पड़िक्कल: अगर आप परिस्थितियों के अनुसार ख़ुद को ढाल लेते हैं, तो आप हर मैच में रन बना सकते हैं
कर्नाटक के बल्लेबाज़ देवदत्त पड़िक्कल के लिए 2025-26 का विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी (VHT) सीज़न असाधारण रहा है। चार शतक और एक 91 रन की पारी से वह ग्रुप चरण में सबसे ज़्यादा 640 रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं।
लेकिन आंकड़े पूरी कहानी नहीं बयां करते। मुंबई के ख़िलाफ़ क्वार्टर फ़ाइनल से पहले पड़िक्कल ने ESPNcricinfo से बातचीत में पर्दे के पीछे हुई मेहनत, फ़ॉर्मेट्स के बीच अपने खेल में किए गए बदलाव और दिनेश कार्तिक व एंडी फ़्लॉवर के साथ हुई बातचीत के सार को साझा किया।
तीन विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी सीज़न, जहां आपने 600 या उससे ज़्यादा रन बनाए हैं। लेकिन इस बार अलग क्या है?
जब आप अलग-अलग बल्लेबाज़ी क्रम पर बल्लेबाज़ी करते हैं, तो आप अपने खेल के बारे में बहुत कुछ सीखते हैं। मुझे लगता है कि क्रिकेट में अपने खेल को पूरी तरह समझना बहुत महत्वपूर्ण है, तभी आप ख़ुद सर्वश्रेष्ठ दे सकते हैं। अलग-अलग क्रम पर बल्लेबाज़ी करने से मुझे समझ आया कि खेल के अलग-अलग चरणों में मुझे मैदान के किन क्षेत्रों को निशाना बनाना है। इससे मैं अपनी पारी को पहले से बेहतर बिल्ड कर पा रहा हूं।
इस सीज़न जब भी आप बल्लेबाज़ी करने आए, आपके खेल में एक अलग तरह का आत्मविश्वास दिखा।
हर मैच में एक ही तरह से जाकर खेलना आसान होता है, लेकिन उससे आप हमेशा बड़ा स्कोर नहीं खड़ा कर सकते। मेरे लिए यह ज़रूरी था कि मैं परिस्थिति के अनुसार खुद को ढालूं और लगातार रन बनाता रहूं। जब आप रन बना रहे होते हैं, तो लगता है कि आसानी से एक ही तरीके से खेलकर रन बनते जाएंगे। कई बार वहीं से फ़ॉर्म गिरना शुरू होता है। अगर आप बड़े रन बनाकर लगातार अच्छा करना चाहते हैं, तो खेल को समझना और जल्दी से उसमें ढलना बेहद ज़रूरी है। अगर आपके अंदर एडजस्ट करने की क्षमता है, तो आप हर मैच में रन बना सकते हैं। मुझे लगता है इस सीज़न मैंने यही किया है।
इस निरंतरता को लाने के लिए आपने कौन सा काम किया है?
ईमानदारी से कहूं तो तकनीक में बहुत ज़्यादा बदलाव नहीं किया है। ज़्यादा काम मानसिक स्तर पर था, जैसे- रन बनाने की भूख, हर बार मैदान पर उतरते ही बड़ा स्कोर करने की चाह। अक्सर कुछ मैचों में रन बना लेने से लगता था कि बस काफ़ी है। लेकिन इस बार मेरे लिए ज़रूरी था कि मैं हर मैच में उसी भूख के साथ उतरूं। इस सोच ने मुझे हर मैच में रन बनाने में मदद की है। लगातार मैच खेलने से थकान भी रहती है, लेकिन मैंने कोशिश की कि मैदान पर उतरते वक़्त शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार रहूं।
इतने व्यस्त कार्यक्रम में थकान को कैसे संभालते हैं?
मैं ऑफ़ दिनों में अपने काम पर लगातार ध्यान देता हूं। स्ट्रेंथ सेशन, रनिंग और फ़िज़ियो के साथ रिकवरी, ये सब नियमित होता रहता है। लेकिन आख़िर में मैदान पर उतरते समय यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप सफलता को कितना चाहते हैं। अगर आप सच में चाहते हैं, तो सफलता मिलती है। मैं इसी सोच के साथ खेलता हूं।
अब तक के चार शतकों में आपका पसंदीदा कौन सा है?
मैं कहूंगा कि झारखंड के खिलाफ़ लगाया गया शतक। जब आप 413 का लक्ष्य देखते हैं तो यह काफ़ी बड़ा लगता है। दिमाग़ में लक्ष्य तो होता है, लेकिन इतना बड़ा स्कोर चेज़ करना आसान नहीं होता। उस स्थिति में टीम को संभालना और उस तरह की पारी खेलना मेरे लिए सबसे ख़ास रहा।
हमारी योजना साफ़ थी। पावरप्ले का पूरा फायदा उठाना और फिर रनरेट को आठ-नौ के आसपास बनाए रखना है। अंत में विकेट बचे हों तो आख़िरी दस ओवर में दस रन प्रति ओवर आसानी से किए जा सकते थे। यह सब सही समय पर सही गेंदबाज़ को निशाना बनाने पर निर्भर था। हम पूरी स्पष्टता के साथ उस चेज़ में उतरे थे।
आपके शानदार सीज़न की बहुत चर्चा हो रही है। न्यूज़ीलैंड वनडे टीम के ऐलान के दौरान आपके मन में क्या चल रहा था?
आख़िर में हर खिलाड़ी भारत के लिए खेलना चाहता है। टीम का चयन होता है, तो चाहत रहती है कि नाम आए। लेकिन साथ ही मुझे कर्नाटक के लिए खेलना भी बहुत पसंद है। हमारा लक्ष्य टूर्नामेंट जीतना है। मुझे लगता है फ़िलहाल शायद मेरा समय नहीं है, लेकिन मेरा समय ज़रूर आएगा।
IPL की बात करें, T20 बल्लेबाज़ के रूप में आपने क्या बदलाव किए हैं?
यह ज़्यादा इस बात पर निर्भर करता है कि विपक्ष क्या करने की कोशिश कर रहा है। उसे बेहतर तरीके से समझना सबसे ज़रूरी है। पहले मैं बिना ज़्यादा लचीलापन दिखाए अपने तरीके से खेलने पर ज़िद करता था। इस बार मैंने परिस्थितियों के मुताबिक खेलना सीखा और इससे मैं गेंदबाज़ से एक क़दम आगे रह पाया।
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु [RCB] ने इसमें कैसे मदद की?
दिनेश कार्तिक और एंडी फ़्लॉवर ने मेरी बहुत मदद की। DK आधुनिक T20 क्रिकेट को गहराई से समझते हैं। उनका अनुभव और सुझाव बहुत काम आया। एंडी फ़्लॉवर ने मुझे बहुत आत्मविश्वास और पूरी स्पष्टता दी कि मुझे कैसे खेलना है।
IPL के बीच चोट लगना कितना मुश्किल था?
यह खेल का हिस्सा है। RCB में वापस आना ही मेरे लिए ख़ुशी की बात थी। उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। मैं बस यही चाहता था कि टीम जीत जाए और RCB की पहली IPL ट्रॉफ़ी का हिस्सा बनना मेरे लिए बेहद ख़ास था।
कर्नाटक के विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी अभियान पर…
कर्नाटक क्रिकेट बदलाव के दौर से गुजर रहा है। लेकिन यहां हमेशा ऐसे खिलाड़ी रहे हैं, जो टीम के लिए खेलने का महत्व समझते हैं। अब हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम युवा खिलाड़ियों के लिए उदाहरण बनें और टीम को ट्रॉफ़ी जिताएं।
अब ख़ुद को सीनियर खिलाड़ी मानना कैसा लगता है?
सीनियर इसलिए हूं क्योंकि मैंने जल्दी शुरुआत की थी। लेकिन यह ज़िम्मेदारी मुझे पसंद है। अगर मैं किसी युवा की मदद कर सकूं तो ख़ुशी होती है।
भारतीय टेस्ट टीम के साथ जुड़ाव से क्या सीखा?
भारत के लिए किसी भी फ़ॉर्मेट में रहना ख़ास होता है। टेस्ट क्रिकेट मेरा अंतिम लक्ष्य है। टीम का हिस्सा होना शानदार था और उम्मीद है कि जब अगली बार मौक़ा मिले, हम भारत के लिए और ज़्यादा सफलता हासिल करें।
शशांक किशोर ESPNcricinfo के वरिष्ठ संवाददाता हैं
