2007 के ऑस्ट्रेलिया जैसे दबदबे के साथ आ रहा है भारत

भारत इस समय अन्य टीमों से इतना आगे है कि उनके और T20 विश्व कप ख़िताब के बीच शायद एक चीज़ है और टूर्नामेंट ख़ुद है

इस प्रारूप में भारत विश्व चैंपियन है और अपने ख़िताब को डिफेंड करने के अभियान में वे और भी ख़तरनाक टीम बन चुके हैं © Associated Press

2024 T20 विश्व कप की समाप्ति से अब तक पूर्ण सदस्य देशों के 11 बल्लेबाज़ों का पेस और स्पिन दोनों के ख़िलाफ़ कम से कम 50 गेंदों का सामना करने के बाद T20I में स्ट्राइक रेट 150 से अधिक का रहा है। इन 11 में से चार बल्लेबाज़ भारत के हैं।

इससे किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। इस प्रारूप में भारत विश्व चैंपियन है और अपने ख़िताब को डिफेंड करने के अभियान में वे और भी ख़तरनाक टीम बन चुके हैं। भारतीय टीम इसलिए भी अधिक ख़तरनाक हो चुकी है क्योंकि बल्ले से उनकी ताक़त अविश्वनीय हो गई है। इस विश्व कप चक्र में उन्होंने तीन बार 250 के आंकड़े को पार किया है। ज़िम्बाब्वे ने भी ऐसा किया है, लेकिन उन्होंने सेशल्स, गांबिया और बोस्तवाना के ख़िलाफ़ ऐसा किया था। इस अवधि में दो फुल मेंबर देशों के बीच खेले गए T20I मैच में केवल दो ही बार 250+ के आंकड़े बने हैं। 

कौन हैं भारत के वो चार बल्लेबाज़ जिनका स्पिन और पेस दोनों के ख़िलाफ़ स्ट्राइक रेट 150 से अधिक का रहा है? जाहिर तौर पर इस लिस्ट में अभिषेक शर्मा का नाम है। लेकिन अन्य तीन कौन हैं?

शिवम दुबे, इस विश्व कप चक्र में अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के सबसे बुरे दौर से गुजरने वाले सूर्यकुमार यादव भी इसमें शामिल हैं। यशस्वी जायसवाल जैसा एक सुपरस्टार जो फिलहाल इंतजार कर रहा है क्योंकि भारत की T20 टीम में उनके लिए जगह नहीं बन पा रही है।

आप जानना चाहते होंगे कि इस टूर्नामेंट में जाते हुए भारत कितनी अच्छी टीम रही है? इसके लिए आप केवल उनके उन खिलाड़ियों के आंकड़े देख लीजिए जो या तो फ़ॉर्म में नहीं हैं या जिनकी प्लेइंग 11 में जगह पक्की नहीं हुई है। 

इस चक्र में संजू सैमसन के आंकड़ों पर निगाह डालें तो उन्होंने स्पिन के ख़िलाफ़ 172.31 की स्ट्राइक रेट और 50.83 की औसत से 305 रन बनाए हैं  और यदि तेज़ गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ उन्हें परेशानी हुई है तो यह भी कोई बहुत बड़ी नहीं दिखती है। उन्होंने तेज़ गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ 21 की औसत और 146.15 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए हैं।

विश्व कप में भारत की प्लेइंग 11 में सैमसन की जगह पर ख़तरा मंडरा रहा है, लेकिन वह भी इसलिए क्योंकि इशान किशन उन्हें टक्कर दे रहे हैं। किशन के आंकड़े अदभुत हैं और वह हमारी 150/150 लिस्ट में केवल इसलिए नहीं हैं क्योंकि उन्होंने इस विश्व कप चक्र में स्पिनर्स के ख़िलाफ़ 50 गेंदों का सामना नहीं किया है। यदि हम 40 गेंदों के हिसाब से देखें तो किशन हमारी लिस्ट के शीर्ष पर होंगे क्योंकि पेस के ख़िलाफ़ उनकी स्ट्राइक रेट 215.68 और स्पिन के ख़िलाफ़ 250 की है।

इस खिलाड़ी का भारत के लिए विश्व कप में खेलना पक्का है।

यदि उन्होंने अपने अधिकतर विश्व कप मैच सपाट पिचों पर खेले जहां स्पिनर्स के लिए मदद नहीं होगी तो भारत कुलदीप यादव को चुने बिना ही टूर्नामेंट खेल सकता है। इस चक्र में फुल मेंबर देशों के 20 से अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज़ों में कुलदीप का औसत दूसरा सर्वाधिक है। करियर में 50 या उससे ज़्यादा विकेट के मामले में भी वह फुल मेंबर देशों के गेंदबाज़ों में दूसरा सर्वाधिक औसत रखते हैं। दोनों ही मामलों में केवल राशिद ख़ान उनसे आगे हैं। 

दो साल पहले जब भारत ने T20 विश्व कप जीता था तब कुलदीप उनके आक्रमण का काफ़ी अहम हिस्सा रहे थे। विकेट लेने और मैच का रुख़ बदलने वाले कलाई के इस स्पिनर ने पिछली बार सभी सुपर-8 और नॉकआउट मैच खेले थे। कुलदीप के पास जितनी स्किल है उससे उन्हें दुनिया की हर टीम अपने 11 का हिस्सा बनाना चाहेगी।

वरुण चक्रवर्ती भी ऐसे ही गेंदबाज़ जो हर 11 का हिस्सा होंगे। इस विश्व कप में अधिकतर टीमों के पास कम से कम एक या फिर दो ऐसे खिलाड़ी हैं जिनके बारे में आप ये दावा कर सकते हैं। भारत के पास कम कसे कम ऐसे चार खिलाड़ी हैं जिनमें अभिषेक, हार्दिक पंड्या, जसप्रीत बुमराह और वरुण शामिल हैं। एशिया की परिस्थितियों में आप शायद अक्षर पटेल को भी इसमें शामिल कर लेंगे। फ़ॉर्म में भारी गिरावट से पहले सूर्यकुमार भी आसानी से इस लिस्ट का हिस्सा बन जाते।

ये छह खिलाड़ी लगभग उन सभी वर्गों को कवर कर लेते हैं जिनकी एक T20 टीम को जरूरत होती है। विध्वंसक ओपनर, 360 डिग्री मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज़, हार्ड हिटिंग तेज़ गेंदबाज़ी ऑलराउंडर, फिंगरस्पिन गेंदबाज़ी ऑलराउंडर, तेज़, सटीक और विकेट निकालने वाला कलाई का स्पिनर। बुमराह के रूप में एक ऐसा तेज़ गेंदबाज़ भी है जो किसी भी फेज़ में गेंदबाज़ी कर सकता है।

भारत ने 2024 बिना कोई मैच गंवाए जीता था T20 विश्व कप © Associated Press

और, जैसा कि पहले ही स्थापित हो चुका है, भारत की लाइन-अप में मौजूद बाकी खिलाड़ी और वे भी जो इसमें जगह तक नहीं बना पा रहे काफ़ी बेहतरीन हैं।

ऐसे में यह कोई हैरानी की बात नहीं कि भारत ने T20 की स्वभाविक अनिश्चितता का मज़ाक उड़ाने वाले जीत-हार के आंकड़े खड़े कर दिए हैं। इस विश्व कप चक्र में फुल मेंबर बनाम फुल मेंबर मुक़ाबलों में भारत का रिकॉर्ड 31-6 का रहा है (जिसमें दो सुपर ओवर की जीत भी शामिल हैं)। यानी हर एक हार पर पांच से ज़्यादा जीतें। यह सब तब, जब भारत अक्सर बड़े नामों को आराम देता रहा है या टीम संयोजन के साथ प्रयोग करता रहा है। इसके मुक़ाबले अगली सर्वश्रेष्ठ टीमों का रिकॉर्ड हर हार पर सिर्फ़ दो जीतों का रहा है।

यहां सबसे उपयुक्त तुलना शायद 2003 और 2007 के बीच के वनडे विश्व कप चक्र में ऑस्ट्रेलिया से की जा सकती है। जैसे भारत ने अब T20I क्रिकेट में किया है, वैसे ही ऑस्ट्रेलिया ने एक विश्व कप में अपराजित रहते हुए दबदबा बनाया और अगले विश्व कप तक और भी मज़बूत हो गया। उन दोनों टूर्नामेंटों के बीच ऑस्ट्रेलिया का वनडे जीत-हार रिकॉर्ड अगली सर्वश्रेष्ठ टीम पाकिस्तान से लगभग दोगुना बेहतर था।

भारत भी इसी तरह की एक आभा के साथ इस टूर्नामेंट में उतर रहा है। इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि कोई T20 विश्व कप एक टीम को इतना ज़्यादा प्रबल दावेदार मानकर शुरू हुआ हो। अगर यह साल भर चलने वाली, 20 टीमों की होम-एंड-अवे लीग होती, तो किसी और टीम के जीतने की कल्पना करना लगभग नामुमकिन होता। भारत इस समय बाक़ी सभी टीमों से काफ़ी आगे है।

हालांकि, यह T20 विश्व कप है, कोई T20 वर्ल्ड लीग नहीं। यह एक साल नहीं, बल्कि सिर्फ़ एक महीने में खेला जाएगा। ऐसे में भारत के लिए बहुत सी चीज़ें ग़लत हो सकती हैं, ठीक उसी समय जब किसी एक या दो अन्य टीमों के लिए सब कुछ सही बैठ जाए। यही छोटे टूर्नामेंटों और नॉकआउट चरणों की ख़ूबसूरती है, जहां फ़ॉर्म और परिस्थितियों की अनिश्चितताएं नतीजों पर असामान्य रूप से बड़ा असर डाल सकती हैं।

भारत यह सब अच्छी तरह जानता है।  19 नवंबर उन्हें कभी नहीं छोड़ेगा। यही वह तारीख़ है, जिसे वे इस T20 विश्व कप में अपने साथ लेकर उतर रहे हैं। उन्होंने यह सब पहले भी देखा है। भारी फ़ेवरेट होना, घरेलू मैदान पर खेलना, लगभग हर मोर्चे पर पूरी तैयारी। उन्होंने यह सब देखा है और 19 नवंबर को झेला है।

तो फिर, इस विश्व कप को जीतने का सपना देखने वाली हर दूसरी टीम के सामने शायद यही चुनौती है: भारत के प्रशंसकों के ज़हन में एक और भूकंपीय तारीख़ दर्ज कर देना और ऐसा ज़ख़्म छोड़ जाना, जो कभी पूरी तरह भर न सके।

कार्तिक कृष्णास्वामी ESPNcricinfo के सहायक एडिटर हैं।

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