भारत 345 (अय्यर 105, गिल 52, जाडेजा 50, साउदी 5-69, जेमीसन 3-91) और 234/7 पारी घोषित (अय्यर 65, साहा 61, जेमीसन 3-40, साउदी 3-75) ने न्यूज़ीलैंड 296 (लैथम 95, यंग 89, अक्षर 5-62, अश्विन 3-82) और 165/9 (लेथम 52, जाडेजा 4-40, अश्विन 3-35) मैच ड्रॉ

हाल के समय की सबसे धीमी भारतीय टेस्ट पिचों में से एक पर विपक्षी टीम के ख़िलाफ़ बेहद सटीक समझ से दो महान स्पिनर अपने सभी तकनीक और विविधताओं का प्रयोग कर रहे थे ताकि उनकी टीम को वह आख़िरी विकेट मिला जाए। दूसरी ओर अपना पदार्पण मैच खेल रहा एक खिलाड़ी और एक नंबर 11 का बल्लेबाज़ जो मैच को ड्रॉ करवाने का प्रयास कर रहे थे और साथ में अंपायरों के हाथ में लाइट मीटर था, जो दिन के अंतिम क्षणों में प्रत्येक ओवर के बाद उस मशीन का प्रयोग करके यह देख रहे थे कि पिच पर प्रकाश पर्याप्त है या नहीं।

यह सभी चीज़ें एक नाटकीय अंतिम सत्र को उस मोड़ तक ले गए, जहां से 'रोमांचक' शब्द भी एक बार के लिए मात खा जाए। विश्व की नंबर एक और दो टीमों के बीच एक मनोरंजक टेस्ट मैच निर्धारित समय से 12 मिनट पहले खराब लाइट के कारण संपन्न हुआ, जिसमें भारत जीत से एक विकेट दूर रह गया।

भले ही ख़राब रोशनी ने मैच में खलल डाला लेकिन इस मैच को ड्रॉ करवाने के लिए कीवी बल्बेाज़ों ने गजब की ढृढ़ता दिखाई और अंतिम विकेट के लिए रचिन रविंद्र और एजाज़ पटेल ने एक मुश्किल परिस्थिति में 51 गेंदों का सामना किया और मैच के अंतिम क्षणों तक अपने विकेट को बचाए रखा।

भले ही आज के मैच में न्यूज़ीलैंड की टीम हार को टालने में सफल रही लेकिन पांचवे दिन के पहले सेशन के बाद जिस तरीके से भारतीय टीम के स्पिन तिकड़ी ने गेंदबाज़ी की वह तारीफ़ योग्य था। हालांकि यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि दिन के शुरुआती क्षणों में नाइट वॉचमैन विलियम समरविल और टॉम लैथम ने शानदार बल्लेबाज़ी करते हुए भारतीय गेंदबाज़ों को कोई मौक़ा नहीं दिया।

कानपुर में पांचवें दिन की पिच में कोई ख़ास बदलाव नहीं दिखा। गेंद स्लिप तक या किसी भी नज़दीकी फील्डर तर कैरी करने में नाकाम रही जिसके कारण कम उछाल वाली गेंद बल्लेबाज़ के लिए किसी भी तरह से परेशानी का सबब नहीं बनी। इस टेस्ट के पांच दिनों में गिरे 36 विकेटों में से एक भी बैट-पैड कैच नहीं था, और स्लिप में केवल एक कैच था - वह भी एक हेलमेट वाले स्लिप क्षेत्ररक्षक के पास गया था जिसे असामान्य रूप से बल्लेबाज़ के करीब तैनात किया गया था।

कुल मिला कर स्पिनरों को लगातार विकेट पर अटैक करना पड़ रहा था क्योंकि उन्हें बस वहीं से मदद की कोई गुंजाइश दिख रही थी। जब दिन का अंतिम सत्र शुरू हुआ तो भारत को छह विकेट हासिल करने की आवश्यकता थी, जिसमें से दिन का खेल खत्म होने से तकरीबन 10 ओवर पहले तक उन्होंने पांच विकेट चटका लिए थे। यह पांचों विकेट पगबाधा और बोल्ड के रूप में भारतीय गेंदबाज़ों को मिले थे।

अंतिम सेशन में जाडेजा ने पांच में से तीन विकेट लिए। सारे के सारे गेंद जाडेजा ने स्टंप की लाइन में फेंकी थी और उन गेंदों की लेंथ एकदम सटीक थी। जाडेजा ने चाय के ठीक बाद रॉस टेलर को पवेलियन वापस भेजा और टेलर के आउट होने के बाद हेनरी निकल्स को 64वें ओवर में अक्षर पटेल ने पगबाधा आउट किया। उसके बाद उन्होंने केन विलियमसन अपनी पारी में 112 गेंदों का सामना किया और 24 रन बनाए हालांकि 70वें ओवर में उन्हें जाडेजा ने पवेलियन का रास्ता दिखा दिया।

इसके बाद मैच भारत के पक्ष में झुकने लगा और इस बात को जोर तब मिली जब कइल जेमीसन और टीम साउदी को जाडेजा ने पगबाधा आउट कर दिया। इसके बाद तक़रीबन 40 मिनट का खेल बचा था और उस दौरान भारत को एक विकेट लेनी वाली गेंद की ज़रूरत थी, लेकिन ऐसे किसी भी अनहोनी को रचिन रविंद्र और एजाज़ ने टाल दिया।

रचिन के इसी बल्लेबाज़ी कौशल के कारण उन्हें टीम में मिचेल सैंटनर और नील वैगनर से पहले जगह दी गई। हालांकि रचिन ने अपने गेंदबाज़ी में किसी भी तरह का असर छोड़ने में नाकाम रहे।

कार्तिक कृष्णास्वामी ESPNcricinfo के सीनियर सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर राजन राज ने किया है।