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रियान पराग 2.0: क्या नंबर चार पर बल्लेबाज़ी है राजस्थान के बल्लेबाज़ की सफलता का राज़?

पिछले कुछ सीज़न सोशल मीडिया पर ट्रोल होने वाले राजस्‍थान रॉयल्‍स के बल्‍लेबाज़ ने दिया है अब मुंहतोड़ जवाब

Riyan Parag scoops the ball, Rajasthan Royals vs Gujarat Titans, IPL 2024, Jaipur, April 10, 2024

पराग इस सीज़न में अब तक तीन अर्धशतक लगा चुके हैं  •  BCCI

रियान पराग के पिता पराग दास ने पिछला सीज़न ख़त्‍म होने के बाद रियान से पूछा था कि वह सोशल मीडिया पर इतना ट्रोल क्‍यों होते हैं? तब रियान ने जवाब दिया था कि वह ऐसा कुछ नहीं करते हैं कि ट्रोल हों, लेकिन जिस दिन कुछ कर जाएंगे तो शायद उस दिन और ट्रोल होंगे। तब पराग दास ने अपने बेटे रियान से कहा था कि वे चाहते हैं कि उनके बल्ले से रन बने। रियान के रन नहीं बन रहे थे, इसी वजह से सोशल मीडिया पर फ़ैंस उनसे गुस्‍सा थे।
अब रियान के इस सीज़न में उनके आंकड़ों पर नज़र डालिए। राजस्थान रॉयल्स का घर में पहला मैच और लखनऊ सुपर जायंट्स सामने थी। पहले बल्‍लेबाज़ी करते हुए राजस्‍थान की टीम पांच ओवर में 49 रनों पर दो विकेट गंवा चुकी थी। तब कप्‍तान संजू सैमसन का साथ रियान पराग ने दिया था, जहां पर उन्‍होंने 29 गेंद में 43 रन की पारी खेली। अगला मैच फ‍िर घर में इस बार सामने दिल्‍ली कैपिटल्‍स थी। राजस्‍थान ने पहले बल्‍लेबाज़ी करते हुए 13.3 ओवर में चार विकेट गंवा दिए थे, लेकिन इस बार हीरो बने रियान जिन्‍होंने 45 गेंद में नाबाद 85 रन की पारी खेलकर टीम को 185 रनों तक पहुंचा दिया। गुजरात टाइटंस के ख़िलाफ़ फिर से उन्होंने सर्वाधिक 76 रनों की पारी खेली।
वह इस सीज़न पांच पारियों में दो बार नाबाद रहते हुए 87 की औसत और 158 के स्ट्राइक रेट से 261 रन बना चुके हैं, जो कि टूर्नामेंट में विराट कोहली के बाद दूसरा सर्वाधिक है। पराग के नाम इस सीज़न तीन अर्धशतक है, जबकि पिछले पांच सीज़न में उनके नाम सिर्फ़ दो अर्धशतक है।
अक्‍सर हम एक खु़शमिज़ाज़ रियान को मैदान पर देखते थे, जो बिहू डांस करता है और कई बार सोशल मीडिया पर ट्रोल भी होता है। लेकिन इस साल उनमें यह बदलाव कैसे आया? इसके पीछे उनकी और उनके पिता की मेहनत छिपी है।
पराग दास ने ESPNcricinfo से कहा, "उम्र के साथ बदलाव तो आ ही जाता है। उसने जो मेहनत की है, वह पहले भी करता था लेकिन जब कोई सफल होता है तो ऐसी बात निकलकर आती है। अभी उसी हिसाब से वह बदलाव देखने को मिल रहा है, जो हम चाहते थे। पहले वह युवा था, क्रिकेट के मजे़ लेता था, अब भी लेता है, लेकिन अब वह अधिक मेच्योर भी हो गया है।"
पिछले IPL सीज़न के बाद से ही रियान का करियर उड़ान भरा है। वह देवधर ट्रॉफ़ी में सबसे अधिक 354 रन बनाने वाले बल्‍लेबाज़ थे, जहां उन्‍होंने सबसे अधिक 23 छक्‍के भी लगाए थे। साथ ही सबसे अधिक विकेट लेने के मामले में भी वह 11 विकेटों के साथ संयुक्त रूप से तीसरे नंबर पर थे। इसके बाद उन्‍होंने सैयद मुश्‍ताक़ अली ट्रॉफ़ी में लगातार रिकॉर्ड सात अर्धशतक लगाए और लगभग अकेले ही अपनी टीम आसाम को टी20 टूर्नामेंट के सेमीफ़ाइनल तक ले गए।
इसके बाद विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी (घरेलू वनडे) आई, लेकिन गुजरात के ख़‍िलाफ़ पहले मैच में कप्‍तानी करते हुए 32 रन की पारी खेलने के बाद वह चोटिल हो गए।
पराग दास ने बताया, "मैंने इस बार उससे कहा था कि रणजी ट्रॉफ़ी में कम से कम 500 रन बनने चाहिए। इस बार घरेलू वनडे में कंधे की चोट की वजह से वह केवल एक ही मैच खेल पाया। उसके बाद वह रणजी में भी सिर्फ़ चार मैच खेला, जिसमें उसके दो शतक और एक 75 रन की पारी थी। बंगाल के ख़ि‍लाफ़ रणजी मैच में उसको दोबारा उसी जगह पर चोट लगी और तभी से वह रिहैब पर था।"
पराग दास हमेशा से रियान की प्रतिभा को अच्‍छे से पहचानते थे। वह जानते थे कि रियान चौथे नंबर पर बल्‍लेबाज़ी करते हुए क्‍या कर सकता है। ऐसा मुमकिन भी है क्‍योंकि रियान के पिता पराग ही उनके बचपन के कोच रहे हैं। पराग ने इस सीज़न की क़ामयाबी का श्रेय राजस्‍थान रॉयल्‍स के बल्‍लेबाज़ी कोच जुबिन नौटियाल को दिया। उनका मानना है कि वह राजस्थान के सभी खिलाड़‍ियों को नज़दीक से फ़ॉलो करते हैं। वह रियान की क़ाबिलयत को समझ गए थे तभी उनको नंबर चार के लिए तैयार रहने को बोला था।
पराग ने कहा, "अभी देखिए वह गुवाहाटी में मिलता ही नहीं है। राजस्थान के कैंप में रहता है और बहुत कम समय ही उसको घर के लिए मिल पाता है। अगर कुछ दिन क्रिकेट से दूर भी रहता है तो वह जिम में ही अधिकतकर समय ब‍िताता है। वह समय के साथ परिपक्‍व हो चुका है। जहां तक उसकी तकनीक की बात है तो इसमें अधिक बात नहीं की जा सकती। हम सभी ने देखा है कि शिवनारायण चंद्रपॉल का स्टांस कैसा होता था, लेकिन एक बार जब वह पॉज़‍िशन में आते थे तो उनका सिर बहुत स्थिर रहता था।"
रियान को जो इस सीज़ हमने करते देखा है, उनके पिता इसके आदी रहे हैं। उनका मानना है कि चौथे नंबर पर बल्‍लेबाज़ी करते हुए उन्‍होंने कई बार ऐसी स्थिति को देखा है और इससे टीम को उबारा है।
उनके पिता ने कहा, "आसाम की तरफ से वह जब भी खेलते हैं तो ऐसी ही स्थिति उसको मिलती है। शॉट्स की बात करें तो यह उसकी ताक़त है। उसकी टाइमिंग लाज़वाब है, लेकिन अभी भी उसका सर्वश्रेष्‍ठ आना बाक़ी है। केरला के ख़‍िलाफ़ रणजी में जो उसने 100 किया था, मैंने उसे लाइव देखा था। उसकी बल्‍लेबाज़ी से पता चल जाता है कि वह क्‍या शानदार बल्‍लेबाज़ी कर रहा है। यह बदलाव अब उसका हर मैच में देखने को मिल रहा है।"
शायद कम ही लोग जानते हैं कि 2018 अंडर-19 विश्‍व कप खेलते हुए रियान की अंगुली में चोट लगी हुई थी। लेकिन नेट्स पर रियान की बल्‍लेबाज़ी देखकर तब कोच राहुल द्रविड़ बहुत प्रभावित हुए थे। उन्‍होंने बस यही रियान से कहा था कि तुम्‍हें नॉकआउट मैचों के लिए तैयार रहना है। रियान अपनी टूटी उंगली के साथ उन नॉकआउट मैचों को खेले, जहां भारत विजेता बनकर उभरा।
उन दिनों को याद करते हुए पराग ने कहा, "रियान सारे नॉकआउट मैच टूटी उंगली से खेला था। उसके बाद जब IPL नीलामी हुई तो उसको किसी टीम ने नहीं लिया। द्रविड़ ने तब पूछा था कि क्या वह परेशान तो नहीं हैं। वह जानता था कि उसका नंबर आ ही जाना है। शायद किसी को नहीं पता होगा कि अंडर 19 विश्‍व कप नॉकआउट मैचों में वह टूटी उंगली के साथ खेला था और बाद में उसकी टीम चैंपियन भी बनी।"
आसाम जैसे देश के उत्‍तर पूर्वी हिस्‍से से खेलना कितना कठिन काम है। यह बात रियान भी अच्‍छी तरह से जानते हैं। देवधर ट्रॉफ़ी के बाद हिंदुस्‍तान टाइम्‍स को दिए इंटरव्‍यू में उन्‍होंने कहा था, "जब आप आसाम जैसे प्रदेश से खेलते हो, जहां पर अधिक लोग क्रिकेट से नहीं जुड़े होते हैं तो आप हमेशा बड़े प्रदेश के खिलाड़‍ियों से अधिक रन बनाना चाहते हो। मैं इसकी शिकायत नहीं कर रहा हूं, लेकिन यही हक़ीक़त है। अगर कोई तीन शतक बनाता है तो आपको पांच शतक बनाने होते हैं।"
रियान को पता है कि उनका करियर किस ओर करवट ले रहा है और उसमें इस सीज़न उनका बल्‍ला इसका साक्षी रहा है। अगर आने वाले मैचों उनका बल्‍ला ऐसे ही चलता रहा तो वह इस टूर्नामेंट में एमर्जिंग प्‍लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट के तौर पर भी उभर सकते हैं।

निखिल शर्मा ESPNcricinfo हिंदी में सीनियर सब एडिटर हैं। @nikss26