T20 विश्व कप से पहले भारतीय टीम के सामने खड़ी हैं ये पांच चुनौतियां
T20 विश्व कप में अपने ख़िताब का बचाव करने उतरने से पहले भारतीय टीम के पास अब महज़ पांच मैच बचे हैं। अच्छी बात यह है कि टीम अपनी प्लेइंग XI की पहेली के ज़्यादातर हिस्सों को सुलझा चुकी है। टीम के सात खिलाड़ी साफ़ तौर पर अपनी जगह पक्की कर चुके हैं और अगर तिलक वर्मा फ़िट होते हैं, तो यह संख्या आठ हो जाएगी। अब सारा दारोमदार हालात पर है, जहां एक जगह के लिए मुक़ाबला तेज़ गेंदबाज़ और कुलदीप यादव के बीच होगा। पिच को देखकर ही इस पर आख़िरी फ़ैसला लिया जाएगा।
तैयारी में जुटी दूसरी बड़ी टीमों के मुक़ाबले यह साफ़ तौर पर एक ऐसी स्पष्टता और निरंतरता है, जिस पर किसी की भी नज़र टिक सकती है। फिर भी फ़ॉर्म, फ़िटनेस और चयन को लेकर चली आ रही बहस ने भारत के सामने कुछ अहम सवाल छोड़ दिए हैं, जिनका जवाब विश्व कप की मुहिम शुरू होने से पहले तलाशना होगा। बुधवार को नागपुर में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ शुरू हो रही पांच मैचों की T20I सीरीज़ से पहले ये पांच सवाल टीम के ज़हन में ज़रूर घूम रहे होंगे।
क्या सैमसन भारत के इस देर से लिए गए फ़ैसले पर खरे उतर पाएंगे?
T20I में ओपनर के रूप में संजू सैमसन के आंकड़े खु़द ही कहानी बयान करते हैं। अब तक की 18 पारियों में उनके नाम तीन शतक हैं, स्ट्राइक रेट 178.02 का है और औसत 32.88 का है। T20I में 500 से अधिक रन बनाने वाले भारत के 11 ओपनर्स में उनसे तेज़ रन बनाने के मामले में सिर्फ़ अभिषेक शर्मा उनसे आगे हैं, जिनका स्ट्राइक रेट 190.40 का है। ऐसे में आंकड़ों के आधार पर टॉप ऑर्डर में सैमसन की जगह को लेकर बहस की गुंजाइश लगभग नहीं के बराबर दिखती है।
लेकिन हालात उनके बस में नहीं थे, जिसकी वजह से उन्हें पिछले कुछ महीने एक बिल्कुल अलग भूमिका में तालमेल बिठाने की कोशिश करनी पड़ी। अब वे फिर से बतौर ओपनर टीम में लौटे हैं। वे अपनी वही पुरानी जगह वापस पा रहे हैं, जो एक ऐसे खिलाड़ी को सौंपी गई थी जिसे पहले तो उप-कप्तान बनाया गया, मगर विश्व कप शुरू होने से कुछ ही हफ़्ते पहले उसे टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
टीम में लगातार हुए इन फेरबदल के दौरान शुभमन गिल और सैमसन, दोनों के ही मन में असुरक्षा और ख़ुद को लेकर शंका के सवाल ज़रूर उठे होंगे। अब जबकि वे अपने मनपसंद पायदान पर वापस आ गए हैं, तो सैमसन पुरानी बातों को भुलाकर जल्द से जल्द अपनी लय पकड़ना चाहेंगे।
श्रेयस अय्यर या इशान किशन?
तिलक के इस सीरीज़ के कम से कम पहले तीन मैचों से बाहर होने के चलते ऊपरी मध्यक्रम में एक स्लॉट खाली हो गया है। इस जगह के लिए दावेदारी कर रहे इशान किशन और श्रेयस अय्यर में से किसी एक को चुनना आसान नहीं है, क्योंकि दोनों के पक्ष में दलीलें बराबरी की दिखती हैं।
अय्यर ने दिसंबर 2023 के बाद कोई T20I नहीं खेला है और पिछले साल के IPL फ़ाइनल के बाद से चोट के कारण वे किसी भी प्रतिस्पर्धी T20 क्रिकेट से दूर रहे। बावजूद इसके, पंजाब किंग्स को फ़ाइनल तक पहुंचाने वाले उनके प्रदर्शन ने उन्हें दोबारा T20I की चर्चा में ला खड़ा किया। उन्होंने 175.07 के स्ट्राइक रेट से 604 रन बनाए, जो 500 से ज़्यादा रन बनाने वाले 11 बल्लेबाज़ों में दूसरा सर्वश्रेष्ठ स्ट्राइक रेट रहा। पेस और स्पिन दोनों के ख़िलाफ़ उनका स्ट्राइक रेट 150 से ऊपर था। खेल के हर चरण में उन्होंने 140 से ज़्यादा की रफ़्तार से रन बनाए और शॉर्ट बॉल के ख़िलाफ़ लंबे समय से उठते आ रहे सवालों का भी ठोस जवाब दिया।
दाएं हाथ के बल्लेबाज़ होने की वजह से अय्यर तिलक का बिल्कुल सरीखा विकल्प नहीं हैं, लेकिन यही पहलू उनके पक्ष में जा सकता है क्योंकि भारत का बाक़ी टॉप ऑर्डर बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों से भरा हुआ है।
किशन का IPL सफ़र इसके मुक़ाबले कहीं ज़्यादा उतार चढ़ाव भरा रहा। एक शतक और नाबाद 94 रन की पारी को छोड़ दें, तो उनका सीज़न ज़्यादा प्रभाव नहीं छोड़ सका। हालांकि, झारखंड के लिए सैयद मुश्ताक़ अली ट्रॉफ़ी में उनका शानदार प्रदर्शन और कप्तान के तौर पर टीम को ख़िताब दिलाने की भूमिका ने उन्हें रिज़र्व कीपर के रूप में भारतीय टीम में वापसी का रास्ता दिखाया। अय्यर के उलट किशन भारत की T20 विश्व कप टीम का हिस्सा भी हैं। ऐसे में अगर तिलक की फ़िटनेस तय योजना के मुताबिक़ आगे बढ़ती है, तो भारत उस खिलाड़ी को आज़माना ज़्यादा बेहतर समझ सकता है जो पहले से विश्व कप टीम में शामिल है।
दूसरी तरफ़, भारत किशन को कीपर ओपनर के तौर पर सैमसन के बैकअप की भूमिका में देखता है, जबकि अय्यर सूर्यकुमार यादव और तिलक के बाद ऊपरी मध्यक्रम की कतार में अगला नाम हैं। ऐसे में अय्यर को उनकी तय भूमिका में मौके देना तार्किक लग सकता है, ताकि ज़रूरत पड़ने पर वे पूरी तरह तैयार हालात में उपलब्ध हों।
क्या सूर्यकुमार अपनी खोई हुई लय वापस पा सकेंगे?
भारत के T20I कप्तान फ़िलहाल अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के सबसे ख़राब दौर से गुज़र रहे हैं। पिछली 22 पारियों से उनके बल्ले से एक भी अर्धशतक नहीं निकला है और इस दौरान उनकी औसत महज़ 12.84 की रही है। वे तेज़ गेंदबाज़ी और फुल लेंथ गेंदों के सामने संघर्ष करते दिखे हैं, यहा तक कि विकेट के सामने तेज़ी से रन बनाना भी उनके लिए मुश्किल साबित हो रहा है।
साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ हुई T20I सीरीज़ के बाद से, उन्होंने प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में सिर्फ़ दो बार बल्लेबाज़ी की है, जहां मुंबई के लिए खेलते हुए 50 ओवरों की विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी में उन्होंने 24 और 15 रन बनाए। वे 35 साल के हो चुके हैं और अब अपनी ही मेज़बानी में होने वाले T20 विश्व कप में बतौर कप्तान डिफेंडिंग चैंपियन भारत की कमान संभालने जा रहे हैं।
इन सबके बावजूद वे भारत के महानतम T20 क्रिकेटरों में से एक हैं। एक ऐसा खिलाड़ी जिसने न केवल इस फ़ॉर्मैट में महारत हासिल की, बल्कि इसकी संभावनाओं को भी नए आयाम दिए। अगर कोई इस बुरे दौर से उबरने का माद्दा रखता है, तो वह सूर्यकुमार ही हैं। लेकिन चुनौती यह है कि विश्व कप शुरू होने में अब बहुत ज़्यादा वक़्त नहीं बचा है।
डेथ ओवर्स (17-20) में कम से कम 200 T20I रन बनाने वाले तमाम भारतीय बल्लेबाज़ों में सिर्फ़ सूर्यकुमार यादव (228.49) और रोहित शर्मा (217.24) का स्ट्राइक रेट ही रिंकू सिंह (207.75) से बेहतर है। दिलचस्प बात यह है कि सूर्यकुमार और रोहित टॉप ऑर्डर के बल्लेबाज़ हैं, जो आमतौर पर डेथ ओवर्स शुरू होने तक क्रीज़ पर अच्छी तरह जम चुके होते हैं।
इस लिहाज़ से रिंकू इस फ़ॉर्मैट में भारत के सबसे बेहतरीन 'प्योर फ़िनिशर' होने का दावा पेश करते हैं। डेथ ओवर्स में उनकी औसत 38.28 की है, जो ज़ाहिर करता है कि उनकी आक्रामकता की क़ीमत उन्हें बार-बार विकेट गंवाकर नहीं चुकानी पड़ती। उनका ओवरऑल रिकॉर्ड भी यही कहता है कि लोअर मिडिल ऑर्डर में उनकी जगह पक्की होनी चाहिए।
लेकिन असलियत ऐसी नहीं है; कम से कम पिछले कुछ महीनों में तो ऐसा नहीं रहा, जब टॉप ऑर्डर में गिल की वापसी की वजह से मिडिल ऑर्डर के किसी खिलाड़ी को विकेटकीपर के लिए जगह खाली करनी पड़ी थी। सितंबर के बाद से उन्होंने महज़ दो T20I खेले हैं और सिर्फ़ एक गेंद का सामना किया है, जो एशिया कप फ़ाइनल की विनिंग बाउंड्री थी।
अब जबकि कीपर के तौर पर सैमसन टॉप ऑर्डर में लौट आए हैं, तो रिंकू को नंबर 6 या 7 पर आसानी से अपनी जगह मिल जानी चाहिए, लेकिन चीज़ें इतनी सीधी नहीं होतीं। शिवम दुबे ने एशिया कप की शुरुआत से भारत के 16 में से 15 T20I मैच खेले हैं। भले ही बल्ले से उनके आंकड़े बहुत प्रभावशाली न रहे हों, लेकिन उन्होंने कुछ उपयोगी कैमियो पारियां खेली हैं और ज़रूरत पड़ने पर अपनी मीडियम पेस से गेंदबाज़ी में भी योगदान दिया है।
हो सकता है कि यह चयन पूरी तरह से पिच और वहां के हालात पर निर्भर करे। भारत की आम T20 पिचों पर, जो सपाट और रनों से भरी होती हैं, भारत कलाई के स्पिनर (कुलदीप) के बजाय एक अतिरिक्त तेज़ गेंदबाज़ खिलाना पसंद करेगा। ऐसे में स्पिन के माहिर दुबे के मुक़ाबले पेस के ख़िलाफ़ बेहतर बल्लेबाज़ी करने वाले रिंकू की दावेदारी मज़बूत होगी। हालांकि, टर्निंग पिचों पर दुबे बल्ले और गेंद दोनों के साथ एक उपयोगी विकल्प बन जाते हैं, जिससे भारत को कुलदीप के लिए जगह बनाने और एक फ्रंटलाइन सीमर को बाहर रखने की सहूलियत मिलती है।
क्या राणा ने नंबर 8 की बहस को ख़त्म कर दिया है?
हर्षित राणा न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ एक शानदार वनडे सीरीज़ खेलकर आ रहे हैं, जहां उन्होंने अपनी तेज़ गेंदबाज़ी के हुनर और अपनी बल्लेबाज़ी की गहराई, दोनों का बेहतरीन नमूना पेश किया। यह सब उन्हें इस T20I सीरीज़ में नंबर 8 के लिए सबसे प्रबल दावेदार बनाता है।
हालांकि, साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ भारत की पिछली T20I सीरीज़ में राणा को सिर्फ़ एक मैच खेलने का मौक़ा मिला था। तब भारत अपनी बल्लेबाज़ी को इतनी गहराई दे रहा था कि दुबे, वॉशिंगटन सुंदर या जितेश शर्मा नंबर 8 पर बल्लेबाज़ी के लिए उतर रहे थे। अक्षर पटेल और हार्दिक पांड्या जैसे मंझे हुए ऑलराउंडर्स और दुबे एवं अभिषेक जैसे छठे गेंदबाज़ी विकल्पों की मौजूदगी में भारत एक बार फिर इस रास्ते पर चल सकता है।
लेकिन वनडे में राणा के प्रदर्शन ने शायद नंबर 8 की इस बहस को उनके पक्ष में मोड़ दिया है। उन्हें टीम में रखने से भारत को हर चरण में गेंदबाज़ी करने वाला एक ऐसा सीमर मिलेगा, जिसके भीतर एक सक्षम निचले क्रम का बल्लेबाज़ भी छिपा है।
नागपुर में पहले T20I के लिए भारत की संभावित प्लेइंग XI
1 अभिषेक शर्मा, 2 संजू सैमसन (विकेटकीपर), 3 सूर्यकुमार यादव (कप्तान), 4 श्रेयस अय्यर/इशान किशन, 5 हार्दिक पंड्या, 6 अक्षर पटेल, 7 रिंकू सिंह, 8 हर्षित राणा/शिवम दुबे, 9 अर्शदीप सिंह/कुलदीप यादव, 10 जसप्रीत बुमराह, 11 वरुण चक्रवर्ती।