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क्रिकेटर, दोस्त और साथी, सारी ख़ूबियों में माहिर हैं रचिन रविंद्र

प्ले स्टेशन की चुनौतियों से लेकर टेस्ट मैच के सपनों तक कॉन्वे और ब्लंडल थे उनके साथ

गहरे दोस्‍त हैं ब्‍लंडल, कॉन्‍वे और रचिन  •  ESPNcricinfo Ltd

गहरे दोस्‍त हैं ब्‍लंडल, कॉन्‍वे और रचिन  •  ESPNcricinfo Ltd

टॉम ब्लंडल ने रचिन रविंद्र को पिछले सप्ताह कानपुर टेस्ट में न्यूज़ीलैंड की टेस्ट कैप सौंपी, इस तिकड़ी के तीसरे सदस्य डेवन कॉन्वे 12,000 किलोमीटर दूर वेलिंगटन में इस लम्हे को टीवी पर देख रहे थे और निराश थे कि इस मौक़े पर वह उनके पास नहीं थे। चोटिल हाथ की वजह से कॉन्वे टेस्ट टीम से बाहर हुए थे।
ये तीनों घनिष्ठ मित्र हैं। वे एक ही घरेलू टीम में खेलते हैं, अक्सर साथ घूमते हैं और एक दूसरे के घर खाना खाने जाते हैं। वे अपने खाली समय में एक साथ गॉल्फ़ भी खेलते थे, लेकिन रविंद्र को उनके एक क़रीबी दोस्त श्रीराम कृष्णमूर्ति ने सलाह दी कि उन्हें गॉल्फ़ नहीं खेलना चाहिए, इससे उनकी बैट स्विंग पर असर पड़ेगा। श्रीराम वेलिंगटन में कोच हैं।
तीनों का दोस्ती और चीज़ों पर भी थी, जैसे लंबे प्ले स्टेशन सेशन। कॉन्वे ने हंसते हुए बताया, "कई बार तो रात के 2 से 3 बजे तक। हम ग्रैंड थेफ़्ट ऑटो का मिशन पार करने की कोशिश करते हैं।" मैदान के बाहर पूरी मौज-मस्ती। क्रिकेट के नज़रिए से यह गहरा रिश्ता है जिसे वे सबसे ज़्यादा संजोते हैं और उसका सम्मान करते हैं। रविंद्र को तीन विश्व स्तरीय स्पिनरों के ख़िलाफ़ फीकी रोशनी में एक मनोरंजक अंतिम सत्र में आत्मविश्वास से बल्लेबाज़ी करता देख कॉन्वे को वेलिंगटन में तीन साल पहले का समय याद आ गया।
कॉन्वे याद करते हुए कहते हैं कि यह हम तीनों के लिए ही एक ख़ास लम्हा है। एक विशेष स्मृति है। हमने कहा, 'चलो सर्दियों में प्रशिक्षण के लिए तीन या चार का समूह बनाते हैं।' ऐंड्रयू फ़्लेचर [उनके वेलिंगटन सहयोगी] भी थे। हमने अपने लिए एक रूटीन तैयार किया। सुबह 7.30 से 8.30 के बीच दौड़ना। 9.00 से 10.30 तक हम जिम में होंगे। वहां से, हम सुबह 11 बजे से दोपहर के 1 बजे तक नेट में समय बिताएंगे।"
"ज़रूरी नहीं कि हमारे पास कोच हों। यह हम चारों ही थे जो ख़ुद को निर्देशित करने और एक-दूसरे की मदद करने की कोशिश कर रहे थे। हमारे पास वास्तविक सोच होगी कि हम कहां सुधार कर सकते हैं, हम एक दूसरे की ख़ुद ही मदद करना चाहते थे। जहां भी हम व्यक्तिगत रूप से पहुंचे हैं वह हमारे कठिन शारीरिक व्यायाम के साथ-साथ बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी तकनीक में सुधार का नतीजा था।"
कॉन्वे ने आगे कहा, "विचार एक-दूसरे की ख़ूबियों को बताना और उनकी कमज़ोरियों पर काम करना था। हम तीनों में अलग-अलग ताक़त है। रचिन लेग साइड पर अच्छा है। उसके पास कमाल की भारतीय कलाई हैं, वह गेंद को उनके सहारे ख़ूबसूरती से हिट करता है। टॉम शॉर्ट गेंद पर अच्छा है, मैं ऑफ़ साइड पर स्क्वेयर की ओर मज़बूत हूं। और हम हमेशा एक-दूसरे से सवाल पूछते रहते हैं। जैसे आप विकेट के किसी विशेष साइड तक कैसे पहुंचते हैं? आप किसी विशेष शॉट के लिए स्थिति में कैसे आते हैं? इसी तरह के सवाल।"
"एक-दूसरे से सीखना अच्छा था। उदाहरण के लिए, मैं लेग साइड पर थोड़ा सीमित हूं, इसलिए उस क्षेत्र में वह (रचिन) कैसे हावी है, इस पर बातचीत से मदद मिली। वह मुझे अपने विचार बताएगा। उस कार्यकाल के बाद हम न केवल बल्लेबाज़ के तौर पर, बल्कि शारीरिक रूप से भी खिलाड़ियों में विकसित हो गए। हम आगे की सोच रहे थे। सच यह है कि हम सभी एक साथ हैं, इस वातावरण में खेलना सुखद है। अतीत में हमने जो कड़ी मेहनत की है, उसका अब फल मिल रहा है। इसलिए मैं उसे टॉमी से वह टोपी प्राप्त करते हुए देखना चाहता था, यह ख़ास होता, लेकिन मैं वहां नहीं था।"
यह 2017 की सर्दियों की बात है। रचिन को बताया गया है कि वह 2018 अंडर-19 विश्व कप के लिए न्यूज़ीलैंड की योजनाओं में है। वह पहले से ही बांग्लादेश में 2016 के संस्करण में 16 वर्षीय खिलाड़ी के रूप में खेल चुके थे, लेकिन वहां उनकी सफलता सीमित रही। लिंकन में तीन महीने की पूरी तैयारी के बाद रचिन को टूर्नामेंट के लिए तरोताज़ा रहने के लिए समय निकालने के लिए कहा जाता है।
रचिन आराम करने के बजाय स्पिन के ख़िलाफ़ अपने खेल को "तरोताज़ा" करने के लिए भारत पहुंच जाते हैं। वह बेंगलुरु आते हैं, अनंतपुर से ग्रामीण विकास ट्रस्ट तक तीन घंटे की ड्राइव करते हैं, जहां पर क्रिकेट का पूरा सेट अप है। वहां पर क्यूरेटर रचिन के पिता के दोस्त हैं, जो हर साल हट हॉक्स क्रिकेट क्लब के सदस्यों को यहां पर तैयारी के लिए लाते हैं। वह कई पिच तैयार करते हैं और रचिन उस पर मेहनत करते।
रचिन कई बार एक दिन में चार सेशन तक करते थे, जिसमें लंच और चाय के लिए छोटा सा ​ब्रेक होता था। इसके बाद वह ख़ुद को लोकल मैचों में परखते थे और देर रात घर लौटते थे। रचिन का स्पिन गेम काफ़ी हद तक 2013 से इन्हीं परिस्थितियों में खेलने का परिणाम है। और इससे न्यूज़ीलैंड के अन्य खिलाड़ियों ब्लंडल और जिमी ​नीशम को भी फ़ायदा पहुंचा है, क्योंकि उन्होंने भी हट हॉक्स क्लब के साथ यहां का दौरा किया है।
कॉन्वे ने रचिन को एक युवा बल्लेबाज़ के रूप में उभरते देखा है और उन्हें कतई ताज्जुब नहीं है। कॉन्वे का मानना ​​है कि रचिन का आर अश्विन या रवींद्र जाडेजा से निपटने का तरीक़ा, आत्मविश्वास के साथ आगे और पीछे खेलना, उस मानसिकता के कारण था जो घंटों के प्रशिक्षण के कारण आई है।
कॉन्वे ने कहा, "रचिन बिल्कुल घबराया नहीं, वह बहुत शांत था और आराम से खेल रहा था। मैंने अगले दिन ज़ूम कॉल पर उससे पूछा कि वह कैसा महसूस कर रहा था। उसने कहा, 'मुझे ठीक लगा, मैं बस हर गेंद पर ध्यान दे रहा था और मैंने अपनी अपेक्षा से कहीं अधिक शांत महसूस किया।' 22 साल के एक खिलाड़ी के लिए इस तरह का डेब्यू करना शानदार था, उसने बहुत अच्छे तरीक़े से दबाव को झेला।"
कॉन्वे लिंकन में 2019 के तैयारी कैंप को याद करते हें, जहां पर रचिन पहली बार न्यूज़ीलैंड ए टीम में चुने गए थे और वह स्पिन के ख़िलाफ़ इस युवा की बल्लेबाज़ी को देखकर प्रभावित हो गए ​थे। वह कहते हैं, "हमने उस समय पर काफ़ी स्पिन प्रशिक्षण किया है। मुझे याद है कि कुछ साल पहले हमने लिंकन में अपने शीतकालीन शिविरों में एक बहुत ही समान प्रशिक्षण सत्र किया था। गेंदें घूम रही थीं और उछल रही थीं, गेंदें नीची भी रह रही थीं। वे ख़राब विकेट थे। हमारे कोचों ने जो किया था वह अच्छा था। उन्होंने हमसे कहा कि अगर आप इन नेट में आउट हो जाते हैं तो आप आउट हैं। सोचिए कि आप यहां एक टेस्ट बचाने की कोशिश करने के लिए हैं।"
"मज़े की बात है, वह एकमात्र ऐसा व्यक्ति था जो पूरे सत्र में बिना आउट हुए बल्लेबाज़ी करने में क़ामयाब रहा, हम सभी खिलाड़ी आउट हो गए थे और हमें नेट के आसपास खड़ा होना पड़ा। हम उसे परेशान करने की कोशिश कर रहे थे, जिससे वह ग़लती कर दे, लेकिन वह शानदार था। यही वजह थी कि इस टेस्ट में उसने जो किया उसे देखकर हम ताज्जुब नहीं हुए क्योंकि मैंने उसे प्रशिक्षण सत्र में उस पर डाले गए दबाव के माध्यम से उसे देखा। वाकई वह 22 साल का है, लेकिन उसके पास 35 साल की उम्र वाला दिमाग है।"
रचिन 2021 में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के लिए मौजूद नहीं रहने वाले थे। इस साल जनवरी में सुपर स्मैश मैच के दौरान डाइव लगाते समय उनके दाहिने कंधे में चोट लग गई थी और जल्द ही स्कैन से पता चला कि उनके कंधे को काफ़ी नुक़सान हुआ है। वह कम से कम 10 महीने के लिए मैदान से बाहर रहने वाले थे। सर्जन की अनुपलब्धता थी, ऐसे में सर्जन ने उन्हें एक रिहैब पर काम करने के लिए मजबूर कर दिया। वेलिंगटन फ़ायरबर्ड्स के स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग कोच निशिल शाह ने एक मज़बूत कार्यक्रम तैयार किया। वह रचिन को लंबे समय तक खेल से दूर नहीं रखना चाहते थे। वह डगआउट में बैठे और उन्होंने फ़ायरबर्ड्स को सुपर स्मैश चैंपियन बनते देखा।
दो सप्ताह बाद रचिन कंधे पर पट्टी बांधकर मैदान पर वापस आए। उन्होंने हट हॉक्स के लिए एक क्लब मैच में 55 गेंदों में 84 रनों की पारी खेली। तब तक वह चयनकर्ताओं की नज़रों पर थे। वेस्टइंडीज़ के दौरे पर न्यूजीलैंड ए के लिए एक स्टाइलिश 144 रन और एक छक्के ने चयनकर्ताओं और मुख्य कोच गैरी स्टीड को उनकी क्षमताओं के बारे में आश्वस्त किया। यह पारी सात प्रथम श्रेणी पारियों में 81 रन बनाने के बाद आई थी, जिससे यह और विशेष बन गई।
हो सकता है कि यह भाग्य का मज़ाक था, लेकिन उनके कंधे की सर्जरी के लिए एक स्लॉट मिलने में देरी एक आशीर्वाद साबित हुई, क्योंकि रचिन को सीनियर टीम के साथ इंग्लैंड के अपने पहले दौरे के लिए चुना गया था। वह बिना मैच खेले लौटे और घर पर दो सप्ताह के लिए क्वारंटीन रहे और इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात, पाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात और अब भारत के लिए निकल दिए।
चोट के 10 महीने बाद रचिन अब टेस्ट और टी20 अंतर्राष्ट्रीय में कैप्ड खिलाड़ी हैं। व्यस्त यात्रा के कारण उनके पास सेमीनार में भाग लेने या अपनी कंप्यूटर इंजीनियरिंग की डिग्री के लिए परीक्षा देने का समय नहीं है।
पिता रवि हंसते हुए कहते हैं, "मैंने अपनी पत्नी से कहा है कि उस पर कम सख्ती बरतें। वह क्रिकेट को ज़्यादा नहीं देखती है। वह बहुत ज़्यादा घबरा जाती है। जब उसके क्रिकेट की बात आती है, तो मैं उससे लगातार पूछता हूं और उससे बातें करता हूं। वह एक क्रिकेट-जुनूनी लड़का है। इन दिनों उसकी प्रेमिका भी क्रिकेट के बारे में बात करने के लिए मुझे फ़ोन करती है (हंसते हुए)।"
चोट से जूझ रहे कॉन्वे भारत के ख़िलाफ़ टेस्ट सीरीज़ से बाहर हो गए और अब वह अपने सा​थियों की वापसी का इंतज़ार कर रहे हैं। वह लंच, कॉफ़ी, लंच और क्रिकेट चर्चा फिर से शुरू करने के लिए तैयार हैं। और जब वे एक साथ अगले दौरे के लिए रवाना होंगे, तो यह तीनों के लिए एक तरह का चक्र पूरा करेगा, जो एक साथ खेले और प्रशिक्षित हुए, सबसे अच्छे दोस्त जो अब न्यूज़ीलैंड की टीम में एक साथ हैं।

शशांक किशोर ESPNcricinfo में सीनियर सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी में सीनियर सब एडिटर निखिल शर्मा ने किया है।