मैच (12)
IND v ENG (1)
BPL 2023 (2)
रणजी ट्रॉफ़ी (4)
CWC Play-off (3)
PSL 2024 (1)
WPL (1)
फ़ीचर्स

पटना से लेकर नाडियाड तक : कैसे बिहार बना रणजी ट्रॉफ़ी प्लेट चैंपियन

केवल एक लीग मैच जीतने के बाद इस टीम ने अगले साल एलीट ग्रुप में जगह बनाई

रणजी ट्रॉफ़ी की प्लेट चैंपियन बिहार टीम  •  Bihar Cricket Association

रणजी ट्रॉफ़ी की प्लेट चैंपियन बिहार टीम  •  Bihar Cricket Association

बिहार के प्रमुख कोच पवन कुमार की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं है।
रणजी ट्रॉफ़ी के प्लेट वर्ग के फ़ाइनल को जीतकर टीम को अगले सीज़न के लिए एलीट प्रतियोगिता में भेजने वाले पवन ने मणिपुर पर मिली 220 रनों की जीत को 'पूरे बिहार' को समर्पित किया।
अपने पांच ग्रुप मैचों में से केवल एक जीतने के बावजूद बिहार ने फ़ाइनल में प्रवेश किया। अरुणाचल प्रदेश के विरुद्ध मिले बोनस अंक ने उनकी मदद की। साथ ही तीन ड्रॉ मैचों में से दो में उन्होंने पहली पारी की बढ़त ली। प्रतियोगिता का फ़ॉर्मेट भी उदार था : प्लेट वर्ग में केवल छह टीमें थीं, जिनमें से चार ने सेमीफ़ाइनल में जगह बनाई।
बिहार के कप्तान आशुतोष अमन ने कहा, "मौजूदा प्रारूप ने हमें एलीट ग्रुप में पहुंचने का आदर्श अवसर प्रदान किया। इस सब के दौरान हम [एलीट ग्रुप में स्थान पाने के लिए] ज़ोर लगाने की बहुत कोशिश कर रहे थे लेकिन किसी तरह ऐसा कभी नहीं हुआ।"
2018-19 में अपने डेब्यू सीज़न में बिहार आठ में से छह मैच जीतने के बावजूद क्वार्टर-फ़ाइनल से पांच अंक पीछे रह गया। अगला साल उतना प्रभावशाली नहीं था : नौ मैचों में से तीन जीत पर्याप्त नहीं थीं। 2021-22 में भी - जब महामारी के बाद रणजी ट्रॉफ़ी फिर से शुरू हुई - वे प्लेट ग्रुप की छह टीमों में से पांचवें स्थान पर रहीं।
पवन का एक दृढ़ लक्ष्य था जब उन्हें इस सीज़न की शुरुआत में बिहार का मुख्य कोच नियुक्त किया गया था। उन्होंने कहा, "जिस दिन से मैं मुख्य कोच बना, मैंने कुछ तय किया था जिसे मैंने कभी किसी के साथ साझा नहीं किया : कि किसी भी तरह हमें एलीट ग्रुप में पहुंचना है।"
लेकिन उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षा अपने खिलाड़ियों को क्यों नहीं बताई? ऐसा उन्होंने अपने अनुभवहीन समूह पर दबाव नहीं डालने के लिए किया।
प्रमुख कोच ने कहा, "टीम मीटिंग के दौरान मैं खिलाड़ियों को यह समझाने की कोशिश करता था कि कोई कारण नहीं है जो हमें एलीट ग्रुप में जाने से रोक सकता है। मुझे लगता है कि इससे उन्हें खेलने की स्वतंत्रता मिली जिससे हमें अच्छा प्रदर्शन करने में मदद मिली।"
ग्रुप स्टेज में बिहार को न केवल अनुभव की कमी बल्कि काफ़ी विपरीत परिस्थितियों में खेलने की चुनौती से पार पाना पड़ा। वे अपेक्षाकृत ठंडे पटना से बेहद गर्मी वाले शहर अहमदाबाद गए, उसके बाद पटना लौटने से पहले ठंडे, पहाड़ी शिलॉन्ग की यात्रा की। उनकी यह यात्रा अंत में एक और गर्म शहर नाडियाड में समाप्त हुई।
शिलॉन्ग की ठंड में बिहार को मेघालय के हाथों इस सीज़न की इकलौती हार मिली। हालांकि उस मैच में बिहार ने पहली पारी की बढ़त के अंक बटोरे।
पवन ने कहा, "उस मैच में ठंडे मौसम ने अहम भूमिका निभाई। हमारे लड़कों ने संघर्ष किया क्योंकि वे इसके आदी नहीं हैं। कभी-कभी पिच ने भी हमारा साथ नहीं दिया। अहमदाबाद और नाडियाड की पिच नीरस थी और विकेट लेना बहुत कठिन था। मुझे लगता है कि हम तब प्रभावी थे जब इसकी सबसे ज़्यादा आवश्यकता थी।"
बिहार ने एक हार और तीन ड्रॉ खेलकर सेमीफ़ाइनल में प्रवेश किया। हालांकि सेमीफ़ाइनल में टीम एकजुट होकर खेली : विकेटकीपर बिपिन सौरभ ने 183 गेंदों पर 177 रन बनाए, सचिन कुमार सिंह ने आक्रामक 75 रनों की पारी खेली और बाएं हाथ के स्पिनर आशुतोष ने मैच में कुल आठ विकेट लिए।
आशुतोष ने कहा कि वह गेंदबाज़ और कप्तान के रूप में अपने कर्तव्यों को संतुलित करने की कोशिश करते हैं। उदाहरणस्वरूप जब वह गेंदबाज़ी करते हैं, तो उनका एकमात्र विचार विकेटों के साथ योगदान देना होता है। लेकिन जब वह गेंदबाज़ी नहीं करते हैं, तब वह दूसरों को प्रेरित करने की कोशिश करते हैं।
सौरभ के बड़े शॉट पवन को वीरेंद्र सहवाग की याद दिलाते हैं और आशुतोष ने इस खिलाड़ी की प्रशंसा की। आशुतोष ने कहा, "वह सबसे रोमांचक हैं। आप उन्हें जल्द ही आईपीएल में भी देख सकते हैं। वह ऐसे छक्के लगाते हैं जैसे हमारी टीम से कोई और नहीं लगा सकता।"
पवन ने साकिबुल गनी की प्रशंसा की जिन्होंने फ़ाइनल में 205 रन बनाए। इस सीज़न में कई मैचों में अच्छी शुरुआत को साकिबुल बड़े स्कोर में नहीं बदल पाए थे लेकिन पवन ने कहा कि साकिबुल के धैर्य ने बिहार को 'एक छोर को पकड़कर रखने' में मदद की। 585 रनों के साथ साकिबुल बिहार के सर्वाधिक स्कोरर रहे।
सचिन ने 562 रन और 20 विकेटों का योगदान दिया, सौरभ ने तीन शतक लगाए। साकिबुल, सचिन और सौरभ की औसत 47 से नीचे नहीं गई। इसके अलावा मध्यम गति के तेज़ गेंदबाज़ वीर प्रताप सिंह बंगाल से छत्तीसगढ़ जाने के बाद इस सीज़न के पहले बिहार से साथ जुड़े।
इस सीज़न से पहले 32 प्रथम श्रेणी मैचों में 82 विकेट लेने वाले वीर प्रताप को आशुतोष ने बिहार में शामिल होने के लिए मना लिया। आशुतोष ने कहा कि उनके 'पुराने दोस्त' ने ड्रेसिंग रूम में शांति की भावना ला दी।
आशुतोष ने कहा "वीर ने [बिहार] आने से पहले मुझसे बात की थी। मैंने उन्हें आगे क़दम बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया था क्योंकि मुझे पता था कि बंगाल और आईपीएल में उनके अनुभव से हमें फ़ायदा होगा। वह हमेशा हमें बताते हैं कि अलग-अलग परिस्थितियों में कैसे प्रतिक्रिया करनी है।"
पवन के अनुसार बिहार के एलीट ग्रुप में जाते हुए वीर प्रताप की उपस्थिति और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। पवन ने कहा, "लोग कहते हैं ना कि चीज़ों को दुरुस्त रखने के लिए घर पर एक बुज़ुर्ग व्यक्ति की आवश्यकता होती है, और वही वही थे, जो अपने साथ बहुत अनुभव लेकर आए, जिसने हमारी खिलाड़ियों की मानसिकता को आकार देने में मदद की।"
प्रमुख कोच ने आगे कहा, "उन्होंने (वीर प्रताप) समय के साथ जो सीखा उसके बारे में उनसे बात करते रहे और मुझे लगता है कि सचिन का खेल विशेष रूप से उनकी कंपनी से प्रभावित हुआ क्योंकि वह बल्ले और गेंद से योगदान देते रहे। सचिन ने सुधार करना सीखा और उन्होंने फ़ाइनल में शतक भी लगाया।"
जबकि वीर प्रताप ने इस सीज़न में 16 विकेट लिए, 28 विकेटों से साथ आशुतोष बिहार के शीर्ष विकेट लेने वाले खिलाड़ी थे। कप्तान ने अपने करियर के पिछले अध्याय में सर्विसेज़ के साथ पर्याप्त मौक़े नहीं मिलने के बाद अपने अवसरों का अधिकतम लाभ उठाया।
यह पूछे जाने पर कि एलीट ग्रुप में वापस आने पर उन्हें कैसा लगा, आशुतोष ने कहा: "यह मेरे लिए घर लौटने जैसा है।"
प्लेट ट्रॉफ़ी अपने नाम करने के बाद बिहार के लिए आगे की राह अगले सीज़न में कठिन और संभावित रूप से कहीं अधिक फ़ायदेमंद होगी।

हिमांशु अग्रवाल ESPNcricinfo में सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर अफ़्ज़ल जिवानी ने किया है।