निकी प्रसाद और स्नेह राणा ने दिखाई पावर हिटिंग की नई रेंज
मंगलवार का WPL मुक़ाबला भारतीय घरेलू महिला क्रिकेट की बेहतर होती गहराई का बेहतरीन उदाहरण है। और वह, यह भी दिखाता है कि इसने WPL के स्तर को कैसे ऊपर उठाया है।
कुछ साल पहले तक "24 गेंदों पर 60 रन" का समीकरण लगभग नामुमकिन लगता था। ज़्यादा से ज़्यादा, कुछ चौके-छक्के हार के अंतर को थोड़ा कम करते थे। निकी प्रसाद और स्नेह राणा ने जो भरोसा दिखाया, उसकी उम्मीद नहीं ही होती थी। वह भी सोफ़ी डिवाइन और ऐश गार्डनर के खिलाफ़, जो महिला क्रिकेट की शीर्ष अंतरराष्ट्रीय गेंदबाज़ हैं। बिल्कुल भी नहीं।
एक साल पहले तक प्रसाद अंडर-19 सर्किट में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही थीं। हालांकि उन्होंने भारत को जूनियर विश्व कप जिताया था, लेकिन उन्हें ऋचा घोष या शेफ़ाली वर्मा जैसी तुरंत पहचान नहीं मिली और न ही उनके द्वारा उस तरह का प्रदर्शन देखने को मिला।
दरअसल, WPL 2025 में वह संघर्ष करती दिख रही थीं। वह सिर्फ़ टच खिलाड़ी की छवि से बाहर निकलने की कोशिश कर रही थीं। उनकी भूमिका निचले मध्य क्रम में एक फ़्लोटर की थी। इस भूमिका में उन्हें अपना पावर गेम तलाशना, शॉट्स की रेंज बढ़ाना और सबसे अहम एंगल्स पर काम करना ज़रूरी था।
कोचिंग और एनालिटिक्स में तमाम तरक्की के बावजूद भारतीय घरेलू क्रिकेट इन स्तरों से नीचे चल रहा है। वहां कोच अक्सर रस्सियों के पार से फ़ील्ड सजाते हैं और बल्लेबाज़ों को सुरक्षित विकल्प अपनाने की सीख दी जाती है। यहीं WPL ने मदद की है, जहां खिलाड़ियों को ऑफ़-सीज़न में कोचों के सामने जवाबदेह बनाया जाता है और मैदान से दूर के समय में खिलाड़ियों के आकलन के लिए एक सिस्टम मौजूद है।
प्रसाद के फ़ोकस के क्षेत्रों में से एक था अपना पावर गेम बेहतर करना। यह कहना अभी जल्दबाज़ी होगी कि पूरी तरह बदलाव आ गया है, लेकिन जो मेहनत की गई है, वह साफ़ दिखता है। सिर्फ़ शॉट्स की रेंज या उनके खेलने के तरीके में ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास में भी।
सोफ़ी डिवाइन के 17वें ओवर में लगाए गए चार गेंदों पर चार चौकों को ही देखिए। मिड-ऑफ़ के ऊपर से लॉफ़्ट, पीछे हटकर कवर के ऊपर इनसाइड-आउट शॉट, शॉर्ट थर्ड के पास से हल्का टच और जगह बनाकर प्वाइंट के पीछे यॉर्कर का प्लेसमेंट। न कोई ज़बरदस्ती, न कोई जोखिम। किसी ऐसे खिलाड़ी के लिए यह ख़ास था, जिसने इस सीज़न में इससे पहले सिर्फ़ एक बार बल्लेबाज़ी की थी। यह वह प्रसाद नहीं थीं, जो पिछले साल के फ़ाइनल में दिल्ली कैपिटल्स (DC) के शीर्ष क्रम के ढह जाने के बाद दबाव में दिखी थीं।
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स्नेह राणा का मामला और भी दिलचस्प है। 30 साल की उम्र में वह पिछले साल की नीलामी में अनसोल्ड रहीं और घर पर बैठकर सोचती रहीं कि वह अपने T20 गेम में क्या सुधार करें। उन्होंने एक ट्रेनर रखा और ऐसी सुविधा ली, जहां वह बिना रुकावट जितनी देर चाहें गेंदें हिट कर सकें। सैकड़ों गेंदें मारने के अलावा वह घंटों गेंदबाज़ी भी करती थीं।
फिर अचानक, RCB में एक लेट इंजरी कॉल-अप ने उनके करियर की दिशा बदल दी। UP वॉरियर्ज़ के ख़िलाफ़ 12 गेंदों पर 43 रन चाहिए थे और उन्होंने छह गेंदों पर 26 रन ठोक दिए। यह WPL में एक ओवर में सबसे ज़्यादा रन थे, वह भी दीप्ति शर्मा के ओवर से। उन्होंने मुक़ाबले को रोमांचक आख़िरी ओवर तक पहुंचा दिया। RCB हार गई, लेकिन राणा के करियर की दिशा बदल चुकी थी।
WPL के तुरंत बाद उनकी भारत की टीम में वापसी हुई। उन्होंने विश्व कप जीत में भूमिका निभाई और इस बार की नीलामी में वह हॉट प्रॉपर्टी बन गईं। मंगलवार की रात ने याद दिलाया कि जब तक राणा मैदान पर हैं, कोई भी लक्ष्य बहुत बड़ा नहीं होता। लेग साइड की ओर खेले गए हुक, आगे बढ़कर लगाया गया स्लॉग, छोटे गैप्स को निशाना बनाने की समझ- उन्होंने 19वें ओवर की शुरुआत में गार्डनर के खिलाफ़ दो चौके और एक छक्का जड़ा।
भारतीय क्रिकेट के एक फ़ॉलोअर के तौर पर आप चाहते थे कि यह हार में न बदले, लेकिन आख़िरकार ऐसा ही हुआ, जब आख़िरी गेंद पर DC को चार रन चाहिए थे, लेकिन प्रसाद नहीं लगा सकीं।
"जिस पल मैं बल्लेबाज़ी के लिए उतरी, मुझे पता था कि हम यह मैच जीतेंगे," प्रसाद ने कहा। "डिवाइन के उस ओवर में, जिसमें हमें कुछ बाउंड्री मिलीं, उसके बाद हमने बात की कि मोमेंटम बनाए रखना है और बाउंड्री लेते रहना है।
"मैं निराश हूं कि टीम को जीत नहीं दिला सकीं, लेकिन यह मेरे लिए सीख है। मैं वापस जाऊंगी, थोड़ी और मेहनत से ट्रेनिंग करूंगी और अगली बार जब मैं ऐसी ही स्थिति में रहूंगी, तो टीम को जीत दिलाऊंगी।"
प्रसाद विजेता हैं। राणा विजेता हैं। उस रात भी, जब उनकी टीम को दिल तोड़ देने वाले अंदाज़ में हार मिली। तसल्ली बस इतनी कि DC अब भी दौड़ में है और प्लेऑफ़ में पहुंचने का एक आख़िरी मौक़ा बाक़ी है।
शशांक किशोर ESPNcricinfo में वरिष्ठ संवाददाता हैं
