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कृष्णस्वामी : कोहली और कवर ड्राइव की गाथा

बल्लेबाज़ी कोच विक्रम राठौर के अनुसार कोहली को शॉट लगाने के लिए सही गेंदों का चयन करना चाहिए

चार दिनों के भीतर भारतीय टेस्ट कप्तान विराट कोहली दो बार शरीर से दूर कवर ड्राइव लगाने के प्रयास में आउट हुए हैं। कितना दूर? पहली पारी में लुंगिसानी एनगिडी के ख़िलाफ़ आउट होने के बाद उनके विकेट से जुड़ी यह तस्वीर ट्विटर पर उपलब्ध थी।
हां, एनगिडी की वह आउट स्विंग गेंद लगभग 11वें स्टंप की लाइन में थी जब कोहली ने उसे खेलने का प्रयास किया था। बुधवार को भी वह इसी प्रकार से आउट हुए थे। लंच के बाद मार्को यानसन की पहली गेंद ऑफ़ स्टंप से बाहर थी और ड्राइव करने वाली लेंथ से हल्की सी पीछे भी। यह भी याद रखने योग्य था कि 6' 8'' की ऊंचाई वाले यानसन को पिच से असमतल उछाल मिल रहा था।
कवर ड्राइव हमेशा से ही कोहली के लिए कारगर शॉट रहा है। वह कई बार इस शॉट को खेलते हैं और कभी-कभी तो गुड लेंथ की गेंदों पर भी। जब चीज़ें उनके पक्ष में जा रही होती है तो गेंद बल्ले के बीच में लगकर सीमा रेखा की ओर चली जाती है। साथ ही यह उनकी बल्लेबाज़ी का अहम हिस्सा भी है - ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो के गेंद दर गेंद आंकड़ों के अनुसार 2018 से तेज़ गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ यह कोहली का दूसरा सबसे सफल शॉट है। इस शॉट से वह सात बार आउट हुए हैं और उन्होंने पिछले चार सालों में 54 की औसत से 378 रन बनाए हैं।
वहीं दूसरे तरफ़ 408 रनों के साथ फ़्लिक उनका सबसे सफल शॉट रहा है। हालांकि वह इसे खेलते हुए नौ बार आउट हुए हैं। बावजूद इसके, कोई यह नहीं कहता कि उन्हें फ़्लिक खेलना बंद कर देना चाहिए या फिर उसे खेलते समय सावधानी बरतनी चाहिए।
हालांकि यह बात भी सही है कि हालिया समय में कवर ड्राइव कोहली की दोस्त कम और दुश्मन ज़्यादा बनती जा रही है। ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो के आंकड़ों के अनुसार 2020 की शुरुआत से विदेशी टेस्ट मैचों में तेज़ गेंदबाज़ों के विरुद्ध कवर ड्राइव या ऑफ़ ड्राइव लगाते हुए कोहली की औसत केवल 18.40 की हो गई है। वहीं इसकी तुलना में 2018 और 2019 में उनकी औसत 64.25 की थी। इस दौरान भारत ने इंग्लैंड, साउथ अफ़्रीका, ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज़ का दौरा किया था।
यह बात साफ़ है कि कुछ तो बदलाव आया है।
जब चौथे दिन के खेल के बाद बल्लेबाज़ी कोच विक्रम राठौर से कोहली के आउट होने के अंदाज़ के बारे में पूछा गया तो उन्होंने संकेत दिए कि कोहली को आक्रमण करने के लिए सही गेंदों का चुनाव करना होगा।
राठौर ने कहा, "यह ऐसा शॉट है जिससे उन्होंने बहुत रन बनाए हैं। इसलिए उन्हें यह शॉट खेलना चाहिए। मुझे लगता है कि आपका सबसे मज़बूत पक्ष आपकी कमज़ोरी भी बन सकता है। अगर आप उस शॉट को नहीं खेलेंगे तो आप आउट ही नहीं होंगे, है ना? लेकिन आपके बल्ले से रन भी नहीं निकलेंगे।"
"कब वह शॉट खेलना है? इसी बात पर लगातार चर्चा हो रही है - क्या वह सही गेंद थी, क्या वह शॉट खेलने की सही स्थिति थी और अगर हम अपने खेल पर थोड़ा और ध्यान दें तो वह बेहतर होगा। वह यह शॉट अच्छा खेलते हैं और इससे बहुत रन बनाते हैं इसलिए उन्हें यह शॉट खेलते रहना चाहिए। हालांकि उन्हें सही गेंदों का चयन करना होगा।"
हालिया समय में सेंचूरियन की ही तरह कोहली ऐसी गेंदों पर आउट हुए हैं जिन्हें छोड़ा जा सकता था। हेंडिंग्ले में जेम्स एंडरसन की क्रॉस सीम गेंद थी जिसे जाने दिया जा सकता था, एडिलेड में 36 ऑलआउट की पारी में पैट कमिंस के ख़िलाफ़ भी शरीर से दूर की गेंद पर गली में कैच थमाने से बचा जा सकता था। और तो और वेलिंग्टन में उन्होंने काइल जेमीसन की गेंद को ड्राइव कर स्लिप में कैच देकर टेस्ट क्रिकेट में उनके पहले दिन को यादगार बना दिया।
हो सकता है कि ड्राइव अब कोहली की कमज़ोरी बनती जा रही है। लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि शायद भाग्य उनका साथ नहीं दे रहा है। जैसा कि मैंने पहले कहा, पिछले दो वर्षों में कवर ड्राइव और ऑफ़ ड्राइव पर कोहली की औसत गिरकर 20 से भी कम हो गई है। परंतु इस दौरान पहले (72.73) की तुलना में वह अधिक नियंत्रण (83.72) के साथ इस शॉट को खेल रहे थे।
2018 और 2019 में कवर ड्राइव या ऑफ़ ड्राइव खेलते समय हर 13.5 ग़लत शॉट में कोहली एक बार आउट हो रहे थे। ग़लत शॉट का मतलब यह है कि वह हर बार इस शॉट पर आउट होने से पहले 13.5 बार या तो बीट हो रहे थे या बाहरी किनारा लगने पर गेंद फ़ील्डर तक नहीं पहुंची। पिछले दो वर्षों में यह आंकड़ा गिरकर 2.8 हो गया है यानि तीन में से एक कवर ड्राइव या ऑफ़ ड्राइव में नियंत्रण में ना होने पर वह आउट हुए हैं।
शायद भाग्य कोहली के पसंदीदा शॉट में उनका साथ नहीं दे रहा है।
भाग्य के अलावा दूसरे कारण भी इसके पीछे हो सकते हैं। तकनीकी सुधार की आवश्यकता अथवा गेंदबाज़ों द्वारा इस कमी का फ़ायदा उठाने की रणनीति भी हो सकती है। या फिर सेंचूरियन की तरह शायद वह ग़लत गेंद पर ग़लत शॉट खेल गए। लेकिन इस सब में अगर कोई व्यापक सच्चाई है भी, तो वह बहुत जटिल है।

कार्तिक कृष्णस्वामी ESPNcricinfo में सीनियर सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर अफ़्ज़ल जिवानी ने किया है।