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स्ट्राइक रेट को अति महत्व दिया जा रहा है : मिताली राज

भारतीय कप्तान चाहती हैं कि बल्लेबाज़ मैच की स्थिति के अनुसार अपने खेल में बदलाव करें

Mithali Raj had a good day out, England vs India, 3rd women's ODI, Worcester, July 3, 2021

मिताली राज भारतीय बल्लेबाज़ों के स्ट्राइक रेट पर की जा रही टिप्पणियों से नाख़ुश हैं  •  Getty Images

भारतीय कप्तान मिताली राज चाहती हैं कि बल्लेबाज़ स्ट्राइक रेट पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करने की बजाय मैच की स्थिति के अनुसार बल्लेबाज़ी करें। साथ ही वह उम्मीद करती हैं कि खिलाड़ी ज़रूरत पड़ने टीम को मुश्किल से बाहर निकालने का काम भी करेंगे।
मिताली के अनुसार भारतीय टीम को न्यूज़ीलैंड में खेले जाने विश्व कप में निरंतरता के साथ 250 से अधिक का स्कोर खड़ा करने का प्रयास करना होगा। पिछले साल दूसरे वनडे में बेथ मूनी के नाबाद अर्धशतक का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे पारी की शुरुआत में अपना समय लेकर स्कोर को चलाने के बाद आक्रामक रुख़ अपनाया जा सकता है। ऐसा करने से टीम महत्वपूर्ण साझेदारियां निभाने में भी सफल होगी।
ऑस्ट्रेलिया दौरे पर 2-1 से गंवाई वनडे सीरीज़ में डॉट गेंदें और बाउंड्री के प्रतिशत से मिली सीख के प्रश्न का उत्तर देते हुए मिताली ने कहा, "मुझे लगता हैं कि आप लोग स्ट्राइक रेट को कुछ अधिक महत्व (नहीं) देते हैं? क्योंकि जब भी बात बल्लेबाज़ी या बड़े स्कोर खड़े करने की होती है, इसका वर्णन आवश्य किया जाता है।"
मिताली ने कहा, "मैं यह जानना चाहती हूं कि क्या आप सिर्फ़ भारतीय खिलाड़ियों के स्ट्राइक रेट पर नज़र रखते हैं। अगर आप मुझे ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ (वनडे) सीरीज़ के विषय में बात करने का मौक़ा देंगे, तो मैं आपको याद दिलाना चाहूंगी कि निर्णायक मुक़ाबले में मूनी ने लगभग 80 गेंदों का सामना करने के बाद 50 रन बनाए थे। और वह उसे 125 रनों की नाबाद और मैच जिताऊ पारी में तब्दील करने में सफल हुई। "
मिताली ने आगे बताया, "मेरा मानना हैं कि क्रिकेट मैदान पर हो रही परिस्थितियों के अनुसार खेला जाने वाले खेल हैं। और हां, यह बात याद रखने योग्य है कि एक अच्छे स्ट्राइक रेट से बल्लेबाज़ी करना महत्वपूर्ण है। लेकिन अंततः, यह बात ज़रूरी हो जाती है कि हमारा बल्लेबाज़ी क्रम किस प्रकार चुनौतियों का सामना करना है और हमारी बल्लेबाज़ी में कितनी गहराई है।"
"इसलिए जब हमें 250 या 270 रन बनाने हैं, हमें एक अच्छे स्ट्राइक रेट से खेलना होगा। लेकिन हम अपना पूरा ध्यान केवल उसी पर केंद्रित नहीं कर सकते हैं। साझेदारियां निभाना और मैच जिताऊ पारी खेलना भी आवश्यक हैं। और यह तभी संभव हो पाता है जब आप मैच की स्थिति के अनुसार ख़ुद को ढालते हैं और अपने खेल में बदलाव करते हैं। कभी आपको तेज़ गति से रन बनाने पड़ते हैं लेकिन कुछ मौक़ों पर टीम को मुश्किल से बाहर भी निकालना पड़ता है।"
2005 और 2017 के संस्करणों में उपविजेता रही भारतीय टीम न्यूज़ीलैंड में पहली बार विश्व विजेता बनने का प्रयास करेगी।
भारतीय कप्तान ने अपनी सलामी बल्लेबाज़ स्मृति मांधना और विशेष रूप से शेफ़ाली वर्मा द्वारा बड़ी साझेदारियां निभाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उनके अनुसार अगर टीम को 250 का आंकड़ा पार करना है तो साझेदारियां महत्वपूर्ण होगी। ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध पिछले वर्ष पहले वनडे में मिली भारी हार के बाद भी उन्होंने ऐसा ही संदेश दिया था।
उन्होंने कहा, "2017 में हम 250-270 रन बनाने में क़ामयाब हुए थे और इतने सफल रहे थे क्योंकि शीर्ष क्रम का एक बल्लेबाज़ अंत तक खेलता था और अन्य बल्लेबाज़ उसके इर्द-गिर्द अपनी पारी बुनते थे। इसलिए यह महत्वपूर्ण हैं कि शीर्ष क्रम में से एक बल्लेबाज़ अंत तक खेलने की ज़िम्मेदारी ले। साथ ही उन्हें इस दौरान एक या दो अर्धशतकीय साझेदारी निभानी होगी। ऐसा बहुत कम बार होता है कि मध्यक्रम या निचला मध्यक्रम टीम के लिए सबसे अधिक योगदान दे। ऐसे में एक बल्लेबाज़ी क्रम के रूप में हम सभी को अपनी भूमिका निभानी होगी।"
भले ही भारत को ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ मल्टी-फ़ॉर्मैट सीरीज़ में हार का सामना करना पड़ा, उन्होंने कई मोर्चों पर बढ़त बनाई। दूसरे और तीसरे वनडे मैच में उन्होंने 250 का आंकड़ा पार किया और तीसरे मैच में 265 रनों का सर्वोच्च सफल लक्ष्य हासिल किया। सितंबर में सात विकेट पर 274 रन बनाने से पहले, 20 पारियों में पहले बल्लेबाज़ी करने के बाद भारत ने केवल तीन बार 250 से अधिक रन बनाए थे।
व्यक्तिगत तौर पर भी खिलाड़ियों को सफलता मिली। पिछले विश्व कप के बाद से भारत के लिए सर्वाधिक रन बनाने वाली स्मृति ने 16 पारियों में अपना सर्वश्रेष्ठ वनडे स्कोर बनाया। नवोदित विकेटकीपर ऋचा घोष ने मध्य क्रम में जान फूंक दी। यास्तिका भाटिका के रूप में भारत को तीसरे नंबर पर एक बेहतरीन विकल्प मिल गया जिसके बाद मिताली को चौथे नंबर पर बल्लेबाज़ी करने का मौक़ा मिल गया। उम्मीद है कि वह इसी स्थान पर बल्लेबाज़ी करना जारी रखेंगी।
अपने 23 वर्षीय अंतर्राष्ट्रीय करियर में कई मौक़ों पर पारी को संभालने और टीम को चुनौती से बाहर निकालने का भार मिताली के कंधों पर रहा है। उनके पास इस भूमिका को निभाने की क्षमता तो है लेकिन उनका स्ट्राइक रेट चिंता का विषय बन जाता है। उपकप्तान हरमनप्रीत कौर का वनडे फ़ॉर्म भी इतना अच्छा नहीं रहा है। 2017 विश्व कप के सेमीफ़ाइनल में 171 रनों की नाबाद पारी खेलने के बाद 28 मैचों में उनके नाम केवल तीन अर्धशतक हैं।
"कई बार अपने खिलाड़ियों का समर्थन करना महत्वपूर्ण होता है और इस टीम में हमने वही किया हैं," प्रमुख कोच रमेश पवार ने कहा। "जब आप इस टीम में चुने जाते हैं, हम भूतकाल में किए गए प्रदर्शन के साथ-साथ वर्तमान और भविष्य पर भी नज़र बनाए रखते हैं। आपको उन प्रदर्शनों से या तो आत्मविश्वास मिलता है या फिर सीखने का मौक़ा। और जहां तक हरमन का सवाल हैं, वह बिग बैश लीग में प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट बनकर आई हैं। इस समय वह बढ़िया लय में हैं और उन्हें विश्व कप में इसका पूरा लाभ उठाना चाहिए।"

ऑन्नेशा घोष (@ghosh_annesha) ESPNcricinfo में सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर अफ़्ज़ल जिवानी ने किया है।