न्यूज़ीलैंड की टीम थोड़ी परेशानी में है लेकिन उन्हें कमज़ोर मानना थोड़ा मुश्किल है

कीवी टीम की तेज़ गेंदबाज़ी में चोट और खिलाड़ियों की अनुपस्थिति की थोड़ी समस्या है लेकिन उनका बल्लेबाज़ी क्रम अब भी कमाल का है

पावरप्ले में बड़े शॉट लगाने वाले फ़िन ऐलन कई टीमों के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं © BCCI

ग्रुप मैच

अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ चेन्नई में, 8 फ़रवरी
UAE के ख़िलाफ़ चेन्नई में, 10 फ़रवरी
साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ अहमदाबाद में, 14 फ़रवरी
कनाडा के ख़िलाफ़ चेन्नई में, 17 फ़रवरी

बड़ी तस्वीर: चोटों से जूझ रहा न्यूज़ीलैंड

न्यूज़ीलैंड की टीम पिछले लगभग बीस दिनों से भारतीय सरज़मीं पर डेरा डाले हुए है। हालांकि, खिलाड़ियों की चोटों और अलग-अलग T20 लीग्स में उनकी भागीदारी के कारण कीवी टीम विश्व कप के आगाज़ से पहले अपने सबसे मज़बूत खिलाड़ियों को एक साथ मैदान पर नहीं उतार सकी है। तेज़ गेंदबाज़ एडम मिल्न के बाहर होने से टीम को पहले ही बड़ा झटका लग चुका है। इसके अलावा लॉकी फ़र्ग्यूसन भी अपनी पिंडली की मांसपेशियों में खिंचाव के चलते फ़िट होने की जद्दोजहद में जुटे हैं। मध्यक्रम के बल्लेबाज़ मार्क चैपमैन के कूल्हे (हिप) की तकलीफ़ ने मैनेजमेंट की चिंता और बढ़ा दी है। इन तमाम मुश्किलों के बीच न्यूज़ीलैंड के लिए अपनी सबसे संतुलित और सटीक प्लेइंग XI का चयन करना फिलहाल एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

फ़र्ग्यूसन और मैट हेनरी अब न्यूज़ीलैंड के लिए तीनों फ़ॉर्मैट में मुख्य हथियार बन चुके हैं। वे इस टूर्नामेंट के बीच में पितृत्व अवकाश पर जा सकते हैं। इसके अलावा माइकल ब्रेसवेल की फिटनेस पर भी सस्पेंस बरकरार है। भारत के ख़िलाफ़ T20 सीरीज़ के दौरान पिंडली की चोट से जूझने वाले ब्रेसवेल 8 फ़रवरी को चेन्नई में अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ होने वाले शुरुआती मुक़ाबले तक पूरी तरह तैयार हो पाएंगे या नहीं, यह कहना मुश्किल है।

गेंदबाज़ी की तुलना में कीवी टीम का बल्लेबाज़ी क्रम काफ़ी बेहतर स्थिति में दिख रहा है। बिग बैश लीग से लौटे फ़िन ऐलन और टिम साइफ़र्ट के आने से टॉप ऑर्डर को नई ऊर्जा मिली है। ये दोनों ही बल्लेबाज़ पेस अटैक की बखिया उधेड़ने में माहिर हैं, लेकिन ग्लोबल T20 लीग के अनुभव ने अब स्पिन के ख़िलाफ़ भी उनके कौशल को निखारा है। हालांकि रचिन रविंद्र के लिए T20 फ़ॉर्मैट अब भी एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है, लेकिन मिडिल ऑर्डर में ग्लेन फ़िलिप्स, डैरिल मिचेल और जिमी नीशम जैसे धुरंधर मौजूद हैं। अगर ब्रेसवेल भी फ़िट हो जाते हैं, तो यह क्रम और भी घातक हो जाएगा। इनमें से कई खिलाड़ी खेल का रुख़ पलटने की पूरी क्षमता रखते हैं। चेन्नई के मैदान पर मिचेल सैंटनर और इश सोढ़ी की स्पिन जोड़ी बेहद अहम साबित होगी, क्योंकि न्यूज़ीलैंड को अपने चार में से तीन ग्रुप मैच यहीं खेलने हैं। चेपॉक में होने वाले ये तीनों ही मुक़ाबले दिन के समय होंगे। ओस का प्रभाव न होने के कारण स्पिनर्स को ज़्यादा मदद मिलने की उम्मीद है, ऐसे में ज़रूरत पड़ने पर ब्रेसवेल और फ़िलिप्स भी ऑफ़-स्पिन से विरोधी बल्लेबाज़ों को परेशान कर सकते हैं।

रचिन रवींद्र अभी तक T20 पहेलियों को नहीं सुलझा पाए हैं © AFP/Getty Images

टीम में कुछ कमियां ज़रूर हैं, लेकिन न्यूज़ीलैंड की सामूहिक ताक़त और बेहतरीन स्काउटिंग उन्हें भरने में मदद कर सकती है।

हालिया फ़ॉर्म

न्यूज़ीलैंड को भारत के ख़िलाफ़ पांच मैचों की सीरीज़ में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। सैंटनर की कप्तानी वाली टीम सिर्फ़ एक मैच जीत सकी, जो विशाखापत्तनम में खेला गया था। इससे पहले उन्होंने घरेलू मैदान पर वेस्टइंडीज़ को 3-1 से हराया था।

इन खिलाड़ियों पर रहेगी नज़र: फ़िन ऐलन और जैकब डफ़ी

सुपर स्मैश में पावरप्ले के बड़े हिटर रहे फ़िन ऐलन अब एक ज़्यादा बहुआयामी बल्लेबाज़ बन चुके हैं। कैरिबियन और अमेरिका में खेले गए पिछले T20 विश्व कप के बाद, ऐलन ने अपने खेल में तकनीकी बदलाव किए। इनमें ट्रिगर मूवमेंट को छोड़ना और गेंद से टकराते वक्त ज़्यादा स्थिर रहने की कोशिश शामिल है।

इसका असर स्पिन के ख़िलाफ़ उनके खेल में साफ़ दिखा है। जनवरी 2017 से 2023 के अंत तक स्पिन के ख़िलाफ़ उनका स्ट्राइक रेट 165 का था और इस दौरान 68 पारियों में वे 28 बार इस तरह की गेंदबाज़ी पर आउट हुए। मिड 2024 के बाद से स्पिन के ख़िलाफ़ उनका स्ट्राइक रेट बढ़कर 207.50 हो गया है। वहीं 30 पारियों में वे 15 बार ही आउट हुए हैं।

जैकब डफ़ी इस बार थोड़ी अतिरिक्त जिम्मेदारी हो सकती है © AFP/Getty Images

अपना पहला विश्व कप खेलने के लिए तैयार जैकब डफ़ी पर इस बार सबकी नज़रें होंगी। कुछ समय पहले तक टी20 रैंकिंग में दुनिया के नंबर एक गेंदबाज़ रह चुके डफ़ी न्यूज़ीलैंड के लिए पावरप्ले और डेथ ओवर्स के विशेषज्ञ माने जाते हैं। ट्रेंट बोल्ट और टिम साउदी जैसे दिग्गजों के बाद वाले इस दौर में, डफ़ी के कंधों पर बड़ी ज़िम्मेदारी होगी--खासकर तब जब फ़र्ग्यूसन और हेनरी किसी मोड़ पर टीम का हिस्सा न हों। डफ़ी को सपाट पिचों पर गेंदबाज़ी करने में कोई दिक़्क़त नहीं होगी, क्योंकि वे न्यूज़ीलैंड के यूनिवर्सिटी ओवल जैसे मैदानों पर ऐसी परिस्थितियों में खेलने का लंबा अनुभव रखते हैं।

आख़िरी विश्व कप?

नीशम 2027 वनडे विश्व कप के समय 37 और 2028 T20 विश्व कप के दौरान 38 साल के होंगे। न्यूज़ीलैंड 2028 T20 विश्व कप का सह मेज़बान भी होगा। उन्होंने 2023 विश्व कप के बाद से कोई वनडे नहीं खेला है। साथ ही क्रिस्टियन क्लार्क जैसे अगली पीढ़ी के ऑलराउंडर सिस्टम से निकलकर सामने आ रहे हैं। ऐसे में किसी और ICC इवेंट में उनका खेलना मुश्किल दिखता है। भले ही T20 फ्रैंचाइज़ियां अब भी उन्हें एक क़ीमती ऑलराउंडर मानती हों। 2019 और 2023 की निराशाओं के बाद यह उनके लिए विश्व कप में खुद को साबित करने का आख़िरी मौक़ा हो सकता है।

संभावित प्लेइंग XI

1 फ़िन ऐलन, 2 टिम साइफ़र्ट (विकेटकीपर), 3 रचिन रवींद्र, 4 ग्लेन फ़िलिप्स, 5 डैरिल मिचेल, 6 मार्क चैपमैन, 7 जिमी नीशम या माइकल ब्रेसवेल, 8 मिचेल सैंटनर (कप्तान), 9 लॉकी फ़र्ग्यूसन या काइल जेमीसन, 10 और 11 मैट हेनरी, जैकब डफ़ी और इश सोढ़ी में से दो

पोल प्रश्न

देवरायण मुथु ESPNcricinfo में सब एडिटर हैं।

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