टेनिस बॉल क्रिकेट से की शुरुआत, अब घरेलू सर्किट में दिल्ली का चमकता सितारा हैं प्रिंस

IPL 2025 में ट्रैविस हेड को बोल्ड कर सुर्खियां बटोरने वाले प्रिंस पिछले दो साल से VHT में दिल्ली की तरफ़ से सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज़ हैं

प्रिंस विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी में इस सीज़न अब तक 16 विकेट हासिल कर चुके हैं © AFP/Getty Images

प्रिंस यादव अभी वह सपना जी रहे हैं, जो उन्होंने कभी देखा/सोचा भी नहीं था। उन्होंने 17 साल की उम्र तक लेदर गेंद को छुआ तक नहीं था। वह एक टेनिस बॉल प्रोफ़ेशनल थे, जिन्होंने गांव में खेतों से क्रिकेट खेलने की शुरुआत की थी और फिर पूरे देश में घूम-घूमकर टेनिस बॉल क्रिकेट खेलने लगे।

आज प्रिंस दिल्ली की सीमित ओवर टीम के एक अहम सदस्य हैं। पिछले साल दिल्ली की तरफ़ से सैयद मुश्ताक़ अली ट्रॉफ़ी (SMAT) और विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी (VHT) में सर्वाधिक विकेट लेकर उन्होंने IPL में लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) की टीम में जगह बनाई थी। इस साल वह फिर से SMAT के बाद VHT में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं और सात मैचों में 18.00 की बेहतरीन औसत और 5.03 की इकॉनमी से रन देते हुए 16 विकेट ले चुके हैं।

वीरेंद्र सहवाग के कारण मशहूर नजफ़गढ़ के पास एक छोटे से गांव दरियापुर ख़ुर्द से आने वाले प्रिंस के घर वाले नहीं चाहते थे कि प्रिंस कभी क्रिकेट खेलें। रेलवे से रिटायर हो चुके और गांव में ही रहकर खेती करने वाले उनके पिता रामनिवास यादव का मानना था कि अगर ज़िंदगी में आगे बढ़ना है, तो पढ़ाई करनी होगी। इसी कारण उन्होंने अपनी बड़ी बेटी को पढ़ाई कराई और वह अब एक अध्यापक हैं। रामनिवास अपने इकलौते बेटे से भी ऐसा ही उम्मीद रखते थे। लेकिन घर के सबसे दुलारी संतान, जिनका नाम भी इसी कारण प्रिंस रखा गया था, का मन कभी पढ़ाई में लगा ही नहीं।

ESPNcricinfo से बातचीत में प्रिंस कहते हैं, "मैं 12-13 साल का था, तो स्कूल बंक कर गांव के खेतों में टेनिस बॉल क्रिकेट खेलने जाता था। ऐसा तीन-चार सालों तक चला और धीरे-धीरे मैं टेनिस बॉल प्रोफ़ेशनल बन गया। पहले तो ख़ुद पैसे लगाकर मैच और टूर्नामेंट खेलने पड़ते थे, लेकिन बाद में इसके पैसे मिलने लगे। अब मैं सूरत-मुंबई से लेकर कोलकाता तक टूर्नामेंट खेलने बाहर जाने लग गया। लेकिन मेरे घर वालों ख़ासकर पापा को यह मंज़ूर नहीं था। वह मुझे इतना डांटते थे कि मैं उसके बारे में बात भी नहीं करना चाहता। लेकिन मेरा मन पढ़ाई में कभी लगा ही नहीं और अंत में उन्हें भी यह स्वीकार करना पड़ा।"

देश भर में घूम-घूमकर टेनिस बॉल क्रिकेट खेल रहे प्रिंस की ज़िंदगी में अहम मोड़ तब आया, जब दिल्ली और दिल्ली कैपिटल्स (DC) की तरफ़ से खेल चुके ललित यादव की नज़र उन पर पड़ी।

प्रिंस बताते हैं, "मैं 17 साल का था, तब हमारे गांव के पास ही एक नई-नई क्रिकेट एकेडमी खुली थी। वहां पर एक क्रिकेट टूर्नामेंट हो रहा था और गांव के लोग चाहते थे कि मैं गांव की टीम की तरफ़ से उसमें हिस्सा लूं, क्योंकि तब तक टेनिस बॉल में मेरा अच्छा नाम हो चुका था और मैं अच्छी गेंदबाज़ी करता था। उन्हें लगा कि शायद मैं लेदर बॉल से भी अच्छा कर लूंगा, लेकिन मैंने कभी लेदर बॉल छुआ भी नहीं था। उस टूर्नामेंट को देखने ललित भैया के साथ-साथ दिल्ली रणजी टीम के विज़न पांचाल और रोहन राठी भैया भी आए थे। उन्होंने दो-तीन मैचों में मेरी गेंदबाज़ी देखी और मुझे नजफ़गढ़ की एकेडमी ज्वाइन करने की सलाह दी, जहां ये तीनों ख़ुद अभ्यास करते थे।"

अब प्रिंस अपने गांव से 15 किलोमीटर दूर नजफ़गढ़ की स्पोर्टिंग क्रिकेट क्लब एकेडमी जाने लगे। हरियाणा के पूर्व रणजी खिलाड़ी अमित वशिष्ठ की कोचिंग वाली इस एकेडमी से प्रदीप सांगवान, ललित, मयंक डागर और विराट कोहली को उनके आख़िरी प्रथम श्रेणी मैच में बोल्ड करने वाले हिमांशु सांगवान जैसे खिलाड़ी निकले हैं। इस एकेडमी में प्रिंस को प्रदीप सांगवान से पर्याप्त सहयोग मिला और उन्होंने सांगवान से लेदर गेंद से तेज़ गेंदबाज़ी के गुर सीखे।

प्रिंस बताते हैं, "टेनिस बॉल में बल्लेबाज़़ों की मार से बचने और विकेट लेने के लिए आपके पास यॉर्कर ही एकमात्र हथियार होता है और मैं ओवर के छह की छह गेंद यॉर्कर फेंक लेता था। मुझे बस यॉर्कर फेंकने आता था, लेकिन मुझे नहीं पता था कि स्विंग और सीम क्या होता है, लेंथ गेंद क्या होती है। लेदर बॉल क्रिकेट में आने के बाद मुझे ये सब चीज़ें सीखनी पड़ी।

"हालांकि मैं यह कहूंगा कि टेनिस बॉल क्रिकेट खेलने से मुझे इन सब चीज़ों को सीखने में बहुत फ़ायदा हुआ, क्योंकि टेनिस बॉल बहुत हल्की होती है और उसको आपको ज़ोर से पटकना होता है। इसकी वजह से मेरा आर्म स्पीड बहुत तेज़ था और मुझे हार्ड लेंथ की गेंदों को फेंकने में इससे फ़ायदा हुआ।"

प्रिंस ने IPL में अब तक तीन विकेट लिए हैं और तीनों विकेट यॉर्कर गेंदों पर ही आए हैं। वहीं दिल्ली प्रीमियर लीग (DPL) के पहले और दूसरे संस्करण में भी यॉर्कर के साथ-साथ हार्ड लेंथ की गेंदों पर ही उन्हें अधिकतर विकेट मिले हैं। घरेलू क्रिकेट के लिस्ट ए मैचों में वह बीच के और डेथ ओवरों के एक उपयोगी गेंदबाज़ हैं और अब तक 13 लिस्ट-ए मैचों में 19.62 की औसत से 27 विकेट ले चुके हैं।

ख़ैर, एकेडमी में आने के एक साल के भीतर ही प्रिंस दिल्ली की अंडर-19 टीम में आ गए और उन्होंने 2018-19 सीज़न में कूच बिहार ट्रॉफ़ी (डेज़ क्रिकेट) और 2019-20 सीज़न में वीनू मांकड़ ट्रॉफ़ी (वनडे क्रिकेट) खेला।

उन्होंने वीनू मांकड़ ट्रॉफ़ी की आठ पारियों में 26.00 की औसत और सिर्फ़ 3.79 की इकॉनमी से गेंदबाज़ी करते हुए 10 विकेट लिए और 2020 के अंडर-19 विश्व कप टीम में पहुंचने के बहुत क़रीब पहुंच गए, जिसमें यशस्वी जायसवाल, ध्रुव जुरेल, तिलक वर्मा और रवि बिश्नोई जैसे खिलाड़ी खेले थे। वह विश्व कप से ठीक पहले हुए अंडर-19 चैलेंजर ट्रॉफ़ी में इंडिया अंडर-19 बी टीम का हिस्सा थे। वह इस सीज़न में दिल्ली की सीनियर टीम की सैयद मुश्ताक़ अली ट्रॉफ़ी (SMAT) टीम का भी हिस्सा थे, लेकिन उन्हें एकादश में मौक़ा नहीं मिला।

प्रिंस यादव ने DPL 2024 में भी काफ़ी प्रभावी प्रदर्शन किया था © PTI

हालांकि इसी दौरान उन्हें उनके करियर का एक बड़ा झटका लगा। उम्र में धोखाधड़ी संबंधी मामले में दिसंबर 2020 में BCCI ने उन्हें दो साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया और यह भी सज़ा सुनाई कि प्रतिबंध के बाद वह सीधे सीनियर क्रिकेट में ही खेल सकेंगे। यह प्रिंस के करियर का सबसे मुश्किल दौर था और वह इसके बारे में ज़्यादा बात नहीं करना चाहते हैं। हालांकि उन्हें इस दौरान सांगवान और ललित जैसे खिलाड़ियों का पूरा समर्थन मिलता रहा और वह एकेडमी में लगातार अभ्यास के साथ-साथ मौक़ा मिलने पर टेनिस बॉल क्रिकेट भी खेलते रहें।

प्रिंस कहते हैं, "मैं अभी भी टेनिस बॉल क्रिकेट खेलता हूं। IPL से वापिस आने के बाद भी मैं टेनिस बॉल के कुछ मैचों को खेला, क्योंकि मुझे टेनिस बॉल क्रिकेट अच्छा लगता है और मैं वहीं से निकला हूं।"

बहरहाल प्रतिबंध समाप्त होने के बाद प्रिंस ने वापसी की पुरज़ोर कोशिश की और DDCA के लीग मैचों में अच्छा प्रदर्शन कर दिल्ली की सीनियर टीम में जगह बनाई। 2023 में वह LSG के नेट बॉलर भी थे।

2023-24 के घरेलू सीज़न में जम्मू और कश्मीर के ख़िलाफ़ मैच में उनका रणजी ट्रॉफ़ी डेब्यू हुआ। हालांकि कोहरे से प्रभावित इस मैच में सिर्फ़ 42 ओवर का खेल हो पाया और उनकी गेंदबाज़ी नहीं आई। उत्तराखंड के ख़िलाफ़ एक और मैच में उन्होंने दोनों पारियों में 33 ओवर गेंदबाज़ी की, लेकिन उन्हें सिर्फ़ एक विकेट मिला और वह फिर टीम से बाहर हो गए।

इसके बाद अगस्त-सितंबर में हुए दिल्ली प्रीमियर लीग (DPL) 2024 में उन्होंने पुरानी दिल्ली-6 की तरफ़ से खेलते हुए 10 मैचों में 24.23 की औसत और 8.18 की इकॉनमी से 13 विकेट लिए और IPL स्काउट्स का ध्यान अपनी तरफ़ खींचा। पुरानी दिल्ली-6 वही टीम है, जिसके कप्तान ऋषभ पंत और मुख्य कोच विजय दहिया थे। दोनों ही क्रमशः कप्तान और सहायक कोच के रूप में LSG से जुड़े हुए हैं। DPL के प्रदर्शन के बाद प्रिंस को LSG के अलावा दो-तीन और टीमों से ट्रायल के कॉल आए और बाद में बड़ी नीलामी में उन्हें LSG ने ही 30 लाख की उनकी बेस प्राइस पर ख़रीदा।

प्रिंस कहते हैं, "DPL से मुझे IPL में ख़रीदा गया यह तो ठीक है, लेकिन इसका सबसे बड़ा फ़ायदा यह हुआ कि मेरी घरेलू क्रिकेट में वापसी हुई। मैं पिछले सीज़न में दिल्ली की तरफ़ से पूरा VHT और SMAT टूर्नामेंट खेला और उनके लिए सबसे ज़्यादा विकेट लिए। वहां मैंने अच्छा किया तो LSG में भी मुझे मौक़ा मिला।"

Prince Yadav ने अपने दूसरे IPL मैच की पहली ही गेंद पर हेड को चलता कर दिया था © Associated Press

ब्रेट ली की तेज़ी और डेल स्टेन की आक्रामकता को आदर्श मानने वाले प्रिंस ने SMAT 2024-25 सीज़न के आठ मैचों में 27.1 की औसत और 7.54 की इकॉनमी के साथ 11 विकेट लिए। वहीं VHT में उन्होंने इससे भी बेहतर करते हुए छह मैचों में 22 की औसत और 5.14 की इकॉनमी के साथ 11 विकेट लिए। इसके बाद जब IPL में उन्हें जब LSG के शुरुआती मैचों में मौक़ा मिला तो उन्होंने अपने दूसरे ही मैच में पहली ही गेंद पर ट्रैविस हेड को बोल्ड कर सुर्खियां बंटोरी। हालांकि वह बाद के मैचों में अपने फ़ॉर्म को बरक़रार नहीं रख सके, टीम से बाहर भी हुए और अंत में छह पारियों में तीन विकेट के साथ टूर्नामेंट की समाप्ति की।

अपने पहले IPL सीज़न से मिली सीख के बारे में पूछने पर प्रिंस बताते हैं, "पहला सीज़न मेरे लिए ठीक-ठाक रहा। काफ़ी सारे लर्निंग मोमेंट रहें और मैंने उससे बहुत कुछ सीखा। मुझे टूर्नामेंट के ठीक पहले ही बता दिया गया था कि मुझे शुरुआत के मैच मिलेंगे, क्योंकि आवेश (ख़ान) भैया और आकाश दीप भैया फ़िट नहीं थे। मुझे भी पता था कि अगर मुझे अपनी जगह बनानी है, तो इन्हीं मैचों में अच्छा करना होगा।

"ज़हीर सर से मुझे बहुत मदद मिली और उन्होंने मुझे मेरा ऐक्शन बेहतर करने में मदद की। मैं अभी भी उनके टच में हूं और अगर अपनी गेंदबाज़ी को लेकर मेरे मन में कुछ सवाल रहते हैं, तो मैं उनसे पूछता हूं। उन्होंने मुझे गेम को पढ़ने और परिस्थितियों के अनुसार गेंदबाज़ी सीखने में बहुत मदद की। इसके अलाावा शार्दुल (ठाकुर) भैया, आवेश भैया और आकाशदीप भैया से भी काफ़ी कुछ सीखने को मिला।"

IPL खेलने के बाद प्रिंस के जीवन में एक सबसे बड़ा बदलाव आया है कि उन्हें लोग पहचानने लगे हैं। हालांकि उनके लिए सबसे बड़ी संतुष्टि यह है कि उनका परिवार, ख़ासकर उनके पिता अब उनसे ख़ुश हैं। भावुक प्रिंस मुस्कुराते हुए कहते हैं, "जब उन्हें कोई मेरे नाम से, 'प्रिंस का पापा' कहकर पहचानता है, तो वह अब बहुत प्राउड फ़ील करते हैं। वह अब ख़ुश हैं और अगर वह ख़ुश हैं, तो मैं भी ख़ुश हूं।"

दया सागर ESPNcricinfo हिंदी में सब एडिटर हैं।dayasagar95

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