आयुष म्हात्रे: मुंबई की तपिश और परिवार की तपस्या से निकला एक प्रतिभाशाली क्रिकेटर
आयुष म्हात्रे मुश्किल से ढाई साल के थे, जब उन्होंने पहली बार प्लास्टिक की बैट पकड़ी थी। उनके पिता योगेश म्हात्रे, विरार में अपने घर के बाहर उन पर प्लास्टिक की गेंद फेंक रहे रहे थे। आयुष ने पुल शॉट इतना साफ़ मिडिल किया कि गेंद उनके घर के ऊपर से निकलकर पेड़ों के उस पार चली गई और लगभग दूसरे के घर में जाकर गिरने वाली थी।
उनके पिता, चाचा और दादा यह देखकर आश्चर्यचकित रह गए। योगेश उस पल को आज भी याद करते हैं।
योगेश को अब इस बात पर हैरानी नहीं होती कि उनका बेटा कितनी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। आयुष ने मुंबई के प्रतिस्पर्धी आयु-वर्ग क्रिकेट में दबदबा बनाया और वह अब सीनियर स्तर पर अपने राज्य का तीनों प्रारूपों में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उन्हें चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के साथ 17 साल की उम्र में IPL कॉन्ट्रैक्ट मिला और अब वह 2026 अंडर-19 विश्व कप में भारत का नेतृत्व करने जा रहे हैं, जो 15 जनवरी से ज़िम्बाब्वे और नामीबिया में शुरू हो रहा है।
बचपन से ही क्रिकेट, आयुष की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया था। वह समुद्र के किनारे बीच पर जाते तो गेंद साथ ले जाते थे। रिश्तेदारों के घरों में कोई भी गोल चीज़ प्याज या आलू भी उन्हें घंटों तक व्यस्त रखती थी। जब 2012 में आयुष पांच साल के हुए तो योगेश ने उन्हें विरार की एक लोकल एकेडमी में दाखिला करवा दिया और उन्हें जल्द ही तारीफ़ें मिलने लगीं।
"ये लड़का बड़ा होकर अच्छा क्रिकेटर बनेगा"।
"100% सोना है"।
"घर जा के उसकी नज़र उतारो"।
यह समझते हुए कि आयुष को अब लोकल लेवल से ऊपर का एक्सपोज़र चाहिए, योगेश ने साउथ मुंबई जाने की सोची, जहां वानखेड़े और ब्रेबॉर्न जैसे स्टेडियम और अनगिनत मैदान हैं। जब उन्होंने दिलीप वेंगसरकर की ELF एकेडमी में कॉल किया तो उन्हें कहा गया कि आयुष को तब लाया जाए, जब वह क़रीब आठ साल का हो जाए। लेकिन योगेश लगे रहे।
उन्होंने एक कोच से कहा, "इस बच्चे में कुछ अलग है। हालांकि हर माता-पिता को लगता है कि उनका बच्चा अगला तेंदुलकर बनेगा, लेकिन बस एक बार देख लो।"
इसके बाद कोच राज़ी हुए और ट्रायल में आयुष ने गेंदें इतनी आसानी से मिडिल कीं, जो प्रतिभाओं से भरे हुए उस शहर में भी असाधारण था।
एकेडमी या स्कूलों में एडमिशन के लिए ट्रायल देते वक़्त आयुष हर चयन चरण पार कर गए। वह अक्सर अपनी उम्र से दोगुनी उम्र के लड़कों से बेहतर खेलते और मुश्किल हालात में रन बनाते।
एक बार जब वह सिर्फ़ छह साल के थे और वेंगसरकर की एकेडमी के तहत अंडर-12 मैच खेल रहे थे। उन्होंने ओपनिंग की और आख़िरी विकेट के रूप में रन आउट हुए। टीम के 107 में से 67 रन सिर्फ़ आयुष के थे। पहली बार आयुष को वेंगसरकर के सामने ले जाया गया, जिन्होंने यह मैच देखा था। वेंगसरकर ने योगेश से कहा: "इसको एकेडमी में छोड़ो और भूल जाओ"।
लेकिन आयुष के लिए अब भी मुश्किलें बहुत थीं। विरार में 45 लोगों के संयुक्त परिवार के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी आयुष को रोज़ एकेडमी ले जाना, जो क़रीब 80 किलोमीटर दूर था। परिवार में कोई क्रिकेट को गंभीरता से नहीं देखता था और आयुष के दोनों माता-पिता नौकरी करते थे। इसमें आयुष के रिटायर्ड नाना आगे आए और आयुष के साथ रोज़ भीड़भाड़ वाली विरार-चर्चगेट लोकल ट्रेन में सफ़र करने लगे।
क़रीब दस साल तक आयुष सुबह 5 बजे उठता, स्कूल जाता, फिर नाना के साथ ट्रेन से साउथ मुंबई जाता, रात 8 बजे वापस आता और घर पर छत से लटकी गेंद के साथ 45 मिनट और अभ्यास करता। योगेश कहते हैं कि उसने कभी शिक़ायत नहीं की।
आयुष बाद में मुंबई के एक स्कूल में शिफ़्ट हो गए ताकि सफ़र आसान हो और वह ज़्यादा नोटिस हो सके। योगेश जानते थे कि मुंबई में सफल होना है तो एकदम फ़ोकस रहना होगा। उन्होंने आयुष को ये आज़ादी दी, "पढ़ाई में जितना कर सको करो, बाक़ी मैं संभाल लूंगा।" साथ ही यह ध्यान रखा कि उनके प्रदर्शन का असर माहौल पर न पड़े। दोहरा शतक हो या शून्य, दोनों को एक जैसा ट्रीट किया जाता ताकि सफलता या असफलता, दिमाग़ में न चढ़ जाए।
आयुष अभी दस साल के भी नहीं हुए थे, जब योगेश ने सोचना शुरू कर दिया था कि बेटा एक दिन मुंबई की सीनियर टीम में खेलेगा। वह रिज़वी स्कूल गए, जहां से रोहित शर्मा, अजिंक्य रहाणे और शार्दूल ठाकुर जैसे खिलाड़ी निकले हैं। वहां आयुष ने तीन दोहरे शतक बनाए और 11 साल की उम्र में अंडर-14 टीम में खेलना शुरू किया। तभी उनकी मुलाक़ात एक और अहम व्यक्ति से हुई- प्रशांत शेट्टी।
शेट्टी MiG क्रिकेट क्लब से हैं और पृथ्वी शॉ व जेमिमाह रॉड्रिग्स के भी मेंटर रहे हैं। शेट्टी ने लंबी दूरी की थकान कम करने में मदद की, जो परिवार पर भारी पड़ने लगी थी। शेट्टी कहते हैं, "जिस तरह वह गेंद को खेल रहा था, मुझे तभी लगा कि इसमें कुछ ख़ास है। उसका बैक-फ़ुट गेम तुरंत नज़र आया था।"
आयुष की तकनीक में ज़्यादा बदलाव की जरूरत नहीं थी, लेकिन शेट्टी ने उनकी बैट स्विंग पर काम किया। ख़ासकर ऑफ़-स्टंप के बाहर वाली गेंदों के लिए, क्योंकि उनका बल्ला शरीर से थोड़ा ज़्यादा दूर जा रहा था। कोरोना ने उनकी लगातार चल रही प्रगति को थोड़ी देर के लिए रोका, लेकिन क्रिकेट शुरू होते ही वह जल्द ही मुंबई अंडर-19 टीम में आ गए।
2024 आयुष की जिंदगी बदलने का साल रहा। KSCA प्री-सीज़न रेड बॉल टूर्नामेंट में सीनियर टीम के साथ खेलते हुए उन्होंने पहले मैच में 52 और दूसरे में 173 रन बनाए। इस टूर्नामेंट की चार पारियों में उनके नाम 67.75 की औसत से कुल 271 रन दर्ज हुए। दो सप्ताह बाद उन्हें अचानक से ईरानी कप का कॉल आया और एक सप्ताह बाद उन्होंने बड़ौदा के ख़िलाफ़ अपने रणजी डेब्यू में मुंबई के लिए पहली पारी में 52 रन बनाए।
अगले रणजी मैच में आयुष ने ऋतुराज गायकवाड़ की कप्तानी वाले महाराष्ट्र के ख़िलाफ़ 176 रन बनाए, जिसमें 22 चौके और चार छक्के शामिल थे। गायकवाड़ CSK के भी कप्तान हैं। इसलिए जब IPL 2025 के बीच CSK को चोटिल गायकवाड़ के रिप्लेसमेंट की जरूरत पड़ी, तो योगेश और शेट्टी को लगता है कि आयुष के नाम की सिफ़ारिश ख़ुद गायकवाड़ ने ही की।
तब तक आयुष विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी में भी डेब्यू कर चुके थे। उन्होंने 2024 का अंत 117 गेंदों पर 181 रन बनाकर किया, जिसमें 11 छक्के शामिल थे। वह इस मैच में यशस्वी जायसवाल का रिकॉर्ड तोड़ते हुए सबसे कम उम्र में 150+ रन बनाने वाले खिलाड़ी बन गए।
आयुष की आक्रामक क्षमता स्पष्ट दिख रही थी। ख़ासकर सीधे लंबे छक्के उनकी पहचान बन रहे थे। शेट्टी कहते हैं कि वह बैक ऑफ़ लेंथ गेंदों को भी लॉन्ग ऑन या सीधे मैदान के पार छह मारने की दुर्लभ क्षमता रखते हैं। इसमें कुछ हिस्सा उनके रोल मॉडल रोहित शर्मा से आता है- पुल, हुक और क्रीज़ पर स्थिरता।
"सबसे कमाल की बात ये है कि इस उम्र में ही वह इतने लंबे छक्के मार रहा है," शेट्टी कहते हैं। "अगर आप T20 देखें, तो उसने 53-55 गेंदों में शतक लगाए हैं, जो अविश्वसनीय है। 18 साल के बच्चे के लिए यह आसान नहीं है।"
CSK के प्रमुख कोच स्टीफ़न फ़्लेमिंग और बल्लेबाज़ी कोच माइकल हसी, आयुष की ट्रायल से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने आयुष मल साइन कर लिया। तब तक आयुष ने घरेलू T20 भी नहीं खेला था। IPL डेब्यू पर वानखेड़े में अपने होमक्राउड के सामने उन्होंने 15 गेंद में 32 रन बनाए। तीन मैच बाद उन्होंने RCB के ख़िलाफ़ 48 गेंद पर 94 रन ठोक दिए। इससे लगभग तय हो गया कि CSK उन्हें 2026 सीज़न के लिए रिटेन करेगा।
आयुष ख़ुशक़िस्मत भी रहे कि CSK और मुंबई के सीनियर खिलाड़ियों ने उन्हें संभाला। फ़्लेमिंग और हसी ने उन्हें स्वाभाविक खेल खेलने की सलाह दी और एमएस धोनी ने कहा कि सिर्फ प्रभावित करने के लिए कुछ मत करो। "उन्होंने, आयुष को ड्रेसिंग रूम में अकेला महसूस नहीं होने दिया," योगेश कहते हैं।
इतनी कम उम्र में इतनी ऊंचाइयों पर पहुंच रहे बेटे के साथ योगेश लगातार बात करते रहे ताकि बाहरी शोर उनके दिमाग़ तक न पहुंचे। आयुष ख़ुद अपना सोशल मीडिया नहीं संभालते, शायद ही व्हाट्सएप देखते हैं और टीनएज़र वाली सामान्य डिस्ट्रैक्शन से दूर रहते हैं।
योगेश मानते हैं कि लक्ष्य आपको थका देते हैं और अगर पूरे न हों तो निराश भी करता है। इसलिए वह रोज़ की जीतों पर ध्यान देते हैं। इसी वजह से पिछले 16 महीनों में भी आयुष पहले जैसे बने हुए हैं।
उन्हें शुरू में 2024 के इंडिया अंडर-19 संभावितों में जगह नहीं मिली थी, लेकिन 2024-25 सीज़न में उनके प्रदर्शन इतने बड़े थे कि उनके पास न सिर्फ़ चयन बल्कि कप्तानी का भी मजबूत दावा था। शेट्टी कहते हैं कि आयुष एक दृढ़, स्पष्ट और आसानी से प्रभावित न होने वाला खिलाड़ी है।
वह अंडर-19 विश्व कप में एक बहुत ही परिचित भारतीय मिसाल के रूप में प्रवेश कर रहे हैं। मुंबई की मेहनत से तराशा हुआ, परिवार के त्याग से संभला हुआ और उम्र से ज़्यादा स्थिर स्वभाव। वह छोटा बच्चा जिसने कभी प्लास्टिक की गेंद को अविश्वसनीय दूरी तक मारा था, आज एक पूरे देश की उम्मीदें अपने कंधों पर उठाने जा रहा है।
विशाल दीक्षित ESPNcricinfo में असिस्टेंट एडिटर हैं
