मैच (6)
त्रिकोणीय सीरीज़ (1)
भारत बनाम साउथ अफ़्रीका (1)
एशिया कप (2)
वेस्टइंडीज़ बनाम न्यूज़ीलैंड (महिला) (1)
ऑस्ट्रेलिया बनाम वेस्टइंडीज़ (1)
ख़बरें

साउथ अफ़्रीकी अंपायर कर्टज़न की कार दुर्घटना में हुई मौत

कर्टज़न ने 1993 से अपने अंतर्राष्ट्रीय करयिर की शुरुआत की थी

Rudi Koertzen was presented with a bronze statue to mark his 108th and final Test, Pakistan v Australia, 2nd Test, Headingley, 4th day, July 24 2010

कर्टज़न ने 331 अंतर्राष्ट्रीय मैचों में अंपायरिंग की थी।  •  Getty Images

पूर्व साउथ अफ़्रीकी अंपायर रूडी कर्टज़न का 73 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। वह आईसीसी एलीट पैनल के अंपायर रह चुके हैं। कर्टज़न के मौत का कारण एक कार एक्सीडेंट है। वह केपटाउन से पूर्वी केप जा रहे थे। वह वहीं अपने परिवार के साथ रहते थे।
कर्टज़न ने 331 अंतर्राष्ट्रीय मैचों में अंपायरिंग की थी। 2010 में उनकी सेवानिवृत्ति के समय यह एक रिकॉर्ड था। बाद में पाकिस्तान के अंपायर अलीम डार इस मामले में उनसे आगे निकल गए। डार और वेस्टइंडीज़ के स्टीव बकनर के साथ कर्टज़न 100 से अधिक टेस्ट में अंपायरिंग करने वाले केवल तीन अंपायरों में से एक थे।
डार ने कर्टज़न की मौत के बारे में कहा, "यह उनके परिवार, साउथ अफ़्रीका और क्रिकेट के लिए काफ़ी बड़ी क्षति है। मैंने उनके साथ कई मैचों में अंपायरिंग की है। वह न केवल एक अंपायर के रूप में अच्छे व्यक्ति थे, बल्कि एक उत्कृष्ट सहयोगी भी थे। खिलाड़ी भी उनका काफ़ी सम्मान करते थे।"
साथी साउथ अफ़्रीकी अंपायर, मरे इरास्मस ने कहा, "रूडी शारीरिक और मानसिक रूप से एक बहुत ही मज़बूत चरित्र वाले व्यक्ति थे। उन्होंने साउथ अफ़्रीकी अंपायरों के लिए वैश्वविक मंच पर पहुंचने का मार्ग प्रशस्त किया। हम सभी को विश्वास दिलाया कि यह संभव है। एक युवा अंपायर के रूप में मैंने उनसे काफ़ी कुछ सीखा है।"
कर्टज़न ने पहली बार अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में 1992-93 में भारत-साउथ अफ़्रीका दौरे पर अंपायरिंग की थी। 1999 में वेस्टइंडीज़ और भारत के बीच चल रहे एक मैच में उन्हें ग़लत फ़ैसले देने के लिए रिश्वत दी जा रही थी लेकिन इसे उन्होंने नकार दिया। इसके लिए उनकी काफ़ी प्रशंसा हुई।
2010 में अंतर्राष्ट्रीय अंपायरिंग से संन्यास लेने के बाद, कर्टज़न ने स्लो डेथ : मेमोरिस ऑफ़ अ क्रिकेट अंपायर (क्रिस शूमैन के साथ) एक पुस्तक प्रकाशित की, जिसमें उन्होंने 2007 विश्व कप फ़ाइनल और अन्य बड़े मैचों में की गई "त्रुटियों" को स्पष्ट रूप से संबोधित किया।
उन्होंने आख़िरी बार 2011 के एक आईपीएल मैच में अंपायरिंग की थी।