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बाज़िद ख़ान : यूएई में अगर आप 140 बनाते हैं तो भी आप मैच से बाहर नहीं हैं

पूर्व पाकिस्तानी बल्लेबाज़ ने बताया कि क्यों टी20 विश्वकप में पारंपरिक तौर से खेलना सही हो सकता है

Virat Kohli has a chat with India's mentor MS Dhoni, England vs India, Men's T20 World Cup 2021, warm-up game, Dubai, October 18, 2021

विराट कोहली और एमएस धोनी बातचीत करते हुए  •  ICC/Getty Images

आज का टी20 क्रिकेट तेज़ और आक्रामकता पर आधारित ज़रूर है लेकिन यूएई में इस प्रारूप में अभी भी क्रिकेट के पुराने मूल्य लागू होते हैं। आप को यहां शुरू में विकेट हाथ में रखने होते हैं और आख़िर के ओवर में आप बड़े शॉट लगा सकते हैं। कुछ हद तक यूएई में टी20 खेलने का फ़ॉर्मूला पिछली सदी के आखिरी दशक में वनडे क्रिकेट खेलने से अभिन्न है।
अगर यहां कोई टीम 180 तक पहुंची तो आम तौर पर पहले तीन बल्लेबाज़ों में एक ने 80 या 90 बनाए होंगे। मुझे याद है जब 2010 और 2012 में इंग्लैंड ने पाकिस्तान को हराया था तब केविन पीटरसन लगभग पूरी पारी को संभाल लेते थे।
पाकिस्तान ने इस देश में इतनी सफलता इस लिए हासिल की है कि यह खेल के शैली उनकी टीम के अनुकूल है। 150 से 170 तक का स्कोर पाकिस्तान टीम के लिए बिलकुल ठीक है। इस टीम को 200 पार स्कोर वाले मैच नहीं भाते।
यूएई में पावर हीटिंग का कोई ख़ास असर नहीं होता क्योंकि ऐसा कम ही हो पाता है कि तीन या चार बल्लेबाज़ तेज़ी से 30-40 बनाकर टीम को 180-200 तक पहुंचा दें। ऐसे पिच दुनिया में और कहीं नहीं होते। पाकिस्तान में भी आप पहली गेंद से ही बोलर पर प्रहार शुरू कर सकते हैं।
यूएई में यदि आपको 180 तक पहुंचना है तो एक एंकर को रखना ज़रूरी है जिसके इर्द-गिर्द सब रन बनाते जाएं। अगर आप और साहसी हैं तो ऐसे दो एंकर रखें जो आख़िर में विस्फोटक बल्लेबाज़ी कर सकते हैं। पाकिस्तान के लिए मोहम्मद रिज़वान और बाबर आज़म कुछ ऐसा ही करेंगे।
इसका महत्व यह है कि बतौर बल्लेबाज़ आप को अपने भूमिका का संज्ञान होना ज़रूरी है। टीमों को 180 के आंकड़े तक भेजने के लिए डाविड मलान, बाबर और विराट कोहली सरीख़े बल्लेबाज़ अहम होंगे। टॉप तीन में कोई एक 70-90 बनाएगा तो ही आप पावर हिटर्स के 20-30 जमा करके 180 तक पहुंच पाएंगे।
यूएई में वनडे क्रिकेट में भी ऐंकर का बड़ा रोल रहता है। आख़िर के पांच-छह ओवर में विकेट बचे तो ही आप विपक्षी टीम पर प्रहार कर सकते हैं। टी20 में आप शुरू से अधिक आक्रमण करने लगे तो जल्दी विकेट भी गंवा सकते हैं। ऐसे में 180 या 190 का लक्ष्य लेकर आप 120 पर ऑल आउट नहीं होना चाहेंगे।
यूएई के पिचों पर मिडिल ओवर्स में बल्लेबाज़ी करने आना मुश्किल रहता है क्योंकि गेंद बल्ले तक रुक कर आती है। और ऐसा भी नहीं कि आपके नंबर आठ और नौ आते ही बड़े शॉट लगाने लगेंगे और ख़ास कर तब जब स्पिनर गेंदबाज़ी कर रहा हो। पावर हिटिंग में माहिर बल्लेबाज़ चाहता है कि गेंद बल्ले तक तेज़ी से आए और इसके लिए स्पिनर नहीं तेज़ गेंदबाज़ के ख़िलाफ़ खेल पाना फ़ायदेमंद है।
यूएई में अगर आप स्पिनर हैं तो तेज़ी से गेंद डालिए और अगर आप तेज़ गेंदबाज़ हैं तो ज़्यादा कटर का प्रयोग करें। पावरप्ले में बहुत ज़रूरी है की आपकी दिशा बिलकुल सीधी हो। पीएसएल में जेम्स फ़ॉकनर को मारना मुश्किल होता था क्योंकि उनकी गेंदबाज़ी में गति कम थी लेकिन दिशा बिलकुल सटीक रहती थी और वह हलकी सी स्विंग भी भी कराते थे। यूएई में अत्यधिक पेस से इतनी दिक्कत नहीं आती जितना कि तब जब तेज़ गेंदबाज़ अपनी रफ़्तार को घटा कर स्टंप्स पर गेंद डाले। ख़ास कर दुबई और अबू धाबी में।
पावरप्ले में अगर आप के स्पिनर गेंदबाज़ी करें तो यह भी एक फ़ायदा है। पाकिस्तान के लिए इमाद वसीम राउंड द विकेट से दाएं हाथ के बल्लेबाज़ों को शॉट लगाने के लिए कोण नहीं बनाने देते हैं। गेंद रुक कर आती है अत: उन्हें सीधा मारना भी जोखिम भरा शॉट है। और उनकी गति के चलते आप उन्हें आड़े बैट से भी आसानी से नहीं मार सकते। ऐसे स्पिनर जो अच्छी गति से गेंद डालते हैं उन्हें फ़्लाइट देने वाले स्पिनर्स से खेलना ज़्यादा कठिन होगा। यह एक वजह है कि पाकिस्तान टेस्ट क्रिकेट में भी यूएई में सफल टीम रही। जहां और स्पिनर्स ने लंबाई में कई परिवर्तन किए वहीं पाकिस्तान के स्पिनर्स ने पिच के बीचों बीच गेंदबाज़ी करना पसंद किया। राशिद ख़ान जैसे गेंदबाज़ यूएई में अपने गति और लंबाई के चलते और घातक हो जाते हैं।
मुझे लगता है इस विश्व कप में भारत और पाकिस्तान को हराना मुश्किल होगा। आईपीएल खेलना भारत के लिए बिलकुल बढ़िया अभ्यास रहा है। और यूएई में खेलते हुए पाकिस्तान भी यहां अच्छा खेलने के मूल मंत्रों से परिचित है।
हालांकि विश्व कप आईसीसी की देखरेख में खेला जाएगा और शायद इसी वजह से पिचों का मिज़ाज थोड़ा अलग हो। ऐसा 2019 में भी हमने इंग्लैंड में देखा जहां उम्मीद थी कि हर मैच में 300 से अधिक बनेंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं। फिर भी मुझे ऐसा नहीं लगता कि यूएई की पिचों में ख़ास बदलाव आएगा।
पाकिस्तान का हालिया फ़ॉर्म उतना अच्छा नहीं है जितना 2016 और 2018 के बीच में था। पूर्व कोच मिकी आर्थर के रहते इमाद नई गेंद से और हसन अली पुरानी गेंद से अच्छी गेंदबाज़ी करते थे। वहीं शादाब ख़ान भी उस गेंदबाज़ी क्रम में फ़ॉर्म में थे।
अगर यह विश्व कप यूएई के सिवाय और कहीं भी आयोजित होता तो उनकी गिनती फ़ेवरिट में नहीं होती। लेकिन यहां की परिस्थितियां उनके टी20 क्रिकेट शैली के लिए सही हैं। रिज़वान और बाबर शुरू से ही टीम को ऐंकर कर सकते हैं - यूएई में 140 का स्कोर भी आपको मैच में बनाए रखता है। लेकिन मिडिल ऑर्डर में मज़बूती की कमी एक चिंता का विषय ज़रूर है। अगर टॉप ऑर्डर में विकेट जल्दी गिर जाएं तो मध्यक्रम में ऐसे बल्लेबाज़ होने चाहिए जो स्पिन के ख़िलाफ़ रन बना सकें। इंग्लैंड के लिए परिस्थितियां अनुकूल भले ही नहीं हैं लेकिन ऐसी टीम ख़ुद को बदलने की क्षमता रखती है। इस टीम में स्पिन को अच्छे से खेलने वाले कुछ बल्लेबाज़ मौजूद हैं और ख़ासकर शारजाह में उनका किरदार काफ़ी अहम होगा।
इंग्लैंड की सफ़ेद गेंद क्रिकेट पावर हीटिंग पर आधारित है। आम तौर पर वह 220 तक स्कोर करते हैं और विपक्षी टीम को 180 तक रोक लेते हैं। पर यहां अगर वह 160 तक ही पहुंच पाएं और दूसरी टिम पहले कुछ ओवर में तेज़ी से रन बना डालें तो दिक्कत आ सकती है। मुझे लगता है इंग्लैंड के बल्लेबाज़ अपनी रणनीति बदल लेंगे लेकिन उनके गेंदबाज़ों को मेहनत करनी होगी। यूएई में आप निरंतर 180-200 का बचाव नहीं करेंगे। यहां आपको छह या सात रन प्रति ओवर में भी टीमों को रोकना होगा।
शायद उपरोक्त पंक्तियां वेस्टइंडीज़ की टीम और उनके समर्थकों के लिए चिंताजनक लगेगा। लेकिन उनके पावर हिटर्स से एक पारी मैच का रुख़ पलटने के लिए पर्याप्त है। परिस्थितयां इस टीम के लिए भले ही सर्वश्रेष्ठ नहीं लेकिन क्रिस गेल और आंद्रे रसल जैसे बल्लेबाज़ तीन या चार ओवर में ही भीषण विध्वंस कर सकते हैं। एक लो-स्कोरिंग मैच में इससे बहुत बड़ा फ़र्क़ पड़ सकता है। यही वजह है कि दो बार चैंपियन रही वेस्टइंडीज़ को भी आप कम नहीं आंक सकते।

दन्याल रसूल (@Danny61000) ESPNcricinfo में सब एडिटर हैं, अनुवाद ESPNCricinfo हिंदी के सीनियर असिस्टेंट एडिटर और स्थानीय भाषा प्रमुख देबायन सेन ने किया है।