डिवाइन: रिटायर्ड आउट होना T20 क्रिकेट में एक अन्य रणनीतिक विकल्प

डिवाइन: 'मुझे लगता है कि संवाद बहुत ज़रूरी है और यह समझना भी कि किसी खिलाड़ी को रिटायर्ड आउट क्यों किया गया' © BCCI

न्यूज़ीलैंड की पूर्व कप्तान और गुजरात जायंट्स (GG) की ऑलराउंडर सोफ़ी डिवाइन का मानना है कि T20 क्रिकेट में बल्लेबाज़ों को रिटायर्ड आउट करना एक आम रणनीति बन जाएगी, भले ही इस पर राय बंटी हुई है।

वीमेंस प्रीमियर लीग (WPL) में दो दिनों के भीतर दो रिटायर्ड आउट देखने को मिले। मुंबई इंडियंस (MI) के ख़िलाफ़ मैच में GG की आयुषी सोनी इस टूर्नामेंट के इतिहास में रिटायर्ड आउट होने वाली पहली खिलाड़ी बनीं, जबकि अगले ही दिन UP वॉरियर्ज़ (UPW) ने हरलीन देओल को रिटायर्ड आउट किया, जिसके बाद इस रणनीतिक आउट को लेकर काफ़ी बहस हुई।

GG द्वारा आयोजित एक मीडिया बातचीत में डिवाइन ने कहा, "इस पर काफ़ी बहस होगी कि लोग इसे कैसे देखते हैं। मेरे लिए यह बस एक और रणनीतिक विकल्प का साधन है। ऐसे फ़ैसले हमेशा टीम को पहले रखकर लिए जाते हैं और यह सोचा जाता है कि टीम के लिए मोमेंटम पाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है। कुछ लोगों को यह पसंद आएगा, कुछ लोगों को यह बिल्कुल पसंद नहीं आएगा। मुझे लगता है कि यह इस्तेमाल करने के लिए एक शानदार विकल्प है।"

हाल के समय में पुरुषों और महिलाओं दोनों की फ़्रैंचाइज़ी क्रिकेट में खिलाड़ियों को रिटायर्ड आउट करने का विकल्प ज़्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है। सिर्फ़ 2026 में, पुरुषों की फ़्रैंचाइज़ी क्रिकेट में छह बल्लेबाज़ रिटायर्ड आउट किए जा चुके हैं, जिसमें सुपर स्मैश में वोल्ट्स के ख़िलाफ़ एक मैच के दौरान नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट ने लगातार ओवरों में ऐसा किया था। हाल ही में मेलबर्न रेनगेड्स ने BBL में सिडनी थंडर के ख़िलाफ़ मैच में मोहम्मद रिज़वान को रिटायर्ड आउट किया था।

डिवाइन ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि जो खिलाड़ी रिटायर्ड आउट होते हैं, वे इसे सकारात्मक रूप में देखें कि वे टीम में योगदान देना चाहते हैं और टीम के लिए सबसे अच्छा कर रहे हैं। यह वाक़ई एक मुश्किल स्थिति होती है क्योंकि अगर आपको रिटायर्ड आउट किया जाए, तो यह कभी अच्छा नहीं लगता। लेकिन मुझे लगता है कि हम आने वाले मैचों में इसे और ज़्यादा होते हुए देखेंगे। हम पुरुषों के खेल में भी इसे थोड़ा ज़्यादा देख रहे हैं और मुझे लगता है कि महिला क्रिकेट भी इसी राह पर चलेगा। इसे एक विकल्प के रूप में सकारात्मक ही माना जाना चाहिए।"

आयुषी सोनी, WPL में रिटायर्ड आउट होने वाली पहली खिलाड़ी बनी थीं © BCCI

हर रणनीति की तरह इसमें भी जोखिम है कि यह उल्टा भी पड़ सकता है, जैसा कि तब हुआ, जब UPW ने दिल्ली कैपिटल्स के ख़िलाफ़ हरलीन देओल को 36 गेंद पर 47 रन के स्कोर पर रिटायर्ड आउट किया। उस समय 17 ओवर के बाद UPW का स्कोर 141 रन पर 4 विकेट था, लेकिन इसके बाद टीम बिखर गई और आख़िरी तीन ओवरों में सिर्फ़ 13 रन बने और चार विकेट गिरे।

डिवाइन ने कहा, "हर बार आप सही नहीं होंगे और यह क्रिकेट के किसी भी फ़ैसले जैसा ही है। हमेशा ऐसे मौक़े होंगे कि कभी फ़ैसला काम करेगा और कभी नहीं करेगा। यही इस खेल का हिस्सा है। [IPL के विपरीत] हमारे पास इंपैंक्ट प्लेयर का नियम नहीं है। मैं इंपैंक्ट प्लेयर रखने की तुलना में खिलाड़ियों को रिटायर्ड आउट करने के पक्ष में ज़्यादा हूं। रिटायर्ड आउट होने के बाद आप मैदान में फिर से फ़ील्डिंग और गेंदबाज़ी के लिए उतर सकते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि यह आगे चलकर और आम होता जाएगा।"

लेकिन क्या यह किसी बल्लेबाज़ की मानसिक स्थिति को प्रभावित करता है? "मुझे लगता है कि संवाद बहुत ज़रूरी है और यह समझना भी कि किसी खिलाड़ी को रिटायर्ड आउट क्यों किया गया। मुझे लगता है कि यही [GG के प्रमुख कोच] माइकल क्लिंगर ने किया, जब उन्होंने आयुषी से जाकर बात की और यह समझाया कि उन्होंने यह फ़ैसला क्यों लिया," डिवाइन ने कहा।

"मेरे लिए यह टीम के फ़ायदे और टीम को पहले रखने के लिए होता है। इसलिए यह बात साफ़ तौर पर बताई जानी चाहिए। मैच के बाद या अगले दिन दोबारा बातचीत होनी चाहिए, ताकि यह समझाया जा सके कि खिलाड़ी द्वारा क्या अलग किया जा सकता था और आगे बेहतर होने के क्या मौक़े हैं। मुझे लगता है कि संवाद बहुत ज़रूरी है और यह खिलाड़ियों को सिर्फ़ रिटायर्ड आउट करने तक सीमित नहीं है। कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां स्पष्ट संवाद, खिलाड़ियों को उनकी भूमिका और अलग-अलग मैच परिस्थितियों में उनसे हो रही अपेक्षाओं को समझने में मदद कर सकता है।"

आशीष पंत ESPNcricinfo में सब एडिटर हैं

Comments