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ऑस्ट्रेलिया का पलड़ा भारी लेकिन इंग्लैंड के स्पिन गेंदबाज़ कर सकते हैं उलटफेर

इस विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया की बल्लेबाज़ी कहीं ज़्यादा मज़बूत है लेकिन हालिया फ़ॉर्म और मैदान से परिचित होना इंग्लैंड के पक्ष में है

महिला विश्व कप का फ़ाइनल ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच खेला जाएगा  •  ICC via Getty Images

महिला विश्व कप का फ़ाइनल ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच खेला जाएगा  •  ICC via Getty Images

ऑस्ट्रेलिया के लिए इस बार का विश्व कप अभियान परफ़ेक्ट रहा है - उन्होंने अपने आठ में से आठ मैच जीते हैं। उन्होंने दूसरे फ़ाइनलिस्ट इंग्लैंड को अपने पिछले सात लगातार मुक़ाबलों में हराया है। अगर अक्तूबर 2017 में इंग्लैंड के हाथ मिली पिछली हार को भी छोड़ दें तो उन्होंने 2018 के बाद 38 वनडे मुक़ाबलों में से 37 जीते हैं।
ऐसे आंकड़ों से ज़रूर लगता है कि रविवार के फ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया का पलड़ा बहुत भारी है लेकिन आप इंग्लैंड को कम आंकने की ग़लती नहीं कर सकते। विश्व कप के पहले मैच में ही इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध 311 के लक्ष्य का पीछा करते हुए केवल 13 रन के अंतर से हार का सामना किया था। हालांकि तब से उनके फ़ॉर्म में ज़बरदस्त बदलाव आया है और अब यह टीम पांच लगातार मैच जीतकर फ़ाइनल में पहुंची है।
इनमें से दो जीत ज़रूर पाकिस्तान और बांग्लादेश के विरुद्ध मिली हैं लेकिन इंग्लैंड ने भारत को 112 गेंदों के रहते हराया था और सेमीफ़ाइनल में तो साउथ अफ़्रीका को 137 रनों से हराया। यह उनके फ़ॉर्म को जग ज़ाहिर करता है।
आंकड़ें फिर भी ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में हैं। ऑस्ट्रेलिया की बल्लेबाज़ी की औसत, 55.79 रन प्रति विकेट, इंग्लैंड के 30.26 से दुगने के क़रीब है। उसका रन रेट भी 5.62 है जब कि इंग्लैंड का 4.99। इस टूर्नामेंट में 260 से अधिक का स्कोर 14 बार बना है और ऑस्ट्रेलिया ने अकेले ऐसा पांच बार किया है। टूर्नामेंट के सर्वाधिक स्कोरर्स में से शीर्ष के चार नामों में से तीन ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी हैं। वहीं इंग्लैंड की टॉप स्कोरर नैटली सीवर विश्व कप में आठवें स्थान पर हैं।
इंग्लैंड का मज़बूत पक्ष है उनकी गेंदबाज़ी। उन्होंने भारत को 134 और सेमीफ़ाइनल में साउथ अफ़्रीका को 156 के स्कोर पर रोका, दो ऐसी टीमें जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध 270 के अधिक बनाए। पिछले पांच मैचों में इंग्लैंड ने हर विकेट के लिए औसतन सिर्फ़ 14.64 रन ख़र्चे हैं और इकॉनमी रेट है सिर्फ़ 3.44 की। पावरप्लेयर ऑस्ट्रेलिया
ऑस्ट्रेलिया ने पावरप्ले में 13 विकेट लिए हैं और सिर्फ़ सात गंवाए हैं। बल्ले से इस फ़ेज़ में उनकी औसत 48 प्रति विकेट है और गेंद से 24 से भी कम। ऐसे आंकड़ों का मतलब है टीम मैच में शुरुआती बढ़त बनाने में सक्षम है। उन्होंने पाकिस्तान और भारत दोनों के ख़िलाफ़ पावरप्ले में 50 से अधिक रन बनाए हैं जबकि उनके विरुद्ध ऐसा सिर्फ़ इंग्लैंड ने ही 311 के लक्ष्य का पीछा करते हुए किया।
पावरप्ले में इंग्लैंड ने 12 विकेट खोए हैं और सिर्फ़ नौ ही ले पाए हैं हालांकि इस फ़ेज़ में उनकी इकॉनमी रहती है 3.84 की।
ओपनिंग में एक ही टीम मज़बूत
कुल आठ सलामी साझेदारियों में रेचल हेंस और अलिसा हीली ने साथ में 63.87 की औसत और 5.6 रन प्रति ओवर के दर से 511 रन जोड़े हैं। यह इस टूर्नामेंट में सबसे मज़बूत सलामी जोड़ी ही नहीं है, दूसरे नंबर पर वेस्टइंडीज़ के सात मुक़ाबलों में 261 रनों से दो गुना ज़्यादा से बस थोड़ा कम है। इंग्लैंड के लिए दो सलामी जोड़ी (टैमी बोमॉन्ट और लॉरेन विनफ़ील्ड-हिल एवं बोमॉन्ट और डैनी वायट) ने मिलाकर आठ पारियों में 12.5 की औसत और 3.72 के रन रेट से केवल 100 रन जोड़े हैं। यह सब टीमों में रनों के मामले में सबसे ख़राब योग है और रन रेट के मामले में केवल बांग्लादेश और पाकिस्तान से बेहतर है।
इस पूरे टूर्नामेंट में इंग्लैंड इकलौती टीम है जिसने एक भी अर्धशतकीय सलामी साझेदारी नहीं निभाई हो। वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ उनकी सलामी जोड़ी ने इकलौते बार 20 का योग पार किया था और तब उन्होंने 31 रन जोड़े थे। वहीं ऑस्ट्रेलिया इकलौती टीम है जिनके पहले विकेट के लिए दो शतकीय साझेदारियां हैं। सेमीफ़ाइनल में वेस्टइंडीज़ के विरुद्ध हेंस और हीली ने 32.4 ओवर में 216 रन बनाए थे।
स्पिन टु विन
ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड दोनों के तेज़ गेंदबाज़ों के आंकड़ें इस विश्व कप में सबसे प्रभावशाली नहीं हैं। जहां साउथ अफ़्रीका के तेज़ गेंदबाज़ों ने 47 विकेट लिए हैं और न्यूज़ीलैंड के लिए यह आंकड़ा है 31, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के लिए तेज़ गेंदबाज़ों का विकेटों में योगदान है 26 और 23 का।
हालांकि दोनों टीमों के स्पिनरों ने ख़ासा प्रभाव डाला है। इंग्लैंड के लिए दो स्पिनर सर्वाधिक विकेट लेने की सूची में पहले छह स्थानों पर हैं - सोफ़ी एकलस्टन के 20 विकेट से अधिक किसी ने नहीं लिए हैं और वहीं चार्ली डीन 11 विकेट के साथ भारत की राजेश्वरी गायकवाड़ के साथ संयुक्त पांचवें स्थान पर हैं। एकलस्टन ने पहले मैच में 0/77 के फ़िगर से उभरते हुए सेमीफ़ाइनल में 6/36 के विश्लेषण लिए तो डीन इंग्लैंड के पांच में से चार जीत का हिस्सा रहीं हैं और 3.78 के इकॉनमी और 14.90 की औसत से विकेट ले रहीं हैं।
ऑस्ट्रेलिया के लिए सर्वाधिक विकेट लेने वाली स्पिनर हैं जेस जॉनासन जिन्होंने 18.80 की औसत और 3.72 के इकॉनमी से 10 विकेट लिए हैं, लेकिन ऐश्ली गार्डनर और अलाना किंग दोनों ने भी नौ नौ विकेट झटके हैं। विकेट, औसत और इकॉनमी के मामले में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के स्पिन गेंदबाज़ इस टूर्नामेंट में सर्वश्रेष्ठ रहे हैं।
क़िस्मत का खेल
हेंस ने टूर्नामेंट में 429 रन बनाए हैं लेकिन हमारे रिकॉर्ड्स के अनुसार उन्हें छह बार विपक्षी टीम ने जीवनदान दिया है। ऐसा पहले मुक़ाबले में ही इंग्लैंड ने दो बार किया और उन्होंने 130 रन बना डाले।
ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ 19 कैच ड्रॉप हुए हैं जो किसी भी टीम के लिए सर्वाधिक हैं। इंग्लैंड को 11 जीवनदान मिले हैं जिनमें से पांच आए हैं वायट के खाते में। फ़ील्ड पर इंग्लैंड ने ख़ुद 17 ऐसी ग़लतियां की है तो ऑस्ट्रेलिया ने केवल नौ। फ़ाइनल जैसे बड़े मंच पर कम ग़लतियां करने वाली टीम विजयी हो सकती है।
मैदान की बात
क्राइस्टचर्च में खेलने के मामले में इंग्लैंड के लिए एक फ़ायदा है कि उन्होंने पिछले दो हफ़्तों में हैगली ओवल में दो मुक़ाबले खेले हैं - पाकिस्तान और साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ मिली आसान जीत। इस मैदान पर इंग्लैंड का परफ़ेक्ट 3-0 रिकॉर्ड है जबकि ऑस्ट्रेलिया ने यहां एक जीता है तो एक हारा है। वह दिसंबर 2000 के विश्व कप फ़ाइनल में न्यूज़ीलैंड के हाथों मिली हार इस मैदान पर उनका आख़िरी मैच था।

एस राजेश Espncricinfo के स्टैट्स एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी में सीनियर सहायक एडिटर और स्थानीय भाषा लीड देबायन सेन ने किया है।