बेहतरीन टीम संतुलन के साथ फिर से विश्व के फ़ाइनल तक पहुंचना चाहेगा साउथ अफ़्रीका

साउथ अफ़्रीका की टीम अनुभवी खिलाड़ियों से भरी पड़ी है और युवा ब्रेविस उसमें मज़बूती देने का काम करेंगे

डेवाल्ड ब्रेविस T20 विश्व कप में साउथ अफ़्रीका के लिए अहम भूमिका निभा सकते हैं © BCCI

ग्रुप मैच

बनाम कनाडा, 9 फ़रवरी - अहमदाबाद
बनाम अफ़ग़ानिस्तान, 11 फ़रवरी - अहमदाबाद
बनाम न्यूज़ीलैंड, 14 फ़रवरी, अहमदाबाद
बनाम UAE , 18 फ़रवरी, दिल्ली

बड़ी तस्वीर: पिछले साल का ज़ख़्म और सफ़ेद गेंद के क्रिकेट में सूखे को ख़त्म करने की चुनौती

तकनीकी तौर पर देखें तो साउथ अफ़्रीका अब उन टीमों की फेहरिस्त में शामिल है जिन्हें बड़े टूर्नामेंट से पहले कम आंकना मुश्किल है। पिछले साल जून में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का ख़िताब जीतकर उन्होंने लगभग तीस साल का लंबा इंतज़ार ख़त्म किया और खु़द को विजेता साबित किया। लेकिन कड़वा सच यह है कि सीमित ओवरों के क्रिकेट में वही कामयाबी दोहराना अब भी एक टेढ़ी खीर बना हुआ है। टेस्ट क्रिकेट के लंबे सफर के मुकाबले सफ़ेद गेंद के विश्व कप की जंग कहीं ज़्यादा तेज़ और दबाव वाली होती है। यहां सफलता के लिए न केवल बड़े लम्हों पर पकड़ बनानी होती है, बल्कि भाग्य का साथ मिलना भी उतना ही ज़रूरी है।

दो साल पहले बारबाडोस में साउथ अफ़्रीकी टीम इस सपने के बेहद क़रीब थी। लगातार आठ जीत दर्ज कर वे T20 विश्व कप फ़ाइनल में पहुंचे और जीत की दहलीज़ पर खड़े थे। 177 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए जब स्कोर 16 ओवर में 151/4 था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि वे हार जाएंगे। मगर आखिरी 23 गेंदों में पासा पलट गया, टीम ने सिर्फ 17 रन पर 4 विकेट गंवाए और एक बार फिर उन्हें हार का नया और दर्दनाक तरीका मिला।

इस बार उस हार का हिस्सा रहे नौ खिलाड़ी फिर से मैदान पर हैं। टीम की कमान अनुभवी ऐडन मारक्रम के हाथों में है और कोच की भूमिका में शुक्री कॉनराड हैं। संतुलन के लिहाज़ से साउथ अफ़्रीका के पास शानदार बैटिंग और बॉलिंग लाइनअप है। हालांकि कलाई की स्पिन का विकल्प थोड़ा कमज़ोर दिखता है। लेकिन इतिहास गवाह है कि यह टीम काग़ज़ी आंकड़ों से कहीं ज़्यादा मैदान पर दबाव झेलने की परीक्षा देगी।

हालिया फ़ॉर्म

कॉनराड के ऑल फ़ॉर्मैट कोच बनने के बाद साउथ अफ़्रीका की T20I फ़ॉर्म सबसे ख़राब रही। पिछले साल जुलाई से दिसंबर के बीच खेली गई छह सीरीज़ में वे एक भी नहीं जीत सके। इसमें भारत में भारत के ख़िलाफ़ मिली 3-1 की हार भी शामिल थी, जिसने चिंता बढ़ाई होगी। हालांकि यह भी जोड़ना ज़रूरी है कि T20I में साउथ अफ़्रीका शायद ही कभी पूरी ताक़त के साथ उतर पाता है। एक उदाहरण यह भी है कि एक दिन वे नामीबिया में मैच खेल रहे थे, जिसमें उन्हें हार मिली, और अगले ही दिन उनकी टेस्ट टीम पाकिस्तान में मैच शुरू करने वाली थी।

पिछले हफ़्ते, जब ज़्यादातर पहली पसंद के खिलाड़ी उपलब्ध थे, तो साउथ अफ़्रीका ने वेस्टइंडीज़ को 2-1 से हराकर विश्व कप की तैयारी को अच्छे नोट पर ख़त्म किया। यह भी याद रखना चाहिए कि 2024 के फ़ाइनल में पहुंचने से पहले साउथ अफ़्रीका को वेस्टइंडीज़ ने 3-0 से क्लीन स्वीप किया था।

इन खिलाड़ियों पर रहेगी नज़र

हाइनरिक क्लासेन की अनुपस्थिति अब साउथ अफ़्रीका के लिए वैसी चिंता का सबब नहीं है जैसी पहले हुआ करती थी। इसका मुख्य कारण एक नए 'मिस्टर 360' का उदय है। डेवाल्ड ब्रेविस अपनी निडर और आक्रामक बल्लेबाज़ी से विपक्षी टीमों में खौफ़ पैदा कर रहे हैं। उनका मशहूर 'नो-लुक' सिक्सर न केवल उनकी स्किल्स को दर्शाता है, बल्कि उनके गज़ब के आत्मविश्वास का भी प्रमाण है। महज़ 22 T20I मुक़ाबलों में ब्रेविस ने 171.32 के तूफ़ानी स्ट्राइक रेट के साथ एक शतक और एक अर्धशतक जड़ा है। एक स्थिर टॉप-3 और डेविड मिलर, ट्रिस्टन स्टब्स एवं जेसन स्मिथ जैसे फ़िनिशर्स के बीच, वे नंबर चार पर टीम की बल्लेबाज़ी को मजबूती देंगे।

वहीं, बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ ऑलराउंडर मार्को यानसन ने भी अपनी लय वापस पा ली है। 2023 के वनडे विश्व कप में वे नई गेंद से कहर बरपा रहे थे, लेकिन बड़े मैचों में दबाव के चलते उनकी गेंदबाज़ी अपनी धार खोने लगी थी। हालांकि, पिछले दो सालों में यानसन ने अपनी मानसिक मज़बूती और तकनीक पर काफ़ी काम किया है। पिछले साल भारत के ख़िलाफ़ हुई टेस्ट सीरीज़ उनके लिए बड़ा टर्निंग प्वाइंट रही, जहां उन्होंने गुवाहाटी में 93 रनों की अपनी सर्वश्रेष्ठ पारी खेली और मुख्य गेंदबाज़ के रूप में भी उभरे। मार्को यानसन अब दबाव की परिस्थितियों से निपटना सीख चुके हैं और इस बड़े टूर्नामेंट में वे इसी बदले हुए अवतार के साथ नज़र आएंगे।

आख़िरी विश्व कप ?

36 साल की उम्र में डेविड मिलर इस टूर्नामेंट से लगभग बाहर ही हो गए थे। SA20 के आख़िरी चरण में ग्रोइन इंजरी ने उन्हें परेशान किया। वे वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ सीरीज़ नहीं खेल पाए, लेकिन T20 विश्व कप के लिए यात्रा की मंज़ूरी उन्हें मिल चुकी है। यह उनका छठा T20 विश्व कप होगा। पहला उन्होंने 2014 में खेला था। समय के साथ उनकी भूमिका और अहम होती चली गई है।

2024 के फ़ाइनल में, जब साउथ अफ़्रीका जीत से बस कुछ कदम दूर था, मिलर क्रीज़ पर मौजूद थे। तभी सीमा रेखा पर सूर्यकुमार यादव के हाथों उनका कैच हुआ और वही मैच का टर्निंग प्वाइंट बन गया। इसके तुरंत बाद वे पूरी तरह टूटे हुए नज़र आए। यह सवाल भी उठा कि क्या वे दोबारा लौटेंगे। लेकिन साउथ अफ़्रीका के लिए विश्व कप जीतने की उनकी चाह अब भी ज़िंदा है। छोटे फ़ॉर्मैट में यह उनका आख़िरी मौक़ा भी हो सकता है।

साउथ अफ़्रीका की सर्वश्रेष्ठ XI

1 क्विंटन डिकॉक (विकेटकीपर), 2 एडन मारक्रम (कप्तान), 3 रियान रिकल्टन, 4 डेवाल्ड ब्रेविस, 5 डेविड मिलर, 6 ट्रिस्टन स्टब्स, 7 मार्को यानसन, 8 केशव महाराज, 9 कगिसो रबाडा, 10 अनरिख़ नॉर्खिए, 11 लुंगी एनगिडी

रिज़र्व: जेसन स्मिथ, कॉर्बिन बॉश, जॉर्ज लिंडे, क्वेन माफ़ाका

Firdose Moonda is ESPNcricinfo's correspondent for South Africa and women's cricket

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