अफ़ग़ानिस्तान से स्कॉटलैंड: मेहनत के दम पर हासिल की गई क़िस्मत के सहारे विश्व कप खेलेंगे ज़ैनउल्लाह इहसान
"क़िस्मत वह चीज़ है, जो ख़ुद ब ख़ुद नहीं बनती उसके लिए आपको मेहनत करनी पड़ती है।"
T20 विश्व कप 2026 में स्कॉटलैंड के पहले मैच में पहले किस्मत के बारे में ज़ैनउल्लाह इहसान ने यह कहा। सफलता, मेहनत और संघर्ष के मेल से कभी-कभी ऐसी कहानियां बनती हैं, जिन्हें शब्दों की सीमाओं में बांधना बेहद मुश्किल होता है। इहसान की कहानी भी कुछ वैसी ही है।
उनका जन्म अफ़ग़ानिस्तान में हुआ है। वहां से वह पहले इंग्लैंड पहुंचते हैं और फिर स्कॉटलैंड। जहां उनका रिफ़्यूजी जीवन ऐसे मोड़ पर पहुंचता है, जिसकी कल्पना उन्होंने कभी नहीं की होगी। रिफ़्यूजी के तौर पर उनका जो भी सफर रहा, उसके बारे में वह ज़्यादा कुछ नहीं कहना चाहते लेकिन एक रिफ़्यूज़ी कैसे क्रिकेटर बनता है और फिर वह विश्व कप जैसे मंच पर स्कॉटलैंड का प्रतिनिधित्व करता है, उसके बारे में काफ़ी कुछ बताते हैं। वह सिर्फ़ 15 साल की उम्र में स्कॉटलैंड आए थे, जहां स्कॉटलैंड की 'गार्डियनशिप' संस्था ने उनकी मदद की ताकि एक अंजान देश में बिना भाषा और बिना परिवार के यह बच्चा खेल के दम पर अपनी पहचान बना सके।
अपनी पहली विश्व कप यात्रा के बारे में इहसान कहते हैं, "मैं पहले अफ़ग़ानिस्तान में टेप बॉल क्रिकेट खेलता था। इसके बाद मैं स्कॉटलैंड आ गया। स्कॉटलैंड में मैं अपने बड़े भाई के साथ एक पार्क में गया। उससे पहले मेरे बड़े भाई और उनके दोस्तों ने मुझे क्रिकेट खेलते हुए देखा था, सबने कहा कि मुझे आगे भी क्रिकेट खेलना चाहिए। इसके बाद मैं और मेरे बड़े भाई ग्लासगो के GHK क्रिकेट क्लब गए। लेकिन दुर्भाग्य से उस दिन वहां कोई नहीं था। अगले दिन वहां एक T20 मैच चल रहा था। मैं वहां गया और कोच ओवेन डॉकिन्स से कहा कि मैं क्लब ज्वाइन करना चाहता हूं। उसके बाद कोच ने कहा कि 'तुम जाओ और लड़को के साथ अभ्यास करो।' मैंने पहले बल्लेबाज़ी की तो वह उन्हें ज़्यादा पसंद नहीं आया। उसके बाद मैंने गेंदबाज़ी की तो वह उन्हें काफ़ी पसंद आई। फिर मुझे क्लब की मेंबरशिप दी गई, जिसका उन्होंने पैसा भी नहीं लिया।"
क्लब में एंट्री तो मिल चुकी थी लेकिन तब तक सीज़न लगभग आधा ख़त्म हो चुका था। सिर्फ़ चार ही मैच बचे थे। उन्हें लगा कि उस साल उन्हें क्लब की तरफ़ से कोई मैच नहीं खेलना पड़ेगा। लेकिन उनके कोच ने उनकी गेंदबाज़ी को देखते हुए उन्हें मैच के लिए चयनित कर लिया। लंबा कद, गेंद को स्विंग कराने की क्षमता, अच्छी बाउंसर और बेहतरीन विविधता। यह सारे ऐसे गुण थे, जिसके कारण इहसान ने उस सीज़न अपनी टीम की तरफ़ से खेलते हुए सिर्फ़ चार मैचों में 16 विकेट हासिल किए।
सफ़र आगे बढ़ा। टीम में उन्हें इतना प्यार मिलता है कि वह ख़ुद को अफ़ग़ान में जन्मे एक लड़के के तौर पर संबोधित ज़रूर करते हैं लेकिन कहते हैं कि अब स्कॉटलैंड ही उनका वतन है।
इहसान कहते हैं, "पहले सीज़न के बाद अगले साल मैंने 12 या 13 मैच में 28 विकेट लिया और फिर इस बार भी मैंने 27 विकेट लिया, जो सबसे ज़्यादा था। इसके बाद मेरा चयन अंडर-17 की टीम में हुआ, फिर मैंने क्लब कप खेला और हमने जीत दर्ज की। फिर मैंने अंडर 19 का ट्रायल दिया और वहां भी चयनित हो गया। वहां भी अच्छे प्रदर्शन के कारण मैंने ए टीम तक का सफ़र तय किया।"
हालांकि इस बीच इहसान के परिवार को कुछ पता नहीं होता है कि वह स्कॉटलैंड में क्या कर रहे हैं। पूछने पर बताते हैं कि मैं कॉलेज में अंग्रेज़ी पढ़ रहा हूं। अंडर 17 और अंडर 19 टीम में चयन के बारे में भी नहीं बताते। लेकिन जब उनका चयन ए टीम में होता है तो वह अपने परिवार को पूरी कहानी बताते हैं।
इहसान कहते हैं, "जब मैंने अपने परिवार को बताया कि मैं क्रिकेट खेल रहा हूं तो वह चौंक गए। अफ़ग़ानिस्तान में मैं काफ़ी ज़्यादा क्रिकेट खेलता था और डांट भी मिलती थी। उन्हें लग रहा था कि मैं यहां पढ़ाई कर रहा हूं लेकिन जब उन्हें मैंने पूरी कहानी बताई तो पहले उनका रिएक्शन थोड़ा गुस्से वाला था और फिर वह समझ गए मैं एक अच्छे स्तर पर खेल रहा हूं।"
लेकिन कठिनाई इहसान का पीछा नहीं छोड़ रही थी। जब अंडर-19 विश्व कप के लिए खिलाड़ियों का चयन और रजिस्ट्रेशन हो रहा था, तब इहसान तकनीकी रूप से स्कॉटलैंड के लिए खेलने के योग्य नहीं हुए थे। लेकिन इस कठिनाई ने उन्हें निराश नहीं किया। और आगे चल कर उन्हें स्कॉटलैंड की सीनियर टीम के लिए खेलने की पात्रता विश्व कप से महज़ चार महीने पहले ही मिली है।
मेहनत से हासिल की गई क़िस्मत का खेल देखिए। बांग्लादेश की टीम विश्व कप से हटती है। स्कॉटलैंड को मौक़ा मिलता है और उस टीम में पहली बार इहसान को शामिल किया जाता है।
वह कहते हैं, "मैं बांग्लादेश और स्कॉटलैंड के बारे में क्या ही बोलूं। लेकिन सच कहूं तो मैंने यहां खेलने का सोचा भी नहीं था। यहां मौक़ा मिलेगा, यह भी नहीं सोचा था। मैंने क्वालीफ़ायर भी नहीं खेला था।"
"क्या मुझे मैच में खेलने का मौक़ा मिलेगा - नहीं पता। क्या मौक़ा मिला तो मैं अच्छा प्रदर्शन करूंगा - नहीं पता लेकिन क्या मैं मेहनत करना जारी रखूंगा - हां। क्योंकि क़िस्मत मेहनत करने से बनती है, क़िस्मत ख़ुदा बनाता है।"
राजन राज ESPNcricinfo हिंदी में सब एडिटर हैं