दुबे और देसाई के पास विदर्भ के लिए इतिहास रचने का मौक़ा

हर्ष दुबे और विदर्भ के पास इतिहास रचने का एक बड़ा मौक़ा है © PTI

बड़ी तस्वीर: कैसे विदर्भ और सौराष्ट्र बने इस सीज़न के नए पावरहाउस?

घरेलू क्रिकेट के नक्शे पर एक दशक पहले तक जिन दो टीमों को 'अंडरडॉग' माना जाता था, आज वे भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी ताक़त बनकर उभरी हैं। विदर्भ और सौराष्ट्र का सफ़र महज़ एक इत्तेफ़ाक़ नहीं, बल्कि निरंतरता और मज़बूत इरादों की मिसाल है।

तकरीबन दस साल पीछे मुड़कर देखें, तो ये दोनों ही टीमें अपने-अपने ज़ोन में संघर्ष करती नज़र आती थीं और इन्हें टूर्नामेंट की सबसे कमज़ोर कड़ियों में गिना जाता था। लेकिन वक़्त का पहिया ऐसा घूमा कि आज ये टीमें न सिर्फ़ बड़ी टीमों को कड़ी टक्कर दे रही हैं, बल्कि हर साल ख़िताब की सबसे प्रबल दावेदार बनकर मैदान पर उतरती हैं।

विदर्भ की टीम पिछले सीज़न की विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी की उपविजेता रही थी, जो उनकी बढ़ती ताक़त का साफ़ संकेत है। उन्होंने एक ऐसा मज़बूत ढांचा तैयार कर लिया है, जहां युवा खिलाड़ियों को तराशने का काम देश के अन्य राज्यों के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा तेज़ी से हो रहा है। इसी बेहतरीन सिस्टम का नतीजा है कि टीम को फ़ैज़ फ़ज़ल, अक्षय वाखरे, उमेश यादव और गणेश सतीश जैसे धुरंधरों की कमी महसूस नहीं हुई और उनके विकल्पों ने इन अनुभवी खिलाड़ियों की जगह को बख़ूबी भर दिया है।

पिछले साल कप्तान करुण नायर और बल्लेबाज़ दानिश मालेवर ने टीम की सफलता में अहम भूमिका निभाई थी। अब जबकि नायर वापस कर्नाटक जा चुके हैं और मालेवार चोट के चलते बाहर हैं, विदर्भ ने एक बार फिर नए नायक तलाश लिए हैं। इन्हीं में से एक उभरता सितारा अमन मोखाडे हैं, जो मौजूदा विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ बने हुए हैं। वहीं, टीम की बागडोर अब युवा हर्ष दुबे के हाथों में है। हर्ष न सिर्फ़ कप्तानी की ज़िम्मेदारी को सहजता से निभा रहे हैं, बल्कि अपनी ऑलराउंड क़ाबलियत से भारतीय टेस्ट टीम में रवींद्र जाडेजा के एक मज़बूत विकल्प के तौर पर भी उभर रहे हैं।

सौराष्ट्र की टीम एक बार फिर विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी 2026 के ख़िताबी मुक़ाबले में अपनी जगह बना चुकी है। टीम का फ़ाइनल तक का यह सफ़र इसलिए भी ख़ास है क्योंकि वे फ़िलहाल एक बड़े बदलाव के दौर का सामना कर रहे हैं। शेल्डन जैक्सन और चेतेश्वर पुजारा जैसे दिग्गजों के संन्यास और जयदेव उनादकट द्वारा वर्कलोड मैनेजमेंट के चलते टीम की कमान अब युवा हार्विक देसाई के पास है। हार्विक ने न सिर्फ़ बल्ले से बल्कि अपनी नेतृत्व क्षमता से भी इस पूरे टूर्नामेंट में गहरी छाप छोड़ी है।

सौराष्ट्र की इस क़ामयाबी का राज़ किसी एक या दो सितारे के बजाय पूरी टीम का एकजुट होकर खेलना रहा है। इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि टीम के छह बल्लेबाज़ों ने इस सीज़न में 250 से अधिक रनों का योगदान दिया है। इनमें विश्वराज जाडेजा और कप्तान देसाई तो 500 रनों का आंकड़ा भी पार कर चुके हैं। साथ ही चिराग जानी और प्रेरक मांकड़ जैसे बेहतरीन ऑलराउंडर्स की मौजूदगी ऊपरी क्रम के बल्लेबाज़ों को बेख़ौफ़ होकर खेलने की आज़ादी देती है। कुल मिलाकर यह फ़ाइनल ऐसी दो ताक़तों की भिड़ंत है, जो पीढ़ियों के बदलने के बाद भी अपनी चमक नहीं खोए हैं।

हालिया फ़ॉर्म

सौराष्ट्र WWWWW
विदर्भ WWWLW

दुबे और देसाई पर रहेगी नज़र

पिछले सीज़न के खिताबी मुक़ाबले में हर्ष दुबे ने मुश्किल हालात में अपनी बल्लेबाज़ी का लोहा मनवाया था। 349 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए उन्होंने महज़ 30 गेंदों पर 63 रनों की आतिशी पारी खेली और विदर्भ की उम्मीदों को अंतिम ओवरों तक ज़िंदा रखा। हालांकि उस मैच में गेंदबाज़ी के दौरान उन्हें 10 ओवर में 49 रन देने के बाद कोई सफलता नहीं मिली थी, लेकिन वह साल उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।

महज़ 23 साल के दुबे ने अपने इसी जुझारू प्रदर्शन के दम पर टीम के नेतृत्व का दावा मज़बूत किया और कप्तानी हासिल की। अब रविवार का दिन उनके लिए अपनी क़ाबलियत साबित करने का सबसे बड़ा मंच है। क्रिकेट प्रेमियों की नज़रें इस बात पर टिकी होंगी कि क्या दुबे अपनी कप्तानी में विदर्भ को उनका पहला विजय हज़ारे ख़िताब दिला पाएंगे।

हर्विक देसाई इस विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी में तीसरे सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ हैं © PTI

शुभमन गिल, पृथ्वी शॉ और अर्शदीप सिंह जैसे अपने अंडर-19 टीम के साथियों के उलट हर्विक देसाई को सुर्ख़ियों में आने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा। अंडर-19 विश्व कप की ख़िताबी जीत के आठ साल बाद, 26 साल के देसाई ने सौराष्ट्र के लिए हर फ़ॉर्मैट में रनों का अंबार लगाकर अपनी एक अलग जगह बनाई है। अब वह, जयदेव उनादकट जैसे प्रेरणादायी खिलाड़ी के बाद टीम की कमान संभाल रहे हैं और बड़ी कुशलता के साथ सौराष्ट्र की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

टीम न्यूज़: उनादकट ने आते ही असर डाला

जयदेव उनादकट विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी के शुरुआती लीग मैचों में नज़र नहीं आए थे, लेकिन टूर्नामेंट के सबसे अहम मोड़ पर उनकी टीम में वापसी हुई। उन्होंने पंजाब के ख़िलाफ़ सेमीफ़ाइनल में शिरकत की और टीम को मज़बूती दी। सौराष्ट्र के लिए फ़िलहाल टीम संयोजन में केवल एक जगह चिंता का विषय बनी हुई है। बाएं हाथ के स्पिन ऑलराउंडर पार्श्वराज राणा, जिन्हें शुक्रवार के नॉकआउट मुक़ाबले में मौक़ा मिला था, खेल के किसी भी विभाग में प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे। ऐसे में निचले क्रम में बदलाव की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

सौराष्ट्र (संभावित XI): 1 हार्विक देसाई (कप्तान/विकेटकीपर), 2 विश्वराज जाडेजा, 3 प्रेरक मांकड़, 4 समर गज्जर, 5 रुचित अहीर, 6 चिराग जानी, 7 धर्मेंद्रसिंह जाडेजा, 8 जयदेव उनादकट, 9 चेतन साकरिया, 10 अंकुर पंवर, 11 पार्श्वराज राणा।

विदर्भ के टीम संयोजन में बदलाव की संभावना कम है।

विदर्भ (संभावित): 1 अथर्व तायडे, 2 अमन मोखाडे, 3 ध्रुव शौरी, 4 आर समर्थ, 5 यश राठौड़, 6 रोहित बिंकर (विकेटकीपर), 7 हर्ष दुबे (कप्तान), 8 दर्शन नालकंडे, 9 यश कदम, 10 यश ठाकुर, 11 नचिकेत भूते

पिच और परिस्थितियां: ओस से लक्ष्य का पीछा करना आसान हो सकता है

बेंगलुरु के BCCI सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस में हुए इस सीज़न के दोनों सेमीफ़ाइनल मुक़ाबलों में लक्ष्य का पीछा करने वाली टीमों ने बाज़ी मारी है। इन मैचों के नतीजों में ओस ने एक निर्णायक भूमिका निभाई, जिसने बाद में बल्लेबाज़ी करने वाली टीम की राह आसान कर दी। हालांकि, दोपहर के वक़्त पिच से गेंदबाज़ों को भी अच्छी मदद मिलती देखी गई है। ख़िताबी भिड़ंत के लिए भले ही एक ताज़ा पिच तैयार की गई हो, लेकिन माना जा रहा है कि मैच के दौरान हालात लगभग पिछले मैचों जैसे ही रहेंगे।

आंकड़े और रोचक तथ्य: मोखाडे की नज़र बड़े रिकॉर्ड पर

  • 17 सीज़न तक फ़ाइनल में नहीं पहुंच पाने के बाद विदर्भ लगातार दूसरी बार 50 ओवर का फ़ाइनल खेल रही है। पिछले साल वह कर्नाटक से हारकर उपविजेता रही थी।

  • सौराष्ट्र ने अब तक खेले गए तीन फ़ाइनल में से दो जीते हैं। उनकी आख़िरी जीत 2022 23 में आई थी, जब उन्होंने महाराष्ट्र को हराया था।

  • विदर्भ के सलामी बल्लेबाज़ मोखाडे, एन जगदीशन के एक सीज़न में सबसे ज़्यादा रन के रिकॉर्ड से सिर्फ़ 50 रन दूर हैं। मोखाडे ने नौ पारियों में 97.62 की औसत से 781 रन बनाए हैं, जिसमें पांच शतक शामिल हैं।

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