'कुछ हद तक फ़ील्ड बदलने जैसा' - कैसे भारती फ़ुलमाली ने ख़ुद को दोबारा गढ़ा
जनवरी 2023 तक भी भारती फुलमाली की सुबह की दिनचर्या में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय अख़बारों को खंगालना और रेलवे, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कार्यालय, आयकर विभाग, डाक सेवाओं और अन्य सरकारी संस्थानों में स्पोर्ट्स कोटे की संभावित भर्तियों को घेरना शामिल था।
उनके पिता एक स्कूल शिक्षक हैं और परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य हैं, जो रिटायरमेंट के क़रीब थे। घरेलू क्रिकेट से होने वाली फुलमाली की मामूली आमदनी उनके बुनियादी ख़र्चों तक के लिए काफ़ी नहीं थी, परिवार की मदद तो दूर की बात थी। साफ़ शब्दों में कहें तो उनके पास कोई और विकल्प नहीं था।
वडोदरा में WPL एलिमिनेटर से पहले जहां वह गुजरात जायंट्स की तरफ़ से खेलती नज़र आएंगी ESPNcricinfo से बातचीत में कहती हैं, "मैं बिना सोचे समझे फ़ॉर्म भर देती थी। मुझे यह भी नहीं पता होता था कि महिला क्रिकेटरों के लिए कोई कोटा है या नहीं। लेकिन मैं लगातार आवेदन करती रही।"
2023 के मध्य में, उनके द्वारा भेजे गए सैकड़ों आवेदनों में से एक शॉर्टलिस्ट हुआ और आयकर विभाग ने उन्हें बेंगलुरु की एक शाखा में क्लर्क की नौकरी की पेशकश की। तब से वह वहीं काम कर रही हैं और साथ साथ क्रिकेट को भी संभाल रही हैं।
फुलमाली ने कहा, "मेरे परिवार ने, ख़ास तौर पर मेरे पापा ने मुझ पर कभी दबाव नहीं डाला। वही भावनात्मक समर्थन मेरी सबसे बड़ी ताक़त है। यह एक व्यावहारिक फ़ैसला था। मैं [2023] WPL ऑक्शन में अनसोल्ड रह गई थी। मैं बस बैठकर उम्मीद नहीं कर सकती थी।"
तीन साल पहले लिया गया वही फ़ैसला फुलमाली और उनके परिवार के लिए स्थिरता लेकर आया। इससे उस असुरक्षा से भी राहत मिली कि अगर क्रिकेट करियर नहीं चला तो क्या होगा।
2019 की शुरुआत में दो T20I खेलने के बाद वह गुमनामी में चली गई थीं। अब सात साल बाद इस महीने के अंत में ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए भारत की T20 टीम में चयन के साथ उनका करियर मानो पूरा चक्कर लगाकर वापस वहीं आ गया है।
वह कहती हैं, "मैं इसे दूसरा डेब्यू मान रही हूं।"
WPL कॉन्ट्रैक्ट तक न होने से लेकर एक फ़िनिशर बनने तक का सफ़र ही उनकी कहानी का केंद्र है।
****
भारत के लिए डेब्यू से काफ़ी पहले, 2015 के आसपास से ही फुलमाली जितेश शर्मा के साथ ट्रेनिंग करने लगी थीं। महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के अमरावती से आने वाले ये दोनों खिलाड़ी शहर के मुख्य क्रिकेट मैदान पर साथ अभ्यास करते थे और अपने अपने कैंप्स के लिए नागपुर की यात्राएं भी साथ करते थे।
तब से दोनों का सफ़र काफ़ी हद तक एक जैसा रहा है, खुद को दोबारा खोजने का।
"जब जितेश को पहली बार IPL में चुना गया था [2017 में], तो मुझे याद है उन्होंने किसी से कहा था, 'मैं भारती की तरह छक्के मारना चाहता हूं।' यह सुनकर बहुत अच्छा लगा। उन्हें देश के लिए खेलते देखना, फिर ड्रॉप होने के बाद वापसी करना, मेरे लिए बहुत बड़ी प्रेरणा बना।
"आज मुझे लगता है कि वह रिंकू सिंह जैसे खिलाड़ियों के साथ भारत के सबसे बेहतरीन फ़िनिशरों में से एक हैं। जब भी मिलते हैं, हम अक्सर इस पर बात करते हैं कि हम क्या बेहतर कर सकते हैं।"
2024 की शुरुआत में ही कहीं जाकर फुलमाली ने अपने खेल को नए सिरे से ढालना शुरू किया। वह एक स्पेशलिस्ट फ़िनिशर बनना चाहती थीं। लेकिन असल में अलग तरह की ट्रेनिंग उन्होंने पिछले साल के WPL के बाद ही शुरू की।
वह कहती हैं, "हर साल मैं कुछ नया सीखने की कोशिश करती हूं। एक बल्लेबाज़ के तौर पर मैं पूरे सीज़न के अपने प्रदर्शन का विश्लेषण करती हूं। वीडियो देखती हूं, यह समझने की कोशिश करती हूं कि कहां कमी रह गई। फिर अगले साल के लिए तैयारी करती हूं। अगर कुछ शॉट्स काम नहीं कर रहे होते, तो मैं यह समझने की कोशिश करती हूं कि क्यों। फिर ऑफ़ सीज़न में उन्हीं पहलुओं पर काम करती हूं या घरेलू क्रिकेट में उन्हें लागू करती हूं। यह एक प्रक्रिया है, जिसे मैं हर साल फ़ॉलो करती हूं।"
WPL 2025 के बाद, जहां फुलमाली की चमक सिर्फ़ झलक भर रही, जायंट्स के हेड कोच माइकल क्लिंगर से हुई बातचीत ने उन्हें एक नया नज़रिया दिया। इसी डीब्रिफ़ सेशन के दौरान उन्होंने फुलमाली से नाकामियों से ख़ुद को अलग रखने की ज़रूरत पर बात की।
संदेश साफ़ था: "आप कभी भी अपनी टीम की सबसे ज़्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाज़ नहीं हो सकतीं। लेकिन अगर आप कोशिश करें, तो अपनी उस क्षमता से अकेले दम पर कुछ मैच जिता सकती हैं।"
फुलमाली कहती हैं, "तो मैंने उसी रोल पर फ़ोकस किया। मैंने घरेलू क्रिकेट में भी वैसे ही हालात में बल्लेबाज़ी करने की कोशिश की। यह मानसिकता विकसित करने पर काम किया कि अगर मुझे सिर्फ़ पांच गेंदें भी मिलें, तो भी मैं असर डाल सकूं। और इसके लिए मुझे अपना स्ट्राइक रेट बढ़ाने के लिए जो करना था, उस पर मैंने काम किया।"
पिछले साल के WPL के तुरंत बाद फुलमाली ने अपनी दिनचर्या बदल दी। नेट सेशन बाहर हो गए और उनकी जगह सेंटर विकेट सिमुलेशन्स और रेंज हिटिंग ड्रिल्स ने ले ली। यह बदलाव उन्होंने अपने निजी कोच संदीप गवांडे की शुरुआती आशंकाओं के बावजूद किया, जो अमरावती में उनके साथ काम करते हैं।
फुलमाली कहती हैं, "यह कुछ हद तक फ़ील्ड बदलने जैसा था। लेकिन आप महिला क्रिकेट को देखिए। आज दुनिया भर में कितने फ़िनिशर्स की एमएस धोनी जैसे बात होती है?। मैं वही मुश्किल रोल निभाना चाहती थी।"
फुलमाली का भरोसा गवांडे के लिए काफ़ी था और वह भी इस बदलाव के साथ जुड़ गए।
वह समझाती हैं, "मुझे नेट्स में लगातार हिट करने के बजाय सेंटर विकेट पर बल्लेबाज़ी करना ज़्यादा पसंद है, क्योंकि इससे बाउंड्री और फ़ील्ड का सही अहसास मिलता है। सब कुछ ज़्यादा साफ़ हो जाता है। मुझे एहसास हुआ कि सिर्फ़ नेट्स में बल्लेबाज़ी करने से ज़्यादा मदद नहीं मिल रही थी, इसलिए मैंने अपनी प्रक्रिया बदल दी।"
"सेंटर विकेट पर बल्लेबाज़ी करने से यह समझ आता है कि कौन से पॉकेट्स को टार्गेट किया जा सकता है और वहां कैसे हिट करना है। मेरे कोच ने लॉन्ग हिटिंग की प्रैक्टिस के लिए टेनिस बॉल इस्तेमाल करने की सलाह दी। वह हल्की होती है, तो अगर मैं टेनिस बॉल से 50 से 60 मीटर मार पा रही हूं, तो लेदर बॉल ज़रूर उससे आगे जाएगी। हर सेशन में मैं इस ड्रिल के तहत करीब 200 से 250 गेंदें हिट करती थी और इससे मुझे बहुत फ़ायदा हुआ।"
इन रेंज हिटिंग सेशन्स ने WPL के शुरुआती हिस्से में बड़ी भूमिका निभाई। अपने पहले मैच में फुलमाली ने यूपी वॉरियर्ज़ के खिलाफ़ सात गेंदों पर नाबाद 14 रन बनाए। फिर मुंबई इंडियंस के खिलाफ़ 15 गेंदों पर नाबाद 36 रन जड़े और तीन दिन बाद RCB के खिलाफ़ 20 गेंदों पर 39 रन की पारी खेली।
उनके शॉट्स के इस्तेमाल में यह भरोसा सिर्फ़ मैचों में ही नहीं, बल्कि ट्रेनिंग के दौरान भी दिखता था, जहां वह रेंज हिटिंग सेशन्स में अक्सर सोफ़ी डिवाइन को चुनौती देती थीं।
वह कहती हैं, "हाल ही में मैंने एक रील देखी, जिसमें हार्दिक पंड्या रेंज हिटिंग कर रहे थे और गौतम गंभीर सर उनसे पूछ रहे थे कि वह कहां मारने वाले हैं। बातचीत इस पर नहीं थी कि वह बाउंड्री पार करेंगे या नहीं, बल्कि इस पर थी कि गेंद स्टैंड के किस टियर में जाएगी।"
"सोफ़ी के साथ मेरी भी ऐसी ही प्रतिस्पर्धा रहती है। हमारी प्रतिस्पर्धा बहुत अच्छी है। नेट्स में वह कहेंगी कि भारती अच्छा मार रही है, तो मैं और बड़ा मारना चाहूंगी। हम मज़ाक में कहते हैं कि अगर उसने दो छक्के मारे, तो मैं तीन मारूंगी। जब वही चीज़ मैच में दिखती है, तो बहुत अच्छा लगता है और हम दोनों को मदद मिलती है।"
शुरुआती प्रदर्शनों के कुछ समय बाद ही फुलमाली ऑस्ट्रेलिया के लिए वीज़ा प्रक्रिया के तहत अपना पासपोर्ट जमा करवा रही थीं और फिर वह ख़बर आई, जिसका उन्हें इंतज़ार था। सात साल के लंबे अंतराल के बाद उन्हें आधिकारिक तौर पर भारतीय टीम में वापस बुला लिया गया।
वह कहती हैं, "उस रात मैं सो नहीं पाई। शुरुआत में मैं बहुत भावुक हो गई थी और अपने डेब्यू के बारे में सोच रही थी कि वह कैसे गुज़रा था। लेकिन अब वह घबराहट कम हो गई है। मैं उत्साहित हूं, लेकिन ऑस्ट्रेलिया से पहले एक WPL जीतना है।"
शशांक किशोर ESPNcricinfo में वरिष्ठ संवाददाता हैं
