दहाड़, हैट्रिक और पर्पल कैप: नंदनी शर्मा की WPL में धमाकेदार दस्तक
मैदान पर जज़्बातों का ऐसा सैलाब कम ही देखने को मिलता है। नंदनी शर्मा ने जब अपने करियर के दूसरे ही WPL मुक़ाबले में हैट्रिक का जादुई आंकड़ा छुआ, तो उनकी दहाड़ ने पूरी कहानी बयां कर दी। स्टैंड्स की ओर देखते हुए उन्होंने दिल्ली कैपिटल्स (DC) के मैनेजमेंट को जो सलामी दी, वह महज़ एक इशारा नहीं बल्कि गहरे एहसान का इज़हार था। यह उस भरोसे का शुक्रिया था, जो DC ने उन पर तब दिखाया जब वे करियर के सबसे कठिन दौर से गुज़र रही थीं। यह सलामी उस मौक़े के नाम थी, जिसने गुमनामी के अंधेरे से निकालकर उन्हें दुनिया के सबसे बड़े मंच पर अपनी क़ाबलियत साबित करने का हक़ दिया।
नंदनी के लिए डेब्यू पर दो विकेट चटकाने के बाद अगली ही रात इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई। महज़ दो मैचों के भीतर किसी अनकैप्ड भारतीय खिलाड़ी द्वारा WPL की पहली हैट्रिक लेना और टूर्नामेंट में एक मैच में पांच विकेट झटकने वाली महज़ दूसरी भारतीय गेंदबाज़ बनने का कारनामा वाक़ई बेमिसाल है। यह किसी ख़्वाब के हक़ीक़त में बदलने जैसा है, जहां एक उभरते हुए सितारे ने इतनी कम मुद्दत में सफलता के शिखर को छू लिया।
पांच विकेटों का यादगार हॉल हासिल करने के बाद उन्होंने अपने जज़्बात साझा किए। नंदनी ने कहा, "मुझसे पहले ही दिन साफ़ कह दिया गया था कि परिस्थितियां कैसी भी हों, टीम पूरी तरह मेरे साथ खड़ी रहेगी। DC ने मुझ पर जो भरोसा जताया, उसके बाद मुझे लगा कि अब मैदान पर कुछ बड़ा करके दिखाने की बारी मेरी है। मेरा वह जश्न महज़ एक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि उसी अटूट भरोसे के प्रति मेरा शुक्राना था।"
चंडीगढ़ की इस 24 वर्षीय तेज़ गेंदबाज़ पर DC की निगाहें लंबे वक़्त से टिकी थीं। यही वजह थी कि पिछले साल के ऑक्शन में टीम ने 20 लाख रुपये की बोली लगाकर उन्हें अपने कुनबे में शामिल किया। उनकी सबसे बड़ी खूबी सटीक लेंथ पर लगातार गेंदबाज़ी करना है, लेकिन इसके साथ ही उनके तरकश में विविधताओं के कई तीर मौजूद हैं, जिनमें उनकी धीमी गति की गेंदबाज़ी विरोधियों के लिए पहेली बन जाती हैं।
इसी तरह से उनकी 'बैक ऑफ़ द हैंड' स्लोअर गेंद GG के विरुद्ध मैच का पासा पलटने वाली साबित हुई। अपने पहले ही ओवर में सोफ़ी डिवाइन के प्रहारों से महंगी साबित होने के बाद, नंदनी ने ज़बरदस्त वापसी की। दूसरे ओवर में उन्होंने अपनी उंगलियों के जादू से डिवाइन को चकमा दिया, जो 95 रन बनाकर खेल रही थीं। डिवाइन का वह कीमती विकेट मुक़ाबले का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट रहा। इसके बाद नंदनी ने निचले क्रम को ताश के पत्तों की तरह समेटते हुए चार और शिकार किए, जिसमें अंतिम ओवर में ली गई वह यादगार हैट्रिक भी शामिल थी।
इस स्पेल की अहमियत को बयां करता वह पल वाक़ई बहुत यादगार था, जब मैच से पहले तक पर्पल कैप की हक़दार रहीं डिवाइन ने पारी के अंतराल में ख़ुद वही कैप नंदनी को पहनाई।
उस ऐतिहासिक शाम को स्टैंड्स में उनकी मां सीमा और भाई आकाश भी मौजूद थे। पर्पल कैप हासिल करते ही नंदनी ने हाथ हिलाकर उनकी ओर इशारा किया, जो एक भावुक मंज़र था। गुज़रे एक साल के दौरान वे सिर्फ़ उनका हौसला ही नहीं रहे, बल्कि एक कोच की भूमिका भी निभाई। उन्होंने ही नंदनी को 'इनस्विंगर' की कला में माहिर बनाने में मदद की। इससे पहले नंदनी के क्रिकेट सीखने का सफ़र ज़्यादातर लड़कों के साथ अभ्यास करते हुए ही गुज़रा था।
नंदनी ने कहा, "मैं पहले एक कोच के साथ अभ्यास करती थी और फिर उन्होंने मुझे बाउंसर डालना सिखाया। लॉकडाउन के बाद मैंने कोच बदला। वहां मैं लड़कों के साथ खेलती थी और वे मेरी गेंद आसानी से पढ़ लेते थे। इसलिए मैंने तेज़ गेंदबाज़ी करना और वैरिएशन विकसित करना सीखा, क्योंकि वे मुझे आसानी से मार रहे थे। मार पड़ने के बाद ही मैंने वैरिएशन सीखना शुरू किया।
मेरे मां पिता और भाई ने मुझे सब कुछ सिखाया है, जिसमें इनस्विंगर डालना भी शामिल है। उन्होंने मुझे आगे बढ़ने के लिए बहुत वक़्त दिया। यह सब सीखने में मुझे काफ़ी समय लगा।"
आख़िरी गेंद से पहले नंदनी ने अपनी कप्तान जेमिमाह रोड्रिग्स और शेफ़ाली वर्मा से बात की थी। WPL के ऑफ़िशियल चैनल पर उन्होंने बाद में कहा, "मैं सोच में थी कि बाउंसर डालूं या स्लोअर। जेमी ने मुझसे स्टॉक बॉल डालने को कहा।" नंदनी ने वही किया। फुल और सीधी गेंद। रेणुका सिंह लैप शॉट खेलने की कोशिश में बोल्ड हो गईं।
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नंदनी की यह कामयाबी घरेलू क्रिकेट के मैदानों पर बहाए गए पसीने का नतीजा है। साल 2025 में बेंगलुरु में हुए 'अंडर-23 इमर्जिंग कैंप' के दौरान उन्होंने अपनी चमक बिखेरी थी। यही वजह रही कि ऑक्शन की मेज़ तक पहुंचने से पहले ही DC की पारखी नज़रों ने उनकी प्रतिभा को पहचान लिया था।
DC के पहले मुक़ाबले के बाद हेड कोच जोनाथन बैटी ने उनकी तारीफ़ में कहा, "वे हमारे कुछ ट्रायल कैंप्स का हिस्सा रही थीं और घरेलू सत्र में भी उनका प्रदर्शन बेहतरीन था। नेट प्रैक्टिस के दौरान उन्होंने हमें काफ़ी प्रभावित किया। उन्होंने अलग-अलग परिस्थितियों में कमाल की गेंदबाज़ी की है। अपने डेब्यू मैच में ही 26 रन देकर 2 विकेट जैसे शानदार आंकड़ों के साथ आगाज़ करना, उनके WPL करियर के लिए एक सुखद शुरुआत है।"
GG के विरुद्ध मुक़ाबले में भले ही DC को हार झेलनी पड़ी, लेकिन कप्तान जेमिमाह रॉड्रिग्स अपनी युवा गेंदबाज़ नंदनी की तारीफ़ करने से पीछे नहीं हटीं। उन्होंने कहा, "वह हमारी सबसे पसंदीदा खिलाड़ियों में से एक हैं। एक कप्तान के लिए उनके जैसा खिलाड़ी होना वाक़ई ख़ुशी की बात है। वे मैदान पर जो कुछ भी करती हैं, उसमें गज़ब की सटीकता होती है। वे हर चुनौती को स्वीकार करने के लिए हमेशा तैयार रहती हैं और उनके इस प्रदर्शन से मुझे बेहद सुकून मिला है।"
मैदान पर हर गेंद के साथ कप्तान का मार्गदर्शन तो मिल ही रहा है, साथ ही नंदनी अपनी टीम की दिग्गज खिलाड़ियों से भी लगातार सीख रही हैं। इसमें साउथ अफ़्रीका की स्टार मारीज़ान काप भी शामिल हैं। नंदनी ने बताया, "काप मुझे पिच के बर्ताव के बारे में अहम जानकारी देती रहती हैं। यहां तक कि मेरे पहले मैच के दौरान उन्होंने शेफ़ाली के ज़रिए मुझे संदेश भिजवाया था कि मुझे किस तरह की गेंदबाज़ी करनी चाहिए।"
इस सीज़न DC के कोचिंग स्टाफ़ से जुड़े पूर्व भारतीय तेज़ गेंदबाज़ वेंकटेश प्रसाद भी उनके खेल को निखारने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। नंदनी के मुताबिक़, "मेरी गेंदबाज़ी की लाइन से लेकर फ़ील्डिंग तक, वे मुझे खेल की हर बारीकी समझाते हैं। मुक़ाबले से पहले और उसके बाद हम खेल पर विस्तार से चर्चा करते हैं। फ़ील्ड सेट करना हो या सही गेंद का चुनाव, वे हर मोड़ पर मेरी मदद कर रहे हैं।"
क्रिकेट के मैदान तक उनका पहुंचना महज़ एक इत्तेफ़ाक़ था, जिसकी शुरुआत अपने भाई को रोज़ाना प्रैक्टिस के लिए जाते देखने से हुई।
पुरानी यादों को साझा करते हुए उन्होंने बताया, "भाई को मैदान पर पसीना बहाते देख मेरे अंदर भी खेलने का शौक़ जागा। जब मैं पहली बार अकादमी गई, तब मेरी उम्र महज़ आठ साल थी। कम उम्र होने के कारण वहां किसी ने मुझ पर ख़ास तवज्जो नहीं दी। मुझे गेंदबाज़ी करने का मौक़ा ही नहीं मिलता था, जिससे निराश होकर मैंने क्रिकेट छोड़ दिया। लेकिन क़रीब छह महीने बाद मैंने एक बार फिर पूरे जोश के साथ वापसी की और उसके बाद मेरा सफ़र कभी नहीं थमा।"
तेज़ गेंदबाज़ बनने की इच्छा उसी अकेडमी की एक सीनियर खिलाड़ी को देखकर पैदा हुई। नंदनी बताती हैं, "उस वक़्त अकेडमी में एक दीदी थीं, जो बहुत तेज़ी से दौड़कर गेंदबाज़ी करती थीं। उस उम्र में मुझे खेल की ज़्यादा समझ नहीं थी, बस मैंने कोच सर से कह दिया कि मुझे भी उन्हीं की तरह तेज़ गेंदबाज़ बनना है। उसके बाद सब कुछ कुदरती तौर पर आगे बढ़ता चला गया।"
उस यादगार रात को हैट्रिक और पर्पल कैप के अलावा एक और चीज़ ने बेहद ख़ास बना दिया। वह पल था भारतीय टीम की स्टार स्मृति मंधाना की तरफ़ से इंस्टाग्राम स्टोरी पर आया बधाई संदेश।
नंदनी ने अपनी खुशी ज़ाहिर करते हुए कहा, "ऐसा लग रहा है जैसे मेरा कोई सपना सच हो गया हो। लोग मुझे इंस्टाग्राम पर सर्च कर रहे हैं और देख रहे हैं, यह मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। मैं इस एहसास को शब्दों में बयान नहीं कर सकती। इस वक़्त मेरा सिर गर्व से ऊंचा है।"
उनसे प्रेरणा लेने वाले उभरते हुए तेज़ गेंदबाज़ों के लिए उनका पैग़ाम बिल्कुल साफ़ है। उन्होंने कहा, "मैं बस यही कहूंगी कि कभी भी हिम्मत मत हारिए। ज़िंदगी में चाहे जो हो जाए, पीछे मत हटिए। ऐसा दौर ज़रूर आएगा जब सब कुछ आपके ख़िलाफ़ होगा। कभी ऐसा भी वक़्त आएगा जब आपका मन गेंदबाज़ी छोड़ने का करेगा या आप चोटिल हो जाएंगे। लेकिन आपको उन मुश्किलों से लड़कर वापसी करनी होगी। बस हार मत मानिए।"
