अंडर-19 विश्व कप से जुड़े हर कठिन सवाल का सरल जवाब
क्रिकेट की दुनिया के भविष्य के सितारों को चमकते देखने का इंतज़ार अब ख़त्म होने वाला है, क्योंकि पुरुष अंडर-19 विश्व कप का आग़ाज़ इसी सप्ताह के अंत में होने जा रहा है। टूर्नामेंट का यह 16वां पड़ाव युवा प्रतिभाओं के लिए अपनी क़ाबलियत साबित करने का सबसे बड़ा मंच होगा। आने वाले तीन हफ़्तों तक, दिग्गज क्रिकेटिंग मुल्कों के साथ-साथ उभरती हुई टीमों के जांबाज़ खिलाड़ी एक-दूसरे को कड़ी चुनौती देते नज़र आएंगे। आइए इस मेगा इवेंट से जुड़ा हर ज़रूरी पहलू और बारीक जानकारी पर एक नज़र डालते हैं।
कब और कहां आयोजित किया जाएगा ?
क्रिकेट के भविष्य के सितारों का जमावड़ा इस बार ज़िम्बाब्वे और नामीबिया में होने जा रहा है, जो संयुक्त रूप से इस भव्य आयोजन की मेज़बानी कर रहे हैं। यह टूर्नामेंट अपने पारंपरिक 50 ओवरों के फ़ॉर्मेट में खेला जाएगा, जिसकी शुरुआत 15 जनवरी को भारत और अमेरिका के बीच बुलावायो के क्वींस स्पोर्ट्स क्लब में होने वाले मुक़ाबले से होगी। ग्रुप चरण की रफ़्तार बहुत तेज़ रहने वाली है, जहां महज़ 10 दिनों के भीतर 24 मैच निपटाए जाएंगे। समय की बात करें तो नॉकआउट समेत तमाम मुक़ाबले स्थानीय वक़्त के मुताबिक़ सुबह 9.30 बजे और भारतीय समयानुसार दोपहर 1 बजे शुरू होंगे।
ज़िम्बाब्वे में मुक़ाबलों के लिए क्वींस स्पोर्ट्स क्लब, हरारे स्पोर्ट्स क्लब और तकाशिंगा स्पोर्ट्स क्लब को तैयार किया गया है। वहीं नामीबिया में खेल विंडहोक के नवनिर्मित नामीबिया क्रिकेट ग्राउंड और एचपी ओवल में आयोजित होंगे। मेज़बानी का संतुलन बनाए रखने के लिए दोनों ही मुल्क ग्रुप स्टेज के 12-12 मैचों की ज़िम्मेदारी संभालेंगे।
अगला पड़ाव सुपर सिक्स मुक़ाबलों और उन टीमों के बीच होने वाले प्लेऑफ़ का होगा, जो सुपर सिक्स के लिए क्वालीफ़ाई करने में नाकाम रहेंगी। टूर्नामेंट का यह हिस्सा भी दोनों मेज़बान देशों के बीच साझा किया जाएगा। हालांकि, रोमांच जब अपने चरम पर होगा, तो तमाम नॉकआउट मुक़ाबले ज़िम्बाब्वे की सरज़मीं पर आयोजित होंगे। ख़िताबी जंग की ओर बढ़ते हुए, 3 फ़रवरी को क्वींस स्पोर्ट्स क्लब और 4 फ़रवरी को हरारे स्पोर्ट्स क्लब में सेमीफ़ाइनल खेले जाएंगे, जबकि फ़ाइनल 6 फ़रवरी को हरारे में खेला जाएगा।
टूर्नामेंट में कौन-कौन सी टीमें खेल रही हैं? क्या कोई सरप्राइज नाम भी इसमें शामिल है?
इस बार की सबसे चौंकाने वाली एंट्री तंज़ानिया की है। अगर सीधे क्वालीफ़ाई करने वाली टीमों की बात करें, तो पिछले सत्र की शीर्ष 10 टीमों - ऑस्ट्रेलिया, भारत, बांग्लादेश, इंग्लैंड, आयरलैंड, पाकिस्तान, न्यूज़ीलैंड, श्रीलंका, साउथ अफ़्रीका और वेस्टइंडीज़ ने मुख्य ड्रॉ में अपनी जगह पक्की की है। मेज़बान होने के बावजूद नामीबिया क्वालीफ़ाई करने में नाकाम रहा, जबकि ज़िम्बाब्वे एक मेज़बान के तौर पर टूर्नामेंट का हिस्सा है। इनके अलावा अफ़ग़ानिस्तान, जापान, अमेरिका और स्कॉटलैंड भी अपनी चुनौती पेश करेंगे।
तंज़ानिया का करिश्मा: आख़िर यह मुमकिन कैसे हुआ?
क्वालीफ़ायर राउंड की सबसे जादुई दास्तान तंज़ानिया ने लिखी है। अफ़्रीका क्वालीफ़ायर में अपने सभी पांचों मुक़ाबले जीतकर उन्होंने अंडर-19 विश्व कप का ऐतिहासिक टिकट हासिल किया। सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि उन्होंने नामीबिया और केन्या जैसे उन मुल्कों को पछाड़ दिया, जिनके पास सीनियर लेवल पर विश्व कप खेलने का लंबा तजुर्बा है। इतना ही नहीं, उन्होंने नाइजीरिया जैसी मज़बूत रैंकिंग वाली टीम को भी मात दी। यह तंज़ानिया के क्रिकेट इतिहास में किसी भी ग्लोबल टूर्नामेंट में उनकी पहली शिरकत होगी।
क्वालीफ़ायर में और क्या हुआ?
तंज़ानिया के साथ जापान ने भी क्वालीफ़ाई किया, जिसने ईस्ट एशिया पैसिफ़िक क्वालीफ़ायर जीता। यह उनका दूसरा अंडर 19 विश्व कप होगा। इससे पहले वे 2020 में भी खेले थे। एशिया क्वालीफ़ायर अफ़ग़ानिस्तान ने जीता, जहां उसने मेज़बान नेपाल को पीछे छोड़ा। वहीं यूरोप और अमेरिका क्वालीफ़ायर क्रमशः स्कॉटलैंड और अमेरिका ने अपने नाम किए।
आपने पहले स्टेज में कुल 24 मैचों की बात की था न ? उसका स्ट्रक्चर कैसा होगा ?
टूर्नामेंट के दूसरे संस्करण के बाद से ही इसमें 16 टीमें शिरकत करती आ रही हैं। इन टीमों को चार-चार के कुल चार ग्रुप्स में बांटा किया जाएगा। हर ग्रुप में छह मुक़ाबले होंगे, जहां हर टीम एक-दूसरे के विरुद्ध मैदान पर उतरेगी। ग्रुप स्टेज की समाप्ति के बाद शीर्ष तीन टीमें सुपर सिक्स के अगले पड़ाव पर पहुंचेंगी। ग्रुप A और D की टीमें मिलकर एक सुपर सिक्स ग्रुप बनाएंगी, जबकि B और C की टीमों को दूसरे ग्रुप में रखा जाएगा। जो टीमें अपने ग्रुप में सबसे निचले पायदान पर रहेंगी, वे अपनी अंतिम रैंकिंग तय करने के लिए प्लेऑफ़ मुक़ाबले खेलेंगी।
सुपर सिक्स की दिलचस्प बात यह है कि टीमें ग्रुप स्टेज के अपने वही अंक, जीत और नेट रन रेट आगे ले जाएंगी, जो उन्होंने सुपर सिक्स में पहुंचने वाली अन्य टीमों के विरुद्ध हासिल किए होंगे। सुपर सिक्स चरण में हर टीम को दो और मैच खेलने होंगे। ये मैच उन टीमों के ख़िलाफ़ होंगे जिनकी ग्रुप रैंकिंग अलग रही होगी। मिसाल के तौर पर, A1 का सामना D1 से नहीं होगा, बल्कि उसे D2 और D3 की चुनौतियों से पार पाना होगा।
इसके बाद, दोनों सुपर सिक्स ग्रुप्स की टॉप-2 टीमें सेमीफ़ाइनल के लिए क्वालीफ़ाई करेंगी।
क्या यहां भी सीनियर विश्व कप जैसे नियम होंगे, जैसे डीआरएस (DRS)?
पिछले सत्र की ही तरह हर मैच में एक टीवी अंपायर और एक रिज़र्व अंपायर की मौजूदगी रहेगी। हालांकि, यहां पूर्ण डीआरएस सिस्टम उपलब्ध नहीं होगा, लेकिन अंपायर रिव्यू और प्लेयर रिव्यू की प्रक्रिया जारी रहेगी। मुमकिन है कि इसमें वह हाई-टेक तकनीक न दिखे जिसकी आदत हमें सीनियर क्रिकेट देखते हुए पड़ चुकी है।
टूर्नामेंट का इतिहास भी बता ही दीजिए
अंडर-19 विश्व कप का सफ़र पहली बार 1988 में शुरू हुआ था, जब ऑस्ट्रेलिया के द्विशताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में इसका आयोजन किया गया। उस शुरुआती दौर में सात टेस्ट खेलने वाले मुल्कों के साथ एक ICC एसोसिएट्स इलेवन ने शिरकत की थी। फ़ाइनल की जंग में ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को पांच विकेट से मात देकर पहला ख़िताब अपने नाम किया था।
उस पहले आयोजन के बाद यह टूर्नामेंट एक दशक तक ठंडे बस्ते में रहा और फिर 1998 में एक नए स्वरूप में इसकी वापसी हुई। तब से यह सिलसिला हर दो साल में 16 टीमों के साथ निरंतर जारी है। हाल के वर्षों में क्रिकेट के इस मंच पर भारत और ऑस्ट्रेलिया का वर्चस्व साफ़ तौर पर देखा गया है। 2024 के फ़ाइनल में भी ये दोनों दिग्गज टीमें ही आमने-सामने थीं, जहां ऑस्ट्रेलिया ने 79 रनों से जीत दर्ज की।
अगर कामयाबी के पैमाने पर देखें तो भारत अब तक की सबसे सफल टीम साबित हुई है, जिसके नाम पांच विश्व ख़िताब दर्ज हैं। 2024 की फ़तह ऑस्ट्रेलिया की चौथी ट्रॉफ़ी थी। पाकिस्तान दुनिया की एकमात्र ऐसी दूसरी टीम है जिसने एक से ज़्यादा बार इस ट्रॉफ़ी पर कब्ज़ा किया है; उन्होंने 2004 और 2006 में लगातार जीत हासिल की थी। इनके अलावा इंग्लैंड, साउथ अफ़्रीका, वेस्टइंडीज़ और बांग्लादेश भी एक-एक बार चैंपियन बनने का गौरव हासिल कर चुके हैं।
क्या अंडर 19 विश्व कप खेलने वाले खिलाड़ी आगे जाकर बड़े नाम बने हैं?
पूरी सूची के लिए बहुत जगह चाहिए, लेकिन एक झलक दे देते हैं।
1998 के संस्करण से ब्रायन लारा, सनत जयसूर्या, इंज़माम उल हक़, माइक एथर्टन, नासिर हुसैन, स्टुअर्ट लॉ, मार्क रामप्रकाश, नयन मोंगिया, क्रिस केर्न्स, आक़िब जावेद और नरेंद्र हिरवानी जैसे नाम निकले। हर संस्करण में ऐसे नाम मिलते रहे हैं। हाल के वर्षों में विराट कोहली, स्टीव स्मिथ, केन विलियमसन, ग्रीम स्मिथ, माइकल क्लार्क, रोहित शर्मा, हाशिम अमला, एलिस्टेयर कुक, जो रूट, डेविड वॉर्नर और ब्रेंडन मक्कलम जैसे सितारे इसी मंच से आगे बढ़े हैं।
इस बार किन खिलाड़ियों पर नज़र रहेगी?
सबसे बड़ा नाम भारत के ओपनर वैभव सूर्यवंशी का है। महज़ 14 साल की उम्र में उन्होंने IPL में 38 गेंदों पर 101 रन की पारी खेली थी और तब से सीनियर स्तर से ठीक नीचे लगातार रिकॉर्ड तोड़ते जा रहे हैं।
पाकिस्तान के ओपनर समीर मिन्हास ने हालिया अंडर-19 एशिया कप में सभी का ध्यान खींचा। उन्होंने फ़ाइनल में भारत के ख़िलाफ़ 172 रन बनाए थे और मलेशिया के ख़िलाफ़ 177 रन जड़े थे।
ऑस्ट्रेलिया के ओलिवर पीक पिछली बार की ख़िताबी जीत के बाद फिर लौट रहे हैं। इस बार वे टीम की कप्तानी करेंगे। घरेलू क्रिकेट और BBL का अच्छा अनुभव उनके पास है, जहां हाल ही में उन्होंने मेलबर्न रिनेगेड्स के लिए आख़िरी गेंद पर सिक्सर लगाकर मैच जिताया था।
पाकिस्तान के ही एक और खिलाड़ी अली रज़ा से भी काफ़ी उम्मीद है। उनकी लंबाई और रफ़्तार उन्हें युवा तेज़ गेंदबाज़ों की भीड़ से अलग बनाती है। उन्होंने पिछले साल PSL में पेशावर ज़ल्मी के लिए नौ मैचों में 12 विकेट लिए थे और अंडर-19 एशिया कप फ़ाइनल में भारत के ख़िलाफ़ चार विकेट लेकर मैच का रुख़ पलट दिया था।
एक नाम जो शायद कम जाना पहचाना हो, वह है जापान के स्पिन गेंदबाज़ ऑलराउंडर चार्ली हारा हिंज़े। वह सीनियर राष्ट्रीय सेट अप का भी हिस्सा हैं और इस टूर्नामेंट में जापान की पहली जीत की उम्मीदों की अहम कड़ी होंगे। उनका हुनर ब्रिस्बेन के एक अंडर 17 मैच में दिखा था, जहां उन्होंने 99 रन बनाए और फिर 4 रन देकर 6 विकेट झटके थे।