह भी इस बार हिस्सा नहीं लेंगे।
मैंने देखा कि दिनेश चांडीमल ने T20 अंतरराष्ट्रीय में 62 पारियां खेली हैं और अभी तक शून्य पर आउट नहीं हुए हैं। क्या यह रिकॉर्ड है? श्रीलंका से असोका गुणारत्ने ने पूछा
आप सही हैं कि श्रीलंका के दिनेश चांडीमल ने अब तक T20I में 62 पारियां बिना शून्य पर आउट हुए खेली हैं। रिकॉर्ड 65 पारियों का है, जो वेस्टइंडीज़ के मार्लन सैमुअल्स के नाम है। वह T20 विश्व कप फ़ाइनल में दो बार प्लेयर ऑफ़ द मैच बनने वाले इकलौते खिलाड़ी भी हैं। (2012 में कोलंबो और 2016 में कोलकाता में।)
साउथ अफ़्रीका के बल्लेबाज़ डेविड मिलर अपने पहले 90 T20I पारियों में कभी शून्य पर आउट नहीं हुए थे, लेकिन 2022 में तिरुवनंतपुरम में भारत के ख़िलाफ़ अपनी 91वीं पारी (105वां मैच) में अर्शदीप सिंह की पहली ही गेंद पर आउट हो गए। उसके बाद वह दो बार और शून्य पर आउट हुए हैं। एमएस धोनी के करियर में 2007 से 2019 के बीच T20I में शून्य पर आउट होने के बीच 84 पारियों का अंतर था।
क्या किसी खिलाड़ी को अपने आख़िरी टेस्ट में 99 पर आउट होना पड़ा है? इंग्लैंड से जैमी क्लार्क ने पूछा
सिर्फ़ एक खिलाड़ी को अपने आख़िरी टेस्ट में 99 पर आउट होने का कड़वा अनुभव हुआ है। वह थे साउथ अफ़्रीका के ब्रूस मिचेल, जिन्होंने 1949 में पोर्ट एलिज़ाबेथ में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ अपने 20 साल के टेस्ट करियर का अंत 99 रन बनाकर किया। मैच देख रहे जॉन आर्लट ने लिखा, "मिचेल ने एक घंटे में 99 रन बनाए। वह शतक पूरा करने की कोई जल्दी में नहीं लग रहे थे, लेकिन जब उन्होंने एलेक बेडसर की गेंद पर किनारा दिया और बिली ग्रिफ़िथ ने कैच लपका, तो सब हैरान रह गए। ऐसा लगा जैसे टेबल माउंटेन गिर पड़ा हो।"
कुल मिलाकर, 12 खिलाड़ी अपने आख़िरी टेस्ट में 90s में आउट हुए हैं। इनमें से एक थे विक स्टॉलमेयर, जिन्होंने अपने इकलौते टेस्ट में 1939 में द ओवल में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ वेस्टइंडीज़ के लिए 96 रन बनाए थे। चार महिला खिलाड़ी भी इस सूची में शामिल हैं, लेकिन इनमें से किसी ने भी अपने आख़िरी टेस्ट में 99 रन नहीं बनाए हैं।
क्या किसी खिलाड़ी ने टेस्ट में दोनों पारियों में स्टंप आउट होकर पेयर किया है? स्कॉटलैंड से कॉलिन मक्किलॉप ने पूछा
ऐसा सिर्फ़ दो खिलाड़ियों के साथ हुआ है और दोनों के बीच 110 साल से भी ज़्यादा का अंतर है। 1895 में सिडनी में इंग्लैंड के बॉबी पील ऑस्ट्रेलिया के एफ़ी जार्विस द्वारा चार्ल्स "टेरर" टर्नर की गेंदों पर दोनों पारियों में शून्य पर स्टंप आउट हुए थे। इसके बाद 2005 में हरारे में, ज़िम्बाब्वे के क्रिस म्पोफ़ू, न्यूज़ीलैंड के ब्रेंडन मक्कलम द्वारा डैनियल विटोरी की गेंदों पर दो बार स्टंप आउट हुए थे।
मैंने देखा कि स्टीवन स्मिथ ने ब्रिसबेन टेस्ट को छक्के के साथ जीता। यह कितना दुर्लभ है? ऑस्ट्रेलिया से डॉन मैकेंज़ी का सवाल
पिछले दिसंबर ब्रिसबेन में खेले गए दूसरे ऐशेज़ टेस्ट में स्टीवन स्मिथ ने गस एटकिंसन की गेंद पर छक्का मारकर मैच ख़त्म किया और ऑस्ट्रेलिया को आठ विकेट से जीत दिलाई। टेस्ट क्रिकेट में ऐसा 50 से ज़्यादा बार हुआ है। मिस्बाह उल हक़ ने अकेले यह कारनामा चार बार किया है। लेकिन ऐशेज़ में यह पहला मौक़ा था, जब 1932-33 की बॉडीलाइन सीरीज़ के बाद कोई मैच छक्के से ख़त्म हुआ। तब इंग्लैंड के वॉली हैमंड ने सिडनी में ऑफ़ स्पिनर फ़िलिप "पर्कर" ली को बाउंड्री के पार भेजकर सीरीज़ 4-1 से सीरीज़ जीत ली थी।
इससे पहले वाला टेस्ट, जो 1933 में ब्रिसबेन में खेला गया था, वह भी छक्के से ही ख़त्म हुआ था। इस बार एडी पेंटर ने स्टैन मक्केब की गेंद पर ऐसा किया था। यह किसी टेस्ट के छक्के से ख़त्म होने का पहला दर्ज मामला था। इंग्लैंड के कप्तान डगलस जार्डिन ने सिडनी में दोहराए गए इस नतीजे के बाद लिखा, "दूसरी बार भी जीत दिलाने वाला शॉट छक्का ही था। हैमंड ने ली को मिड ऑफ़ के ऊपर से मारा। यह ऐसा शॉट था, जिसमें ब्रैसी शॉट (गोल्फ़ का एक शॉट) जैसी ताक़त थी, जो किसी ओपन गोल्फ़ चैंपियन को भी ईर्ष्या में डाल दे।"
ऊपर दिए गए कुछ जवाबों में ESPNcricinfo की स्टैट्स टीम के शिवा जयरमन ने मदद की।
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स्टीवन लिंच Wisden on the Ashes के एडिटर हैं
