सूर्यकुमार, किशन और दुबे - न्यूज़ीलैंड सीरीज़ में भारत को मिले मुश्किल सवालों के जवाब
2026 T20 विश्व कप से पहले भारत ने न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ खेली गई, अपनी आख़िरी T20I सीरीज़ 4-1 से जीती। यह परिणाम शायद बहुत मायने नहीं रखती, क्योंकि ज़्यादातर मैचों में न्यूज़ीलैंड अपनी पूरी ताक़त के साथ नहीं उतरा था। लेकिन भारत इस सीरीज़ में कुछ सवालों के साथ ज़रूर उतरा था। क्या उन्हें जवाब मिले ? आइए देखते हैं।
सूर्यकुमार की फ़ॉर्म में वापसी
सूर्यकुमार यादव फिर से अपने रंग में दिखने लगे हैंं और यह भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी सुख़बर है। इस सीरीज़ से पहले खेले गए 25 मैचों में उन्होंने सिर्फ़ 244 रन बनाए थे। उस दौरान उनका स्ट्राइक रेट औसत 12.84 और स्ट्राइक रेट 117.87 का रहा। साथ ही वह एक बार भी 50 स्कोर तक नहीं पहुंच पाए थे। वह लगातार कहते रहे कि उनके बल्ले से भले ही रन नहीं मिल रहे हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि वह फ़ॉर्म में नहीं हैं। लेकिन तेज़ गेंदबाज़ों की फुल लेंथ गेंदों के ख़िलाफ़ उन्हें दिक़्क़त हो रही थी। उन गेंदों के ख़िलाफ़ उनका स्ट्राइक रेट सिर्फ़ 91.25 था। उन 25 पारियों में वह 19 बार आउट हुए। इसमें से 17 बार वह पहली 11 गेंदों के भीतर ही आउट हो गए।
पांचवें T20I के बाद ब्रॉडकास्टर से बात करते हुए सूर्यकुमार ने कहा, "साउथ अफ़्रीका सीरीज़ के बाद जब मुझे ब्रेक मिला, तो मैं घर गया, किट बैग पैक किया, कमरे में रख दिया और 9-10 दिन तक कुछ भी नहीं किया। नए साल की शुरुआत के साथ मैंने फिर से अभ्यास शुरू किया। उस दौरान मैंने सोचा कि पिछले एक साल में ग़लत क्या हुआ।
"जब मैं 21, 22 और 23 में बल्लेबाज़ी कर रहा था, तो पहली पांच या 10 गेंदों में ही मेरा स्ट्राइक रेट 200 से 250 के आसपास रहता था। मैंने सोचा कि पहली पांच या सात गेंदों में थोड़ा समय लिया जाए और आंखें जमा ली जाएं। इसके बाद अगर अगली 10 या 15 गेंदें खेली जाएं, तो स्ट्राइक रेट अपने आप दोगुना हो जाएगा। मैंने काफ़ी मैच सिमुलेशन किए। उन दोस्तों के साथ अभ्यास किया, जो मुझे पिछले 10-15 साल से जानते हैं। जब मैं इस सीरीज़ में नागपुर में उतरा, तो मुझे अच्छा महसूस होने लगा। मैंने थोड़ा समय लिया और धीरे-धीरे हमने यह दूसरा सूर्या देखा।"
न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ वह सिर्फ़ एक बार 20 गेंदों के भीतर आउट हुए। तेज़ गेंदबाज़ों की फुल लेंथ गेंदों के ख़िलाफ़ उनका स्ट्राइक रेट भी बढ़कर 217.95 हो गया। उन्होंने तीन अर्धशतक लगाए, जिसमें सर्वश्रेष्ठ स्कोर 82 नाबाद रहा। साथ ही वह सीरीज़ के सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ बने। पांच मैचों में उन्होंने 242 रन बनाए, जो उनके ख़राब दौर के 25 मैचों में बनाए गए कुल रनों के लगभग बराबर थे। साथ ही उनका स्ट्राइक रेट भी 196.74 का रहा।
सैमसन का ख़राब दौर
इस सीरीज़ में संजू सैमसन फिर से उसी पोज़ीशन पर बल्लेबाज़ी कर रहे थे, जहां उन्होंने कुछ महीने पहले ही तीन शतक लगाए थे। शुभमन गिल के टीम में आने के बाद वह कुछ मैचों में मिडिल ऑर्डर में बल्लेबाज़ी करते नज़र आए। हालांकि इस सीरीज़ में सैमसन अपने सर्वश्रेष्ठ से काफ़ी दूर रहे। मिडिल ऑर्डर में छोटे से प्रयोग के बाद ओपनर के रूप में लौटे सैमसन ने सभी पांच मैच खेले। उन पारियों में उन्होंने 10, 6, 0, 24 और 6 का स्कोर बनाया। मतलब कुल जमा 46 रन और औसत 9.20 रहा।
मसला सिर्फ़ रन न बन पाने का नहीं था, बल्कि जिस तरह से वह आउट हो रहे थे, उसने ज़्यादा सवाल खड़े किए। क्रीज़ पर रहते हुए उनके बॉडी लैंग्वेज में वह आत्मविश्वास कहीं नज़र नहीं आया जिसके लिए वह जाने जाते हैं। उनका 'ट्रिगर मूवमेंट' उनके लिए जी का जंजाल बन गया है। गेंदबाज़ के हाथ से गेंद छूटते ही वह क्रीज़ में काफ़ी पीछे और कभी-कभी लेग साइड की तरफ़ ज़्यादा झुक रहे थे। यही वजह रही कि वह कई बार अपनी पोज़िशन गंवा बैठे। दो बार तो वह स्टंप्स छोड़कर खड़े हो गए और क्लीन बोल्ड हुए, जबकि एक बार फुल लेंथ गेंद को बिना सोचे-समझे शॉर्ट मिडविकेट की तरफ़ खेल बैठे। हालांकि, इतनी कमियों के बावजूद टीम इंडिया के खेमे में इसे लेकर कोई बड़ी चिंता नहीं है, और इसके पीछे कुछ ठोस वजह भी है।
किशन की एंट्री
इशान किशन ने मिले हुए मौके पर दोनों हाथों से चौका मारा। तिलक वर्मा की बदक़िस्मत चोट टीम इंडिया के लिए एक तरह से 'छिपा हुआ वरदान' साबित हुई, जिसने किशन के लिए पूरी सीरीज़ के दरवाज़े खोल दिए। हालांकि मामूली खिंचाव की वजह से वह चौथा T20I नहीं खेल सके, लेकिन बाक़ी चार मैचों में उन्होंने जो गदर मचाया, उसने विश्व कप के लिए बतौर विकेटकीपर उनकी दावेदारी को सबसे आगे लाकर खड़ा कर दिया है।
रायपुर में 32 गेंदों पर 76 रनों की पारी से उन्होंने धमाका किया, गुवाहाटी में 13 गेंदों पर 28 रन बनाकर उस लय को बरकरार रखा और फिर तिरुवनंतपुरम में संजू सैमसन के ही घरेलू मैदान पर 43 गेंदों में 103 रनों का तूफ़ान खड़ा कर उन्होंने शिखर छू लिया।
अभिषेक शर्मा के साथ किशन के ओपनिंग करने में बस एक ही तकनीकी पेंच है और वह है दोनों का बाएं हाथ का होना। इसका नतीजा यह हो सकता है कि टॉप-8 में भारत के पास छह खब्बू बल्लेबाज़ हो जाएं, क्योंकि तिलक, रिंकू सिंह, शिवम दुबे और अक्षर पटेल सभी प्लेइंग XI की रेस में बने हुए हैं। लेकिन सैमसन और किशन की मौजूदा फ़ॉर्म में इतना ज़मीन-आसमान का अंतर है कि किशन का 'बाएं हाथ का होना' उनकी राह का रोड़ा बनता नहीं दिखता।
रिंकू और दुबे ने साबित की अहमियत
रिंकू सिंह को विश्व कप स्क्वॉड में जगह तब मिली, जब चयनकर्ताओं ने शुभमन गिल के प्रयोग को फ़िलहाल रोकने का फ़ैसला किया। सितंबर के बाद से उन्होंने सिर्फ़ दो T20I खेले थे और साउथ अफ़्रीका सीरीज़ से उन्हें बाहर रखा गया था। लेकिन नागपुर में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ पहले ही मैच में उन्होंने अपनी अहमियत साबित कर दी। 16वें ओवर में भारत का छठा विकेट गिर चुका था, लेकिन रिंकू ने निचले क्रम के साथ मिलकर मुश्किल दौर संभाला और फिर आक्रामक अंदाज़ में खेलते हुए 20 गेंदों पर 44 रन बनाकर नाबाद रहे। उनकी पारी भारत को 238 के ओस से सुरक्षित स्कोर तक ले गई। फील्डिंग में वह हमेशा की तरह शानदार रहे। ग्राउंड फील्डिंग के अलावा, उन्होंने विशाखापट्टनम में चार कैच लपके और एक T20I पारी में सबसे ज़्यादा कैच लेने के अजिंक्य रहाणे के भारतीय रिकॉर्ड की बराबरी की।
दुबे अक्सर रडार से बाहर रहते हैं। लेकिन बल्ले और गेंद दोनों से उनका योगदान उन्हें टीम का अहम हिस्सा बनाता है। उन्होंने 18 गेंदों पर 36 नाबाद और 23 गेंदों पर 65 रन की पारियों से अपनी मारक क्षमता दिखाई। सीरीज़ में उनका स्ट्राइक रेट 248.93 रहा, जो अभिषेक के 249.31 के बाद दूसरा सर्वश्रेष्ठ था, और गेंद प्रति सिक्सर अनुपात 3.9 के साथ सबसे बेहतर रहा। गेंदबाज़ी में उन्होंने पहले T20I में तीन ओवर में 28 रन देकर तीन विकेट लिए। दूसरे T20I में उन्होंने एक ओवर फेंका और सात रन देकर एक विकेट लिया। भारत नंबर आठ तक बल्लेबाज़ी चाहता है, ऐसे में उनकी सीम गेंदबाज़ी विश्व कप में अहम भूमिका निभा सकती है।
गेंदबाज़ी संयोजन
एशिया कप में भारत लगातार तीन स्पिनरों के साथ खेल रहा था। लेकिन सूर्यकुमार ने साफ़ किया कि विश्व कप में वे दो स्पिनरों के साथ उतरेंगे। दरअसल, उन्होंने यह लगभग बता दिया कि भारतीय टीम किस तरह के गेंदबाज़ी अटैक के साथ मैदान पर उतरेगी।
उन्होंने कहा, "एशिया कप में मैदान के आयाम बिल्कुल अलग थे। मैदान बड़ा था और पिचें थोड़ी धीमी थीं। इसलिए हमें एक अतिरिक्त स्पिनर की ज़रूरत थी। लेकिन भारत में मुझे लगता है कि विकेट काफ़ी अच्छे होंगे। ऐसे में दो तेज़ गेंदबाज़ और दो स्पिनर का संयोजन सही रहेगा।
"हाई रिस्क हाई रिवॉर्ड गेम को देखते हुए हमें नंबर आठ पर एक अतिरिक्त बल्लेबाज़ की ज़रूरत होगी। इसलिए जसप्रीत बुमराह, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह और अक्षर पटेल का अपने पूरे ओवर डालना हमारे लिए बड़ा बूस्ट है। इसके अलावा हार्दिक और शिवम दुबे दो दो ओवर डाल सकते हैं। कुछ दिनों में अभिषेक शर्मा भी। हमारे पास गेंदबाज़ी के कई विकल्प हैं।"
इसका मतलब यह हुआ कि हर्षित राणा और कुलदीप यादव को तभी मौक़ा मिलेगा, जब भारत अपने किसी पहले पसंद के खिलाड़ी को आराम देगा या अपनी प्लान ए से हटेगा।
