अपने साथियों को यह सूचित करने के चार महीने बाद कि वह अब टेस्ट क्रिकेट नहीं खेलेंगे, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने पुष्टि की है कि महमुदउल्लाह ने इस प्रारूप से संन्यास ले लिया है। महमुदउल्लाह ने हरारे में ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ बांग्लादेश के एकमात्र टेस्ट के तीसरे दिन टीम के साथ इस बारे में बातचीत की थी और मैच की अंतिम सुबह उन्हें गार्ड ऑफ़ ऑनर मिला था।

हालांकि खेल से संन्यास लेना सही अर्थों में आधिकारिक क्षमता में नहीं आता है, लेकिन चलते टेस्ट मैच के बीच महमुदउल्लाह का संन्यास लेना बोर्ड के अध्यक्ष नाज़मुल हसन को रास नहीं आया था। यहां तक कि जब जुलाई में उस टेस्ट मैच के अंतिम दिन सभी खिलाड़ियों द्वारा अपने वरिष्ठ खिलाड़ी को विदाई देने के बावजूद अब तक बीसीबी की ओर से उनके फ़ैसले की कोई मान्यता नहीं थी।

एक प्रेस रिलीज़ में, बोर्ड ने टेस्ट क्रिकेट में उनकी सेवाओं के लिए महमुदउल्लाह को धन्यवाद दिया, लेकिन यह उल्लेख नहीं किया कि उन्होंने जुलाई में ही संन्यास लेने की घोषणा की थी। महमुदउल्लाह का बयान भी उस रिलीज़ में संलग्न था, जहां उन्होंने ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ टेस्ट टीम में अपनी वापसी करवाने के लिए बीसीबी अध्यक्ष हसन का आभार व्यक्त किया।

महमुदउल्लाह ने कहा, "जिस प्रारूप का मैं इतने लंबे समय से हिस्सा रहा हूं, उसे छोड़ना आसान नहीं है। मैंने हमेशा अच्छे मौक़े पर यह निर्णय लेने के बारे में सोचा था और मेरा मानना ​​है कि यह मेरे टेस्ट करियर को ख़त्म करने का सही समय है। जब मैं टेस्ट टीम में लौटा तब मेरा समर्थन करने के लिए मैं बीसीबी अध्यक्ष का आभार व्यक्त करना चाहता हूं।

उन्होंने आगे कहा, "मैं हमेशा मुझे प्रोत्साहित करने और मेरी क्षमता पर विश्वास करने के लिए अपने साथियों और सहयोगी स्टाफ़ का धन्यवाद करता हूं। बांग्लादेश के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलना एक परम सम्मान और सौभाग्य की बात है और मैं इन यादों को संजो कर रखूंगा। मैं टेस्ट से संन्यास ले रहा हूं, लेकिन मैं वनडे और टी20 अंतर्राष्ट्रीय खेलता रहूंगा। मैं सफ़ेद गेंद की क्रिकेट में अपने देश के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देना जारी रखूंगा।"

बोर्ड और महमुदउल्लाह दोनों के बयान ने जुलाई से उनके फ़ैसले को लेकर दोनों पक्षों के बीच चल रहे एक असहज अध्याय को समाप्त कर दिया। उन्हें ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ मैच के लिए अंतिम समय पर टीम में शामिल किया गया था। इससे पहले साल 2017 से ही वह टेस्ट टीम से अंदर-बाहर होते रहे हैं। उन्हें 2017 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ घरेलू सीरीज़ से ड्रॉप किया गया था और इसके बाद पिछले साल ख़राब फ़ॉर्म के चलते दोबारा टीम से बाहर किया गया था।

ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ दमदार वापसी करते हुए महमुदउल्लाह ने नाबाद 150 रन बनाए जो उनके टेस्ट करियर का सर्वश्रेष्ठ स्कोर भी है। उन्होंने नौवीं विकेट के लिए तस्कीन अहमद के साथ 171 रन जोड़े और टीम को 220 रनों से, इस साल की इकलौती, बड़ी जीत दिलाई।

हरारे में खेला गया वह मैच महमुदउल्लाह का 50वां टेस्ट मैच भी था। साल 2009 में वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ पदार्पण करने के बाद से उन्होंने 33.49 की औसत से 2914 रन बनाए। अपनी ऑफ़-स्पिन गेंदबाज़ी से उन्होंने 43 विकेट भी चटकाए। 2018 के बाद से शाकिब अल हसन की अनुपस्थिति में महमुदउल्लाह ने छह टेस्ट मैचों में टीम का नेतृत्व किया और एक जीत दिलाई।