फ़्लू से लड़कर मांधना ने RCB को जिताया ख़िताब

WPL 2026 फ़ाइनल जीतने के बाद राधा यादव को गले लगातीं स्मृति मांधना © BCCI

स्मृति मांधना ने फ़्लू से लड़ते हुए ना सिर्फ़ रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को दूसरी बार WPL ख़िताब जिताया, बल्कि ख़ुद सामने से नेतृत्व करते हुए इस जीत में 41 गेंदों पर 87 रन बनाकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

RCB के प्रमुख कोच मलोलन रंगराजन ने दिल्ली कैपिटल्स के ख़िलाफ़ छह विकेट की जीत के बाद कहा, "उन्हें (स्मृति को) तेज़ बुखार था और हालत सच में ख़राब थी। लेकिन फिर भी वह मैदान पर आईं और एक पल के लिए भी किसी को महसूस नहीं होने दिया कि उन्हें फ़्लू है। टीम में यह किसी को पता तक नहीं था। यही स्मृति हैं। जब आज दोपहर मैंने उनसे बात की तो उन्होंने कहा, 'नहीं, मालो, कोई प्रॉब्लम नहीं, मैं खेलूंगी।' यही उनका वर्क एथिक है।"

मांधना के ऊंचे मानकों के हिसाब से भी यह पारी बड़े दबाव में लक्ष्य का पीछा करने की एक शानदार मिसाल थी। शुरुआत में उन्होंने अपनी ऑस्ट्रेलियाई साथी जॉर्जिया वॉल को स्ट्राइक दी और फिर अपने खेल के रफ़्तार को भी बढ़ाया।

पांचवें ओवर के अंत में मांधना पांच गेंदों पर छह रन पर थीं, उसके बाद उन्होंने तबाही मचानी शुरू की। उनकी पारी की सबसे बड़ी ख़ासियत यह रही कि उन्होंने दिल्ली की स्पिन गेंदबाज़ी को कैसे तोड़ा। RCB की इकलौती बाएं हाथ की बल्लेबाज़ होने के नाते, मांधना ने श्री चरणी की बाएं हाथ की स्पिन पर हमला किया, जो वडोदरा चरण में काफी असरदार रही थीं। इससे DC की कप्तान जेमिमाह रॉड्रिग्स के पास कोई विकल्प नहीं बचा।

मांधना ऐसे ज़ोन में थीं, जहां वह एक जैसी गेंदों को अलग-अलग जगह भेज रही थीं। वह कभी पीछे हटकर शॉर्ट गेंद को प्वाइंट के ऊपर से मार रही थीं, तो कभी स्टंप्स के एक्रॉस जाकर उसी तरह की गेंद को लॉन्ग-ऑन और डीप मिडविकेट के बीच उड़ा रही थीं।

इतना अनुभव होने के बावजूद स्नेह राणा के पास भी मांधना की आक्रमण का कोई जवाब नहीं था। RCB ने हर ओवर में कम से कम एक बाउंड्री लगाई और मांधना का पीछे हटकर राणा को वाइड लॉन्ग-ऑफ़ के ऊपर से इनसाइड आउट मारना इसकी एक बानगी भर थी। उन्होंने इस सीज़न का अंत WPL 2026 की टॉप स्कोरर के रूप में 377 रनों के साथ किया।

रंगराजन ने कहा, "मुझे लगता है कि उन्होंने अपनी बेहतरीन पारियों में से एक को फ़ाइनल के लिए बचाकर रखा था। जिस तरह से उन्होंने बल्लेबाज़ी की, वह… अमानवीय? मुझे नहीं पता इसे क्या कहूं। इतनी क्लासी, इतनी एलिगेंट, ऐसा नहीं लगा कि वह दबाव में हैं। उन्हें देखकर साफ़ दिख रहा था कि वह पूरी तरह नियंत्रण में थीं। वह गेंद को टाइम कर रही थीं, हिट कर रही थीं और तय कर रही थीं कि कहां आक्रमण करना है।

"उन्होंने मैच से दो दिन पहले अभ्यास किया था और हम उनकी बल्लेबाज़ी को लेकर काफ़ी बातचीत कर रहे थे। मुझे लगता है कि उनका आख़िरी अभ्यास सत्र [बुधवार को] उनके बेहतरीन सत्रों में से एक था।"

सोच में यह बदलाव लीग के आख़िरी मैच में आया, जब RCB लगातार दो हार के बाद वापसी करना चाह रही थी। प्ले-ऑफ़ में उनकी जगह पक्की थी, लेकिन उन्होंने UP वॉरियर्ज़ के ख़िलाफ़ 27 गेंदों पर नाबाद 54 रन बनाकर अपनी टीम को सीधे फ़ाइनल में पहुंचा दिया। यह पारी इसलिए भी अहम थी क्योंकि उन्होंने तेज़ खेलने के साथ-साथ शॉट चयन और एग्ज़ीक्यूशन दोनों में निरंतरता भी दिखाई।

"मुझे पता है कि वह फ़ाइनल में भी मैच ख़त्म करना चाहती थीं," रंगराजन ने कहा। "लेकिन यह क्या पारी थी। हम पिछले चार साल से साथ काम कर रहे हैं। हम दोनों को पता है कि टूर्नामेंट में हमारी भूमिकाएं क्या हैं। हमारे बीच सब कुछ बहुत स्पष्ट है, हमारी अच्छी बॉन्डिंग है। उनके साथ काम करके मुझे सच में बहुत मज़ा आया और उम्मीद है कि यह RCB के लिए आगे भी जारी रहेगा।"

बैकग्राउंड की बातें साझा करते हुए रंगराजन ने कहा, "मांधना अपने खेल के हर पहलू में 'फ़ील' वाली खिलाड़ी हैं- बैट टैप करने के तरीके में, बैट नीचे आने के तरीके में और गेंद को मिडिल करने पर होने वाले एहसास में। शायद यही वजह है कि वह ज़िंदगी में हमेशा बेहतर बनने की कोशिश और हमेशा अपने स्किल को निखारने की कोशिश में रहती हैं।

"जब भी वह बल्लेबाज़ी कर रही होती हैं, वह कहती हैं, 'मैं यह ट्राय करूंगी, वह ट्राय करूंगी।' कुछ न कुछ नया, स्मृति हमेशा प्रयोग करती हैं। उन्होंने उदाहरण पेश करके टीम का नेतृत्व किया। हर अभ्यास सत्र में एक नए मानक तय किए। अगर मैं यह बताने की कोशिश करूं कि पिछले कुछ महीनों में स्मृति कितनी अच्छी रही हैं, तो भी कम ही कह पाऊंगा।"

शशांक किशोर ESPNcricinfo में सब एडिटर हैं

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