मांधना ने नवी मुंबई में पूरा किया RCB का 'परफ़ेक्ट' सफ़र
इन दिनों नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम के बाहर का नज़ारा किसी उत्सव से कम नहीं है। सड़क किनारे सजी खेल सामग्री की दुकानों पर सबसे ज़्यादा मांग स्मृति मांधना की रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) जर्सी की है। ख़रीदारों को लुभाने के लिए दुकानदार उन दिनों भी RCB के झंडे लहराते दिखते हैं, जब टीम का मैच नहीं होता। हालांकि, पिछले कुछ समय में दुकानों पर टंगी ऋचा घोष के नाम वाली जर्सियां भी प्रशंसकों को अपनी ओर खींच रही हैं।
मैदान के भीतर भी माहौल कुछ अलग नहीं है। स्टेडियम में अक्सर 'RCB-RCB' की गूंज इतनी तेज़ होती है कि घरेलू टीम मुंबई इंडियंस का शोर भी उसके सामने फीका पड़ जाता है। WPL 2026 के नवी मुंबई लेग में बेंगलुरु को न केवल घरेलू टीम जैसा प्यार मिला, बल्कि उनका खेल भी उसी दर्जे का रहा। RCB ने यहां के हालातों का पूरा फ़ायदा उठाते हुए अपने चारों मुकाबलों में जीत का परचम लहराया। इस मैदान पर सीज़न के आखिरी मैच में दिल्ली कैपिटल्स (DC) के विरुद्ध टीम ने जिस दबदबे के साथ मैच ख़त्म किया। कुल मिला कर फै़ंस को वही मिला, जिसकी उन्हें उम्मीद थी।
RCB ने इस बार एक ऐसा संतुलित संयोजन तैयार किया है, जो डीवाई पाटिल की बल्लेबाज़ी के अनुकूल पिच पर सटीक बैठता है। T20 का दिग्गज हिटर होना एक अलग बात है, लेकिन एक इकाई के रूप में प्रदर्शन करना असली अंतर पैदा कर रहा है। पहले मैच में नडीन डी क्लर्क चमकीं, तो दूसरे में ग्रेस हैरिस ने अपना दम दिखाया। तीसरे मैच में ऋचा घोष और राधा यादव ने बाज़ी मारी, तो शनिवार की शाम पूरी तरह मांधना के नाम रही।
गेंदबाज़ी के मोर्चे पर भी डीवाई पाटिल की परिस्थितियां RCB के पक्ष में रहीं। यहां शुरुआत में गेंद को मिलने वाली मूवमेंट का गेंदबाज़ों ने बखू़बी लाभ उठाया। वैसे तो यहां ओस एक बड़ी चुनौती मानी जाती है, लेकिन इकलौते मैच में जहां RCB को स्कोर का बचाव करना था, वहां उनके गेंदबाज़ों ने शुरू में विकेट झटके और फिर गति में बदलाव का बेहतरीन इस्तेमाल कर विपक्षी बल्लेबाज़ों को बांधे रखा।
ग्रेस हैरिस ने टीम की इस कामयाबी का श्रेय टीमवर्क और परिस्थितियों के साथ तालमेल को दिया। उन्होंने कहा, "हालात हमारे लिए काफ़ी मददगार रहे। टॉस जीतना और बाद में ओस का आना हमारे पक्ष में गया, लेकिन मौकों को भुनाने के लिए आपको मैदान पर मेहनत करनी पड़ती है। यह पूरी तरह से एक सामूहिक प्रयास रहा है। अलग-अलग खिलाड़ियों ने ज़िम्मेदारी संभाली और जब भी दबाव बना, हमने रन बनाए या अहम मौकों पर विकेट निकाले।"
हैरिस ने आगे जोड़ा, "स्किल के मामले में हम बहुत अच्छी स्थिति में हैं। अब तक बल्लेबाज़ी में चार-पांच खिलाड़ी मैच विनर बनकर उभरे हैं। किसी भी टीम के लिए इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता।"
दिल्ली के ख़िलाफ़ इस मैच से पहले मांधना अपनी लय के लिए जूझती दिख रही थीं। उनकी टाइमिंग सही नहीं बैठ रही थी और अच्छी शुरुआत बड़े स्कोर में तब्दील नहीं हो पा रही थी। शनिवार को भी शुरुआत थोड़ी संभलकर हुई। पारी की दूसरी ही गेंद पर मारिज़ान काप ने उन्हें छकाया, लेकिन फिर मांधना ने गियर बदला। लूसी हैमिल्टन की गेंद पर लगाया गया पुल शॉट भले ही पूरी तरह नियंत्रण में नहीं था, लेकिन उसी ओवर में बैकवर्ड प्वाइंट की ओर खेला गया उनका क्लासिक ड्राइव पुरानी मांधना की वापसी का एलान था।
इसके बाद मांधना ने मोर्चा संभाल लिया। स्टेडियम में शोर और तेज़ हो गया क्योंकि दर्शकों को WPL इतिहास के पहले शतक की उम्मीद दिखने लगी थी। हालांकि, स्मृति महज़ चार रन से इस ऐतिहासिक आंकड़े से चूक गईं। उनके आउट होते ही पूरे स्टेडियम में सन्नाटा पसर गया और वे निराश मन से पवेलियन लौटीं।
लेकिन यह पारी सिर्फ़ फ़ॉर्म में वापसी तक सीमित नहीं थी। मांधना ने टूर्नामेंट से पहले अपनी टाइमिंग से समझौता किए बिना अधिक सिक्सर लगाने की जो जानबूझकर कोशिश करने की बात कही थी, वह यहां साफ़ दिखी। उन्होंने नंदनी शर्मा की स्लोअर बॉल को मिडविकेट के ऊपर से भेजा, तो मिन्नू मणि को लांग ऑफ़ के पार उड़ाया। मैच के बाद स्मृति ने कहा, "लक्ष्य का पीछा करना सेट करने से आसान होता है, क्योंकि यहां बल्लेबाज़ को पता नहीं होता कि सुरक्षित स्कोर क्या है। जब ग्रेस आउट हुईं, तब मुझे पता था कि किन गेंदबाज़ों को निशाना बनाना है। T20 में कभी आपकी योजना काम करती है, कभी नहीं। आज मेरा दिन था।"
इससे पहले, मैदान पर सबसे ज़्यादा तालियां लॉरेन बेल के लिए बजीं। सीज़न की अपनी पहली ही गेंद से उन्होंने कमाल की लय हासिल की है। DC के ख़िलाफ़ उनका शुरुआती स्पेल किसी रोमांचक फिल्म जैसा था। एक तेज़ आउटस्विंगर, फिर शॉर्ट बॉल, और उसके बाद लिज़ेल ली और लॉरा वुलफ़ॉर्ट को बोल्ड करने वाली दो तीखी इनस्विंगर्स। डेथ ओवर्स में भी उन्होंने ओस से गीली गेंद के बावजूद अपनी लेंथ और धीमी गेंदों पर पर नियंत्रण रखा।
हैरिस ने बेल की तारीफ में कहा, "ओस के बीच धीमी गेंदों को सही जगह डालना आसान नहीं होता। इसके लिए साहस और हुनर दोनों चाहिए। लॉरेन और नादिन डी क्लर्क ने अपनी रफ़्तार कम रखने के बावजूद लेंथ को सटीक रखा और कोई ढीली गेंद नहीं फेंकी।"
सिर्फ़ तेज़ गेंदबाज़ी ही नहीं, RCB के पास बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों का तोड़ भी मौजूद था। ऑफ़-स्पिनर श्रेयांका पाटिल, जो चोट के बाद वापसी कर रही हैं, एक बार फिर वही तेवर दिखा रही हैं जो उन्होंने 2024 में दिखाए थे। इस सीज़न में उनके अधिकांश विकेट बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों के रहे हैं।
इस मैच ने RCB की 'बेंच स्ट्रेंथ' और गहराई को भी साबित किया। नंबर तीन पर मौक़ा पाकर जॉर्जिया वॉल ने अर्धशतक जमाकर अपनी जगह पक्की करने की दावेदारी पेश की। उन्होंने मांधना का बखू़बी साथ निभाया और उनके आने से टॉप ऑर्डर अब पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत दिख रहा है।
वहीं, लेग-स्पिनर प्रेमा रावत और सायली सतघरे ने भी अपनी सटीक गेंदबाज़ी से प्रभावित किया। अब जब अरुंधति रेड्डी या पूजा वस्त्राकर वापस आएंगी, तो टीम मैनेजमेंट के सामने चयन की सुखद चुनौती होगी। RCB की नज़र अब सोमवार को वडोदरा में अपनी इस जीत की लय को बरकरार रखने पर होगी।
