केएल राहुल ने अब तक
भारत की कप्तानी 12 वनडे, तीन टेस्ट और एक T20 में की है। नियमित कप्तान शुभमन गिल के चोटिल होने पर उन्हें एक बार फिर यह जिम्मेदारी मिली है। राहुल खु़द को वनडे फ़ॉर्मेट में एक फ़िनिशर मानते हैं। उन्होंने चैंपियंस ट्रॉफ़ी के सेमीफ़ाइनल में
ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ विजयी रन बनाए थे। इसके बाद फ़ाइनल में
न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ भी अंत तक बल्लेबाज़ी की थी।
राहुल ने रविवार को रांची में होने वाले साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ पहले वनडे से एक दिन पहले कहा, "घोषणा से ठीक एक दिन पहले मुझे बताया गया था कि मुझे यह मौक़ा मिल सकता है और मुझे टीम की कप्तानी करनी पड़ सकती है। मैं पहले भी कप्तानी कर चुका हूं और यह जिम्मेदारी मुझे उत्साहित करती है। मैं इसका आनंद लेना चाहता हूं। टीम के लिए सही निर्णय लेना हमेशा मुझे अच्छा लगता है और मैं इसे लेकर ज़्यादा नहीं सोचता।"
राहुल के पास ऐसे खिलाड़ियों का अनुभव और सहयोग भी है जो लंबे वक़्त से एक साथ खेल रहे हैं और 2027 वनडे विश्व कप की तैयारी में यह अनुभव काम आएगा।
राहुल ने कहा, "मेरे आसपास रोहित, विराट, जड्डू जैसे वरिष्ठ खिलाड़ी हैं जो हर समय मदद करते हैं। हम सभी अपनी क्रिकेट इस सोच के साथ खेलते आए हैं कि हम सब टीम में नेतृत्वकर्ता हैं और टीम के लिए हमेशा अहम योगदान देने का प्रयास करेंगे। चाहे कप्तान मैं रहूं या कोई और, हमारा उद्देश्य हमेशा बड़े लक्ष्य की दिशा में सामूहिक प्रयास करना ही होता है।"
हाल ही में राहुल की सबसे ताज़ा याद ऐसी गेंद पर आउट होने की है जिसमें वह साइमन हार्मर की ऑफ़ ब्रेक को कवर ड्राइव करने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन गेंद की ड्रिफ़्ट और डिप ने उन्हें चकमा दे दिया और वह बोल्ड हो गए।
राहुल से जब उस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "मुझे इस बात का अफ़सोस नहीं है कि मैंने कोई और शॉट क्यों नहीं खेला। अफ़सोस सिर्फ़ यह है कि जो करने की कोशिश की, उसे सही तरह से अंज़ाम नहीं दे पाया।"
"टेस्ट में उस स्थिति में दिन के आख़िरी कुछ ओवर बचे थे। उस समय आगे बढ़कर बड़े शॉट की कोशिश करना सही विकल्प नहीं था। पीछे मुड़कर देखें तो शायद मैं आगे आकर गेंद को ब्लॉक कर सकता था लेकिन वह ओवर की सिर्फ़ दूसरी गेंद थी। अगर आगे बढ़कर आउट हो जाता तो यह सवाल मेरे मन में रह जाता कि यह सही था या ग़लत। उस समय डिफ़ेंस ही सबसे सही विकल्प था, जिसे मैं ठीक से निभा नहीं पाया।"
घरेलू परिस्थितियों में विपक्षी स्पिनरों ने भारत के बल्लेबाज़ों की परीक्षा ली है और अब सवाल यह उठ रहा है कि भारतीय बल्लेबाज़ स्पिन को पहले जितना सहज क्यों नहीं खेल पा रहे।
राहुल ने कहा, "मुझे नहीं पता कि हम पहले स्पिन बेहतर क्यों खेलते थे और अब क्यों दिक्कत हो रही है। कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। हमें सिर्फ़ यह सोचना है कि खिलाड़ी के तौर पर हम कैसे बेहतर हो सकते हैं। अगले छह-सात महीने में श्रीलंका के दौरे और ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ घरेलू सीरीज़ में हम फिर ऐसी परिस्थितियों में होंगे। तब तक हमें अपनी तकनीक में ज़रूरी सुधार करने होंगे। हम उन खिलाड़ियों से भी बात करेंगे जिन्होंने स्पिन को बेहतरीन तरीके से खेला है ताकि उनसे कुछ सीख सकें।"