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चार दिन, चार महारथी : जो बने भारत की जीत के सारथी

रांची में भारत के युवा खिलाड़ियों का बोलबाला रहा

नवनीत झा
27-Feb-2024
जीत के बाद जश्‍न मनाते ध्रुव जुरेल और शुभमन गिल  •  Getty Images

जीत के बाद जश्‍न मनाते ध्रुव जुरेल और शुभमन गिल  •  Getty Images

भारत की युवा फ़ौज ने सीनियर खिलाड़ियों की अगुवाई में इंग्लैंड की बैज़बॉल रणनीति को पटखनी दे दी है। भारत ने इस टेस्ट श्रृंखला में तीन मैच जीतकर घर पर लगातार 17वीं टेस्ट सीरीज़ अपने नाम कर ली है। हालांकि जीते हुए इन तीन मैचों में भारत के लिए सबसे कठिन जीत यही थी क्योंकि रांची में दूसरे दिन के खेल की समाप्ति के बाद भारत से हार ज़्यादा दूर नहीं लग रही थी। रांची की रणभूमि में भारत की जीत चार महारथियों के चलते ही संभव हो पाई, जो अलग अलग दिन अपने प्रदर्शन से भारत की जीत के सारथी बने।

पहला दिन : आकाश दीप

सासाराम से निकलकर बंगाल के रास्ते भारतीय ड्रेसिंग रूम पहुंचे आकाश दीप ने पहले दिन ड्रीम डेब्यू किया। ज़ैक क्रॉली को आकाश दीप ने बोल्ड कर दिया था लेकिन वो गेंद नो बॉल करार दे दी गई। हालांकि इससे आकाश दीप के इरादे पस्त नहीं हुए और उन्होंने जल्द ही नियमित अंतराल पर इंग्लैंड को दोहरा झटका दे दिया। आकाश दीप के तीन झटकों के चलते पहले दिन के लंच तक ही आधी इंग्लैंड की टीम पवेलियन में थी। इसमें बेन डकेट, ओली पोप के अलावा क्रॉली का विकेट भी शामिल था जिन्हें आकाश दीप अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय शिकार नहीं बना पाए।
आकाश दीप को दूसरी पारी में एक भी ओवर की गेंदबाज़ी नहीं मिली लेकिन उन्होंने डीप में फ़ील्डिंग कर भारत के लिए रन भी बचाए। रांची की पिच पहले दिन बहुत अच्छा खेल रही थी और बाद में इंग्लैंड ने वापसी भी कर ली थी। अगर आकाश दीप के पहले सत्र में तीन विकेट नहीं होते तो संभव है कि इंग्लैंड ने पहली पारी में एक बड़ा स्कोर खड़ा किया होता और ध्रुव जुरेल की पारी के बावजूद दूसरी पारी में इंग्लैंड के पास एक बड़ी बढ़त होती।

दूसरा दिन : ध्रुव जुरेल

ध्रुव जुरेल ने राजकोट टेस्ट में अपनी डेब्यू पारी से ही सभी को प्रभावित कर दिया था। हालांकि बतौर बल्लेबाज़ उनकी असली परीक्षा रांची में होनी थी। पहली पारी में जुरेल की जब बल्लेबाज़ी आई तब इंग्लैंड भारत से 200 से अधिक रन से आगे चल रहा था। हालांकि दूसरे दिन के अंतिम सत्र में जुरेल ने कुलदीप यादव के साथ अच्छी साझेदारी बनाई और इसे अगले दिन के पहले सत्र तक भी जारी रखा। ध्रुव के 90 रनों की पारी ने इंग्लैंड को ज़्यादा बड़ी बढ़त (46 रन) नहीं लेने दी। अंतिम पारी में भी जुरेल भारत के संकटमोचक बने और इंग्लैंड द्वारा वापसी किए जाने के बाद भी मेहमान टीम को मुक़ाबले पर पकड़ नहीं बनाने दी। जुरेल को उनके प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ़ द मैच का भी अवॉर्ड दिया गया।
जुरेल ने विकेटों के पीछे भी संतोषजनक प्रदर्शन किया। हालांकि उन्होंने तीसरे दिन रवींद्र जाडेजा की एक ही गेंद पर स्टंप्स के पीछे जॉनी बेयरस्टो का कैच और स्टंप का मौक़ा ज़रूर छोड़ा लेकिन इस एक ग़लती को छोड़ दिया जाए तो जुरेल ने रांची और राजकोट दोनों जगह ऋषभ पंत के रिक्त स्थान को भरने और पंत की वापसी की स्थिति में भी अपना दावा मज़बूत करने के संकेत ज़रूर दिए। जुरेल से पहले इस श्रृंखला में केएस भरत को पहले दो मैचों में मौक़ा दिया गया था लेकिन वह बल्ले के साथ अधिक प्रभावित नहीं कर पाए थे और जुरेल ने इस कमी को भी पूरा कर दिया।

तीसरा दिन : रविचंद्रन अश्विन

पहले दो दिन तक इंग्लैंड ही भारत पर हावी था और दूसरी पारी में इंग्लैंड को भले ही बड़ी बढ़त नहीं मिल पाई थी लेकिन रांची की पिच को देखते हुए यह बढ़त कमतर भी नहीं लग रही थी। भारतीय गेंदबाज़ों के सामने इंग्लैंड को पहली पारी जैसा स्कोर खड़ा करने से रोकने की चुनौती थी और आर अश्विन ने अपनी लगातार दो गेंदों पर डकेट और पोप का शिकार कर डाला था। डकेट टेस्ट में घर पर अश्विन का 351 वां शिकार भी बने और उन्होंने घर पर सर्वाधिक टेस्ट विकेट लेने के मामले में अनिल कुंबले को पीछे छोड़ दिया।
हालांकि अश्विन यहीं नहीं रुके और उन्होंने अकेले इंग्लैंड की आधी टीम को पवेलियन लौटाया। इस सीरीज़ में अश्विन अब तक अपनी पहचान के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाए थे लेकिन रांची टेस्ट के तीसरे दिन के खेल में अश्विन ने अपने आलोचकों की यह शिकायत भी दूर कर दी। अश्विन ने टेस्ट ने में भारत की ओर से सर्वाधिक पांच विकेट हॉल लेने के मामले में अनिल कुंबले की बराबरी भी कर ली।
अश्विन के अलावा कुलदीप ने भी तीसरे दिन इंग्लैंड के बल्लेबाज़ों को परेशान किया और उन्होंने पहले एक बार फिर अच्छी लय में नज़र आ रहे क्रॉली और स्टोक्स को चलता कर यह सुनिश्चित किया कि पहली पारी की तरह इंग्लैंड वापसी ना कर पाए और निचले क्रम से टॉम हार्टली और ऑली रॉबिंसन को आउट कर इंग्लैंड के पुछल्ले क्रम को संघर्ष का मौक़ा तक नहीं दिया। भारतीय स्पिनर धमाल मचा रहे थे और इसीलिए आकाश दीप को कप्तान रोहित शर्मा ने दूसरी पारी में एक भी ओवर नहीं दिया।

चौथा दिन : शुभमन गिल

चौथे दिन का खेल शुरु होने से पहले मुक़ाबला भारत की मुट्ठी में लग रहा था लेकिन अगर गिल की संयमित और सूझबूझ पारी नहीं होती तो भारत को 192 का लक्ष्य का पीछा करने में पसीने छूट सकते थे। 120 के स्कोर पर भारत के पांच विकेट गिर चुके थे और अब बल्लेबाज़ी करने की क्षमता के अनुसार भारत के दो विकेट ही बचे हुए थे।
हालांकि शुभमन गिल ने जुरेल के साथ मिलकर आहिस्ता आहिस्ता पारी को बढ़ाना शुरु किया और इसी का नतीजा था कि जुरेल के बल्ले से आया पहला चौका भारतीय पारी में 31 ओवर के बाद आया था। गिल ने ख़ुद भी 40 के निजी स्कोर तक एक भी बाउंड्री नहीं लगाई थी लेकिन जैसे ही भारत जीत की दहलीज़ पर पहुंचा उन्होंने दो छक्के लगाते हुए अपना अर्धशतक पूरा किया।
पहली पारी में भी गिल के बल्ले से 38 रन आए थे लेकिन वह अंपायर्स कॉल का शिकार हो गए थे। गिल के अलावा तीन अन्य बल्लेबाज़ (रजत पाटीदार, अश्विन और आकाश दीप) भी पहली पारी में अंपायर्स कॉल के चलते पवेलियन लौट गए थे। पहले टेस्ट में गिल के निराशाजनक प्रदर्शन पर टीम में उनकी जगह पर सवाल भी उठ रहे थे। लेकिन विशाखापटनम, राजकोट और फिर रांची में परिपक्वता का परिचय देते हुए गिल ने नंबर तीन के लिए भारत को एक स्थाई विकल्प देने की ओर अपने क़दम बढ़ा दिए हैं।