चंडीगढ़ से मुंबई वाया नेपाल: कैसे करन केसी का वानखेड़े में खेलने का सपना हो रहा पूरा

नेपाल के तेज़ गेंदबाज़ की क्रिकेटिंग यात्रा उतार-चढ़ावों से भरी हुई है

करन केसी: "कभी-कभी हम क्रिकेट को इतना गंभीरता से ले लेते हैं कि जब हारते हैं, तो उसे संभालना नहीं आता" © AFP/Getty Images

अपने प्रोफ़ेशनल क्रिकेट करियर के शुरुआती सालों के हर गर्मी के मौसम में करन केसी मुंबई जाते थे। वह वहां उमेश पटवाल द्वारा चलाए जा रहे एकेडमी में ट्रेनिंग करते थे, फिर भी कभी वानखेड़े स्टेडियम में नहीं खेल पाए।

रविवार को जब इंग्लैंड के ख़िलाफ़ T20 विश्व कप 2026 के अपने शुरुआती मैच में नेपाल की टीम वानखेड़े में उतरेगी, तो करन के लंबे समय से चला आ रहा सपना आख़िरकार पूरा होगा। नेपाल के सभी ग्रुप मैच वानखेड़े में ही होने हैं, जिससे उनके पास इस ऐतिहासिक मैदान पर कुछ यादें बनाने का मौक़ा भी होगा।

ESPNcricinfo से बात करते हुए करन ने कहा, "मैं कांदिवली से ऑटो और लोकल ट्रेन लेकर मुंबई में बहुत घूमा हूं, लेकिन कभी वानखेड़े के अंदर नहीं जा पाया। मैं मैदान को देखना चाहता था, तो हम चर्चगेट तक लोकल ट्रेन से गए। बाहर खड़े होकर, मैदान के इतना क़रीब पहुंचना भी बहुत ख़ास था। हालांकि अब हम वहां खेलेंगे, यह सोचकर ही मैं रोमांचित हो जाता हूं।"

"उमेश सर हमेशा कहा करते थे, 'एक दिन तुम वहां खेलोगे'। जब शेड्यूल आए, तो मैंने उनसे कहा, 'आखिरकार मैं वहां खेलूंगा'। वह बहुत ख़ुश थे।"

करन का रिश्ता हालांकि सिर्फ़ मुंबई से ही नहीं रहा है। वह चंडीगढ़ में पले-बढ़े, जहां उनके पिता काम करते थे। वहीं उन्होंने अपने बड़े भाईयों के साथ आंगन में क्रिकेट खेलकर अपने क्रिकेटिंग करियर की नींव रखी।

"हम एक-एक मैच, ट्राई-सीरीज़, सब खेलते थे। मैं हमेशा ऑस्ट्रेलिया चुनता था, मेरा भाई भारत। अगर मैं गेंदबाज़ी करता, तो नियम था कि हर ओवर में ऐक्शन बदलना होगा। मेरा पहला ओवर हमेशा ब्रेट ली का ऐक्शन होता था, क्योंकि मैं उनका बहुत बड़ा फ़ैन था। फिर ग्लेन मक्ग्रा और आगे अन्य ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़। अगर मैं बल्लेबाज़ी करता, तो रिकी पोंटिंग की तरह ओपन करता। अगर वह आउट हो जाते, तो मैं ऐडम गिलक्रिस्ट की तरह बाएं हाथ से बल्लेबाज़ी करता। ऐसे ही मैंने बेसिक्स सीखे।"

करन ने 14 साल की उम्र तक औपचारिक कोचिंग शुरू नहीं की थी। उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट एक स्कूल ट्रायल था, जहां उन्होंने ली के एक्शन से गेंदबाज़ी करते हुए सबको प्रभावित किया। कक्षा 10 तक वह अपने स्कूल की टीम की कप्तानी करते हुए एक टूर्नामेंट के फ़ाइनल में पहुंचा चुके थे। उसी दौरान वह चंडीगढ़ के जूनियर नेशनल जूडो चैंपियनशिप में भी हिस्सा ले रहे थे।

लेकिन जूनियर कॉलेज पहुंचते-पहुंचते क्रिकेट पूरी तरह हावी हो गया। "टेनिस-बॉल क्रिकेट," वह बीच में टोकते हैं। "दिन-रात, बस वही खेलता था। सुबह मैच, फिर कुछ घंटों के लिए कॉलेज, वापस आकर शाम को फिर खेलने निकल जाता था और कभी-कभी अगली सुबह ही घर लौटता था। हालात ऐसे हो गए कि मेरे माता-पिता को लगने लगा कि कहीं मैं ग़लत संगत में तो नहीं पड़ गया हूं।"

एशिया कप 2023 में करन केसी ने अपनी आउटस्विंग से रोहित शर्मा को परेशान किया था Pankaj Nangia / © Getty Images

कक्षा 12 तक वह चंडीगढ़ के प्रतिस्पर्धी टेनिस-बॉल सर्किट में एक जाना-पहचाना नाम बन चुके थे, जहां कई बार लेदर बॉल क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ी भी आते थे। "वे टूर्नामेंट बहुत बड़े होते थे," वह कहते हैं। "मैंने मनप्रीत गोनी, मनन वोहरा के साथ खेला था। यहां तक कि नवदीप सैनी भी खेलने आया करते थे।"

करन इतना कमा लेते थे कि अपने ख़र्च पूरे हो जाएं, लेकिन ख़ुशी "कुछ और ही" थी। चंडीगढ़ विश्वविद्यालय से BA पूरा करने के बाद, उनके पिता ने साफ़ कहा कि अब करन को और गंभीर होना पड़ेगा।

"2014 की शुरुआत में मुझे पासपोर्ट के लिए आवेदन करने नेपाल भेजा गया," करन कहते हैं। "योजना यह थी कि वीज़ा आते ही मैं मलेशिया चला जाऊं, जहां मेरे दोनों भाई शिफ़्ट हो चुके थे। मैं तब ग्रेजुएट हो चुका था और शायद वहां नौकरी मिल जाती।"

करन अस्थायी तौर पर पोखरा में बसे, जो उनके बागलुंग गांव के सबसे पास का बड़ा शहरी केंद्र है। वहां वह रिश्तेदारों के साथ रहते थे। "मुझे तब ठीक से नेपाली भी नहीं आती थी," वह कहते हैं। "मैं बस समझ लेता था, लेकिन पंजाबी और हिंदी में ज्यादा सहज था।"

एक दिन अपने चचेरे भाई की मदद करते हुए करन ने देखा कि पोखरा में उनकी दुकान पर लोग TV के आसपास जमा हैं। बांग्लादेश में चल रहे T20 विश्व कप में नेपाल, हॉन्ग कॉन्ग के ख़िलाफ़ एक मैच खेल रहा था। "तभी मुझे एहसास हुआ कि नेपाल की भी एक क्रिकेट टीम है। मैंने सोचा, 'ठीक है, अब मुझे कोशिश करनी चाहिए'।"

"अब नेपाल के क्रिकेटर के लिए ज़िंदगी अच्छी है। हमें मासिक वेतन मिलता है, साथ ही मैच फ़ीस भी। मेरा NPL कॉन्ट्रैक्ट 20 लाख नेपाली रूपये तक जाता है। मैं पोखरा में अपना घर बना पाया हूं। मेरे माता-पिता तीन साल पहले भारत से वापस आ गए। वे बहुत ख़ुश हैं।"

यह रास्ता उन्हें दीपेश खत्री तक ले गया, जो पूर्व अंडर-19 क्रिकेटर और उस क्षेत्र में बड़ा नाम थे। खत्री ने एक कॉलेज टूर्नामेंट में प्रॉक्सी खिलाड़ी के तौर पर करन को खेलते हुए देखा और उनसे प्रभावित हो गए। इसके बाद उन्होंने पोखरा के अन्नपूर्णा माछापुच्छ्रे क्लब में करन का दाखिला करवा दिया।

"मैं उस कॉलेज से था ही नहीं, लेकिन जब उन्होंने मुझे खेलते देखा, तो प्रभावित हुए और टीम में ले लिया," वह हंसते हुए कहते हैं। "उन्होंने कहा, सब मैनेज हो जाएगा, किसी को पता नहीं चलेगा।" और सच में, किसी को पता नहीं चला, जब तक कि करन बड़ा नाम नहीं बन गए।

इसके तुरंत बाद, करन को काठमांडू में नेशनल कैंप के लिए बुलाया गया। वह रात भर का सफ़र करके पहुंचे, उन्हें यह भी नहीं पता था कि कहां उतरना है। उसी समय, एवरेस्ट प्रीमियर लीग (EPL) के लिए चयन हो रहे थे, जहां उन्हें नेट बॉलर के तौर पर चुना गया।

तब नेपाल के मुख्य कोच पुबुदु दासनायके यह ट्रायल्स देख रहे थे। करन के प्रदर्शन से प्रभावित होकर, उन्होंने उनका नाम प्रतियोगिता की एक टीम पंचकन्या तेज़ को सुझाया।

तब तक, करन को नेपाल लौटे लगभग एक साल हो चुके थे। वीज़ा का कोई पता नहीं था और भारत में मौजूद उनके माता-पिता अक्सर फ़ोन कर नाराज़ होते थे, यह जाने बिना कि वह नेपाल के क्रिकेट ढांचे में कितने आगे बढ़ चुके हैं।

2015 में करन ने नेपाल के लिए डेब्यू किया। EPL 2016 में, उन्होंने छह मैचों में नौ विकेट लिए और उनकी टीम ने ख़िताब जीता। "मुझे प्रति मैच लगभग 1500 नेपाली रूपये मिलते थे, इसके अलावा विजेता टीम के लिए अलग से ईनाम था। कुल मिलाकर क़रीब 25,000 नेपाली रूपये," वह याद करके बताते हैं।

"मेरे पिता तब नेपाल में थे। मैंने उन्हें 20,000 रूपये दिए और 5000 अपने पास रखे। वह ख़ुश थे। अख़बारों में मेरा नाम देखने के बाद ही वह धीरे-धीरे मेरे क्रिकेट खेलने को लेकर सहज हुए।"

"अब नेपाल के क्रिकेटर के लिए ज़िंदगी अच्छी है। हमें मासिक वेतन मिलता है, साथ ही मैच फ़ीस भी" - करन केसी © ICC/Getty Images

एक दशक से ज़्यादा बाद करन का यह सफ़र जारी है। आज वह राष्ट्रीय टीम के सीनियर सदस्य हैं, 2023 में विश्व कप क्वालिफ़ायर्स तक टीम के सफ़र में अहम भूमिका निभा चुके हैं। उसी साल एशिया कप में अपनी आउटस्विंग से रोहित शर्मा को परेशान कर चुके हैं, 2024 में USA और वेस्टइंडीज़ में T20 विश्व कप खेल चुके हैं, नेपाल प्रीमियर लीग (NPL) में काठमांडू गोरखाज़ की कप्तानी कर चुके हैं और T20I में नेपाल के लिए दूसरे सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ हैं।

"अब नेपाल के क्रिकेटर के लिए ज़िंदगी अच्छी है," करन कहते हैं। "हमें मासिक वेतन मिलता है, साथ ही मैच फ़ीस भी। मेरा NPL कॉन्ट्रैक्ट 20 लाख नेपाली रूपये तक जाता है। मैं पोखरा में अपना घर बना पाया हूं। मेरे माता-पिता तीन साल पहले भारत से वापस आ गए। वे बहुत ख़ुश हैं।"

हाल ही में करन की सगाई हुई है और वह एक और विश्व कप खेलने के मुहाने पर खड़े हैं।

उन्होंने बताया, "मेरे दोनों भाई सेटल हैं। एक जापान में है और दूसरा US में। लेकिन वे अब भी फ़ोन करके कहते हैं, 'तुम अब कप्तान हो, ओपनिंग क्यों नहीं करते?'"

पूरी एक घंटे की बातचीत में, करन आपको क़िस्सों और हंसी से भर देते हैं। उनके भीतर एक सहज और आज़ाद-ख़याल ऊर्जा है, जो खेल के प्रति उनके गहरे प्यार को दर्शाती है। ख़ुद को ऑस्ट्रेलिया का पक्का समर्थक मानने वाले करन अब पैट कमिंस के लिए भी बराबर की प्रशंसा रखते हैं।

"मैं उनकी क़िताब Tested पढ़ रहा हूं," करन कहते हैं। "उस क़िताब की एक लाइन मेरे साथ रह गई है। 'क्रिकेट ज़िंदगी का हिस्सा है, पूरी ज़िंदगी नहीं'। खेल ख़त्म करो और उसके बाहर की ज़िंदगी का आनंद लो। कभी-कभी हम क्रिकेट को इतना गंभीरता से ले लेते हैं कि जब हारते हैं, तो संभाल नहीं पाते। मुझे हमेशा ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट पसंद रहा है। वे चाहे जितने नीचे हों, हारना उनके DNA में नहीं है। वे हमेशा वापसी का रास्ता ढूंढ लेते हैं। यही मानसिकता मेरी है और मैं चाहता हूं कि मेरे आसपास के लोग भी यही रखें।"

अन्नपूर्णा बेस कैंप की ट्रेकिंग कर चुके करन अब एवरेस्ट बेस कैंप का सपना देख रहे हैं। "सात से दस दिन। बहुत कठिन," वह कहते हैं। "पिछले कुछ सालों में समय नहीं मिला। शायद विश्व कप के बाद मैं वह ट्रेकिंग करूंगा।"

शशांक किशोर ESPNcricinfo के विशेष संवाददाता हैं।

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