कुनाल चंदेला: मेरा काम रन बनाना है, बाक़ी ऊपर वाले की मर्ज़ी

तीनों प्रारूप में उत्तराखंड की कप्तानी कर रहे चंदेला इस सीज़न रणजी ट्रॉफ़ी में बना चुके हैं 700 से अधिक रन

Kunal Chandela इस सीज़न 700 से अधिक रन बना चुके हैं © PTI

उत्तराखंड की क्रिकेट टीम ने पहली बार रणजी ट्रॉफ़ी के सेमीफ़ाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया है और इस शानदार सफ़र के पीछे टीम के कप्तान कुनाल चंदेला की अहम भूमिका रही है। साल 2021 में दिल्ली छोड़कर उत्तराखंड का रुख़ करने वाले इस खिलाड़ी के लिए यह बदलाव एक मील का पत्थर साबित हुआ। 2017 में ही चंदेला ने दिल्ली के लिए घरेलू क्रिकेट में अपना डेब्यू कर लिया था। उनकी किस्मत अच्छी थी कि पहले सीज़न में ही उन्हें वर्तमान टीम इंडिया हेड कोच गौतम गंभीर के साथ पारी की शुरुआत करने का मौक़ा भी मिल गया। इस टीम में कुछ और बड़े खिलाड़ी भी मौज़ूद थे।

इस समय तक उत्तराखंड को BCCI मान्यता नहीं मिली थी और यहां के खिलाड़ियों को अलग़-अलग़ राज्यों से खेलना पड़ता था। दिल्ली में डेब्यू करके और वहां अपना नाम बनाने के बाद चंदेला के पास वापस अपने गृहराज्य जाने का मौक़ा आया। 2021 में उन्हें उत्तराखंड से खेलने का न्यौता मिले जिसे उन्होंने तुरंत स्वीकार किया। अब वह तीनों प्रारूप में टीम के कप्तान और भरोसेमंद बल्लेबाज़ हैं।

दिल्ली छोड़कर उत्तराखंड आने के निर्णय को याद करते हुए चंदेला ने ESPNcricinfo से कहा, "मुझे सफ़ेद गेंद की क्रिकेट खेलनी थी। ऊपर से हमारे सेक्रेटरी सर ने भी बोला कि अपने राज्य से आकर खेलो, जहां मैं बचपन से रहा हूं, तो फिर मैं आ गया।"

चंदेला की कप्तानी में टीम ने पहली बार सेमीफ़ाइनल का सफ़र तो तय कर लिया, लेकिन अब यहां से आगे जाने के लिए उन्हें कर्नाटक से पार पाना होगा। घरेलू क्रिकेट की एक ऐसी टीम जिनके पास स्टार्स की कभी कमी नहीं रही है। इस मैच के लिए भी उनके पास के एल राहुल, करुण नायर और देवदत्त पड़िक्कल जैसे बड़े खिलाड़ी होंगे। बड़े मैच में अच्छा प्रदर्शन करने का प्रेशर भी उत्तराखंड के ऊपर ही होगा। हालांकि, इसके बावजूद चंदेला और उनकी टीम का आत्मविश्वास काफ़ी बढ़ा हुआ है।

उन्होंने कहा, "फ़ीलिंग अच्छी है। कोई भी टीम सेमीफ़ाइनल खेलती है तो अच्छी है। जो भी टीम यहां तक आती है उसके लिए ये एक अचीवमेंट ही है, चाहे उत्तराखंड हो या कोई और टीम। लड़कों में जोश दिख रहा है कि अच्छा करके यहां तक आए हैं। हम दबदबा बनाते हुए यहां पहुंचे हैं। पिछले तीन मैच तो हमने काफ़ी अच्छे तरीक़े से जीता। हम विपक्षी टीमों पर ध्यान देने की बजाय अपने खेल पर ध्यान देते हैं। हमारा ध्यान इस पर होता है कि हम अपना क्या बेस्ट कर सकते हैं। विपक्षी चाहे जो भी जीत उसकी होती है जो उस दिन अच्छा खेलता है। ये सेशन का खेल है। हम पहले सेशन से शुरू करते हैं और जब तक गेम ख़त्म नहीं होता, हम यही सोचते हैं कि हम दबदबा बनाए रहें। विपक्षी टीम में चाहे जितने इंडिया प्लेयर्स हों, हमारा काम है अपना बेस्ट देना।"

सबका लक्ष्य होता है कि इंडिया खेले, IPL खेले। मेरा भी यही लक्ष्य है। मैं अपना काम करता आ रहा हूं जो मेरे हाथ में है। मैं अधिक से अधिक रन बनाने की कोशिश करता हूं। इस सीज़न 1000 रन नहीं बने, कोशिश रहेगी कि अगले सीज़न में 1000 रन से ज्यादा बनाऊं। इससे भी बढ़िया प्रदर्शन करूं और टीम को किसी भी प्रारूप का फ़ाइनल खिलाऊं। बस यही चाहता हूं मैं कि अपना रोल निभाता चलूं। मेरा रोल ये है कि मैं अपना काम करता चलूं बाक़ी किस्मत की बात है। मेरा काम है रन बनाना, बाक़ी भगवान की इच्छा।
कुणाल चंदेला

दिल्ली के उस ड्रेसिंग रूम की यादें आज भी उनके ज़ेहन में ताज़ा हैं, जहां उन्होंने गंभीर के अलावा इशांत शर्मा, शिखर धवन और नीतीश राणा जैसे खिलाड़ियों के साथ वक़्त बिताया था।

उस सुनहरे दौर का ज़िक्र करते हुए वह कहते हैं, "हमारे ड्रेसिंग रूम में चार-पांच इंडिया प्लेयर और 11 IPL प्लेयर थे। उस ड्रेसिंग रूम का हिस्सा होना ही बहुत बड़ी बात थी। ऐसे दिग्गजों के बीच रहकर कॉन्फ़िडेंस अलग ही लेवल पर होता है।" अपने डेब्यू साल में महज़ 22 साल की उम्र में उन्हें गंभीर जैसे सीनियर खिलाड़ी से जो तज़ुर्बा मिला, वह आज भी उनके काम आ रहा है। वह बताते हैं, "वो लोग आज भी देखते रहते हैं। ऑफ़ द फ़ील्ड जब भी मिलते हैं, तो पूछते हैं कि कैसा चल रहा है। उन्होंने जो एक्सपीरियंस शेयर किया, वह मुझे आज भी याद है और वह मेरी बहुत हेल्प कर रहा है।"

चंदेला को दिल्ली में अनुभवी खिलाड़ियों से काफ़ी कुछ सीखने मिला © Kunal Chandela

उत्तराखंड की टीम का यह मौजूदा मुक़ाम रातों-रात हासिल नहीं हुआ है। शुरुआत में अनुभव की कमी साफ़ झलकती थी, लेकिन अब यह टीम एक मज़बूत इकाई बन चुकी है। मयंक मिश्रा जैसे अनुभवी खिलाड़ियों और लक्ष्य रायचंदानी जैसे अंडर-19 के युवा सितारों के बेहतरीन तालमेल ने टीम को एक नई धार दी है। अभी टीम को बने एक दशक का समय भी नहीं हुआ और वे पांच बार रणजी ट्रॉफ़ी के नॉकआउट का हिस्सा बन चुके हैं। चंदेला के मुताबिक़ टीम नई है तो उसमें कमियां निकालना आसान है, लेकिन उनके हिसाब से उत्तराखंड के पास अब केवल और केवल अनुभव की कमी वाली बात ही है।

उन्होंने कहा, "जब कोई भी राज्य की नई टीम बनती है तो समय तो लगता है। खिलाड़ी सेटल हो रहे होते हैं, अनुभव की कमी होती है। धीरे धीरे खिलाड़ियों में अनुभव आया है। अगर मैं अपनी बात करूं तो जब मैं आया था तो यूनिट बहुत अच्छा था। देखा जाए तो उत्तराखंड ने सीनियर टीम पांच साल एक यूनिट खिलाई है। एक दो बदलाव ही होते थे। ऐसे में सबका एक तगड़ा बांड बन जाता है और टीम एक परिवार जैसी लगने लगती है। जैसे-जैसे थोड़े सीनियर प्लेयर्स आए और फिर उनके साथ नए लड़कों ने जो ख़ुद को तैयार किया तो उसका परिणाम दिख रहा है।

"17 साल के बच्चे, 19 साल के बच्चे खेल रहे हैं। कोई अंडर 23 खेल रहा है। और कुछ सीनियर्स हैं तो सीनियर और युवा खिलाड़ियों का जो मिश्रण तैयार हुआ है इसने टीम को काफ़ी हेल्प किया है। सब अच्छे टच में है, चाहे बात करूं मैं मयंक मिश्रा की, तो उसने जो इम्पैक्ट डाला है मैचों में वह काफ़ी अच्छा साबित हुआ है। लक्ष्य रायचंदानी अंडर 19 का प्लेयर है, जो अभी प्रदर्शन के दम पर ऊपर आया है। जब ये सब देखो तो अच्छा लगता है और टीम अपने आप विकास करती है।"

इस सीज़न में ख़ुद कप्तान का बल्ला भी जमकर बोला है। एक शानदार दोहरे शतक के साथ 700 से ज़्यादा रन बनाने के पीछे उनकी पिछले दो सालों की कड़ी मेहनत छिपी है। चंदेला ने लगातार अपनी फ़िटनेस पर काम किया है और उन्हें लगता है कि इससे ही उनके प्रदर्शन में काफ़ी बदलाव आया है। तीनों प्रारूप में टीम की कप्तानी कर रहे होने के कारण वह मानते हैं कि उनका अच्छा प्रदर्शन करना बेहद ज़रूरी है और वह इस ज़िम्मेदारी को लेते हुए आगे बढ़ रहे हैं।

उन्होंने कहा, "मैंने दो साल से फ़िटनेस, स्ट्रेंथ और माइंडसेट पर बहुत काम किया है। इस साल मैं तीनों फ़ॉर्मेट लीड कर रहा हूं, तो मैंने ख़ुद पर अधिक ज़िम्मेदारी ली है कि मैं आगे से लीड करूं। तक़नीक वाली कोई समस्या नहीं थी, केवल चीज़ें फ़िटनेस और माइंडसेट की थीं। उन्हें दुरुस्त कर लिया तो अब परिणाम सामने है।"

फ़र्स्ट-क्लास में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे चंदेला ने सैयद मुश्ताक़ अली ट्रॉफ़ी में भी ज़ोरदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने कर्नाटक के ख़िलाफ़ 49 गेंदों में 88 रन बनाने के बाद सौराष्ट्र के ख़िलाफ़ भी 54 गेंदों में 94 रन बनाए थे। भले ही उत्तराखंड को सात में से केवल दो मैचों में ही जीत मिली, लेकिन चंदेला ने सात मैचों में 50 की औसत और 150.86 की स्ट्राइक रेट से 350 रन बनाए थे। इस दमदार प्रदर्शन से पहले उन्होंने मुंबई इंडियंस और राजस्थान रॉयल्स के लिए ट्रॉयल भी दिया था। दोनों ही टीमों का ट्रायल अच्छा रहा था और उन्हें संकेत मिले थे कि नीलामी में उनके SMAT के प्रदर्शन पर गौर किया जाएगा।

नीलामी में अनसोल्ड रहने पर उन्होंने कहा, "मैंने मुंबई इंडियंस और राजस्थान रॉयल्स के लिए ट्रायल दिया था। नीलामी में अनसोल्ड रहा तो भी रॉयल्स ने मेरे ऊपर काफ़ी भरोसा दिखाया। शायद टीम की रणनीतियों के हिसाब से मैं उनके स्क्वॉड में फ़िट नहीं बैठ रहा था, लेकिन उन्होंने मुझे इग्नोर नहीं किया। उनके मैनेजमेंट की ओर से मुझे संदेश मिला था कि हम ले नहीं पाए तो इसका मतलब यह नहीं है कि हम लेना नहीं चाहते थे। उन्होंने मुझे यह भी कहा कि सीज़न के बीच में या शुरुआत से पहले भी बुलावा आ सकता है तो हमेशा तैयार रहना है।"

कुछ ही महीनों में 32 साल के होने जा रहे चंदेला आज भी IPL और भारत के लिए खेलने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। इसके साथ ही वह रणजी के इस सीज़न में 1000 रनों का आंकड़ा भी छूना चाहते हैं, जो इस सीज़न भी संभव है।

उन्होंने कहा, "सबका लक्ष्य होता है कि इंडिया खेले, IPL खेले। मेरा भी यही लक्ष्य है। मैं अपना काम करता आ रहा हूं जो मेरे हाथ में है। मैं अधिक से अधिक रन बनाने की कोशिश करता हूं। इस सीज़न 1000 रन नहीं बने, कोशिश रहेगी कि अगले सीज़न में 1000 रन से ज्यादा बनाऊं। इससे भी बढ़िया प्रदर्शन करूं और टीम को किसी भी प्रारूप का फ़ाइनल खिलाऊं। बस यही चाहता हूं मैं कि अपना रोल निभाता चलूं। मेरा रोल ये है कि मैं अपना काम करता चलूं बाक़ी किस्मत की बात है। मेरा काम है रन बनाना, बाक़ी भगवान की इच्छा।"

नीरज पाण्डेय ESPNcricinfo हिंदी में एसोसिएट सब-एडिटर हैं। @Messikafan

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