धोनी की फ़िल्म और एक सपने का दोबारा जन्म: तारिक़ के विश्व कप तक पहुंचने की यात्रा
2015 में उस्मान तारिक़ ने एक अदद नौकरी की तलाश में दुबई का रुख़ करने का मन बनाया। महज़ चार साल की उम्र में पिता का साया सिर से उठ जाने के बाद पूरे परिवार की ज़िम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी, लिहाज़ा उन्होंने भारी मन से क्रिकेट को अलविदा कहने का फ़ैसला कर लिया। ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के नौशेरा से ताल्लुक़ रखने वाले लंबे क़द के तारिक़ उन दिनों सीम और स्पिन, दोनों तरह की गेंदबाज़ी कर लेते थे। कई जगह छोटी-मोटी नौकरियां करने के बाद आख़िरकार उन्हें दुबई की एक रियल एस्टेट कंपनी में परचेज़ कोऑर्डिनेटर के तौर पर स्थायी काम मिल गया।
साल 2016 के आख़िरी दौर में तारिक़ ने भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की ज़िंदगी पर बनी फ़िल्म 'एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी' देखी। तक़रीबन 6 फ़ुट 1 इंच लंबे तारिक़ पर धोनी की कहानी का गहरा असर हुआ। ख़ासकर जिस तरह धोनी ने भारतीय रेलवे की टिकट चेकर की नौकरी छोड़कर दोबारा क्रिकेट का दामन थामा, उस बात ने तारिक़ के भीतर एक नई चिंगारी पैदा कर दी। उन्होंने उसी पल पूरे जुनून के साथ दोबारा क्रिकेटर बनने की क़सम खा ली। उनकी उस अटूट मेहनत का ही नतीजा है कि आज वह पाकिस्तान की जर्सी पहनकर पुरुष T20 विश्व कप 2026 के मैदान पर अपना दम दिखा रहे हैं।
तारिक़ ने मंगलवार को कोलंबो में बातचीत के दौरान कहा, "मैं एमएस धोनी की फ़िल्म देखने के बाद ही क्रिकेट में वापस आया। उस फ़िल्म को देखने के बाद मुझे महसूस हुआ कि हमारी कहानियाँ काफ़ी हद तक एक जैसी हैं। क्रिकेट को गंभीरता से लेने से पहले मैं भी नौकरी कर रहा था और वह भी नौकरी ही कर रहे थे। तब मेरे मन में यह बात आई कि अगर वह शख़्स इतिहास रच सकता है, तो मैं भी तो एक साधारण इंसान ही हूं। शायद मैं भी उसी रास्ते पर चल सकता हूं, लेकिन इसके लिए मुझे भी दूसरों की तरह ही जी-तोड़ मेहनत करनी होगी। सच कहूं तो मैं सिर्फ़ MS धोनी की वजह से ही दोबारा मैदान पर लौटा।"
आख़िरकार उनकी मेहनत रंग लाई। पिछले कुछ सालों में CPL, PSL और ILT20 जैसी अलग-अलग फ़्रैंचाइज़ी लीग के ट्रायल में अपना लोहा मनवाने के बाद, तारिक़ को इसी साल जनवरी में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ T20I सीरीज़ के दौरान पाकिस्तान की कैप मिल गई। उन्होंने अपने विश्व कप डेब्यू में ही USA के ख़िलाफ़ तीन विकेट चटकाकर धमाका कर दिया। टूर्नामेंट के सबसे बड़े और बहुचर्चित मुक़ाबले से पहले ही वे सुर्ख़ियों में छा चुके थे।
ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ सीरीज़ के दौरान तारिक़ के गेंदबाज़ी एक्शन ने सबका ध्यान खींचा और भारत के साथ मुक़ाबले से पहले यह चर्चा और तेज़ हो गई। सिर्फ़ फ़ैंस और मीडिया ही नहीं, बल्कि पूर्व खिलाड़ियों ने भी उनके एक्शन, रन-अप में ठहराव और विविधता पर जमकर अपनी राय दी। हालांकि, इन सबके बीच तारिक़ पूरी तरह शांत नज़र आए और मंगलवार को एक बार फिर दोहराया कि उनके लिए "प्रक्रिया" (प्रोसेस) ही सबसे ऊपर रही है। उन्होंने अपनी गेंदबाज़ी को लेकर लोगों में पैदा हुई दिलचस्पी का लुत्फ़ उठाया। यहां तक कि जब विरोधी खिलाड़ी उनके एक्शन की नक़ल उतारते दिखे, तो भी वे विचलित नहीं हुए। भारत बनाम पाकिस्तान मैच की पूर्व संध्या पर सूर्यकुमार यादव को भी ऐसा करते देखा गया था।
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह मेरे लिए एक अच्छा संकेत है कि विपक्षी टीमें उस्मान तारिक़ से निपटने के लिए ख़ास तैयारी कर रही हैं। यह जानकर मेरा आत्मविश्वास और बढ़ जाता है कि मेरे ख़िलाफ़ विशेष रणनीति बनाई जा रही है। मैं इस समय के हर पल का मज़ा ले रहा हूं।"
आर प्रेमदासा स्टेडियम में, जहां तक़रीबन 90 फ़ीसदी दर्शक भारत के पक्ष में शोर मचा रहे थे, तारिक़ ने उस दबाव के बीच ऐसी शांति दिखाई जिसने शायद शाहीन अफ़रीदी, शादाब ख़ान और अबरार अहमद जैसे अनुभवी गेंदबाज़ों को भी पीछे छोड़ दिया। भारतीय बल्लेबाज़ों ने हाथ खोलने के मौक़े तो तलाशे, लेकिन तारिक़ ने पाकिस्तान को मुक़ाबले में बनाए रखने की पूरी कोशिश की। अपने दूसरे ओवर में दिए गए 10 रनों को छोड़ दें, तो बाक़ी के तीन ओवरों में उन्होंने महज़ 6, 4 और 5 रन ही ख़र्च किए। पारी के आख़िरी ओवरों से ठीक पहले उन्होंने सूर्यकुमार यादव का बेशक़ीमती विकेट निकाला, जब भारतीय कप्तान डीप मिडविकेट की लंबी बाउंड्री पार करने की कोशिश में कैच दे बैठे। तारिक़ ने इस बड़े विकेट का जश्न अपने ख़ास अंदाज़ में मनाया, जिसमें गरिमा और सादगी साफ़ झलक रही थी। इस T20 विश्व कप की सबसे ख़तरनाक बल्लेबाज़ी लाइन-अप के सामने 4 ओवर में 25 रन देकर 1 विकेट लेना वाकई बेहद असरदार प्रदर्शन है।
Who did the best Usman Tariq imitation? pic.twitter.com/7w5YWiZVW2
— ESPNcricinfo (@ESPNcricinfo) February 15, 2026
हालांकि तारिक़ का मानना है कि अगर यह मैच दोबारा खेला जाए, तो वे एक अलग रणनीति के साथ मैदान पर उतरेंगे।
"पाकिस्तान और भारत के मैच दोनों मुल्कों के साथ-साथ पूरी दुनिया में देखे जाते हैं। सच कहूं तो मैं इस मुक़ाबले को एक ऐसे बड़े मौक़े के रूप में देख रहा था जहां मैं अपना नाम बना सकूं। मैंने अपनी तरफ़ से पूरी जान लगा दी, लेकिन निजी तौर पर मुझे लगा कि मैं उम्मीदों पर उतना खरा नहीं उतर पाया। अगर मुझे दोबारा ऐसा मैच खेलने का मौक़ा मिला, तो मैं पिछली बार से कहीं बेहतर प्रदर्शन करना चाहूंगा।"
"मुझे महसूस हुआ कि भारतीय बल्लेबाज़ जिस तरह मुझे खेल रहे थे, वे पूरी तरह फ़ोकस्ड थे। वे उस्मान को अपना विकेट नहीं देना चाहते थे, इसलिए अपनी योजनाओं पर डटे रहे, जबकि मैं विकेट चटकाने की फिराक में अपनी रणनीति पर क़ायम था। दिन के आख़िर में, मैं सुरक्षित रहा। भले ही मुझे ज़्यादा विकेट न मिले हों, लेकिन मैंने रन भी नहीं लुटाए। डेथ ओवरों जैसे नाज़ुक समय पर गेंदबाज़ी करते हुए रन रोकना टीम के लिए फ़ायदेमंद रहता है। मुझे लगा कि यह मेरे लिए भी अच्छा रहा।"
धोनी की बायोपिक देखने के बाद क्रिकेट की दुनिया में वापसी करने की एक वजह यह भी थी कि तारिक़ शोहरत हासिल करना चाहते थे। अभी उन्होंने महज़ पांच अंतरराष्ट्रीय मैच ही खेले हैं, लेकिन क्रिकेट जगत अब उस्मान तारिक़ के नाम को पहचानने लगा है।
नागराज गोलापुड़ी ESPNcricinfo के न्यूज़ एडिटर हैं।