रीढ़ पहले से ज़्यादा मज़बूत, विकेटों की लगी झड़ी: सुशांत मिश्रा की नज़र अब ट्रॉफ़ियों पर

महज़ 25 साल की उम्र में सुशांत ने पीठ की तकलीफ़ की वजह से क्रिकेट का काफ़ी वक़्त गंवाया है, लेकिन अब वह अपनी असली क़ाबलियत के साथ प्रदर्शन कर रहे हैं

Sushant Mishra ट्रेनिंग के दौरान © ICC/Getty Images

क्रिकेट के मैदान पर यह माना जाता है कि एक तेज़ गेंदबाज़ की असली परख उसकी गति से नहीं, बल्कि चोट के बाद उठ खड़े होने के जज़्बे से होती है। सुशांत मिश्रा की दास्तां भी इसी संघर्ष का आईना है। अंडर-19 विश्व कप में मिली शुरुआती ख्याति के बाद स्ट्रेस फ़्रैक्चर के कारण उन्हें लंबे वक़्त तक गुमनामी के अंधेरे में रहना पड़ा। हालांकि इस घरेलू सत्र में उन्होंने जिस अंदाज़ में वापसी की, वह क़ाबिले-तारीफ़ है। सैयद मुश्ताक़ अली ट्रॉफ़ी में झारखंड को चैंपियन बनाने में उनकी भूमिका निर्णायक रही, और विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी के 15 विकेटों ने उनकी फ़ॉर्म पर मुहर लगा दी। इसी शानदार प्रदर्शन का फल उन्हें IPL ऑक्शन में मिला, जहां राजस्थान रॉयल्स ने उन पर भरोसा जताते हुए अपनी टीम में शामिल किया।

मिश्रा पहली बार 2020 अंडर-19 विश्व कप के दौरान चर्चा में आए, जहां भारत को फ़ाइनल तक पहुंचाने में उन्होंने पांच मैचों में सात विकेट चटकाकर अहम भूमिका निभाई। उनके पास इरफ़ान पठान की याद दिलाने वाला एक सहज बाएं हाथ का ऐक्शन था, जिसमें 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार छूने की ताक़त और गेंद को दोनों तरफ़ स्विंग कराने का गज़ब का हुनर साफ़ झलकता था। उस वक़्त उनका करियर एक शानदार रफ़्तार से ऊंचाई की ओर बढ़ता हुआ महसूस हो रहा था।

उन्होंने 2021-22 रणजी ट्रॉफ़ी सीज़न में छत्तीसगढ़ के ख़िलाफ़ झारखंड के लिए फ़र्स्ट क्लास डेब्यू किया और पहली ही पारी में पांच विकेट झटके। 13 महीनों के भीतर उन्होंने सात फ़र्स्ट क्लास और पांच लिस्ट ए मैच खेले, लेकिन इसके बाद उनकी पीठ में स्ट्रेस फ़्रैक्चर हो गया। इस चोट ने उन्हें 2023 में क़रीब 10 महीनों तक प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से दूर रखा।

रिहैब के बाद उन्होंने वापसी की, लेकिन चोट फिर उभर आई और एक बार फिर उन्हें लंबे समय तक मैदान से बाहर रहना पड़ा। 2024 के IPL ऑक्शन में मिश्रा को गुजरात टाइटंस ने 2.2 करोड़ रुपये में ख़रीदा, लेकिन वह एक भी मैच नहीं खेल सके। चोट लगातार परेशान कर रही थी, और आख़िरकार मिश्रा को सर्जरी करानी पड़ी।

मिश्रा ESPNcricinfo से कहते हैं, "पिछला डेढ़ साल मेरे लिए अच्छा नहीं रहा। 2022 में अपनी पहली रणजी ट्रॉफ़ी के बाद मुझे स्ट्रेस रिएक्शन हुआ और वही समस्या 2024 तक चलती रही। मेरी रीढ़ की हड्डी के एल3 लेवल पर एक हड्डी में फ़्रैक्चर था, जो पूरी तरह ठीक नहीं हुआ था। वह मैल यूनियन था। सर्जरी के बाद उसे ठीक किया गया।"

Sushant Mishra विकेट का जश्न मनाते हुए © PTI

सर्जरी के बाद मिश्रा करीब 15 महीनों तक प्रतिस्पर्धी क्रिकेट नहीं खेल पाए और धीरे-धीरे पूरी तरह फिट होने की राह पर लौटे। अब जब वह वापसी कर चुके हैं, तो खोए हुए वक़्त की भरपाई करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, "पीठ की इस चोट ने मुझे बहुत परेशान किया है। अप्रैल 2024 से सितंबर 2025 तक मैं चोटिल रहा और बहुत सारा क्रिकेट मिस किया। अब मेरी रीढ़ सबसे बेहतर स्थिति में है। मेरी एक ही प्रेरणा थी कि मुझे वापसी करनी है और भगवान की कृपा से मैं कर पाया हूं।"

2025-26 रणजी ट्रॉफ़ी अभियान के लिए चुने जाने पर मिश्रा घबराए हुए भी थे और उत्साहित भी। नागालैंड के ख़िलाफ़ उन्होंने एक विकेट लिया। इसके एक महीने बाद ही वह झारखंड की पहली सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफ़ी खिताबी जीत के हीरो बने, जहां 11 मैचों में 22 विकेट लेकर वह टूर्नामेंट में संयुक्त रूप से सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ बने।

वह कहते हैं, "झारखंड क्रिकेट को जो पहचान मिलनी चाहिए, वह अब मिल रही है, और इससे ज़्यादा ख़ुशी की बात मेरे लिए कुछ नहीं है। लोग अक्सर झारखंड क्रिकेट को एक या दो खिलाड़ियों से जोड़कर देखते हैं। अब इस जीत के बाद पूरे राज्य को पहचान मिलेगी। हमारा क्रिकेट और मज़बूत होगा। यह आसपास के हर खिलाड़ी के लिए प्रेरणा बनेगा।"

इसी टूर्नामेंट के दौरान मिश्रा को IPL ऑक्शन में राजस्थान रॉयल्स ने 90 लाख रुपये में ख़रीदा। गुजरात टाइटंस के साथ उनका पिछला IPL सीज़न भले ही मैदान से बाहर बीता हो, लेकिन उन्होंने क़रीब से पेशेवर खिलाड़ियों को काम करते देखा और बहुत कुछ सीखा।

अपने IPL के अनुवभव के बारे में उन्होंने कहा, "IPL का अनुभव अविश्वसनीय होता है। दुनिया भर के इतने बड़े खिलाड़ियों को आप एक साथ देखते हैं। उनकी तैयारी, उनकी प्लानिंग, सब कुछ सामने होता है। मैंने वहां से बहुत कुछ सीखा। जो अनुभव मुझे वहां मिला, उसे मैं घरेलू क्रिकेट में इस्तेमाल कर रहा हूं। आप जो भी योजना बनाते हैं, अगर उसे लगातार अमल में लाते रहेंगे, तो कामयाब होंगे।"

Sushant Mishra अंडर-19 विश्व कप के दौरान © ICC/Getty Images

IPL के दौरान मिश्रा को गुजरात टाइटंस के हेड कोच आशीष नेहरा के साथ काम करने और ट्रेनिंग करने का मौक़ा भी मिला, और यह रिश्ता टूर्नामेंट ख़त्म होने के बाद भी बना रहा।

मिश्रा ने कहा, "आशीष नेहरा सर के साथ काम करना शानदार रहा। IPL के आठ-नौ महीने बाद भी वह मेरी चोट, मेरे रीहैब और प्रोग्रेस के बारे में पूछते रहते थे। हम साथ बैठकर कई मैच देखते थे। वह लगातार योजनाओं पर बात करते थे और यह सुनिश्चित करते थे कि मैं साइडलाइन पर रहते हुए भी खेल से जुड़ा रहूं।"

"वह कहते थे कि एक तेज़ गेंदबाज़ के तौर पर आपको आक्रामक रहना चाहिए। बचने के रास्ते नहीं तलाशने चाहिए। गेंदबाज़ को हर हाल में विकेट लेने की सोच रखनी चाहिए। 99 फ़ीसदी समय आक्रामक रहो। आक्रमण ही सबसे अच्छा बचाव है।"

मिश्रा खुद को एक ऐसा गेंदबाज़ मानते हैं, जो मैच से पहले कई रणनीति बनाता है और खेल की परिस्थितियों के बारे में काफ़ी कुछ सोचता है। उनके पास कई तरह की वैरिएशन हैं, लेकिन वह जानते हैं कि कब क्या इस्तेमाल करना है और कब ज़्यादा प्रयोग नहीं करना है। सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफ़ी फ़ाइनल में हरियाणा के ख़िलाफ़ इसका बेहतरीन उदाहरण देखने को मिला, जब उन्होंने अपने स्पेल की चौथी ही गेंद पर सटीक यॉर्कर से ओपनर अर्श रंगा को बोल्ड कर दिया। मध्य प्रदेश के ख़िलाफ़ एक अन्य मैच में, आख़िरी ओवर में 12 रन बचाते हुए उन्होंने अराउंड द विकेट से अपनी वैरिएशन का शानदार इस्तेमाल किया और झारखंड को एक रन से जीत दिलाई।

वह कहते हैं,"मैच से पहले वीडियो एनालिस्ट के साथ मीटिंग में मैं हर बल्लेबाज़ की ताक़त और कमज़ोरी के नोट्स बनाता हूं। मैच से पहले उन नोट्स को दो-तीन बार देखता हूं। बल्लेबाज़ के आते ही मुझे पता होता है कि कौन सी गेंद डालनी है। रन अप की शुरुआत में ही मैं साफ़ दिमाग़ रखना चाहता हूं। हर बल्लेबाज़ के लिए हमारी अलग योजना होती है, और मैं उसे अमल में लाने की कोशिश करता हूं।

"मैं पहले से तय करके गेंदबाज़ी नहीं करता। मुझे वाइड यॉर्कर डालना पसंद है। लेकिन अगर लगे कि बल्लेबाज़ इसके लिए तैयार है, तो मैं वाइड लाइन पर स्लोअर गेंद डाल देता हूं। मैं ऐसा फ़ील्ड रखता हूं, जहां से दो तरह की गेंदें डाल सकूं। प्रोफ़ेशनल क्रिकेट में सफल होना है, तो लगातार खु़द को बेहतर बनाना ज़रूरी है। स्किल्स मेरे पास हैं, लेकिन उन्हें और धार देनी है। अभ्यास में सही ढंग से अमल करूंगा, तभी मैच में भी कर पाऊंगा।"

हालांकि वह अब भी युवा हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों में उन्होंने मैदान पर जितना समय नहीं बिताया, उससे ज़्यादा बाहर रहना पड़ा। फिर भी उन्हें भरोसा है कि चोट वाली बात अब पीछे छूट चुकी है और वह बस क्रिकेट का आनंद लेना चाहते हैं और झारखंड को और जीत दिलाना चाहते हैं।

फिलहाल विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी खेल रहे मिश्रा की नज़र अब IPL पर है, जहां वह राजस्थान रॉयल्स में जोफ़्रा आर्चर, नांद्रे बर्गर और संदीप शर्मा जैसे गेंदबाज़ों के साथ खेलेंगे। झारखंड के अंतिम लीग मैच में उन्होंने त्रिपुरा के ख़िलाफ़ छह विकेट भी हासिल किए। पूरे टूर्नामेंट उन्होंने कुल 15 विकेट हासिल किए।

IPL के बारे में वह कहते हैं, "मैं इस साल मैच खेलने के लिए उत्सुक हूं। मैं इस साल खेलूंगा और राजस्थान के लिए अच्छा प्रदर्शन करूंगा। मैं IPL में अपनी यॉर्कर और अन्य गेंदों का पूरा इस्तेमाल करना चाहता हूं। यही मेरा लक्ष्य है।"

राजन राज ESPNcricinfo हिंदी में सब एडिटर हैं

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