प्रतिदिन पांच हज़ार गेंदें और कोच का ख़ुद से किया गया वादा: अभिज्ञान कुंडु की कहानी
अभिज्ञान कुंडु अपने बचपन में बेहद ऐक्टिव बच्चे थे। वह दिन भर नवी मुंबई के वाशी में स्थित सोसायटी परिसर में दौड़ते-भागते और खेलते रहते थे। उनके शिक्षकों ने उनके माता-पिता को कुंडु की इस ऊर्जा को खेल में लगाने की सलाह दी और इसके बाद उनका दाखिला चेतन जाधव क्रिकेट एकेडमी में हो गया।
दो दशक पहले जब इस एकेडमी का संचालन करने वाले चेतन जाधव ने कोचिंग में क़दम रखा था, तब से उनका एक ही लक्ष्य था कि वह एक भारत के लिए खेलने वाला खिलाड़ी तैयार करें। नवी मुंबई स्थिति उनकी एकेडमी में कुछ लड़के थे, लेकिन कुछ ही महीनों या वर्षों में अधिकतर छात्र मेडिसिन या इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए क्रिकेट छोड़ देते थे।
जाधव ने ESPNcricinfo से कहा, "नवी मुंबई में एक समय मेरी एकेडमी में ही 44 इंजीनियर और पांच डॉक्टर हुआ करते थे। मैं चाहता था कि कोई मेरी एकेडमी से जुड़े और क्रिकेट खेले।"
इन्हीं डॉक्टरों में से एक सौरभ पाटिल ने जाधव की इच्छा को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई, जब उन्होंने कुंडु के पिता अभिषेक को जाधव के एकेडमी में उनके बेटे को दाखिला कराने की सलाह दी।
जाधव कहते हैं, "मैं बच्चों की देखभाल करते करते ऊब गया था। जब लोग अपनी नौकरी पर जाते तो अपने बच्चो को मेरी एकेडमी में छोड़ जाते और शाम को लौटते समय उन्हें वापस ले जाते। उन्हें मेरी एकेडमी में अनुशासन के बारे में पता था और मैंने बच्चों को क्रिकेट के गुर भी सिखाए। लेकिन हर किसी के माता-पिता क्रिकेट में उतनी दिलचस्पी नहीं रखते थे।"
इसके चलते जाधव ने एकेडमी में किसी को दाखिला देने से पहले बच्चे और उनके माता-पिता का इंटरव्यू करना शुरू किया। कुंडु के दाखिले के लिए जब उनके पिता आए, तो उनका जवाब अन्य लोगों से अलग नहीं था। उन्होंने कहा, "हम दिन भर के लिए काम पर जाते हैं, इसलिए हम चाहते हैं कि कुंडु आपके मार्गदर्शन में रहे।"
जाधव ने सीधा सवाल किया, "क्या आप उन्हें क्रिकेटर बनाना चाहते हैं?" उन्हें वैसा ही जवाब मिला जैसा वो चाहते थे, "हम दखल नहीं देंगे, आप इसे जैसा बनाना चाहते हैं, वैसा बनाएं।"
अभिषेक बताते हैं, "तीन वर्ष बाद जब अभिज्ञान आठ वर्ष के थे, तब चेतन जाधव से हमें फ़ीडबैक मिला कि 'अगर आप अभिज्ञान को मेरे पास फ़ुल टाइम कोचिंग के लिए भेजते हैं तो हम उनके भीतर से और भी कुछ बेहतर निकाल सकते हैं।' हम सोच में पड़ गए। चेतन ने हमें यह भी कहा कि अगर उसे एक पेशेवर क्रिकेटर बनना है तो उसे कुछ अलग करना होगा। 'आप सिर्फ़ 2-3 घंटे की कोचिंग से बहुत अधिक की उम्मीद नहीं कर सकते। अगर वह ज़्यादा देर मेरे साथ रहेगा तो हम उसके भीतर से और बेहतर निकाल सकते हैं'। उनकी इन बातों से हमें काफ़ी आत्मविश्वास मिला और हमने इसी योजना के साथ आगे बढ़ने का फ़ैसला किया।"
54 वर्षीय जाधव ख़ुद भी एक पेशेवर क्रिकेटर रहे हैं और उन्होंने मुंबई के डिविज़न ए में क्लब क्रिकेट भी खेला था। वह दो-तीन वर्ष पहले तक टाइम शील्ड में भी खेले थे। बड़े होते समय उनके कोच रमाकांत आचरेकर थे, जो सचिन तेंदुलकर के भी कोच थे और उन्होंने अमोल मजूमदार, समीर दिघे, प्रवीण आमरे और विनोद कांबली जैसे खिलाड़ियों को आगे बढ़ते देखा था। उन्होंने क़रीब से यह देखा था कि आचरेकर की एकेडमी में खिलाड़ियों को कैसे चिन्हित किया जाता है और वे शुरू में ही उन खिलाड़ियों पर काम करना शुरू कर देते हैं। जाधव ने भी यही रास्ता अपनाया।
जाधव ने एकेडमी में आचरेकर को कुछ सहायक कोचों को यह कहते सुना था कि आप एक सफल कोच तभी हैं, जब आप कम से कम एक भारतीय खिलाड़ी तैयार करते हैं। यह जाधव का लक्ष्य बन गया। वह शुरू से ही कुंडु को प्रतिदिन पांच हज़ार गेंदें डाला करते थे। यहां तक कि आज भी जब दोनों साथ में अभ्यास करते हैं जैसा कि उन्होंने अंडर-19 विश्व कप से पहले भी किया, कुंडु आज भी 1000-1500 गेंदों से कम पर नहीं रुकते।
जाधव ने कहा, "मैंने कुंडु पर काफ़ी मेहनत की है। उनकी बिल्डिंग के नीचे भी उनसे नेट प्रैक्टिस करवाई। हम पहले सुबह साढ़े नौ से शाम के छह से सात बजे तक हमारे एकेडमी में अभ्यास करते थे और फिर शाम से राज 11 बजे तक उसकी बिल्डिंग के नीचे अभ्यास करते थे। पीठ और कलाई में दर्द होने के बावजूद उन्होंने अभ्यास नहीं छोड़ा। दरअसल टाइफ़ाइड से जूझते हुए भी उन्होंने दो दोहरे शतक लगाए।"
जाधव कुंडु के क्लब क्रिकेट के हर मैच का स्कोरकार्ड रखे हैं और बताते हैं कि कुंडु ने अब तक 125 शतक बनाए हैं। इनमें 15 दोहरे शतक, दो तिहरे शतक और दो 400 से अधिक के स्कोर शामिल हैं। जाधव के अनुसार, कुंडु ने अंडर-19 भारतीय टीम के लिए खेलने से पहले 722 क्लब मैच भी खेले थे।
14 साल की उम्र में, कुंडु ने विजय मर्चेंट ट्रॉफ़ी 2022-23 में मुंबई अंडर-16 टीम के लिए पदार्पण किया और 86.25 की औसत और 121.90 के स्ट्राइक रेट से 690 रन बनाकर टीम के सर्वोच्च रन स्कोरर रहे, जिसमें एक दोहरा शतक भी शामिल था। अगले सीज़न में, उन्होंने वीनू मांकड़ ट्रॉफ़ी में मुंबई अंडर-19 टीम की ख़िताबी जीत वाले सीज़न में पदार्पण किया और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। दिसंबर 2024 में उन्हें ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 के ख़िलाफ़ सीरीज़ के लिए पहली बार भारतीय अंडर-19 टीम में शामिल किया गया और उन्होंने अपने दूसरे ही मैच में अर्धशतक बनाया।
जाधव ने कहा, "जब मैंने कुंडु के भारत अंडर-19 टीम में चयनित होने की ख़बर सुनी तो मुझे अधिक कुछ महसूस नहीं हुआ। फिर उसने मुझे भारतीय टीम की जर्सी में अपनी एक तस्वीर भेजी, जिसके बाद मैं पुडुचेरी में वह सीरीज़ देखने गया। जब मैंने वास्तव में कुंडु को जर्सी में देखा और उनके सीने पर लगे लोगो (BCCI का लोगो) देखा तो मैं ख़ुद को रोक नहीं पाया। मेरे आंसू बह निकले। यह मेरे लिए सपने के सच होने जैसा था।"
अंडर-19 विश्व कप से पहले कुंडु ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और साउथ अफ़्रीका के दौरे पर गए थे और उन्होंने अहम योगदान दिए थे। हालांकि उनके टीम के साथियों वैभव सूर्यवंशी और आयुष म्हात्रे ने अधिक सुर्खियां बटोरीं। लेकिन इस बीच कुंडु ने ब्रिस्बेन में ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 के ख़िलाफ़ 74 गेंदों पर 87 रनों की पारी खेली। विश्व कप की शुरुआत में उन्होंने बांग्लादेश अंडर-19 के ख़िलाफ़ 112 गेंदों पर 80 रनों की पारी खेली, जब भारत अंडर-19 टीम ने 10 ओवर में तीन विकेट गंवा दिए थे।
कुंडु ने पिछले साल दिसंबर में अंडर-19 एशिया कप में मलेशिया के ख़िलाफ़ 209 रनों की नाबाद पारी भी खेली, लेकिन वह मैच आधिकारिक तौर पर यूथ वनडे का हिस्सा नहीं था। वह इस समय अंडर 19 विश्व कप में भारत के लिए दूसरे सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज़ हैं।
कुंडु का अंडर-19 विश्व कप के लिए चयन अभिषेक के लिए इस बात की पुष्टि थी कि उनका बेटा अपने लक्ष्य की ओर सही राह पर अग्रसर है। काम में व्यस्त रहने के बावजूद अभिषेक को अपने हाउसिंग सोसाइटी के सदस्यों से मैचों की नियमित जानकारी मिलती रहती है, जिनमें से अधिकांश क्रिकेट के शौकीन हैं। आख़िरकार ऊर्जा से भरपूर एक प्रतिभा उनके और पूरे देश के सपने को साकार कर रही है।
एस सुदर्शनन ESPNcricinfo में सब एडिटर हैं।