ग्वालियर से शिवपुरी और अब WPL: अनुष्का शर्मा की प्रेरणादायक कहानी

गुजरात जायंट्स के लिए अपने डेब्यू मैच में ही प्रभावित करने वाली अनुष्का को केवल जीतना पसंद है

अनुष्का शर्मा ने अपने WPL डेब्यू पर 30 गेंदों में 44 रन बनाए © AFP/Getty Images

अनुष्का शर्मा को अपने पहले WPL मैच में अपना तेवर दिखाने में ज़्यादा समय नहीं लगता। वह एज़ ग्रुप क्रिकेट में मध्य प्रदेश (MP) की कप्तान रह चुकी हैं और BCCI द्वारा कराई जाने वाली चैलेंजर ट्रॉफ़ी में भी टीमों की अगुवाई कर चुकी हैं। वह फ़िजिकल एजुकेशन और स्पोर्ट्स में बैचलर डिग्री भी कर रही हैं और यह उनका तीसरा साल है। वह यह सब कैसे संभालती हैं?

जवाब तुरंत आता है। "मेरे को तो बस जीतना अच्छा लगता है।"

22 साल की अनुष्का एक बल्लेबाज़ी ऑलराउंडर हैं, जिन्हें गुजरात जायंट्स (GG) ने WPL 2026 की नीलामी में साइन किया था। अनुष्का को अपने WPL डेब्यू में प्रभाव छोड़ने में भी देर नहीं लगी और उन्होंने यूपी वॉरियर्ज़ (UPW) के ख़िलाफ़ नंबर 3 पर खेलते हुए 30 गेंद में 44 रन बनाए। इस पारी से GG को पहली बार अपने WPL अभियान की जीत भरी शुरुआत करने में मदद मिली।

"मुझे बल्लेबाज़ी करना बहुत पसंद है," अनुष्का ESPNcricinfo से कहती हैं। "भले ही हमारे पास मेरे साइज़ का बैट नहीं था, फिर भी मैं थापी से बल्लेबाज़ी करती रही [कपड़े धोने में इस्तेमाल होने वाली लकड़ी की बैट जैसी चीज़], फिर पापा ने प्लास्टिक का बैट दिलाया, और फिर लकड़ी का बैट।"

ग्वालियर में पैदा हुई अनुष्का ने सबसे पहले अपने घर के पीछे भाई के साथ क्रिकेट खेलना शुरू किया और फिर भाई के दोस्तों के साथ मोहल्ले में खेलने लगीं। उनका चार साल बड़ा भाई बल्लेबाज़ी करना पसंद करता था और अनुष्का को तेज़ गेंदबाज़ी कराता था। बड़े लड़कों के साथ खेलते हुए उनकी ऊर्जा और जज़्बे को अनदेखा नहीं कर सकते थे। जब वह नौवीं कक्षा में थीं, तब उनके इलाके के एक व्यक्ति ने उनके पिता को ग्वालियर जिला क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा कराए जा रहे अंडर-16 ट्रायल के बारे में बताया।

"मैंने सोचा, 'बढ़िया, क्योंकि स्कूल से छुट्टी मिल जाएगी।' वह कहती हैं। "ट्रायल में मेरा चयन हो गया और मैंने कुछ चयन मैच खेले। यह पहली बार था जब मैंने लड़कियों के साथ खेला।"

वह जल्दी ही 2021-22 में अंडर-19 वनडे ट्रॉफ़ी में MP की कप्तान थीं और टीम को फ़ाइनल तक टीम ले गईं। वह टीम की दूसरी सबसे ज़्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाज़ रहीं। अनुष्का ने अंडर-19 वनडे चैलेंजर ट्रॉफ़ी में इंडिया बी को जीत भी दिलाई और सर्वाधिक रन बनाने वालों की सूची में दूसरे स्थान पर रहीं।

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अरुण सिंह शिवपुरी में मध्य प्रदेश स्टेट वीमेंस क्रिकेट एकेडमी के प्रमुख कोच हैं, जो ग्वालियर से 120 किलोमीटर दूर है और राज्य सरकार द्वारा चलाई जाती है। पहले यह लड़कों की एकेडमी हुआ करती थी, जिसकी अगुवाई पूर्व भारतीय ऑलराउंडर मदन लाल करते थे। लेकिन जून 2022 में इसे महिला क्रिकेटरों के लिए एक स्पोर्ट्स हॉस्टल के रूप में बदल दिया गया और इसे संभालने की ज़िम्मेदारी अरुण को दी गई। एकेडमी ने 24 खिलाड़ियों का चयन किया, जिनके रोज़मर्रा के ख़र्चे, कोचिंग, किट, मेडिकल ख़र्च और शिक्षा का ख़र्च, सब राज्य सरकार उठाती थी। अनुष्का इस पहली बैच का हिस्सा थीं और यह क़दम ऐसे समय आया, जब वह अपने भविष्य को लेकर सोच रही थीं।

वैसे ही जैसे वैष्णवी शर्मा के मामले में हुआ, जो ग्वालियर से ही हैं। अनुष्का को भी शहर में महिला क्रिकेट की सुविधाएं ठीक नहीं लगती थीं और उनका परिवार उनकी महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए इंदौर जाने पर विचार कर रहा था। यह कोरोना का ही समय था, जब अनुष्का भी मानसिक तौर पर थोड़ा लो भी महसूस कर रही थीं।

अनुष्का ने गार्डनर के साथ शतकीय साझेदारी बनाई © AFP/Getty Images

"मैं अनुष्का को काफ़ी समय से जानता था और वह जूनियर व एज़ ग्रुप क्रिकेट में अच्छा कर रही थी," अरुण ESPNcricinfo से कहते हैं। "2016 में अनुष्का के पिता उसे मेरे पास लाए। उसके पास हमेशा अच्छी बल्लेबाज़ी की क्षमता थी और मैं उस पर नज़र रख रहा था। शिवपुरी की एकेडमी में आने के बाद मैंने उससे कहा, 'सिर्फ़ जूनियर क्रिकेट में अच्छा करने से संतुष्ट मत हो। अगर ऊंचे स्तर पर खेलना है, तो अलग बनना पड़ेगा।' उसने इसे दिल से लिया और बहुत मेहनत की।"

अनुष्का लंबी और पतली थीं, और उनका पहला बड़ा काम अपनी स्ट्रेंथ और फ़िटनेस पर काम करना था। "मुझे पता था कि उसके पास मारने की रेंज ज़्यादा है, लेकिन ताक़त कम थी," अरुण कहते हैं। "हमने उसकी बैकलिफ़्ट ऊंची कराई और फिर रेंज-हिटिंग का अभ्यास कराया।

"ये सब सेंटर विकेट पर होते थे और हमारे पास गेंदबाज़ी मशीन के साथ तेज़ गेंदबाज़ और स्पिनर भी थे। जब भी मैं उन्हें रेंज-हिटिंग कराता था, कभी भी बाउंड्री 70 मीटर से कम नहीं रखता था। मुझे पता था कि महिला क्रिकेट में बाउंड्री 55-60 मीटर से ज़्यादा नहीं होती। अगर वह 70 मीटर क्लियर कर सकती है, तो 60 मीटर तो आराम से कर लेगी।"

इस सीज़न सीनियर ज़ोनल T20 ट्रॉफ़ी में सेंट्रल ज़ोन के लिए खेलते हुए अनुष्का ने पांच छक्के मारे, जो टूर्नामेंट में संयुक्त रूप से दूसरे सबसे ज़्यादा थे। उनकी पावर-हिटिंग ने उन्हें WPL टीमों की नज़र में ला दिया और उन्होंने GG व RCB के ट्रायल में प्रभावित भी किया।

अनुष्का के साथ अरुण के कोचिंग सत्र का एक ढांचा था। वह रोज़ाना लगभग 500 से 600 गेंदें खेलती थीं और हफ़्ते में दो-तीन दिन गेंदबाज़ी पर भी काम करती थीं। उन्हें महसूस हुआ कि उनका खेल धीरे-धीरे बेहतर हो रहा है। एक छोटा सा रोडब्लॉक तब आया, जब उनकी गेंदबाज़ी ऐक्शन पर सवाल उठा, लेकिन अरुण और अनुष्का ने मिलकर उस पर बहुत काम किया और उसका नतीजा भी मिला। पिछले दो घरेलू सीज़न में सिर्फ़ T20 क्रिकेट में ही उन्होंने 26 विकेट लिए हैं।

वह कहती हैं, "मुझे लगता है कि बहुत से कोच सिर्फ़ स्किल सिखाते हैं। लेकिन मानसिक तौर पर उन्होंने मुझे, मेरे गेम पर बहुत भरोसा दिलाया।"

दूसरी चीज़ जिस पर अनुष्का ने अरुण के साथ जानबूझकर काम किया, वह तेज़ गेंदबाज़ी के खिलाफ लॉन्ग ऑन से लेकर डीप एक्स्ट्रा कवर के बीच आर्क में हिट करना था। यह UPW के ख़िलाफ़ उनकी पारी में साफ़ दिखा।

अरुण कहते हैं, "उसमें जो संभावनाएं मैं देखता हूं, उसके हिसाब से UP वॉरियर्ज़ के ख़िलाफ़ अनुष्का का प्रदर्शन सिर्फ़ 50% था। उसमें इससे कहीं बेहतर करने की क्षमता है।"

दिल्ली कैपिटल्स (DC) के खिलाफ अगले मैच में अनुष्का ने फ़ील्डिंग में भी अपनी फुर्ती दिखाई और कुछ रन बचाकर GG को चार रन से जीतने में मदद की।

यह जुनून अनुष्का को बख़ूबी दर्शाता है, जिन्हें बस जीतना पसंद है।

एस सुदर्शनन ESPNcricinfo में सब एडिटर हैं. @Sudarshanan7

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