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भूमिकाओं में लचीलापन और चयन में निरंतरता, द्रविड़ का लक्ष्य

"हम अपने टीम संतुलन और संयोजन के बारे में बहुत स्पष्ट हैं। हम इसी के इर्द-गिर्द टीम की संरचना कर रहे हैं और व्यक्तिगत कार्यभार को भी संतुलित कर रहे हैं।"

भारत के बल्लेबाज़ी क्रम में लचीलापन और वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ भारतीय बल्लेबाज़ों के दृष्टिकोण में जो बदलाव देखा गया, वह कोई संयोग नहीं था। यह कुछ ऐसा है जिसके बारे में अक्सर टीम रूम और प्रशिक्षण के दौरान बात की जाती है और की गई है। इस श्रृंखला में आपने जो कुछ भी देखा, वह कोच राहुल द्रविड़ और टीम मैनेजमेंट की सोच है। वे इसी सोच और अप्रोच के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं।
बल्लेबाज़ी से अधिक, टीम प्रबंधन परिस्थितियों के प्रति अनुकूलित होकर और उसके अनुसार खेल को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है, जैसे रविवार को जब भारत को विराट कोहली और ऋषभ पंत के अनुपस्थिति में मध्य क्रम में कुछ अनुभव की आवश्यकता थी। ऐसे में यह फ़ैसला लिया गया कि ऋतुराज गायकवाड़ को सलामी बल्लेबाज़ के तौर पर इशान किशन के साथ पिच पर उतारा गया। रोहित ख़ुद नंबर चार पर बल्लेबाज़ी करने आए और श्रेयस को नंबर तीन पर बल्लेबाज़ी करवाया गया।
द्रविड़ ने कहा, "मुझे लगता है कि हमें टी20 में एक निश्चित स्तर के लचीलेपन की ज़रूरत है, जो फिर से कई खिलाड़ियों को बता दिया गया है। कई खिलाड़ियों से बातचीत हुई है। उन्हें यह बताया गया है कि टीम में उनको किसी भी भूमिका के लिए तैयार होना चाहिए। ऐसा नहीं हो सकता है कि हम विरोधी टीम के ख़िलाफ़ एक तय टेम्पलेट या रणनीति के साथ उतरें।"
" हमें कभी-कभी दाएं और बाएं संयोजन के साथ भी मैदान पर उतरना पड़ेगा। सभी आंकड़े और डेटा आपको बाएं-दाएं संयोजन का मूल्य बताते हैं। बाएं हाथ के स्पिनर हो या बाएं हाथ के बल्लेबाज़ की विशेषता के बारे में पता है। हम चाहते हैं कि हमारे खिलाड़ी अलग-अलग भूमिकाओं के लिए तैयार हों। निश्चित रूप से मध्य क्रम के एक ऐसा क्षेत्र है जिसे हम सुधारना चाहते हैं और वहां बेहतर होना चाहते हैं।"
द्रविड़ विशेष रूप से जिन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं उनमें से एक टीम का टेम्पो है। श्रृंखला में दो बार, जहां टॉस के फ़ैसले को ओस ने प्रभावित किया और भारत को पहली पारी में बल्लेबाज़ी करना पड़ा। टीम ने दो बार 186 और 184 रनों का लक्ष्य मेहमान टीम के सामने रखा और जीतने में सफल भी हुए। यह कुछ ऐसा था जो विश्व कप में भारतीय टीम के पक्ष में नहीं रहा था। विश्व कप लगभग एक ही थ्योरी पर चल रही थी कि टॉस जीतो और मैच जीतो।
द्रविड़ ने कहा, "ख़ास तौर पर पहले बल्लेबाज़ी करते हुए हम अच्छा स्कोर बनाना चाहते हैं। कभी-कभी आपको उस लचीलेपन की आवश्यकता होती है जब आप कुछ गेंदबाज़ों, संयोजनों या परिदृश्यों के अनुसार बदलाव करना चाहते हैं। ऐसी स्थिति में आपको संभावित रूप से कुछ ऐसे खिलाड़ियों की आवश्यकता होती है जो कम समय में बढ़िया बल्लेबाज़ी करें। कभी-कभी पांच या छह गेंदें, मैच बदल सकती है। ऐसा ख़ास कर के तब होता है, जब सही गेंदबाज के ख़िलाफ़ सही बल्लेबाज़ बल्लेबाज़ी कर रहा हो।"
"हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि जब तक हम विश्व कप तक पहुंचें, तब तक हमारे युवा खिलाड़ी 15-20 मैच खेल चुके हों। रोहित उन्हें गेंदबाज़ी करने का मौका दें, उन्हें अपनी पसंद की स्थिति में बल्लेबाज़ी करने का मौक़ा दें। हम इस पर भी ध्यान देने की ज़रूरत है कि अगर किसी खिलाड़ी को चोट लगती है तो उनका बैकअप कौन होगा।"
"टीम में जिस तरह का हम संतुलन और संयोजन चाहते हैं, उसके साथ हम बहुत स्पष्ट हैं। हम इसी के अनुसार अपने टीम की संरचना कर रहे हैं और व्यक्तिगत कार्यभार को भी संतुलित कर रहे हैं। रोहित, चयनकर्ताओं और प्रबंधन के बीच हर एक बात लगभग स्पष्ट है कि हम किस तरह के खिलाड़ियों की तलाश कर रहे हैं और कैसी टीम बनाना चाह रहे हैं। जो खिलाड़ी इस दौड़ में हैं - हम उन खिलाड़ियों को भी अपना दावा पेश करने का एक उचित मौक़ा देना चाहते हैं। "
इस सीरीज़ में भारतीय टीम के साथ मुख्य कोच के रूप में द्रविड़ के 100 दिन भी पूरे हो गए। इस यात्रा में टीम कई उतार-चढ़ाव और विवादों का हिस्सा रही है। भारत ने न्यूज़ीलैंड और वेस्टइंडीज़ को सभी प्रारूपों में घर पर हराया, और टेस्ट और वनडे दोनों में साउथ अफ़्रीका से हार गया। मैदान के बाहर, द्रविड़ को कोहली की कप्तानी से जुड़े विवादों से जूझना पड़ा, और अब चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे, रिद्धिमान साहा और इशांत शर्मा जैसे वरिष्ठ खिलाड़ियों के साथ टेस्ट टीम में से बाहर कर दिया गया है। हालांकि एक बात यह भी है कि अलग-अलग समय में द्रविड़ ने स्पष्ट विचार के साथ सामने आए और कठिन सवालों के जवाब दिए हैं।
द्रविड़ ने हंसते हुए कहा, "यह सीखने का अनुभव रहा है।" "मैंने बहुत कुछ सीखा है। मैं परिणामों को लेकर बहुत अधिक तनाव में नहीं हूं। मैं चाहता हूं कि टीम बेहतर हो, मैं उन्हें सही दिशा में ले जाना चाहता हूं। साउथ अफ़्रीका में वनडे सीरीज़ हमारे लिए एक वास्तविकता की जांच थी। एक कोच के रूप में सीखते रहना महत्वपूर्ण है। हर दिन, नई चीज़ें सामने आती हैं। ऐसा नहीं है कि मैं इस उम्मीद में बैठा हूं कि मैं ग़लती नहीं करूंगा। मैं ग़लती करूंगा, मैं सीखूंगा, मैं सुधार करूंगा। मुझे उम्मीद है कि टीम भी ऐसा करना चाहती है। कुल मिला कर हम आगे बढ़ते रहना चाहते हैं।"
"हमने इस श्रृंखला में कुछ सीखा है। यह सिर्फ़ जीतने के बारे में नहीं है। हम जीतकर खु़श हैं। हारने की तुलना में जीतना बेहतर है। युवा खिलाड़ियों को देखकर अच्छा लगा। वेस्टइंडीज़ टी20 क्रिकेट में एक कठिन टीम है। इस प्रारूप में उन्हें हराना इतना आसान नहीं है। उनके पास नीचले क्रम में भी कुछ ऐसे बल्लेबाज़ हैं, जो मैच आपकी झोली से निकाल कर उनकी झोली में डाल सकते हैं।"
"हमें पहले दो बार बल्लेबाज़ी करनी पड़ी, ओस वाली परिस्थितियों में दो बार गेंदबाज़ी करनी पड़ी। ये आपको बताती हैं कि हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हम चाहते हैं कि आने वाले विश्व कप में एक ऐसी टीम बन कर जाएं, जो सभी टीमों को कड़ी टक्कर दे।"

शशांक किशोर ESPNcricinfo के सीनियर सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर राजन राज ने किया है।