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धर्म को लेकर किसी पर हमला करना निराशाजनक और दयनीय : कोहली

सोशल मीडिया पर मिली गाली गलौज के बाद भारतीय कप्तान ने किया मोहम्मद शमी का समर्थन

बाहर से लोग क्या सोचते हैं, हमारे समूह के भीतर इसका कोई मूल्य नहीं है : विराट कोहली  •  ICC via Getty

बाहर से लोग क्या सोचते हैं, हमारे समूह के भीतर इसका कोई मूल्य नहीं है : विराट कोहली  •  ICC via Getty

भारतीय कप्तान विराट कोहली ने सोशल मीडिया पर अपमानजनक बातों का सामना करने वाले अपने साथी तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद शमी का समर्थन किया है। पिछले रविवार को टी20 विश्व कप 2021 के पहले मैच में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ मिली 10 विकेटों की हार के बाद शमी सोशल मीडिया और ख़ासकर इंस्टाग्राम पर दुर्व्यवहार के अधीन थे। शमी 3.5 ओवरों में 43 रन देकर भारत के सबसे महंगे गेंदबाज़ रहे थे और उन्हें कही गई ज़्यादातर बातें इस्लामोफ़ोबिया के तहत उनके धर्म से संबंधित थी।
कोहली ने न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ अपने दूसरे मैच से पहले दुबई में कहा, "एक बड़ा कारण है कि सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति से व्यक्तिगत रूप से बात करने का साहस नहीं रखने वाले रीढ़विहीन लोगों की बजाए हम मैदान पर खेल रहे हैं। वे पीछे छिप जाते हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों का मज़ाक उड़ाते हैं और यह आज की दुनिया में मनोरंजन का एक स्रोत बन गया है। यह सचमुच मानवीय क्षमता का निम्नतम स्तर है और देखने में बहुत दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद है। मैं इन लोगों को इसी नज़रिए से देखता हूं।"
कोहली ने आगे कहा, "मेरे लिए धर्म के आधार पर किसी पर हमला करना एक मनुष्य द्वारा की जाने वाली सबसे दयनीय बात है। हर किसी को अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है लेकिन मैंने व्यक्तिगत रूप से किसी के धर्म के बारे में [के ख़िलाफ़] भेदभाव करने के बारे में कभी नहीं सोचा। वह हर इंसान के लिए एक बहुत ही पवित्र और व्यक्तिगत चीज़ है और इसे वहीं छोड़ देना चाहिए।"
कोहली ने इस बात पर ज़ोर दिया कि पूरी टीम शमी के साथ है और टीम की संस्कृति इतनी मज़बूत है कि इस तरह के हमलों का असर होने का कोई मौक़ा नहीं था।
कोहली ने आगे बताया, "लोग हम पर अपनी निराशा इसलिए निकालते हैं क्योंकि उन्हें इस बात की कोई समझ नहीं है कि हम मैदान पर कितना प्रयास करते हैं। उन्हें इस तथ्य की कोई समझ नहीं है कि मोहम्मद शमी ने पिछले कई वर्षों में भारत को अनगिनत मैच जिताए हैं। जब टेस्ट क्रिकेट में प्रभाव डालने की बात आती है तो वह जसप्रीत बुमराह के साथ हमारे प्राथमिक गेंदबाज़ रहे हैं। अगर लोग इसे और देश के लिए उनके जुनून को नज़रअंदाज़ कर सकते हैं, तो मैं ईमानदारी से उन लोगों पर अपने जीवन का एक मिनट भी बर्बाद नहीं करना चाहता। ना ही शमी और ना ही टीम का कोई अन्य सदस्य। हम उनके साथ खड़े हैं और 200 प्रतिशत उनका समर्थन करते हैं। उन पर हमला करने वाले लोग और अधिक बल के साथ आने पर भी हमारे भाईचारे, टीम के भीतर हमारी दोस्ती को हिला नहीं सकते। टीम के कप्तान के रूप में, मैं आपको आशवासन दे सकता हूं कि हमने एक ऐसी संस्कृति का निर्माण किया है जहां ये चीज़ें इस माहौल में 0.0001 प्रतिशत भी घुसपैठ नहीं करेंगी। यह मेरी तरफ़ से पूरी गारंटी है।"
कोहली के अनुसार इस तरह के हमलों में शामिल लोगों में साहस की कमी है, और वह करुणा की कमी और निराशा के कारण ऐसा करते हैं।
"एक समूह के तौर पर हम समझते हैं कि हमें एक साथ रहने की, एक-दूसरे का समर्थन करने की और अपनी ताक़त पर ध्यान देने की आवश्यकता है। हम खेल खेलते हैं और समझते हैं कि खेल कैसे चलता है। बाहर से लोग क्या सोचते हैं, हमारे समूह के भीतर इसका कोई मूल्य नहीं है। हमने कभी इस पर ध्यान केंद्रित नहीं किया है और आगे भी नहीं करेंगे। जैसा कि मैंने पिछली बार भी कहा था, लोग यह नहीं समझते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करने के लिए क्या करना पड़ता है। हम यहां-वहां जाकर अपने काम के बारे में बाते नहीं करते हैं। हम अपने कार्यों पर ध्यान देते हैं, और अगर मैच आपके पक्ष में नहीं जाता है, तो आप इससे सीख लेते हैं और आगे बढ़ते हैं," यह कहकर कोहली ने अपनी बात का अंत किया।